आपकी राय

सरकार को सबक

Feb 27, 2021

टूलकिट मामले में दिशा रवि की गिरफ्तारी को देश की लोकतांत्रिक प्रणाली की विसंगति के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि उसे जमानत दे दी गई है। राज्य की नीतियों से सहमत नहीं होने के लिए किसी को भी सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता। सरकार को देश के लोकतंत्र और राय देने के लिए किसी व्यक्ति के अधिकार का सम्मान करना चाहिए। इसलिए, इसे सरकार के लिए एक सबक के रूप में लिया जाना चाहिए ताकि वह किसी पर राजद्रोह के आरोप लगाने से पहले सोचे।

आयुशी उपाध्याय, चंडीगढ़


प्रकृति से तालमेल

21 फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में अभिषेक कुमार सिंह का लेख 'हिमालय की करुण पुकार' विकास की अंधी दौड़ में शामिल मानवता की वैचारिक सोच का खुलासा करने वाला था। प्रकृति से छेड़छाड़, औद्योगिक क्रांति, गगनचुंबी भवन निर्माण विध्वंस के कारण हैं। वर्ष 2013 में केदारनाथ में जल प्लावन इसका उदाहरण है। मानव की विनम्रता, विनयशीलता, नि:स्वार्थ भावना और प्रकृति से तालमेल ही प्राकृतिक प्रकोप से बचा सकती है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

सख्ती जरूरी

केरल, महाराष्ट्र के अलावा पंजाब और मध्यप्रदेश में कोरोना के नए मामलों में अचानक तेजी देखने को मिली है, जिसने सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। पिछले पांच दिनों में पंजाब में महाराष्ट्र की तरह कोरोना के नये मामले दर्ज किए गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी लोगों ने शारीरिक दूरी के नियमों को नकार-सा दिया है। पंजाब-हरियाणा में तो लोग सामूहिक जगहों पर इकट्ठे हो रहे हैं। सरकार को अभी और सख्ती बढ़ाने की जरूरत है।

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद

समस्या की जड़

Feb 26, 2021

मोदी सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के इरादे से जो न्यूनतम मूल्य में वृद्धि की थी, उससे बिचौलियों की भूमिका शायद ही खत्म हो और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले। बहुत से किसान ऐसे भी होंगे, जिन्होंने बिचौलियों से कर्जा लिया होगा। कर्जा उतारने के लिए ऐसे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों के पास जाना ही पड़ता होगा। इसलिए किसान बिचौलियों की भूमिका को समाप्त नहीं करना चाहते हैं? सरकार को चाहिए कि किसानों को घरेलू उद्योगों से जोड़ें ताकि किसानों की आय के स्रोत बढ़ें। बिचौलियों पर निर्भरता न हो।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


लंबा है सफर

पंजाब में कोविड-19 में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा उठाए गए कदम में रात का कर्फ्यू, सामाजिक समारोहों पर नियंत्रण और परीक्षण में एक दिन में 3000 नमूनों तक वृद्धि को एक प्रभावी पहल के रूप में तभी देखा जा सकता है, जब राज्य के लोग दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हों। सरकार तो हर संभव कदम उठा रही है, इसलिए, नागरिकों का भी कर्तव्य है कि वे भी याद रखें कि वायरस खत्म नहीं हुआ है और अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है। वरना लापरवाही बहुत महंगी पड़ सकती है।

दीपांशी, पटियाला


कर घटायें

देश के लगभग सभी राज्यों में पेट्रोल की कीमत सौ रुपए प्रति लिटर के आसपास पहुंच गयी है। अब इसका सीधा असर आम लोगों के दैनिक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। तेल की कीमत पर अंतर्राष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर खुदरा बाजार में साफ तौर पर देखा जा सकता है। केंद्र व राज्य सरकार दोनों मिलकर फिलहाल करों की दर को कम करें, जिससे पेट्रोलियम पदार्थ की कीमत को कम किया जा सके। आम लोगों को महंगाई के असर से बचाया जा सकता है।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

महंगाई की मार

Feb 25, 2021

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी, कोई नई बात नहीं है। लेकिन, जिस पार्टी ने प्रतिपक्ष में रहकर, पक्ष को ललकारा था, आज वह भी उसी जाल में फंसे नजर आ रहे हैं। साफ है सत्ता बदलती है, चेहरे बदलते हैं लेकिन चरित्र नहीं। जब कच्चे तेल की कीमत कम थी, बावजूद इसके सरकार ने छूट नहीं दी, लेकिन जब तेल के दाम में वृद्धि हुई तो इसको बढ़ाया जा रहा। ऐसे में सरकार की मंशा साफ नजर आती है कि किस तरीके से मौके का फायदा उठाकर, आम आदमी की जेब पर प्रहार किया जाए और राज कोष को भरा जाए। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि महामारी से उबर रही अर्थव्यवस्था पर कहीं महंगाई की मार न झेलनी पड़े।

अमन जायसवाल, दिल्ली


सतर्क रहें

23 फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘फिर बढ़ता कोरोना’ लोगों की लापरवाही तथा कोरोना स्ट्रेन के फलस्वरूप एक बार फिर सिर उठाने लगा है। इन्हीं दिनों में पंजाब, केरल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र से कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते केंद्र और राज्य सरकारों का चिंतित होना स्वाभाविक है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने तो लॉकडाउन लगाने की चेतावनी दी है। अगर देश के अन्य भागों के लोगों ने सावधानियां नहीं बरती तो महामारी तेजी से फैल सकती है, जिसका खमियाजा हम पहले ही बहुत भुगत चुके हैं।

शामलाल कौशल, रोहतक


राजनीतिक संकट

कांग्रेस के हाथ से पांच राज्य फिसल गए। कुछ महीनों पहले मध्य प्रदेश और हाल ही में पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार गिर गई। इसके पीछे कई कारण है। पद और धन बल के प्रलोभन में विधायकों को खरीदा जाता है। सरकार शासन चलाने में असमर्थ होती है। शक्ति परीक्षण में मध्य प्रदेश कमलनाथ सरकार को अल्पमत के कारण कुर्सी छोड़नी पड़ी। तख्तापलट रोकने के लिए सरकार को अंदरूनी गतिविधियों में सुधार लाना होगा। तब सरकार को गिरने से बचाया जा सकता है।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

ये संकट बड़ा है!

Feb 24, 2021

बीस फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का ‘संकट को अवसर में बदल पायेंगे मोदी’ लेख पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों के संदर्भ में केंद्र सरकार और भाजपा को आईना दिखाने वाला था। भले ही यह संकट पंजाब के अलावा हरियाणा व उत्तर प्रदेश के जाट बहुल इलाकों में दर्शाया जा रहा हो, लेकिन इसकी तपिश राजस्थान और मध्यप्रदेश तक महसूस की जा रही है, जिसके परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों में नजर आएंगे। किसान के लिए खेती बिजनेस और कारोबार से आगे बढ़कर अस्मिता का सवाल है। वह तल्ख प्रतिक्रिया जरूर जाहिर करेगा। उपयोगी जानकारी हेतु साधुवाद!

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार


सरकार राहत दे

देश में पेट्रोल का दाम प्रति लिटर सौ रुपये के आसपास पहुंच गया है। इसी तरह डीजल व रसोई गैस के दाम बढ़ते जा रहे हैं। सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट हो तो उसका खुदरा फायदा ग्राहकों को मिलना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों ने कोरोना महामारी से बचाव और आर्थिकी में अनेक प्रयास किये हैं, उसी कड़ी में तेल की कीमतों में राहत देने के लिए पहल करनी चाहिए, ताकि महंगाई से लोगों को राहत मिले।

चौ. भूपेंद्र सिंह रंगा, पानीपत


सज़ा मिले

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने गत दिन आयोजित मैट्रिक परीक्षा की सामाजिक विज्ञान की परीक्षा रद्द कर दी। पर्चा लीक की घटना के बाद बोर्ड ने यह निर्णय लिया। अब रद्द परीक्षा 8 मार्च को ली जाएगी। इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद पर्चा लीक कैसे हो जाता है, यह समझ से परे है। पेपर लीक घटना में संलिप्त सभी दोषियों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। आखिर इसका खमियाजा छात्र क्यों भुगते?

