Dainik Tribune : आपकी राय

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Dec 31, 2022

इलाज में न हो कमी

काेरोना की बीमारी की आहट ने फिर से सभी के कान खड़े कर दिए हैं। इस बार संतोष की बात यह है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार इस बार पूरी तैयारी से हैं। देश में जिला अस्पतालों एवं सरकारी अस्पतालों में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया ताकि कोरोना की विभीषिका से देश को बचाने के लिए की जा रही तैयारी का जायजा लिया जा सके। केंद्र सरकार और राज्य सरकार को इस बार पहले ही बड़ा बजट इस बीमारी के लिए निर्धारित कर देना चाहिए ताकि पैसे के अभाव में और इलाज के अभाव में किसी की अकाल मृत्यु न हो।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

जागरूकता जरूरी

भारत की बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय है। वैसे कई राज्य जनसंख्या नियंत्रण के लिए बिल लेकर आ रहे हैं। सर्वप्रथम तो राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए लोगों को जागरूक करना होगा। लोगों को वे साधन उपलब्ध कराने होंगे जिसके इस्तेमाल से प्रजनन दर में कमी लाई जा सके। वहीं बिल बनाते वक्त ध्यान रखा जाये कि जनसंख्या नियंत्रण में चीन जैसी गलतियां न हों।

श्वेता चौहान, जालंधर

बढ़ते मामले

बिहार राज्य में शराब के बेचने, खरीदने और पीने पर पाबंदी है। लेकिन बावजूद इसके राज्य में शराब बेची, खरीदी और पी भी जा रही है। कई दिनों से बिहार के छपरा में जहरीली शराब पीने से कोहराम मचा हुआ है। गौरतलब है कि बिहार में जिस तरह जहरीली शराब से मरने वालों के आंकड़े बढ़ रहे हैं। इस पर सरकार को जल्द ही सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

भाषा की मर्यादा

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करना निंदनीय है। कांग्रेसी नेताओं द्वारा स्वामीभक्ति दर्शाने हेतु भाषा की मर्यादा लांघने का यह पहला मामला नहीं है। ऐसे ही एक अन्य मौके पर एक और कांग्रेसी नेता ने नेहरू परिवार ही असली कांग्रेस है, कहकर अपने लिए फजीहत मोल ले ली थी।

ईश्वर चन्द गर्ग, कैथल

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Dec 30, 2022

मुफ्त अनाज कब तक

‘भूख का समाधान’ संपादकीय में उल्लेख है कि सरकार ने राशन प्रणाली में सबको मुफ्त अनाज देने की योजना को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है, किंतु खाद्यान्न सस्ता और मुफ्त उपलब्ध कराने के बावजूद देश में भूखे पेट सोने वाले और कुपोषित लोगों की बढ़ रही संख्या चिंतनीय है। यदि लोगों के पास पर्याप्त काम होता तो आधी से अधिक आबादी को मुफ्त में खाद्यान्न भी उपलब्ध नहीं कराना होता। देश की जनता भूखे पेट न सोए, किंतु मुफ्त का भोजन आखिर कब तक देंगे? इस मुद्दे पर सियासत नहीं बल्कि हर हाथ को काम देने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में कार्य को गति दी जाये।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

कसौटी पर खरा

पच्चीस दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंत में सरस्वती रमेश की ‘मौन’ कहानी गद्य विधा की श्रेष्ठ अभिव्यक्ति रही। कथा नायिका नम्रता के सरल, मृदुभाषी स्वभाव से नए घर में सामंजस्य कर्तव्यनिष्ठा आदर्श नारी की प्रस्तुति है। सासू मां का रूखा बर्ताव नयी जिंदगी जीने की बाध्यता कहानी में सहानुभूति रोचकता का मिश्रण है। वर्तमान से अतीत का क्षणिक मिलन कथानक को प्रासंगिक बनाकर शीर्षक 'मौन' की कसौटी पर खरा उतरता है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

सतर्कता जरूरी

‘चीन ने चौंकाया’ संपादकीय दैनिक ट्रिब्यून 29 दिसंबर पठनीय लगा। चीन में कोरोना से तेजी से हालात बिगड़े हैं। सरकार सख्त प्रबंधन के खिलाफ हो रहे विरोध से परेशान होकर सब कुछ खोलने पर आमादा हो गई है जो निश्चित रूप से कोरोना के दुनिया में प्रसार का बड़ा कारक बनेगा। वहां लोग सामान्य जीवन के लिये तरस रहे थे। विश्व के देशों को चाहिए कि वे इस ढील के दुष्परिणाम समझते हुए अपने यहां सख्ती बरतें ताकि 2020 के हालात की पुनरावृत्ति न हो। भारत को इससे विशेष रूप से सतर्क रहना होगा।

अमृतलाल मारू, महालक्ष्मी नगर, इंदौर

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Dec 29, 2022

सावधानी बरतें

चीन में इन दिनों कोरोना संक्रमित लोग सामने आ रहे हैं। स्थिति भयावह बनी हुई है। इस बीच राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूर्व की भांति सारी गतिविधियां शुरू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में हमारा देश इस समय नई स्थितियों और नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में हमें नए कदम उठाने की जरूरत है। नि:संदेह लंबे समय के लिए लॉकडाउन समस्या का समाधान नहीं है। भारत के लोगों को भी पहले की भांति मास्क व कोविड गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए। ताकि इस महामारी से आसानी से निपटा जा सके।

सदन जी, पटना

विपक्षी नेतृत्व

हिमाचल प्रदेश में भाजपा की हार के बाद जयराम ठाकुर को विधायक दल का नेता चुन लिया गया। वैसे जयराम ठाकुर को संगठन और सरकार चलाने का अनुभव है। देखना यह है कि वह सदन में विपक्ष की भूमिका कैसे निभाते हैं और लोकहित के मुद्दों को कितनी मजबूती से उठाते हैं। उन्हें पार्टी को और अधिक मज़बूत बनाना होगा ताकि आने वाले 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित कर पार्टी के उम्मीदवारों को जीत दिला सके।

नरेंद्र कुमार शर्मा, जोगिंद्र नगर

गंगा को बचाएं

सरकार बेशक गंगा को साफ-सुथरा करने के उद्देश्य से ‘नमामि गंगे’ योजना अमल में लाई है, लेकिन गंगा तभी पूरी तरह साफ होगी जब हम इसे साफ-सुथरा रखने का मन बनाएंगे। गंगा एक नदी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की अनोखी पहचान भी है। गंगा नदी का न सिर्फ़ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि देश की चालीस प्रतिशत जनसंख्या गंगा नदी पर निर्भर है। दुनिया के कई देशों में ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जब सरकार और समाज ने मिल कर नदियों को पुनर्जीवन दिया, जबकि वहां नदियों का कोई धार्मिक महत्व भी नहीं है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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Dec 28, 2022

उदारता का परिचय

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर सोमवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। गांधी परिवार का कोई नेता पहली बार वाजपेयी की समाधि पर पहुंचा है। राहुल गांधी ने उदारता का परिचय दिया। भाजपा को भी संकीर्णता से ऊपर उठकर तारीफ करनी चाहिए थी। दूसरी तरफ कांग्रेस को अपने नेता गौरव पांधी द्वारा वाजपेयी के लिए प्रयोग किये गए अनुचित शब्दों के लिए प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। लेकिन देश के नेता संकीर्णवाद से ऊपर उठ ही नहीं पाते। 

चंद्र प्रकाश शर्मा, दिल्ली 


मूल्यों का समाधान

छब्बीस दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में ‘समता में ही निहित मानवीय मूल्यों का समाधान’ लेख हाल ही में आर्थिक विकास के नाम पर गिने-चुने लोगों द्वारा देश की संपत्ति पर कब्जा करने तथा आम लोगों की मूलभूत जरूरतें पूरी न होने के कारण मूल्यविहीन तरीके इस्तेमाल करने का वर्णन करने वाला था। गिरते मानवीय मूल्यों के कारण ‘भारत के विश्व गुरु, वसुधैव कुटुंबकम’ की बात एक मजाक बनकर रह गई है। विकास का मतलब तो लोगों की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी होनी चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


सावधानी जरूरी

देश में कोरोना वायरस की रफ्तार धीमी है। लेकिन चीन में कोरोना फिर से कोहराम मचा रहा हैं। हेल्थ विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि आने वाले समय में पूरी दुनिया की 10 प्रतिशत आबादी कोरोना वायरस से संक्रमित होगी। इसलिए समय रहते सावधानी बरतनी आैर कोरोना से बचाव के उपाय करना बहुत जरूरी है। सरकार के साथ-साथ आम जन को भी मास्क, सामाजिक-दूरी का पालन के अलावा, समुचित हाथ धोना, भीड़-भाड़ से बचना, यह वह कारगर उपाय हैं, जिनको फिर से अपनाना होगा। अगर इस बार भी लापरवाही बरती तो यकीनन देश में भयंकर तबाही आ सकती है।

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

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Dec 27, 2022

तालीम विरोधी

चौबीस दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘तालीम विरोधी तालिबान’ अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन द्वारा इस्लाम विरोधी हवाला देकर महिलाओं के पार्क, जिम जाने तथा लड़कियों के हायर सेकेंडरी में शिक्षा प्राप्त करने और अब यूनिवर्सिटी में शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने की रूढ़िवादी व अन्यायपूर्ण सोच का पर्दाफाश करने वाला था। किसी देश की आधी दुनिया को इस प्रकार से वंचित करना देश के विकास तथा कल्याण में उनके योगदान को शून्य बनाना है। किसी भी इस्लामिक विद्वान ने महिलाओं के शिक्षा प्राप्त करने पर प्रतिबंध को जायज नहीं ठहराया।

शामलाल कौशल, रोहतक

सतर्कता जरूरी

चीन में कोरोना का नया वैरियंट कोहराम मचा रहा है। वहीं भारत के प्रधानमंत्री मोदी व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आगाह किया है कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतें। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा है कि कोरोना का नया स्वरूप इतना कुप्रभाव नहीं डालेगा। फिर भी सरकार चीन संबंधी हर आवाजाही पर नजर रखे, साथ ही प्रत्येक भारतीय को सतर्क रहने की जरूरत है। सतर्कता व सुरक्षात्मक उपाय ही बचाव के श्रेष्ठ व कारगर तरीके हैं।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

जनादेश के मायने Other

Dec 26, 2022

विकास कार्यों पर मोहर

गुजरात चुनाव में मतदाताओं ने मुफ्त की रेवड़ियों के झांसे में न आते हुए विकास कार्यों पर मोहर लगाई। वहीं पार्टियां दलित व मुस्लिम वोटरों को भी अपने पक्ष में न कर सकीं। इसके विपरीत कांग्रेस का पीएम पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना उनके लिए घातक सिद्ध हुआ। एमसीडी चुनाव में भाजपा व आप पार्टी के बीच चूहा-बिल्ली के खेल में मतदाताओं ने चैलेंज दे डाला है कि ‘वे काम करके दिखाएं, सच-झूठ का फैसला हो जाए।’ हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की लंबित मांग को अनदेखा कर हाथ से सत्ता गंवा दी।

गजानन पाण्डेय, काचीगुडा, हैदराबाद

काम के दाम

हाल ही में विधानसभाओं तथा दिल्ली एमसीडी चुनावों में जो जनादेश आया है, उसका अर्थ है कि जो दल जनता की मांगों को दरकिनार करके, केवल अपने हितों के लिए काम करेगा, जनता उन्हें सत्ता की कुर्सी से बाहर का रास्ता दिखा देगी। राजनीतिक दलों के नेताओं को जनता की प्रमुख समस्याओं बेरोजगारी, महंगाई, अशिक्षा पर पर्याप्त ध्यान देना ही होगा। हिमाचल में ओल्ड पेंशन स्कीम, दिल्ली में स्वच्छता, बिजली पानी और गुजरात में विकास प्रमुख मुद्दे रहे। जनता आज काम करने वाले नेताओं को ही चुनती है।

सुनील कुमार महला, पटियाला, पंजाब

संपर्क से फायदा

गुजरात में विकासपरक नीतियों के कारण वहां जनादेश भाजपा के पक्ष में गया। हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी मतदाताओं से संपर्क एवं विकास के विश्वास पर खरी नहीं उतरी, वहीं कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना को अनदेखा करती रही। जबकि कांग्रेस पार्टी मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने में कामयाब रही। दिल्ली नगर निगम के चुनावों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी मतदाताओं से लगातार संपर्क में रहने के साथ-साथ विश्वास बढ़ाने में कामयाब रही। इसलिए चुनावों के परिणाम उनके हक में गये।

जयभगवान भारद्वाज, नाहड़

जागी जनता

गुजरात, हिमाचल और दिल्ली नगर निगम के चुनाव एवं नतीजे अहम रहे। निश्चित रूप से भाजपा ने गुजरात में बहुत ही अच्छा किया है जिसे स्वीकारना होगा। लेकिन हिमाचल की हार और दिल्ली में पिछड़ने के मंथन से जो कहानी निकलेगी, उससे सीख भी लेनी पड़ेगी। गुजरात में कांग्रेस नेताओं के बिगड़े बोल की सजा उन्हें मिली। जनता किसी भी हालत में अपने क्षेत्र का विकास चाहती है। अब वह जागरूक हो चुकी है। उसे कोई भी नेता पहले की तरह डुगडुगी बजाकर न दिग्भ्रमित कर सकता है और न ही ठग सकता है।