जफर अहमद, मधेपुरा, बिहार

बदलाव के संकेत

Feb 23, 2021

बीस फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘संकट को अवसर में बदल पायेंगे मोदी’ लेख में पंजाब निकाय चुनाव को आधार बनाकर केन्द्र की शीर्ष सत्ता से प्रश्न किया गया है कि क्या भावी चुनावों में इस संकट को अवसर में बदल सकेंगे सत्ता के शिखर पुरुष? यह भी कि पंजाब में विजय हासिल करने का कारण, किसान-आन्दोलन तो नहीं। लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भाजपा इस चुनावी संदेश को गम्भीरता से ले। यह आशंका भी व्यक्त की गयी है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के आसपास के जाट बहुल इलाकों में होने वाले चुनाव परिणाम, क्या पूरे राज्य को प्रभावित करेंगे? कुल मिलाकर लेख में, भावी चुनावों और किसान आन्दोलन पर फोकस करके समाधान दिया गया है।

मीरा गौतम, जीरकपुर


लापरवाही का नतीजा

मुंबई समेत कई इलाकों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। लोगों ने मास्क लगाना छोड़ दिया है। लोग सैनिटाइजर का उपयोग भी कम कर रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जहां कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, वहां प्रशासन सख्त कदम उठाये।

विनय मोघे, चिंचवड, पुणे

पर्यावरण-विकास के अंतर्विरोध

Feb 22, 2021

विनाश का निमंत्रण

बहुत मनभावन शब्द है ‘विकास’। हो भी क्यों नहीं? समृद्धि-खुशहाली का पर्याय जो है। किन्तु पर्यावरण की अनदेखी कर प्राप्त किया गया विकास विनाश को खुला निमंत्रण है। पिघलते ग्लेशियर, जल प्लावन, अतिवृष्टि-अनावृष्टि आदि इसके उदाहरण हैं। हमें अपनी एक-एक गतिविधि पर टकटकी लगानी होगी ताकि पर्यावरण संरक्षित रहे। ‘विकास-विकास’ की तोता रटन्त पर नियंत्रण कर पर्यावरण और विकास के मध्य पनपते अंतर्विरोध को हर हाल में खत्म करना होगा।

कृष्णलता यादव, गुरुग्राम 


हादसों को दावत

विकास के लिए कुदरत की आज़ादी में हमारी घुसपैठ ने यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड जैसी त्रासदी हर वक्त मौके की तलाश में है। नदियों को रोकने की हमारी असफल कोशिशें प्रलय की खुली दावत है। विकास की चाह में हमने पर्यावरण के साथ जो ज्यादती की है, उसका खमियाजा हमें भुगतना ही पड़ेगा। पर्यावरण और विकास के अंतर्विरोध का नतीजा बार-बार भयानक तबाही की शक्ल में सामने आता है। हमारा प्रकृति से तालमेल नगण्य है। जरूरत से ज्यादा दोहन पर जोर है। बहरहाल, वक्त रहते प्रकृति के मौन संदेश को समझने की आवश्यकता है ताकि अप्रत्याशित हादसे रोके जा सके।

एम.के. मिश्रा, रांची


घातक विकास

हिमालय क्षेत्र में विकास के नाम पर जल विद्युत उत्पादन जैसे अनेक प्रौजेक्टों की स्थापना की जा रही है, जिनके लिए नदियों का प्राकृतिक प्रवाह रोक कर सुरंगों के निर्माण हेतु पहाड़ों में बहुत शक्तिशाली विस्फोट किए जाते हैं जो इस क्षेत्र के संवेदनशील पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रहे हैं। वृक्ष काटे जा रहे हैं तो पहाड़ दरक रहे हैं। इसलिए यदि हिमालय की त्रासदी से बचना है तो विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच का रास्ता अपनाना होगा। वरना ऐसी भयावह स्थिति बनी रहेगी।

एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र


छेड़छाड़ बंद करें

उत्तराखंड के चमोली में धौलीगंगा व ऋषिगंगा में आई तबाही ने वहां के लोगों को हिला कर रख दिया। नदियों के प्राकृतिक बहाव को बदलना, बांध बनाना, पर्वतों को काटकर सड़कें या सुरंगे बनाना, वनों का काटना, या फिर बहुत ज्यादा लोगों का वहां भ्रमण के लिए जाना और गंदगी फैलाना, भवन निर्माण करना आदि प्रकृति और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ है। इस तबाही को ध्यान में रखते हुए हमें सबक सीखना चाहिए और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ करनी बंद कर देनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक


नीतियां बदलें

हाल ही में उत्तराखंड में ग्लेशियर के खिसकने से हुई जल प्रलय मनुष्य द्वारा विकास के नाम पर प्रकृति के साथ की जाने वाली छेड़छाड़ का परिणाम है। जून, 2013 में भी कुदरत ने ऐसा ही कहर ढाया था, जिसमें जान-माल की भारी हानि हुई थी। ये इलाके अति संवेदनशील हैं। यहां पर विकास के कार्यों की योजना बनाते समय पर्यावरण को ध्यान में रखा जाना चाहिए। हिमालय क्षेत्र में इस तरह की त्रासदियां कई बार हो चुकी हैं। अब आवश्यकता इतिहास से सबक सीखने और विकास की नीतियों पर गहन विचार करने की है।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल


वैकल्पिक ऊर्जा

वर्ष 2013 में आई केदारनाथ त्रासदी के बाद अब एक बार पुन: धौलीगंगा-ऋषिगंगा की हालिया त्रासदी से विशेषज्ञ व देश चिन्तित है। विकास योजना जलविद्युत की हो या परमाणु विद्युत की, गहन अध्ययन के बाद ही बननी चाहिए। सब नदियों से भिन्न सर्वोच्च शिखर से निसृत गंगा की तीव्र जलधारा में तांबा व रेडियोधर्मी थोरियम के साथ रोगनाशक तत्वों में इस गतिरोध से कमी की संभावना है। सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा का खर्च भी अपेक्षाकृत कम है। संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में स्वास्थ्य, अध्यात्म व वानिकी आदि से आर्थिक विकास का प्रकृति से संतुलन रहे।

आचार्य रामतीर्थ, रेवाड़ी


पुरस्कृत पत्र

संतुलन जरूरी

विकास होता है तो इससे हमारी धरती के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र व पर्यावरण पर भी व्यापक असर पड़ता है। पर्यावरण और आर्थिक विकास के मध्य संतुलन स्थापित करना काफी आवश्यक है। मसलन, यदि हम औद्योगिकीकरण कर रहे हैं तो हमें औद्योगिक अपशिष्टों के सही निस्तारण पर भी विचार करना होगा। यदि हम पर्यावरण और विकास के मध्य संतुलन स्थापित कर लेते हैं तो इससे न केवल हमारी वर्तमान पीढ़ी ही लाभान्वित होगी बल्कि इससे हमारी आने वाली पीढ़ियांं लाभान्वित हो सकेंगी।

सुनील महला, पटियाला

आंदोलन की पवित्रता

Feb 20, 2021

सत्ताधारी पार्टी जब प्रचंड बहुमत में होती है तब उनकी मनमानी शुरू हो जाती है, जिससे वे जनविरोधी कार्यों और कानूनों पर उतर आती है। इनसे दुखी जनता को मजबूरन आंदोलन करना पड़ता है जो लोकतंत्र में उसका अधिकार भी है। आंदोलन सदा शांतिपूर्वक और अहिंसक होना बहुत जरूरी है। इसी से इसकी पवित्रता और प्रभाव रह पाता है। किसी भी जान-माल की हानि और नागरिक अधिकार का हनन भी तो अंततः अपना ही तो है, यह सभी को समझने की जरूरत है।

वेद मामूरपुर, नरेला


रोक अनुचित

म्यांमार में लोगों द्वारा सैनिक सरकार के विरोध को रोकने के लिए अब वहां इंटरनेट पर रोक लगा दी गयी है। इस प्रयास से वहां विरोध का भड़कना संभव है जो सैन्य प्रशासन के लिए मुसीबत बन सकता है। प्रदर्शनकारी और विरोधी किसी भी माध्यम से अपना आंदोलन म्यांमार की जनता और विश्व के सम्मुख रख सकते हैं। ऐसे में इंटरनेट या नहीं चलना कोई मायने नहीं रखता।