हरि गोविंद प्रसाद, बेगूसराय

जन का आदेश

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा और दिल्ली में आप पार्टी को जनता ने नगर निगम के स्थानीय शासन की बागडोर सौंपी। तीनों स्थानों के चुनाव परिणाम एक दल के पक्ष में नहीं गए। इस जनमत के अलग-अलग मायने हैं। हिमाचल में मतदाता भाजपा के शासन को अपने हित में नहीं समझते थे। गुजरात में मोदी का जादू चल गया। जबकि दिल्ली के नगर निगम के चुनावों में मतदाताओं का यह विचार था कि भाजपा उनकी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी, आप की नीतियों और कार्यक्रम से संतुष्ट थे। इन बातों के कारण अलग-अलग प्रदेशों के मतदाताओं ने अपने ही ढंग से निर्णय दिया।

शामलाल कौशल, रोहतक

परिपक्व मतदाता

हाल ही में हुए गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश विधानसभाओं एवं दिल्ली एमसीडी के चुनाव से यह तथ्य जाहिर होता है कि देश की जनता अब इतनी परिपक्व हो चुकी है कि वह काम करने वाली सरकारों को विकास के आधार पर वोट करती है। हिमाचल प्रदेश की जनता ने बदलाव को पसंद किया है। भाजपा के विकास मॉडल को गुजरात की जनता ने पूर्ण समर्थन दिया है। हिमाचल की जनता ने हर पांच साल में सरकार बदलने के अपने पुराने ट्रेंड को कायम रखा है। दिल्ली में आप ने बेहतर कार्य करते हुए अपनी साख को बढ़ाया है।

ललित महालकरी, सुदामा नगर, इंदौर

पुरस्कृत पत्र

जनादेश के निहितार्थ

हालिया चुनावों में जनादेश अलग-अलग आया क्योंकि चुनाव राष्ट्रीय स्तर के नहीं थे। दोनों विधानसभाओं में मुद्दे अलग थे और एमसीडी में अलग। दूसरी बात कांग्रेस और आप का वोट बैंक एक ही है। जहां आप उभरती है, वहां कांग्रेस को नुकसान होता है। तीनों जगह भाजपा सत्ता में थी और सत्ता विरोधी लहर भी थी। लेकिन गुजरात में भाजपा की राह आप के उभार ने आसान कर दी। हिमाचल में कांग्रेस, आप के ज्यादा वोट नहीं काटने और भाजपा की कलह से जीती। दिल्ली में कांग्रेस के सफाये से आप को फायदा हुआ और भाजपा तीन प्रतिशत वोट बढ़ने के बाद भी हार गई।

बृजेश माथुर, बृज विहार, गाजियाबाद

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Dec 24, 2022

किसान की सुध

देश की जीडीपी में कृषि का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। देश एक कृषि प्रधान देश है। लेकिन किसानों को कभी प्राकृतिक प्रकोप का तो कभी सरकार की गलत नीतियों का सामना करना पड़ता है। तभी किसानों का मन कृषि से ऊब रहा है। आज भी देश में बहुत से ऐसे किसान हैं जो गरीबी का जीवन यापन कर रहे हैं। सभी सत्ताधारियों और राजनेताओंं को भी चाहिए कि वे किसानों की समस्याओं पर संकीर्ण राजनीति करना बंद करके उनकी समस्याओं की तरफ गंभीरता से ध्यान दें।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

तैयारी जरूरी

चीन में कोरोना संक्रमण के मामलों में आयी तेजी को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश में महामारी से निपटने की स्थिति में तैयारियों की समीक्षा की है। इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्रशाासित प्रदेशों को निर्देश दिये गये हैं। रिपोर्टों में बताया गया है कि सरकार नें संक्रमण के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन पहले ही कर लिया है। हवाई अड्डों पर बाहर से आने वाले यात्रियों का परीक्षण शुरू किया गया है।

चौ. भूपेंद्र सिंह, दिल्ली

अपना-अपना दुख

अट्ठारह दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में जयति जैन ‘नूतन’ की ‘पंद्रह दिनों में’ कहानी मनभावन रही। पुरुष प्रधान समाज में मुखिया अपना वर्चस्व बनाए रखना अधिकार समझता है। पति-पत्नी को एक-दूसरे का दुख-सुख का साथी मानते हुए घर की सुख शांति को दृढ़ता प्रदान करती है। बाबूजी का सरल स्वभाव कथानक को अत्यंत प्रभावशाली बना गया।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

सतर्कता जरूरी

चीन में जिस तरह से कोरोना फैल रहा है उसने फिर से पूरे विश्व को डरा दिया है। भारत सरकार ने जिस तरह से वैक्सीनेशन प्रोग्राम को सफलतापूर्वक संचालित किया उससे फिलहाल देश में डर की स्थिति नहीं है लेकिन सतर्कता रखनी होगी। राहुल गांधी की भारत यात्रा, जिसमें इतनी भीड़ होती है, को रोकना होगा।

भगवानदास छारिया, इंदौर

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Dec 23, 2022

अभिव्यक्ति की आजादी

इक्कीस दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करें सरकारें’ सारगर्भित था। महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि संदर्भित पुस्तक माओवाद तथा नक्सलवाद को बढ़ावा देती है। तथ्य है कि जब यह पुस्तक प्रकाशित हुई थी तब माओवादियों ने कोबाड गांधी का बहिष्कार कर दिया था। लेखक का कहना है कि उनकी यह पुस्तक 10 साल के जेल के अनुभव पर आधारित है। उनका उद्देश्य दलितों, पिछड़ों के संघर्ष के प्रति सहानुभूति करना है! जब उन्हें महसूस हुआ कि माओवादी, नक्सलवादी लोग हिंसा का सहारा लेने लगे हैं तब उन्होंने उनसे किनारा कर दिया।

शामलाल कौशल, रोहतक

यात्रा के निहितार्थ

भारत जोड़ो यात्रा में लोगों की काफी भीड़ दिखाई दे रही है। लोगों की यह भीड़ यदि राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी की लोकप्रियता का संकेत है तो फिर यह भीड़ वोटों में तब्दील क्यों नहीं होती। हाल ही में गुजरात विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह से हार गयी। क्या लोगों की यह भीड़ केवल राहुल गांधी को देखने के लिए ही आती है? आने वाले समय में दूसरे राज्यों में भी चुनाव होने हैं और इन चुनावों में यह पता चल जाएगा कि इस यात्रा का लोगों पर कितना असर पड़ा है।

नरेन्द्र कुमार शर्मा, जोगिंद्र नगर

आयुर्वेद का वर्चस्व

बीस दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में ‘विदेशी मुद्रा अर्जन का जरिया बनते आयुर्वेद उत्पाद’ लेख पढ़ा। हमें अपनी चिकित्सा पद्धतियों को प्रमुखता देनी होगी। चिकित्सा की दुनिया में भारतीय ज्ञान परंपरा का लोहा पूरी दुनिया मानती आई है। कोरोना संक्रमण के इलाज में भी प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद काफी सफल रही। इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोरोनाकाल में आयुर्वेदिक सेक्टर की अहमियत बढ़ने के साथ-साथ आयुर्वेदिक बाजार तेजी से बढ़ा है। आयुर्वेद के उत्थान के लिए इसके अस्पतालों की संख्या में वृद्धि व साथ ही डॉक्टरों की भर्ती करनी होगी।

साजिद अली, चंदन नगर, इंदौर

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Dec 22, 2022

अशोभनीय व्यवहार

राजनीति बेलगाम है। यहां बड़े से बड़ा नेता भी संवैधानिक पदों पर बैठे विशिष्ट लोगों पर अनर्गल टिप्पणियां कर बैठता है। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक असंयत टिप्पणियों के शिकार होते हैं। एक कांग्रेसी नेता ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जिस तरह की टिप्पणी की है, वह अशोभनीय है। राजनीति में शुचिता का पाठ पढ़ाया जाना जरूरी है। व्यक्ति विशेष के साथ ही पदों की मर्यादा बनी रहे, सरकार ने इस दिशा में जो कानून बना रखे हैं, उनका सख्त पालन किया जाना चाहिए। जिससे भाषा की शुद्धता के साथ ही नैतिकता की सीमा में व्यवहार बना रहे।

अमृतलाल मारू, महालक्ष्मी नगर, इंदौर

शराब नीति बने

बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब पीने से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु इस बात का संकेत है कि बिहार में शराबबंदी कामयाब नहीं हो पाई है। इस संदर्भ में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सर्वदलीय बैठक बुलाकर शराबबंदी की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। यदि केंद्र सरकार पहल करके शराब बिक्री की एक राष्ट्रव्यापी नीति घोषित करे और पूरे देश में एक ही एमआरपी पर शराब उपलब्ध कराए तो देश में अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाई जा सकेगी।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

जिम्मेदार व्यवहार

इक्कीस दिसंबर का संपादकीय ‘एक बार फिर दस्तक’ चीन में बढ़ते कोरोना संकट पर प्रकाश डालने वाला व लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत करने वाला था। हालांकि, चीन में सूचना माध्यमों पर सख्त पहरा होने के कारण ठीक-ठीक आंकड़े सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ संकट को बड़ा बता रहे हैं। नि:संदेह एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति को कोरोना से बचाव के उपायों पर अमल करने की जरूरत है। इस जानलेवा बीमारी से सजग व सतर्क रहकर ही बचा जा सकता है।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

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Dec 21, 2022

अध्यात्म विषयक ज्ञान

उन्नीस दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में आस्था के अंतर्गत ‘ब्रह्म तथा ब्रह्माण्ड के यक्ष प्रश्न’ लेख में डॉ. नरेश ने एक जटिल और गूढ़ विषय पर प्रकाश डाला है। ब्रह्माण्ड का अर्थ (ज्ञात-अज्ञात विश्व), ब्रह्माण्ड का विस्तार (भूलोक, मृतलोक तथा सिद्ध लोक) और ब्रह्माण्ड के पांच कोष (जड़, प्राण, मन, विज्ञान और आनंद) का विषद विवेचन लिए लेख अध्यात्मवेत्ताओं तथा अध्यात्म के छात्रों के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है। अध्यात्म में साधारण रुचि रखने वाले आम आदमी को भी लेखक ने ध्यान के माध्यम से अज्ञात को ज्ञात में परिवर्तित करने का सूत्र उपलब्ध कराया है। 

ईश्वर चन्द गर्ग, कैथल

विवेक से काम लें

सोलह दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘विवादों की परंपरा से मुक्त हो राज्यपाल’ विषय पर चर्चा करने वाला था! मत तो यह प्रकट किया जाता है कि केंद्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति राज्य की सरकार की स्वीकार्यता लेकर करनी चाहिए। राज्यपाल केंद्र और राज्य के बीच पुल का काम करता है। अक्सर केंद्र सरकार अपने ही राज्यपाल नियुक्त करती है। हाल ही में पश्चिमी बंगाल, केरल तथा दिल्ली के उपराज्यपाल जिस तरह प्रदेशों की सरकारों को परेशान करते रहे हैं, वह नैतिक नहीं कहा जा सकता। 

शामलाल कौशल, रोहतक

क्षमता और दक्षता

संपादकीय ‘आधी दुनिया का हक’ में उल्लेख है कि महिलाओं को संख्या के अनुपात से सियासत में अभी तक प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में पितृसत्तात्मक प्रथा का जारी रहना हाल में हुए चुनाव ने सिद्ध कर दिया है, जबकि विदेशों में भारतीय महिलाएं सियासत में अग्रणी हैं। अच्छा हो कि महिलाएं आरक्षण की मोहताज न रहें और अपनी क्षमता और दक्षता के बल पर सियासत में संख्या बढ़ाकर परचम लहराएं, क्योंकि पुराने अनुभव से स्पष्ट होता है कि महिला आरक्षण संसद से पास होना आसान नहीं है।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

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Dec 20, 2022

रोमांचक खेल

फीफा विश्वकप फाइनल में अर्जेंटीना-फ्रांस के बीच हुआ मुकाबला अंतिम समय तक रोमांच की सारी हदें पार करने वाला था। इस मुकाबले में किसी एक खिलाड़ी की तारीफ करना न्यायसंगत नहीं होगा। चाहे मेसी हो या मारिया या फ्रांस का एमबापे- सबने प्रदर्शन से फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में जगह बनाई है। एमबापे ने अंतिम समय में जो प्रदर्शन किया उसी के कारण यह मैच रोमांचक हो गया। यह जीत फुटबॉल की है, जिसमें स्टार खिलाड़ी अपने दमखम, जज्बे व जादुई प्रदर्शन से रोमांच भर देते हैं।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन 