अमृतलाल मारू ‘रवि’, दसई, मप्र


गर्व की बात

हाल ही में दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ शहरों में राजधानी दिल्ली का भी नाम शामिल हुआ है। सच में यह हमारे देश और देश में रहने वाले करोड़ों लोगों तथा खास करके दिल्ली वासियों के लिए काफी खुशी और गर्व की बात है।

गीता कुमारी, सरहिंद


शानदार प्रदर्शन

पंजाब में नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस की शानदार जीत उसकी विकासोन्मुखी नीतियों का परिणाम है। केंद्र द्वारा पारित किए कृषि कानून के खिलाफ पंजाब और हरियाणा में किसानों का गुस्सा सबसे ज्यादा झलक रहा है। उसी का नतीजा है कि भाजपा को झटका लगा है।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

कर कटौती करें

Feb 19, 2021

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में कोविड-19 वैक्सीन के विश्वव्यापी रोलआउट के मद्देनजर मांग में सुधार हुआ है। केंद्र सरकार को करों को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। पेट्रोल और डीजल की दरों में बढ़ोतरी से केंद्र और राज्य सरकारों को आय होती है। डीजल के दाम बढ़ने से कृषि यंत्र संचालित करने वाले किसान के तेल व्यय में वृद्धि होती है, किन्तु आय अानुपातिक रूप से नहीं बढ़ पाती। लिहाजा सरकारें करों में कटौती करें।

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद


निजीकरण के खतरे

बैंकों का राष्ट्रीयकरण जब किया गया तो उद्देश्य देश के पैसों से देश की तरक्की में सहयोग लेना था। बैंकों ने कमोबेश अपनी भूमिका का बखूबी निर्वाह किया है लेकिन समय के साथ कुछ कमियां भी इनमें आई, जिनका निवारण जरूरी है परंतु निजीकरण कोई समाधान नहीं है। निजीकरण से सरकार अपना पल्ला तो झाड़ लेगी लेकिन बैंक के करोड़ों ग्राहकों की पूंजी का क्या होगा? निजीकरण समाधान न होकर बैंकों के ग्राहकों व कर्मचारियों को मझदार में छोड़ना है।

मुनीश कुमार, भिवानी


सोच बदलें

भारत में लोग विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का पालन करते हैं। लेकिन अंतरजातीय विवाह के समय 'अनेकता में एकता' का नारा कहां खो जाता है? लव-जिहाद जैसे कानून समाज में सांप्रदायिक खाई को चौड़ा करते हैं। हर किसी को निडर होकर दूसरे धर्म या जाति में शादी करने का अधिकार होना चाहिए‍। जिस पर विचार करने की जरूरत है।

भव्या, अंबाला शहर


कहने का हक

क्या सच में हम एक लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं। दिशा रवि की गिरफ्तारी की गई। अगर सच में वह खालिस्तान से नाता रखती है तो सबूत दिखाए जाएं और जड़ तक जाया जाये। नवदीप कौर भी अपने हक के लिए लड़ रही थी। उसे भी गिरफ्तार कर लिया। कई मंत्री जब उत्तेजित भाषण देते हैं तब कानून कहां जाते हैं। सरकार को किसान आंदोलन का हल निकालना चाहिए।

नेहा जमाल, मोहाली

राहत दे सरकार

Feb 18, 2021

15 फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘तेल की तपिश’ देश में पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं के साथ सहानुभूति प्रकट करते हुए सरकार को इस संदर्भ में राहत देने के लिए सुझाव देने वाला था! पहले तेल और पेट्रोल की कीमतों की समीक्षा 1 महीने के बाद होती थी। आजकल तेल और पेट्रोल की कीमतों में भी प्रतिदिन समीक्षा होती है! जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और पेट्रोल की कीमतों में कमी आ रही थी तब सरकार ने राजस्व प्राप्त करने के लिए इसकी कीमतें बढ़ाकर उपभोक्ताओं को लूटने का काम शुरू किया। आजकल तेल उत्पादक देश अधिक लाभ कमाने के लिए तेल की पूर्ति नहीं बढ़ा रहे, जिससे कीमतों में वृद्धि हो रही है। इसका बोझ भी हमारी सरकार उपभोक्ताओं पर डाल रही है। सरकार लोगों को करों में कटौती करके कुछ राहत दे।

शामलाल कौशल, रोहतक


प्रकृति का संरक्षण

वसंत पंचमी का उत्सव ज्ञान की देवी 'मां सरस्वती' के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। वसंत में हरियाली का आगाज हो जाता है। लेकिन जैसे-जैसे इनसान ने प्रकृति से खिलवाड़ शुरू किया है वैसे-वैसे देश के बहुत से स्थानों पर हरियाली कम होती जा रही है। अगर आने वाली पीढ़ी को भारत के त्योहार जो कि प्रकृति से भी संबंधित हैं, का ज्ञान करवाना है तो उसके लिए प्रकृति का संरक्षण बहुत जरूरी है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


ठेकेदार जिम्मेवार

पहले सड़क बनायी जाती है और दूसरे साल सड़क टूट जाती है। इसमें सरकार के साथ विश्वासघात किया जाता है। सड़क मरम्मत कराने के लिए फिर उसी ठेकेदार को ठेका दिया जाता है। इससे सरकार को दूसरे साल ही करोड़ों का घाटा होता है। दो साल में उसी सड़क के लिए सरकार से दो बार राशि ली जाती है। सरकार एक ही ठेकेदार को ठेका नहीं देकर हर वर्ष अलग-अलग ठेकेदार को ठेका दे, जिससे कम लागत में मजबूत सड़क निर्माण हो सके।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

सतर्क रहें

Feb 17, 2021

13 फ़रवरी के दैनिक ट्रिब्यून के सम्पादकीय ‘सहमति की ओर’ के सन्दर्भ में, मैं कहना चाहता हूं कि पैंगोंग झील के उत्तरी-दक्षिणी तट से सैनिकों की वापसी पर भारत और चीन के मध्य बनी सहमति स्वागतयोग्य तो है ही, यह भारत की कूटनीति की जीत के रूप में भी देखी जानी चाहिए। संवादहीनता की बर्फ़ का पिघलना आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने तथा सेना को निरन्तर तनाव की स्थिति से उबरने में भी सहायक होगा। इसके साथ ही चीन के प्रति सदैव जागरूक व सचेत रहने की आवश्यकता है, क्योंकि उस पर एकाएक विश्वास कर लेना भी घातक सिद्ध हो सकता है।

लाजपत राय गर्ग, पंचकूला


सजगता जरूरी

चीन पैंगोंग झील से वापस आने के लिए सहमत हो गया है। चीनी सैनिक पैंगोंग में दस महीने से अधिक समय तक रहे। उन्होंने सोचा था कि भारतीय सेना माइनस डिग्री तापमान में नहीं रह पाएगी। भारत ने वहां 50000 सैनिकों को तैनात किया है। और उन्हें निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया। कई देशों ने हमारे दृढ़ निश्चय का समर्थन किया और चीन पूरी दुनिया में अलग हो गया। लेकिन चीन एक विश्वासघाती देश है। कोई भी इस देश पर विश्वास नहीं कर सकता है। इसलिए हमें हमेशा खुली आंखों के साथ और सजग रहना होगा।

नरेंद्र कुमार, जोगिंदर नगर


प्रेरक सबक

गत दिनों जब रतन टाटा को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग ने जोर पकड़ा तो रतन टाटा को खुद ही कहना पड़ा कि वे अपने प्रशंसकों की भावनाओं की क़द्र करते हैं लेकिन ऐसे कैंपेन को बंद किया जाना चाहिए। ऐसा कहकर टाटा ने अपना कद और भी बढ़ा लिया है। आज पुरस्कारों के लिए लोग लाइन में खड़े दिखते हैं। अपनी छोटी-सी उपलब्धि का ढिंढोरा पीटकर येन केन प्रकारेण कोई पुरस्कार पा लेना चाहते हैं। पुरस्कारों के लिए लालायित रहने वालों के लिए यह एक सबक है।