बेनकाब झूठ

उन्नीस दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून के संपादकीय ‘बेनकाब हुआ झूठ’ डब्ल्यूएचओ द्वारा अफ्रीकी देश गांबिया में कुछ बच्चों के मरने की झूठी खबर का पर्दाफाश करने वाला था। यह डब्ल्यूएचओ का भारत के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया है। पश्चिमी मीडिया का डब्ल्यूएचओ के जरिये भारतीय दवा कंपनियों की साख को बट्टा लगाने का प्रयास है। वहीं विश्व में कोरोना महामारी फैलाने के लिए चीन के नाम को छुपाया और उस पर इस संदर्भ में लगे आरोपों का बचाव किया। 

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

साइबर सुरक्षा की चुनौती Other

Dec 19, 2022

तंत्र की नाकामी

आज तकनीकी युग में साइबर सुरक्षा एक अहम मुद्दा बन चुका है। साइबर अपराधी बेखौफ होकर लोगों से ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं। पीड़ित को कानूनी मदद न के बराबर है। किसी संस्था की ऑनलाइन प्रणाली को असामाजिक तत्वों द्वारा हैक कर लेना सरकारी खामी मानी जाएगी। सर्वर हैक करना देश के तकनीकी मंत्रालय की नाकामी है। यह अपराध केवल साइबर चुनौती नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी चुनौती है। सीमाओं से बाहर बैठी भारत विरोधी ताकतें हमारी इस कमजोरी का फायदा कभी भी उठा सकती हैं। साइबर अपराधियों को कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

वैश्विक पहल हो

इंटरनेट के आविष्कार ने जहां जीने का तरीका बदल दिया, वहीं मुश्किलों का अम्बार भी खड़ा कर दिया। इंटरनेट की रफ्तार से आगे चलने वाले साइबर अपराधियों ने दुनिया के सामने कठिन चुनौती खड़ी कर दी है। संभवतः भारत में साइबर धोखाधड़ी के शिकार हर समुदाय, हर तबके के लोग शामिल हैं। इनके हमले के दायरे में आर्थिक क्षेत्र सबसे आगे है। विशेषकर बैंक से लेनदेन में पढ़े-लिखे लोग भी इन अपराधियों के चंगुल में फंस जाते हैं। इस अपराध को बढ़ावा देने में इंटरनेट पर व्यक्तिगत विवरणों का सुलभ होना मुख्य कारण है। लिहाज़ा साइबर सुरक्षा के लिए न केवल विश्व को साथ आना होगा बल्कि व्यापक तकनीकी सुधार की आवश्यकता है।

एमके मिश्रा, रांची, झारखंड

बड़ी चुनौती

देश में डिजिटल ऑनलाइन प्रणाली के चलते साइबर अटैक ने दिल्ली स्थित एम्स के सर्वर को छह दिन तक बंद रखने की साजिश को अंजाम दिया। वास्तव में साइबर सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। इंटरनेट सेवा का प्रयोग सावधानी से करते हुए अपने मोबाइल, कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर को अपडेट रखते हुए एंटीवायरस का प्रयोग करना चाहिए। बैंक खाते की गोपनीयता के लिए किसी अज्ञात कॉलर अथवा अनजान चेहरे को अपना एटीएम कार्ड, पासवर्ड, ओटीपी नंबर शेयर न करें। सरकार को भी ऐसे साइबर अटैक रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

सख्ती जरूरी

आम आदमी के साथ ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं आम होती जा रही हैं। इतना ही नहीं एम्स जैसे प्रसिद्ध चिकित्सा संस्थान का सर्वर भी हैकरों ने हैक कर दिया। ऐसे में स्पष्ट है कि साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। यह एक अति गंभीर समस्या है। अतः इस समस्या के समाधान के लिए जरूरी है कि सरकार द्वारा फुलप्रूफ सुरक्षा प्रदान की जाए, तभी सरकार द्वारा की जाने वाली साइबर सुरक्षा क्रांति सफल हो पाएगी। इसके अतिरिक्त इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देने वालों के विरुद्ध यथाशीघ्र कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

पाठ्यक्रम में शामिल हो

साइबर सुरक्षा तकनीकी युग की बड़ी चुनौती है। नये-नये अपराध कर अपराधी बच निकलते हैं। साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता की कार्यशालाएं लगातार आयोजित होनी चाहिए। साइबर अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि अपराधियों में डर का वातावरण बना रहे और उन्हें राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण कदापि नहीं मिलना चाहिए। साइबर सुरक्षा के विषय स्कूलों एवं कॉलेजों मे पाठ्यक्रम के रूप में भी शुरू किए जाने चाहिए ताकि गहरे अर्थों में जागरूकता लाई जा सके।

प्रदीप गौतम सुमन, रीवा, म.प्र.

विश्वास बहाल हो

दिल्ली के एम्स अस्पताल में साइबर अपराधियों द्वारा सर्वर हैक किया जाना चिंता का विषय है। निश्चित रूप से अहम जानकारियां भी चुराई गयी होंगी। ऐसे में सवाल उठता है कि डिजिटल क्रांति के बावजूद देश की साइबर सुरक्षा कमजोर क्यों है। यही कारण है कि आम आदमी आज भी लेन-देन के लिए डिजिटल पेमेंट करने से कतराता है। वहीं धोखा मिलने पर उसकी समस्या का समाधान समय पर नहीं होता। सरकार को इसके लिए आम लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना होगा तो वहीं साइबर सुरक्षा को भी चुस्त-दुरुस्त बनाने की जरूरत है। ताकि आम आदमी का विश्वास बहाल हाे सके।

गणेश दत्त शर्मा, होशियारपुर

जागरूक करें

देश में डिजिटलाइजेशन ने क्रांति ला दी है। अब देश में हर कोई मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप और कंप्यूटर द्वारा अधिक से अधिक बैंकों का लेनदेन, यूपीआई मेल, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टा, ट्विटर का उपयोग कर रहा है, जिसमें सभी को अपना सुरक्षित पास वर्ड बनाना होता है। अब तो ओटीपी भी आता है जिससे सुरक्षा रहती है लेकिन कहीं-कहीं अज्ञानता के चलते इस ओटीपी को साझा कर देते हैं। वहीं साइबर क्राइम करने वाला उनका खाता खाली कर देते है। सरकार को इसे रोकने का फूलप्रूफ सिस्टम बनाना चाहिए तथा लोगों को जागरूक करना चाहिए।