विनय मोघे, चिंचवड, पुणे

आपकी राय

Feb 16, 2021

महिला पेट्रोलिंग

मनचलों पर नकेल कसने के लिए राजस्थान में महिला पुलिस पेट्रोलिंग यूनिट शुरू की गयी, जिससे महिलाओं में दहशत खत्म हो गई है। देर रात तक महिला-युवतियां अपने घर से बाहर निकल सकती हैं। महिलाओं के लिए आपात स्थिति में लैंडलाइन नंबर जारी किया है। यह आज समय की मांग है। महिलाओं ने गश्ती दल को सराहा है। इस तरह की पेट्रोलिंग हर शहर में शुरू की जानी चाहिए।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

सतर्क रहें

भारत और चीन के बीच घटते तनाव के बावजूद चीन पर किसी भी दृष्टि से भरोसा नहीं किया जा सकता है। उसकी रग-रग में धोखा व षड्यंत्र है। भारत सरकार को न केवल अति सावधानी बरतनी होगी बल्कि जल्दबाजी में वाहवाही लूटने से बचना होगा क्योंकि चीन ने कई मौकों पर कथनी के विपरीत करनी करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी है। भारत सरकार को सख्ती को आगे जारी रखना चाहिए।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

कसौटी पर बजट

Feb 15, 2021

आर्थिकी का ध्यान

इस महामारी ने हमें ये सबक दिया है कि स्वास्थ्य सुविधा प्राथमिक हो। 130 करोड़ से ज्यादा की आबादी का देश सिर्फ एक छोटे से वायरस के कारण थम जाये, यह न हमारे लिए उचित है और न ही पूरे विश्व के लिए। यही दृष्टि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस बजट में नजर आती है। भारत सरकार ने स्वास्थ्य के प्रति इस बजट में जो प्रावधान किया है, वह सराहनीय है। आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के अंतर्गत 64,180 करोड़ आवंटित करके स्वस्थ भारत अभियान को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह लगता है कि अब किसी भी तरह के स्वास्थ्य संकट का सामना करने के लिए भारत पूरी तरह तैयार रहेगा। यह बजट स्वास्थ्य एवं अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज है।

दिव्येश चोवटिया, गुजरात

निराशाजनक बजट

कोरोना की प्रतिकूल परिस्थितियों में -23.9 तक गिर चुकी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में केंद्रीय बजट एक चुनौती रहा। हालांकि कृषि विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास हुआ, लेकिन विगत बजट से कम आवंटन से अपेक्षित लक्ष्य प्राप्ति दूर की कौड़ी है। सामान्य चिकित्सा सेवाओं की दशा में विशेष प्रगति की अपेक्षा बेमानी है। राष्ट्र का आयकरदाता पूर्णत: निराश रहा। बजट में महंगाई रोकने और बेरोजगारी घटाने का प्रयास प्रतिबिंबित नहीं हुआ। सरकार द्वारा अनेक सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और उपक्रमों की बिक्री और निजीकरण का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।

सुखबीर तंवर, गढ़ी नत्थे खां, गुरुग्राम


कसौटी पर खरा नहीं

सरकार ने इस बजट में किसान हितकारी, स्वास्थ्य सेवी, आत्मनिर्भर भारत की बात कही है लेकिन अगर ध्यान से देखा जाए तो कोरोना काल के बाद देश में जो मंदी और बेकारी का आलम था, पेट्रोलियम पदार्थों में निरंतर मूल्य वृद्धि हाक रही है, उसके चलत घरेलू बजट में कोई राहत न देने से बजट ने कर्मचारी व व्यापारी वर्ग को निराश ही किया है। हर साल की तरह इस साल भी कर्मचारियों ने आयकर में राहत न मिलने के कारण सरकार को कोसा है। देश के सुरक्षा व्यय में भी कोई वृद्धि नहीं की गई है। इस तरह 2021-22 के बजट को निराशाजनक ही कहा जाएगा।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


कुछ अच्छा भी

जहां देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है, उसी दौरान वित्त मंत्री बजट में आंकड़ों के हिसाब से देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास कर रही थी। देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। इस वर्ष का बजट आम आदमी को राहत देने वाला नहीं है। इसकी सीधी मार मध्य वर्ग और वेतनभोगियों पर पड़ने वाली है। यह पहला ऐसा बजट है जो गिरावट वाली जीडीपी के दौर में पेश किया गया। वहीं दूसरी ओर बजट में 75 वर्ष से ऊपर के नागरिकों को आयकर रिटर्न दाखिल करने से मुक्त कर दिया गया है। यह बहुत ही सराहनीय है। बजट में कृषि, स्वास्थ्य और विनिर्माण के क्षेत्र में सुधार पर जोर दिया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट स्वागत योग्य है।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़


कथनी-करनी का फर्क

नये बजट में कृषि विकास तथा स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक व्यय करने की बात कही गई है, किन्तु सरकारी नीतियों को लेकर आज सरकार के प्रति आम जनमानस में विश्वास का घोर अभाव है। किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिल जाए, इसी में कृषि विकास का फंडा निहित है। केन्द्र द्वारा 20 से अधिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने के बावजूद कृषकों का शोषण हो रहा है। इसी भांति सरकारी चिकित्सा व्यवस्था का हाल है। जब तक सरकार पब्लिक सेक्टर को मजबूत नहीं करेगी तब तक केवल सरकारी आंकड़ों पर यकीन करना जनता के लिए बेमानी है।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम


निराश किया

किसान संगठन और मध्य वर्ग ने बजट की प्रशंसा नहीं की है। इसी तरह आयकर की स्लेब अपरिवर्तित रखने से आयकरदाता खुश नही हैं, क्योंकि महंगाई में हो रही वृद्धि से बचत में कमी होना स्वाभाविक है। किसान आंदोलन के मद्देनजर यदि उनके हित में बजट होता तो संभव है कि आंदोलन ठंडा हो जाता। कहने को तो स्वास्थ्य बजट में 135 पर्सेंट का इजाफा हुआ है पर लोगों को इसका लाभ मिलेगा, इसमें संशय है। लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दोषपूर्ण योजनाएं बंद करनी होंगी जिसके लिए कोई प्रावधान नहीं किए गए। कहना होगा कि बजट सरकारी महत्वाकांक्षा तथा जनाकांक्षा के बीच झूलता परिलक्षित हो रहा है।

बीएल शर्मा ‘अकिंचन’, उज्जैन, म.प्र.


पुरस्कृत पत्र

राहत नहीं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए प्रस्तुत बजट में सरकार ने स्वास्थ्य बजट में अप्रत्याशित वृद्धि की। कृषि क्षेत्र को मजबूती देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी कई कदम इस बजट में उठाए गए हैं मगर 2021 -22 का बजट आम आदमी को राहत देने वाला नहीं है। इसकी सीधी मार मध्य वर्ग और वेतन भोगियों पर पड़ने वाली है। यह बजट मौजूदा चुनौतियों से मुकाबले के लिए नयी सोच नहीं देता। कोरोना काल के बाद उपजी बेरोजगारी से मुकाबले के मामले में बचट निराश करता है। सरकार को रोजगार बढ़ाने पर भी जोर देना चाहिए था।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़

उम्मीदों के रिश्ते

Feb 13, 2021

ग्यारह फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून का ‘रिश्तों की इबारत’ संपादकीय भारत-अमेरिका के नए प्रशासन के बीच भविष्य में संबंधों में सुधार की आशा का विश्लेषण करने वाला था। पिछले कुछ सालों से भारत तथा अमेरिका में कुछ मतभेदों के बावजूद संबंधों में जो सुधार हुआ है, उसको लेकर दोनों देश संतोष अनुभव कर सकते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका का नया प्रशासन भारत के साथ व्यापार, रक्षा तथा कूटनीति को लेकर संबंधों को सुधारने की कोशिश करेगा। दो लोकतांत्रिक देशों में संबंधों में सुधार विश्व शांति के लिए सहायक साबित हो सकता है।