भगवानदास छारिया, इंदौर 

आपकी राय Other

Dec 17, 2022

कर्ज से ईमानदारी

वित्तमंत्री ने बताया कि मुद्रा लोन स्कीम के तहत लोन लेकर वापस करने वालों में 98 प्रतिशत लोग गरीब तबके के हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से अपने लोन की किस्त भरी है। जबकि इसके विपरीत नामी गिरामी व्यापारियों, कारोबारियों, उद्योगपतियों ने लोन लेने के बाद नहीं भरा है, इनका प्रतिशत 92 के करीब है। जो छोटे-मोटे व्यापार-व्यवसाय कर गुजर-बसर करते हैं, वे सचमुच ‘भारत’ का सच्चा प्रतिनिधित्व करते हैं। उनमें नैतिकता, ईमानदारी अभी भी जिंदा है, जो देश के बारे में सोचते हैं। नि:संदेह लोन लेने के बाद वापस करने वाले लोग ही सच्चे देशभक्त हैं। 

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन 


व्यवस्था में खोट

देश में अन्न की प्रचुरता के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का भूखे पेट रहना व्यवस्था के प्रयास पर सवाल है। देश में अंतिम आदमी तक भरपेट अनाज नहीं पहुंच पाना कहीं न कहीं व्यवस्था में ही खोट का ही नतीजा है। हालांकि लोगों द्वारा अन्न के दुरुपयोग और खाद्यान्न योजना के अनाज को बेचने के मामले भी उजागर होते रहते हैं। सरकार अपनी कमियां दूर करे लेकिन लोग भी अपने हक का दुरुपयोग न करें।

अमृतलाल मारू, महालक्ष्मी नगर, इंदौर


सफाई कर्मियों को संरक्षण

सोलह दिसंबर का संपादकीय ‘जानलेवा सफाई’ सफाई कर्मियों की सीवर व सैप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान होने वाली मौत व ऐसे हादसों के बाद इन कर्मियों के परिवारों के पुनर्वास की समस्या पर प्रकाश डालने वाला था। निःसंदेह सफाई कर्मचारियों द्वारा किया जाने वाला कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः जरूरी है कि इनके परिवारों को पर्याप्त संरक्षण मिले। 

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल


प्रेरणादायक कहानी

ग्यारह दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में वीणा सेठी की ‘पिघलती मोम’ कहानी गृहस्थ जीवन की कथा व्यथा का विश्लेषण करने वाली रही। मेहनतकश, दृढ़ निश्चयी, दिलेर कथा नायक-नायिका के आदर्श शिक्षाप्रद व प्रेरणादायक रहे। ‘ईमानदारी सबसे अच्छी नीति’ गृहस्थी में सुख शांति, समृद्धि का परिचायक है। 

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

आपकी राय Other

Dec 16, 2022

हिन्दी में न्याय

पन्द्रह दिसंबर को दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित ‘हिन्दी में न्याय’ संपादकीय प्रशंसनीय है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायलय के अधीन सभी न्यायलयों और संबन्धित विभागों में एक अप्रैल, 2023 से हरियाणा सरकार द्वारा राजभाषा हिन्दी में फैसले व काम-काज अनिवार्य किया गया है। सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है। हिन्दी को हर विभाग में अनिवार्य किया जाना चाहिए। यदि हम भारतीय ही हिन्दी को पिछड़ी भाषा मानेंगे तो अन्य देशों में हमारी पहचान कैसे रहेगी? नि:संदेह जब से केंद्र में भाजपा सरकार कार्यकाल में आई है, हिन्दी का काफी उत्थान हुआ है। 

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम 

हासिल करें हक

गत दिनों लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर को मुक्त कराकर पुन: भारत में मिलाने के लिए सक्षम है। आश्चर्य है कि सेना के इस तरह के बयान आते रहते हैं पर उन्हें ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता। बात सिर्फ पाक अधिकृत कश्मीर को हासिल करने तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि पाकिस्तान द्वारा चीन को सौंपे गये लगभग 3165 वर्ग किमी के इलाके और समूचे अक्साई चिन को वापस लेने की योजना पर भी काम करना चाहिए। 

तिलकराज गुप्ता, रादौर

जवाब देना जरूरी

एलएसी पर बार-बार तनाव बढ़ाकर चीन एक सोची-समझी साजिश के तहत काम कर रहा है। वहीं चीन की विस्तारवादी नीति से उससे लगी हुई सीमाओं वाले सभी देश त्रस्त हैं। यहां तो भारतीय सेना हर स्थिति का सामना करने के लिए सजग थी इसलिए उसने सैकड़ों चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया। वहीं चीन की तरफ से एलएसी के निकट सैन्य ढांचा खड़ा किये जाने और सैनिकों की तैनाती में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय है। विश्व मंच पर इसका आधिकारिक विरोध होना चाहिए। छोटे-बड़े किसी भी युद्ध के लिए सेना भले ही पहल न करे मगर हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब दे।

सुभाष बुड़ावन वाला, रतलाम, म.प्र.

आपकी राय Other

Dec 15, 2022

विश्वासघाती चीन

तेरह दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में छपी खबर ‘अरुणाचल में एलएसी पर भिड़े भारत-चीन’ तवांग सेक्टर में सैकड़ों घुसपैठी चीनी सैनिक को भारतीय सैनिकों द्वारा वापस उनकी सीमा में खदेड़ने का वर्णन करने वाली थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के वक्तव्य अनुसार दोनों पक्षों के सैनिकों को इस भिड़ंत में चोटें आई हैं परंतु किसी भी भारतीय सैनिक के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की कोई खबर नहीं। संभव है कि घरेलू फ्रंट पर समस्याओं का सामना करने वाले राष्ट्रपति, शी जिनपिंग ने लोगों का ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठाया हो। एक तरफ चीन भारत के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहा है और दूसरी तरफ विश्वासघात भी कर रहा है। ऐसी में भारत को अति शीघ्र आत्मनिर्भर बन कर चीनी निर्भरता शून्य करनी होगी। 

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

नीतीश की चुनौती

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के बयान से बिहार की राजनीति ने करवट ली है। नीतीश कुमार ने बीजेपी को टारगेट करते हुए लोकसभा चुनाव 2024 विपक्ष बनाम एनडीए होने वाला बताया है। बिहार की राजनीति में यदि तेजस्वी यादव का कद बढ़ता है तो यह स्पष्ट है कि बिहार में भाजपा को चुनौती बड़ी मिलने वाली है। यह भी देखना बेहद महत्वपूर्ण है कि नीतीश इसे राष्ट्रीय मुहिम कब बनायेंगे और भाजपा को उखाड़ फेंकना है तो राष्ट्रव्यापी दौरे पर कब निकलेंगे। 

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

भाजपा चिंतन करे

दिल्ली के एमसीडी चुनाव में आप की सरकार ने केंद्र सरकार, भाजपा और कांग्रेस को हरा कर साबित किया कि ‘आप’ ही जनसमस्या को सुनती और हल भी करती है। हिमाचल प्रदेश में भाजपा के कलह ने कांग्रेस की अनापेक्षित जीत करा दी। गुजरात में भाजपा की कड़ी मेहनत तथा बदले नेतृत्व और उम्मीदवारों पर मतदाता ने विश्वास किया, किंतु कम मतदान के प्रतिशत पर भाजपा को चिंतन करना होगा। 

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन 

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Dec 14, 2022

बिखराव की चिंता

दस दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में शंभूनाथ शुक्ल का लेख ‘विपक्ष के लिए सबक है गुजरात का संदेश’ हाल ही में हिमाचल प्रदेश, गुजरात विधानसभा तथा दिल्ली नगर निगम के चुनावों को लेकर विश्लेषण करने वाला था। अगर विपक्ष इसी तरह विभाजित रहा तो वर्ष 2024 के संसदीय चुनावों में भी उसकी दुर्गति होने की संभावना है। गुजरात में राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा का कोई प्रभाव होता दिखाई नहीं दिया। असल में कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता अपनी पार्टी को अलविदा कह गए। मोदी तथा अमित शाह की तरह कांग्रेस समेत विपक्ष के पास कोई करिश्माई नेता नहीं है। 

शामलाल कौशल, रोहतक

अनमोल हैं किताबें

तेरह दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में ‘मन-मस्तिष्क की सेहत संवारती किताबें’ मोनिका शर्मा के लेख में उचित कहा गया है कि पुस्तकें मनुष्य के ज्ञान और समझ को परिष्कृत करती हैं। लेकिन विभिन्न कारणों से पुस्तकों से विमुख होते समाज को पुस्तकों की ओर उन्मुख कैसे किया जाए, एक जटिल समस्या है। नि:संदेह स्कूल-कालेजों में विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में कम से कम एक दिन एक पीरियड पुस्तकालय में गुज़ारना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसी तरह जन्मदिन, त्योहारों या प्रतियोगिताओं में पारितोषिक स्वरूप किताबें भेंट करने की परंपरा सार्थक पहल होगी। 

ईश्वर चन्द गर्ग, सरगोधा कालोनी, कैथल

चीन की हठधर्मिता 

चीन के सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में भारतीय सीमा में अतिक्रमण करने का प्रयास किया। इस घटना की पहले से ही आशंका लग रही थी। शंघाई सहयोग संगठन की मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जिनपिंग को तवज्जो न देना चीन को नागवार गुजरा। चीन में लॉकडाउन और उसके बाद उपजे विद्रोह के हालात, उनके इस्तीफे की मांग, गिरती आर्थिक स्थिति, कंपनियों का बंद होना और भारत की ओर स्थान्तरित होना, भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत ने जिनपिंग की खीझ को बढ़ा दिया है। 

चंद्र प्रकाश शर्मा, रानी बाग़, दिल्ली 

आपकी राय Other

Dec 13, 2022

महानायकों की प्रतिष्ठा

बारह दिसंबर को दैनिक ट्रिब्यून के संपादकीय पृष्ठ पर लेख ‘भूले-बिसरे महानायकों की प्रतिष्ठा’ सटीक और समय की मांग को दर्शाती अभिव्यक्ति रही। इतिहास सदैव प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा स्वयं के पक्ष में लिखा जाता रहा है। गरीब, शोषित और आदिवासी देशभक्तों द्वारा राष्ट्र के लिए दिए गए बलिदानों को हाशिये पर रखा गया। कुछेक बलिदानियों को तो इतिहास के पन्नों में बिलकुल भी जगह नहीं मिल पाई। यह उन वीर सपूतों का दुर्भाग्य नहीं बल्कि हमारे देश का दुर्भाग्य है। यदि अब भी उन भूले-बिसरे महानायकों को भारतीय इतिहास के पन्नों पर जगह मिल जाए तो देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति का नया अध्याय खुलेगा। 

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम 

साइबर अपराधी

पिछले दिनों एम्स के सिस्टम को हैक करके न सिर्फ आमजन अपितु सरकार को भी साइबर अपराधियों ने हकलान कर दिया। साइबर अपराधी पूरे विश्व में परेशानी का सबब बने हुए हैं। आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जो इंटरनेट से अछूता हो, लेकिन साथ ही यह भी सत्य है कि कोई भी सिस्टम फुलप्रूफ सुरक्षित नहीं है। साइबर अपराधियों से निपटने के लिए कड़े कानून बनाने होंगे।

मुनीश कुमार, अलखपुरा, भिवानी 

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

जन संसद Other

Dec 12, 2022

मूल्यों में गिरावट

भौतिकतावाद और पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव चिंता का विषय बन गया है। धन-सम्पत्ति और बड़ी-बड़ी गाड़ियों के स्वप्न संजोये युवा अपनी संस्कृति और सभ्यता को भूल रहे हैं। रिश्ते मात्र स्वार्थपूर्ति के हो चुके हैं। यह सब मानवीय मूल्यों के पतन का कारण बन गया है। एकाकी परिवार और उस पर भी इकलौती संतान अधिक लाड-प्यार के कारण कुमार्ग की ओर जा रही है। माता-पिता द्वारा संतान को समय न देना, उन्हें कुमार्ग की ओर प्रशस्त कर रहा है। इंटरनेट, फेसबुक और अन्य संचार के साधनों के माध्यम से परोसी जा रही अमर्यादित अश्लीलता और अपराध इसका एक बड़ा कारण है।

अशोक कुमार वर्मा, कुरुक्षेत्र

शिक्षा के साथ संस्कार

रिश्तों में विश्वास बहुत जरूरी है। रिश्तों को मधुर बनाने में कोशिश दोनों ओर से होनी चाहिए। अतः रिश्तों में नम्रता, गंभीरता व सहनशीलता जरूरी है। रिश्तों को निभाना नहीं, जीना होता है। घरेलू समस्याओं को धैर्य, समझदारी व आत्म-संयम द्वारा ही हल किया जा सकता है। अतः माता-पिता को बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना चाहिए। संतान के जीवन का निर्माण करना, माता-पिता का उत्तरदायित्व है। इन बातों का ध्यान रखकर ही रिश्तों को टूटने से व भावावेश में बनते कत्ल जैसे अपराधों को रोका जा सकता है।

गजानन पाण्डेय, काचीगुडा, हैदराबाद

परंपराओं का सिमटना

संयम, धैर्य और आत्मीय अहसास हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हुआ करते थे वे अब विलुप्त हो रहे हैं। पारिवारिक रिश्तों के दरकने के मूल में हमारी सामाजिक व पारंपरिक परंपराओं का सिमटना भी है। भौतिक संस्कृति के प्रसार से तमाम जीवन मूल्यों का अवमूल्यन होता जा रहा है। पहले घर के बुजुर्ग रिश्तों में खटास और उतार-चढ़ाव आने पर एक सुरक्षा दीवार की तरह खड़े नजर आते थे लेकिन जैसे-जैसे हमारे जीवन में समाज की भूमिका खत्म हुई और संयुक्त परिवार बिखरे, एकाकी परिवार रिश्तों का त्रास झेलने लगे। नैतिक मूल्यों को आत्मसात‍् करके ही ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