शामलाल कौशल, रोहतक


हिन्दी का सम्मान

प्रधानमंत्री जब भी देश से बाहर जाते हैं तो अपनी मातृभाषा का सम्मान पूरे विश्व में फैला देते हैं। अक्सर नरेंद्र मोदी जब भी जनता को भाषण देते हैं तो मातृभाषा हिंदी में ही बोलते हैं। यही कारण है कि हिंदी भाषा को अन्य देशों में भी पूरा सम्मान मिल रहा है। लेकिन वहीं दूसरी ओर आज के युवा हिंदी बोलने से शर्माते हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रभाषा को आगे ले जाने में अच्छा कदम उठा रहे हैं। हमें भी हिंदी का उच्चारण करना चाहिए ताकि पूरे विश्व में हिंदी का नाम रोशन हो।

चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी, असम


वैक्सीन डिप्लोमैसी

वैक्सीन कूटनीति से घबराए चीन ने नेपाल को एक बड़ी खेप देने का ऐलान किया है। भारतीय वैक्सीन का दुनिया में बजता डंका चीन को रास नहीं आ रहा है। भारतीय वैक्सीन की विश्व में बढ़ती पसंद अन्य देशों को भी भारत की ओर प्रेरित कर रही है। यही वजह है कि चीन इसे अपनी जमीन खिसकती मान रहा है। भारत वैक्सीन डिप्लोमेसी की तरह ही अन्य क्षेत्रों में भी कदम रखे तभी चीन को पहाड़ के नीचे आने का अहसास हो सकेगा।

अमृतलाल मारू ‘रवि’, दसई धार, म.प्र.

जीवन रक्षा

Feb 12, 2021

18 जनवरी से 17 फरवरी तक सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है। इस बार की सड़क सुरक्षा माह का थीम है—सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा। हर वर्ष सड़क हादसों में लाखों लोग जान गंवा देते हैं। अंतर्राष्ट्रीय सड़क संगठन के अनुसार 12.5 लाख लोग प्रतिवर्ष सड़क हादसों में मौत का शिकार होते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में सड़क दुर्घटना में मरने वालों की दर प्रति 100,000 पर 6 है। इसका मुख्य कारण तेज रफ्तार, मादक पदार्थों, शराब का सेवन कर वाहन चलाना, गाड़ी चलाते हुए मोबाइल पर बात करना, ओवरटेक करना, ट्रैफिक रूल तोड़ना आदि हैं। सावधानीपूर्वक व सुरक्षित वाहन चालन से ही सड़क हादसों से बचा जा सकता है।

जफर अहमद, मधेपुरा, बिहार


सज़ा मिले

कनाडाई कारोबारी तहव्वुर राणा ने अपने भारत प्रत्यारोपण का अमेरिकी अदालत में विरोध किया है। राणा के वकीलों ने दलील दी कि अमेरिका-भारत प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद छह के तहत राणा को भारत प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता। भारत प्रत्यारोपण के लिए जिस मामले का हवाला दे रहा है, उससे अमेरिकी अदालत पहले ही बरी कर चुकी है। राणा अमेरिका में ऐसा कह सकता है क्योंकि घटना से अमेरिका का कुछ लेना-देना नहीं है बल्कि आतंक और हिंसा की बड़ी घटना को उसने हिंदुस्तान में अंजाम दिया था, इसलिए उसे पकड़ने और सजा देने के लिए भारत ही हकदार है।

अमृतलाल मारू ‘रवि’, दसई धार, म.प्र.


नई सुबह

सात फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में सर्वेश तिवारी का ‘ये वादियां ये फिजाएं बुला रही हैं...’ लेख कश्मीर प्रदेश में लौटी अमन-चैन के चलते प्रकृति का मनमोहक नजारा एवं फिल्मी हस्तियों व पर्यटन में वृद्धि यात्रा संस्मरण बन गया। प्रदेश के शांत वातावरण में एक नयी सुबह का उजाला दिखा। पर्यटकों की चहल-पहल से प्राकृतिक बर्फीला क्षेत्र मनमोहक हृदय-ग्राह्यता का केंद्र बिंदु रहा।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

घातक विकास

Feb 11, 2021

सात-आठ साल पहले केदारनाथ में जो त्रासदी हुई थी, अभी उसके घाव भरे नहीं हैं। इसके बाद चमोली में ग्लेशियर के टूटने से जो त्रासदी हुई है, वह दर्दनाक है। आखिर कब तक जंगलों, पेड़-पौधों, पहाड़ों व पर्यावरण की अनदेखी की जाएगी? पहाड़ों का जो सब्र टूट रहा है, उसके पीछे यह मानवीय दखल है, जो विकास के नाम पर हो रही है। ऐसे संवेदनशील इलाकों में विकास ऐसा होना चाहिए कि वनों व पर्यावरण पर कोई आंच न आए और काम भी हो जाए।

हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, म.प्र.


संकट की आहट

कुदरत ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप उत्तराखंड के चमोली में दिखाया। यहां नंदादेवी ग्लेशियर के टूटने से जान-माल की तबाही होने की खबरें हैं। इस कहर ने जून, 2013 में हुए कुदरत के कहर के जख्मों को फिर से ताजा कर दिया। कुछ वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी इसका कारण जलवायु परिवर्तन से लेकर कम बर्फबारी तक बता रहे हैं। आज सारी दुनिया ग्लोबल वार्मिग के लिए चिंतित है। अगर ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार इसी तरह बढ़ती रही तो यह धरती बंजर बन जाएगी।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


अलोकतांत्रिक पहल

बिहार सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार अगर कोई हिंसक विरोध प्रदर्शन में भाग लेता है तो वह सरकारी नौकरी और अनुबंध के लिए पात्र नहीं होगा। ऐसे में जो शांतिपूर्वक आंदोलन करना चाहेगा, उसमें कुछ शरारती तत्व आकर उस आंदोलन को हिंसक आंदोलन बदलने का काम करेंगे। इस प्रकार वे लोग भी दंडित होंगे जो शांतिपूर्वक आंदोलन करना चाहते थे।

विकास बराड़ा, अम्बाला


लोकतंत्र की बहाली

म्यांमार में सैन्य शासन को उखाड़ फेंकने के लिए लाखों लोग सड़कों पर हैं। माना जा रहा है कि बढ़ती भीड़ के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। श्रम संगठनों, डॉक्टरों और छात्रों ने आंग सान सू की के पक्ष में नारे लगाए। उन्होंने मांग की कि तानाशाही को तुरंत खत्म किया जाए। आधुनिक युग में सैन्य शासन और तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है। म्यांमार में लोकतंत्र बहाल होना चाहिए।

नरेंद्र कुमार, भुजड़ू, जोगिंदर नगर

बदलें विकास के मानक

Feb 10, 2021

आठ फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून में सम्पादकीय ‘कुदरत के सबक’ के सन्दर्भ में मानव अपनी असीमित लिप्सा के चलते प्राकृतिक संरचना से निरन्तर छेड़छाड़ कर रहा है। प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में विवेक को ताक पर रखकर जुटा हुआ है। किसी भी क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना बहुत आवश्यक है, लेकिन भू-वैज्ञानिकों तथा पर्यावरणविदों की चेतावनी को नजरअंदाज कर के सरकारें संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े-बड़े बांध बनाने में लगी हुई हैं। इसी का परिणाम है कि साल-दर-साल कोई न कोई प्राकृतिक आपदा से आमजन को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ती है।

लाजपत राय गर्ग, पंचकूला


साइबर अपराध

देश में साइबर अपराध के मामले साल-दर-साल बढ़ रहे हैं। अपराध के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि से सरकार की चिंता भी बढ़ गई है। अभी साइबर सेल की कई टीमों के पास एक्सपर्ट की कमी होने और पुलिस की धाक कम होने के कारण अपराध जगत के अपराधी सक्रिय हैं। हाल ही में बिहार के महराजगंज के भाजपा सांसद के बैंक खाते से 90 हजार रुपये निकाल लिये। सरकार को बढ़ते अपराधों की रोकथाम के लिए प्रयास करने होंगे।

कांतिलाल मांडोत, सूरत


प्रकृति से संतुलन

आठ फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘कुदरत के सबक’ उत्तराखंड में चमोली में ग्लेशियर के खिसकने से जो तबाही हुई, उसका विश्लेषण करने वाला था। यह सब प्रकृति का जरूरत से ज्यादा दोहन करने का नतीजा है। इस प्राकृतिक विपदा से हमें सबक सीखना चाहिए। पर्वतों पर अनावश्यक छेड़छाड़ रोकनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

रचनात्मक सहयोग

Feb 09, 2021

आज जिस प्रकार विपक्ष सरकार का हर हाल में केवल विरोध करता है, यह देश के विकास के लिए बहुत बड़ी बाधा है। लोकतंत्र में असहमति के पर्याप्त अधिकार हैं, लेकिन मुद्दे के अच्छे पहलुओं को भी नकार देना विपक्ष होने का अर्थ नहीं है। आज भारत-पाक युद्ध होने पर इन्दिरा गांधी को 'दुर्गा' का सम्बोधन और नरसिम्हा राव द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार की ओर से संयुक्त राष्ट्र में भेजे जाने की घटनाओं के उदाहरण नगण्य से हो गए हैं। विपक्ष को सरकार के अच्छे कदमों पर रचनात्मक सहयोग देना होगा।

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली


लोकतंत्र की बहाली

म्यांमार में सैन्य शासन को उखाड़ फेंकने के लिए लाखों लोग सड़कों पर हैं। माना जा रहा है कि बढ़ती भीड़ के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। लेबर संगठनों, डॉक्टरों और छात्रों ने आंग सू की के पक्ष में नारे लगाए। उनकी मांग है कि तानाशाही को तुरंत खत्म किया जाए। आधुनिक युग में सैन्य शासन और तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है। म्यांमार में लोकतंत्र बहाल होना चाहिए।

नरेंद्र कुमार, भुजड़ू, जोगिंदर नगर

कोरोना टीकाकरण की चुनौतियां

Feb 08, 2021

जिम्मेदारी भी

भारत में जहां सवा अरब से अधिक जनसंख्या है, वहां कोरोना का टीकाकरण करना निस्संदेह बड़ी चुनौती होगी। चूंकि निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है, इसके लिए सबसे पहले निजी अस्पतालों में सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां के सभी कर्मचारियों को वैक्सीन लगे। इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरे देश में टीकाकरण शुरू करना चाहिए। यह तभी संभव है जब सभी नागरिक टीकाकरण के लिए अपनी सहमति प्रदान करें और भारत को कोरोना वायरस मुक्त बनाने में सहयोग करें।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़ 


सही जानकारी दें

कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर देश में भ्रम फैलाया जा रहा है। वैसे टीकाकरण से होने वाले साइड इफेक्ट बहुत ही हल्के होते हैं। लोगों को यह बात समझने की जरूरत है कि वैक्सीनेशन के कारण ही आज हम चेचक, पोलियो, मलेरिया, डिप्थीरिया, टिटनेस, रूबेला, रेबीज व पीले बुखार तक को नियंत्रित कर पाये हैं। लोगों को इस बात की सही जानकारी देनी होगी कि कोरोना वैक्सीन अनेक चरणों से गुजरने के बाद देश में उपयोग की जा रही है। जरूरी है कि हम कोरोना वैक्सीन के सकारात्मक पक्ष की ओर देखें और आगे बढ़ें।

सुनील महला, पटियाला, पंजाब


पर्याप्त सूचना मिले

कोरोना शुरू होने के बाद से ही हम लगातार इम्यूनिटी बढ़ाने की बात करते रहे हैं। रोगों से लड़ने की शक्ति और असर की प्रतिक्रिया भी इसी पर निर्भर करती हैं। इसलिए दवा का नकारात्मक प्रभाव सब पर समान नहीं होगा। ऐसे में सरकार को कुछ खास चेहरों को इनके प्रचार-प्रसार का कार्य सौंपना होगा। टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिये की गई तैयारियों की जानकारी विभिन्न माध्यमों से जनता तक पहुंचाई जानी चाहिए। यदि कोई नकारात्मक पहलू सामने आता है तो चिकित्सीय पड़ताल करके सूचना माध्यमों के जरिये लोगों को सूचित किया जाये।

मनजीत कौर ‘मीत’, गुरुग्राम


शंकाएं दूर हों

लोगों में वैक्सीन को लेकर कुछ शंकाएं भी हैं, जिनमें से कुछ तो राजनेता हैं और कुछ तथ्यात्मक भी हैं। भारत बायोटेक के अंतिम चरण के परीक्षण परिणामों के सामने न आने की वजह से सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन यह कंपनी पिछले 24 सालों से वैक्सीन बना रही है और इसने अब तक 16 वैक्सीन बनाई हैं और इनका दुनिया के 123 देशों में निर्यात किया है। ड्रग कंट्रोलर एजेंसी ने जांच के बाद ही इसे अनुमति दी है। टीकाकरण के समय राजनीतिक रोटियां सेंकना अच्छी बात नहीं है। लेकिन अच्छी शुरुआत किसी अभियान की सफलता की राह तो निर्धारित करती ही है।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़


विश्वास पैदा करें

आज सबसे बड़ी चुनौती है टीके के प्रति विश्वास की। जब स्वास्थ्य कर्मियों को ही आश्वस्त होने में समय लग रहा है तो आम आदमी को आश्वस्त करना थोड़ा मुश्किल होगा। टीके पर विश्वास होने के बाद आमजन की बारी आने पर एक ऐसी प्रक्रिया विकसित करनी होगी, जिससे बिना परेशानी, भेदभाव के लक्षित लोगों को टीका लग सके। बड़ी आबादी के कारण टीकाकरण अभियान लम्बा चलेगा और इसे भ्रष्टाचार, व्यवसायीकरण, राजनीतिकरण, अफवाहों और धार्मिक विवादों से बचाये रखना भी चुनौतीपूर्ण होगा।

बृजेश माथुर, गाज़ियाबाद


चुनौतियों भरा समय

कोरोना महामारी से जूझते देश के लिए तीन करोड़ भारतीय वैक्सीन की पहली खेप जारी होना एक ऐतिहासिक क्षण माना जाएगा। अधिक आबादी वाले देश में टीकाकरण अभियान निश्चित रूप से चुनौतियों भरा है। उत्पादन, भण्डारण और वितरण की तकनीकी कठिनाइयों के बीच शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करना एक कठिन कार्य है। पहले चरण में प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण होना सराहनीय फैसला था। अगले चरणों के निर्धारण और क्रियान्वयन में तकनीकी संसाधनों का सहारा लिया जाए। वहीं लोगों को देश की जनसांख्यिकी हालात को देखते हुए धैर्य सहित अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

एमके मिश्रा, रांची, झारखंड


पुरस्कृत पत्र

राजनीति बंद हो

देश में वैक्सीन लगाने के अभियान की शुरुआत में ही इसको संदेह की दृष्टि से देखा जाना दुखद है। स्वदेश में निर्मित इन वैक्सीनों का अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव जाने बगैर ही इस पर उंगली उठाना वैज्ञानिकों को हतोत्साहित करने के समान है। इसको लेकर सरकार ने जिस प्रकार से अपना महिमामण्डन शुरू किया है वह भी गलत है, क्योंकि इससे पूर्व भी देश में पोलियो, हैजा, चेचक आदि कई बीमारियों का टीका लगाने का अभियान शुरू हुआ, परन्तु उसमें राजनीति नहीं थी। बार-बार इस बात का प्रचार किया जा रहा है कि हमने वैक्सीन बना दी, दूसरे लोग नहीं बना सके। सरकारी तंत्र को पिछले अनुभवों का लाभ उठाते हुए वैक्सीन को आम जन के लिए स्वीकार्य बनाने के लिए अभियान चलाना चाहिए।

जगदीश श्योराण, हिसार

हकीकत समझे भाजपा

Feb 06, 2021

पांच फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित राजकुमार सिंह का ‘किसान असंतोष के राजनीतिक निहितार्थ’ लेख आम जन का मार्गदर्शक तथा भाजपा के लिए आंख खोलने वाला था। भाजपा समझ नहीं रही है कि खेती-किसानी आम किसान के लिए गहरे भावनात्मक लगाव का विषय है। पश्चिमी देशों की तरह महज रोजी-रोटी का जरिया नहीं। उसकी जमीन पर आंच आएगी तो वह वोट देना तो दूर की बात है, संघर्ष की मुद्रा में आ जाएगा। सरकार सुधारों का मतलब समझाने में विफल रही है। विपक्ष का विरोध किसान को समझ आ रहा है।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार


सकारात्मक ऊर्जा

देश में 35 लाख से भी अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन का टीका लगाकर यह साबित कर दिया कि बीमारी के मामले में आमजन कितना सतर्क और जागरूक है। यह उम्मीद की किरण का आगाज है। वैसे इस बीमारी से अब तक कई जिले कोरोना मुक्त हो गए हैं। लेकिन जो तथाकथित स्वार्थी तत्व वैक्सीन को लेकर अनर्गल और टीका-टिप्पणी कर रहे हैं उन्हें देश हित की बात करनी चाहिए।

प्रकाश हेमावत, टाटा नगर, रतलाम


शहीदों का स्मरण

चौरी-चौरा घटना के शताब्दी वर्ष को बड़े स्तर पर मनाने से देश का आम नागरिक अपने शहीदों को स्मरण कर सकेगा। साथ ही उनकी कुर्बानियों को नमन कर सकेगा। देश में चाहे जो भी मुद्दे चल रहे होंं, हमें शहीदों को हमेशा याद करना चाहिए। उनके द्वारा दिलाई गयी आजादी का मूल्य समझना चाहिए। गर्व करना चाहिए कि हम ऐसे महान देश के नागरिक हैं।

गीता कुमारी, सरहिंद


गरीबों की अनदेखी

कोरोना काल के बाद संसद में पेश हुए बजट के संदर्भ में लोगों में चर्चाएं होने लगी हैं। लोगों का कहना है कि इस बजट में देश के साधारण और गरीब परिवार में निराशा छा जाने जैसा है। आम लोगों को दो वक्त की रोटी मिलनी चाहिए। इस बजट से देश के गरीब लोग गरीब होते जायेंगे और अमीर लोग और अमीर होते जायेंगे।

चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी, असम

लोकतंत्र के विरुद्ध

Feb 05, 2021

दुनिया भर में म्यांमार के सैन्य तख्तापलट की निंदा हो रही है। यह तख्तापलट ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया के अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्था काफी नीचे चली गयी है। इस कठिन समय में लोकतंत्र का गला घोट कर सैन्य तख्तापलट करना बेहद निंदा की बात है। इसको लेकर अमेरिका, भारत, रूस, ब्रिटेन, समेत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चिंता व्यक्त की है। इस समय भारत को चाहिए कि वह एशियाई देशों के सहयोग से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में म्यांमार के तख्तापलट मुद्दे को जोर-शोर से उठाए। लोकतंत्र की पुनर्स्थापना बहाल करने की बात करे।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी


पुतिन की मुसीबत

रूस की पुतिन सरकार इन दिनों स्थानीय लोगों ही नहीं, विश्व के अन्य देशों के निशाने पर है। विपक्षी नेता अलेक्सेई नवलनी की गिरफ्तारी से उपजा विवाद अब अंतर्राष्ट्रीय मामला बनता जा रहा है। अगर इस मामले का शीघ्र कोई हल नहीं निकला तो पुतिन के लिए यह समय संकटदायक हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र की नाराजगी के अलावा अमेरिका सहित अन्य देशों ने भी पुतिन के कदमों का पुरजोर विरोध किया है। बड़ी संख्या में लोगों का विरोध प्रदर्शन पुतिन के लिए खतरे की घंटी है।

अमृतलाल मारू ‘रवि’ दसई धार, म.प्र.


आंतरिक मामला

कृषि कानूनों के विरोध मे चल रहे किसान आंदोलन पर कुछ बिन बुलाए असंबंधित अंतर्राष्ट्रीय समर्थक सामने आये हैं। कुछ अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों ने किसानों के लिए अपने विचार और समर्थन दिये हैं। भारत एक संप्रभु देश है जो हमें अपने आंतरिक मामले में अन्य प्रभावों से मुक्त करता है। किसान आंदोलन हमारा आंतरिक मामला है, जहां बाहरी लोग केवल दर्शक बन सकते हैं लेकिन भारत के अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।

नंदनी जांगिड़, पंचकूला

आपकी राय

Feb 04, 2021

आम आदमी की अनदेखी

इस वर्ष का बजट आम आदमी को राहत देने वाला नहीं है। इसकी सीधी मार मध्य वर्ग और वेतनभोगियों पर पड़ने वाली है। सरकार का जोर विकास और भविष्य के आथिक सुधारों पर है। यह पहला ऐसा बजट है जो गिरावट वाली जीडीपी के दौर में पेश किया गया। ऐसी स्थिति में बजट पेश करना एक चुनौती था। वही दूसरी ओर बजट में 75 वर्ष से ऊपर के नागरिकों को आयकर रिटर्न दाखिल करने से मुक्त कर देना सराहनीय कदम है। बजट में कृषि, स्वास्थ्य और विनिर्माण क्षेत्र में सुधार पर जोर ज्यादा दिया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट बढ़ाना स्वागतयोग्य है।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़

विपक्ष की गरिमा

वर्ष 1993 में जब पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने कश्मीर को लेकर जेनेवा में भारत को ललकारा था, तब तत्कालीन सरकार ने विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को भारत का नेतृत्व करने के लिए भेजा था। अटल का मानना था कि पोजीशन से बड़ा उद्देश्य होना चाहिए, और देश सेवा के लिए कोई पक्ष और विपक्ष नहीं होता। अटल जी के पदचिन्हों पर चलना होगा, कदम मिलाकर बढ़ना होगा। हालांकि सरकार की मंशा, विपक्ष को अस्थिर और कमजोर करके, किसी भी बिल को अमलीजामा पहना देना, सही नहीं है। सरकार को पक्ष और विपक्ष से ऊपर उठकर देशहित में फैसले लेने चाहिए।

अमन जायसवाल, दिल्ली

लापरवाही की हद

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के कापसी कोपरी हेल्थ सेंटर पर पल्स पोलियो की दवा की जगह 12 बच्चों को सैनिटाइजर पिला दिया गया। सवाल उठता है कि क्या पोलियो ड्रॉप व सैनिटाइजर में अंतर नहीं है। हेल्थ सेंटर के कर्मियों पर लापरवाही के लिए कानून के तहत कार्रवाई की जाए। ऐसे लापरवाह लोगों की जनसेवा के काम में बिल्कुल जरूरत नहीं है।

हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, म.प्र.

जख्मों पर मरहम

Feb 03, 2021

दैनिक ट्रिब्यून के 29 जनवरी के अंक में प्रकाशित सुषमा रामचंद्रन के ‘महामारी से उपजे जख्मों पर मरहम’ लेख में सरकार कैसे एक महामारी से डांवांडोल हुई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बजट पेश करेगी, विश्लेष्ाण करने वाला था। लेख में उन्होंने बताया कि संभव है राजकोषीय घाटे के कारण बड़ी बुनियादी परियोजनाओं को प्रोत्साहन देना बजट की मजबूरी हो। महामारी से यह तो पता चला है कि आपातकाल से निपटने को अकेला स्वास्थ्य सेवा तंत्र नाकाफी है। वहीं जिन संगठित व असंगठित क्षेत्रों को नुकसान हुआ है, उन्हें मदद पहुंचाने की जरूरत है। खासकर सेवा क्षेत्र, चिकित्सा क्षेत्र और शिक्षा क्षेत्र पर ध्यान देने की जरूरत है।

नवज्योत सिंह, ऊना, हि.प्र.


परेशानी का सबब

छब्बीस जनवरी के घटनाक्रम के बाद हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद है। इसको बंद करने का मकसद किसान आंदोलन को लेकर फैलनी वाली अफवाहों को रोकना है। लेकिन इससे आम लोगों को बहुत दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। जिन लोगों का कामकाज इंटरनेट पर निर्भर है, उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। बच्चों की अॉनलाइन स्कूल शिक्षा के अलावा वार्षिक परीक्षाएं भी नजदीक हैं। प्रशासन को इंटरनेट सेवाओं को चालू करना चाहिए तथा उन शरारती तत्वों पर नजर रखनी चाहिए जो अफवाहें फैलाते हैं।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


वैक्सीन पर राजनीति

भारत कोरोना वैक्सीन अन्य देशों को उपलब्ध करा सहायता करने की कोशिश कर रहा है। यह उपहार स्वरूप भेंट देकर उसने इनसानियत का सबूत दिया है। लेकिन कुछ स्वार्थी तत्व वैक्सीन को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वैक्सीन को लेकर राजनीति करना उन वैज्ञानिकों का अपमान है, जिन्होंने रिकॉर्ड समय में कोरोना महामारी के इलाज के लिए वैक्सीन तैयार की है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

प्रगतिशील सोच हो Other

Feb 02, 2021

दैनिक ट्रिब्यून में 1 फरवरी का संपादकीय ‘टूटे गतिरोध’ के संदर्भ में जब सरकार विवादित कृषि कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव दे चुकी है और अन्य मुद्दों पर वार्ता के लिए तैयार है तो किसान संगठनों का कहना कि ‘हम पहल नहीं करेंगे, वार्ता का प्रस्ताव भेजे सरकार’ उनकी हठधर्मिता को ही दर्शाता है। किसान इस बुनियादी सच को समझने से इनकार कर रहे हैं कि 21वीं सदी की खेती पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकती। भूमि के संकुचन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, खाद्यान्न के विश्व बाजार के ट्रेंड, घटते जल स्रोत तथा ढर्रे की खेती के नुक़सानों के मद्देनजर कृषि क्षेत्र में सुधारों की जरूरत है।

लाजपत राय गर्ग, पंचकूला


उचित कार्रवाई करें

अमेरिका में अराजक तत्वों द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा को खंडित करने की घटना की संपूर्ण विश्व ने निंदा की है। आज गांधी को शांतिदूत के नाम से याद किया जाता है। अलगाववादी भारत के खिलाफ नफ़रत का माहौल बनाकर शांति को धूमिल करना चाहते है। अमेरिका जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करे।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

आम बजट से उम्मीदें Other

Feb 01, 2021

जीवनयापन सहज हो

इस समय देश कोरोना महामारी संकट से जूझ रहा है। महामारी के चलते लोग बेरोजगार हो गये। जिसकी प्राइवेट नौकरी थी, कोरोना के बाद वो भी या तो छूट गई या फिर तनख्वाह आधी हो गई। कोरोना के कारण आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने वैक्सीन लगाने का कार्य शुरू भी कर दिया है। आने वाले आम बजट पर आम आदमी की बहुत सारी उम्मीदें हैं। आम आदमी को दैनिक जीवन में रोटी, कपड़ा और मकान जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। आम बजट में केंद्र सरकार आम आदमी को ध्यान में रखते हुए महंगाई से राहत दे और रसोई का सामान सस्ता करे, जिससे आम आदमी ठीक से अपना जीवनयापन करे।

सतपाल सिंह, करनाल


आयकर छूट बढ़े

केंद्रीय बजट से आम करदाताओं की काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। मध्यम वर्ग का करदाता चाहता है कि उसे स्टैंडर्ड डिडक्शन में कर से छूट और बीमा में निवेश निरूपण भी बढ़े। बीमा में निवेश निरूपण पर कर से छूट बढ़ेगी तो लोग एलआईसी पॉलिसी लेने के लिए ज्यादा इच्छुक होंगे। लंबे समय से बीमा में निवेश की सीमा नहीं बढ़ाए जाने से निवेशकों को आयकर छूट नहीं मिल पा रही है। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग नंबर एक में कमाते हैं और नंबर एक में आयकर देते हैं। अतः नियोक्ता से सुनिश्चित आय पर सुनिश्चित करदाता के लिए आयकर की छूट बढ़ानी चाहिए।

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद


राहत की उम्मीद नहीं

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना, लोगों को रोजगार देना तथा उनकी आमदनी बढ़ाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। लेकिन कोरोनाजनित मंदी को दूर करने के लिए सरकार ने जो-जो उपाय किये हैं उसका श्रेय बजट के प्रस्तुतीकरण में लेने का प्रयास जरूर करेगी। अगर सरकार ने लोगों को राहत देनी होती तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव का लाभ आम लोगों को भी देती। आज महंगाई अपनी चरम सीमा पर है। रसोई का बजट, बच्चों की स्कूल फीसें, रोजगार की स्थिति, क्रय शक्ति आदि की स्थिति में किसी प्रकार की सुधार की आशा नहीं है। वैसे बजट में आम आदमी को कोई राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आती।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


समृद्धि की राह

आगामी बजट से बेरोजगार युवक बड़ी उम्मीदें रखते हैं। रोटी, कपड़ा, मकान, चिकित्सा, रोजगार प्रदायी व जनसंख्या नियंत्रण उन्मुख बजट की देश को बड़ी दरकार है। नशे के सामान महंगा करने के साथ पारम्परिक खेलों, नैतिक मूल्यों व श्रम को विशेष प्रोत्साहन मिले। उच्च मूल्यदायी, एक्सपोर्ट योग्य कृषि उत्पादन, उत्तम बीज, उत्कृष्ट तकनीक, नहरों, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट व रक्षा उत्पादों के लिए बजट में प्रावधान हो। मुफ्तखोरी, असीमित सब्सिडी, पैकेज आदि को हतोत्साहित कर रोजगारोत्पादक निम्नतम ब्याज दर पर कर्ज के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाये। सटीक खुफिया तंत्र, शीघ्र न्याय व कठोर दण्डव्यवस्था हेतु प्रावधान से व्यावसायिक स्वीकार्यता बढ़े।

आचार्य रामतीर्थ, रेवाड़ी


महंगाई कम हो

आम बजट से आम लोगों को बहुत-सी उम्मीदें रहती हैं। आज जबकि महंगाई चरम पर है, गरीब मजदूरों की कमाई खाने पकाने में ही खर्च हो जाती है तब बजट से यही उम्मीद लगाई जा सकती है कि महंगाई कम हो। काम के अवसर बढ़ाए जाएं और नये रोजगार हेतु रणनीति बनाई जाये। बजट संतुलित हो ताकि किसी भी वर्ग पर खास बोझ न पड़े। किसानों और करदाताओं को राहत हो। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट को बढ़ाया जाना चाहिए। कर्मचारियों को टैक्स में राहत मिले।

जफर अहमद, मधेपुरा, बिहार

जख्मों पर मरहम लगे

कोरोना संकट के चलते सरकार इस समय बहुत बड़े आर्थिक संकट में से गुजर रही है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाकर रोजगार देना तथा उनकी आमदनी बढ़ाना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। उम्मीद है सरकार जख्मों पर मरहम लगाने के लिए करों में कटौती करेगी, आयकर की सीमा बढ़ा देगी, विभिन्न योजनाओं के लिए सार्वजनिक व्यय में वृद्धि करेगी, आयात नियंत्रण तथा निर्यात वृद्धि की तरफ ध्यान देगी, आत्मनिर्भर भारत के नारे पर अमल करेगी। वहीं अगर सरकार ने लोगों को राहत देनी होती तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल में इतनी वृद्धि न करती। बजट से राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।

शामलाल कौशल, रोहतक


पुरस्कृत पत्र

दाल-रोटी का सवाल

बजट का सभी को इंतजार होता है। मन में कई सवाल होते हैं। क्या टैक्स में राहत मिल सकती है? क्या इस बजट में देश के विकास के लिए कुछ ऐसी योजनाएं आयेंगी, जिनसे नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे, आर्थिक सुस्ती दूर होगी या फिर इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर देने के लिए ऐलान होंगे। लेकिन गरीब जनता बजट, तेजी-मंदी, आर्थिक सुस्ती कुछ नहीं समझती। उसे तो दाल, रोटी और दवाई सस्ती मिल जाए बस। यह कोरोना काल का बजट है, सरकार के सामने भी कई चुनौतियां हैं। लेकिन बजट में आर्थिक मजबूती के उपाय के साथ ही लोगों की सुविधाओं पर खर्च होना चाहिए। गरीब जनता पर टैक्स का बोझ कम होना चाहिए। वहीं मध्यम वर्ग भी बजट में आयकर में राहत की म्मीद रखता है।

प्रदीप कुमार दुबे, देवास, म.प्र.