पूनम कश्यप, नयी दिल्ली

मूल्यों का ह्रास

हाल ही के दिनों में आत्मीय कहे जाने वाले रिश्तों में बेरहमी से हुई हत्या ने हर संवेदनशील व्यक्ति को व्यथित किया है। इनके पीछे आत्मीय रिश्तों की गरिमा को न समझना और भावना शून्य होना प्रमुख कारण है। संयुक्त परिवारों का टूटना, मूल्यों का ह्रास होना भी ऐसी वीभत्स घटनाओं को जन्म देता है। आध्यात्मिकता से परे जाना, ईश्वर में विश्वास न होना और गलत कार्यों के परिणाम से भयरहित होना मूल्यों के अवमूल्यन के प्रमुख कारण बने हैं। रिश्तों में क़त्ल का सिलसिला थामने के लिए कठोरतम सजा का प्रावधान होना चाहिए। माता-पिता, गुरुओं को चाहिए कि वे युवा पीढ़ी को अच्छे संस्कार दें, रिश्तों की गरिमा और उचित व्यवहार की जानकारी प्रदान करें।

शेर सिंह, हिसार

रिश्तों में शंका

आत्मीय कहे जाने वाले रिश्तों में खटास और फिर हत्या के कई भयानक मामले सामने देखने को मिल रहे हैं। इस प्रकार के प्रकरण आपस में शंका और विश्वास की कमी के कारण होते हैं। अापसी गिले-शिकवे मिल-जुलकर दूर कर लेने चाहिए। रिश्तों में शंका और अहंकार का कोई स्थान नहीं होता है। अतः आत्मीय रिश्तों में कत्ल का सिलसिला रोकने के लिए आपस में एक-दूसरे में विश्वास बढ़ायें और आपस में एक-दूसरे का सम्मान करने से इस प्रकार के मामलों में कमी अवश्य आयेगी। निश्चित रूप से रिश्तों में कत्ल का सिलसिला भी रुक जायेगा।

जयभगवान भारद्वाज, नाहड़

विश्वास जरूरी

रिश्तों का अवमूल्यन रोकने के लिए अहम‍् को त्यागना होगा। अपने अहम‍् की तुष्टि लिए सामने वाले व्यक्ति को झुकाने की कोशिश कतई नहीं करें। रिश्तों को बनाये रखने के लिए अपनी गलती का अहसास करना होगा, माफी मांगने में शर्म नहीं करनी होगी। आज असुरक्षा, संवादहीनता, गलतफहमी और भावनात्मक दूरियाें के कारण रिश्तों में निरंतर खटास बढ़ रही है। रिश्तों को बनाये रखने के लिए समझने का प्रयास करना होगा कि आखिरकार गलती कहां और क्यों हो रही है। रिश्तों में मजबूती लाने के एक-दूसरे के प्रति विश्वास की डोर को थामना होगा। हमें शक, शंकाओं से दूर रहना होगा। स्वस्थ संवाद को बढ़ावा तथा अस्वस्थ परिस्थिति में बचाव करना होगा।

सुनील कुमार महला, पटियाला, पंजाब

पुरस्कृत पत्र

सामाजिक सहमति जरूरी

हमारे पूर्वजों ने स्वस्थ समाज की स्थापना व संचालन के लिए पवित्र रिश्तों की बुनियाद खड़ी की है। जिस पर चलकर हमें अपनेपन का अहसास होता है। लेकिन इन मूल्यों के विरुद्ध जाकर लिव-इन-रिलेशन के मर्यादाविहीन व्यवहार से लेकर ऑनर किलिंग जैसे मारकाट के वीभत्स मामले उजागर हो रहे हैं। जो कि सभ्य समाज की संरचना के लिए कलंक है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए न केवल त्वरित न्याय की जरूरत है बल्कि संबंधों में सामाजिक सहमति को अनिवार्य करने की भी आवश्यकता है।

देवी दयाल दिसोदिया, फरीदाबाद

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Dec 10, 2022

जनसरोकारों की सुध

दिल्ली के एमसीडी चुनाव में आप ने केंद्र सरकार भाजपा और कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया। उसने यह साबित कर दिया कि आप पार्टी ने स्थानीय मुद्दे तथा जनता की समस्याओं को ठीक से सुना और हल करने में सरकार सफल भी हुई। जिसे जनता ने स्वीकारा और आप पार्टी को एमसीडी में बहुमत दिया। भाजपा और कांग्रेस दोनों को इससे सबक सीखना चाहिए कि सरकार चाहे छोटी हो या पार्टी भी छोटी हो किंतु यदि जनता से जीवंत सम्पर्क तथा लगन और मेहनत से कार्य किए तो ही जनविश्वास अर्जित होता है, जो आप ने कर दिखाया वरन 15 से जमी भाजपा को हराना आसान नहीं था।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

भाजपा का विजय रथ

दिल्ली एमसीडी में आप ने सत्ता हासिल कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दिया है। यह बीजेपी और कांग्रेस के लिए मंथन का विषय है कि राजधानी की पढ़ी-लिखी जनता निरंतर आप की ओर अग्रसर क्यों हो रही है। वहीं गुजरात में बीजेपी की सुनामी ने भाजपा को गद‍्गद कर दिया है। गुजरात में लगातार सातवीं बार भाजपा सत्तासीन हुई है। इन परिणामों से 2024 में होने वाले आम चुनाव का नक्शा भी साफ होने लगा है। भाजपा का विजय रथ इस बार भी सिंहासन तक की यात्रा मोदी जी को तय करवा देगा।

सुभाष बुड़ावन वाला, रतलाम, म.प्र.

हृदयस्पर्शी कथानक

चार दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में हरिमोहन की ‘आकाश छूती बेल’ कहानी अतीत की यादों का सारगर्भित विश्लेषण करने वाली रही। प्रकृति के मनोहारी परिवेश का प्रतिबिंबित चित्रण सिमटकर कहानी को परिपक्वता प्रदान कर रहा था। कथा नायक-नायिका अमित-बबली के सहज-सरल कथन में संवाद शैली, विचार अभिव्यक्ति की हृदय ग्राह्यता रोचक बन पड़ी है। अतीत की यादों का मुहाना फुटकर दिल में आनंद अतिरेक का अहसास करवा रहा था।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

आपकी राय Other

Dec 09, 2022

जीत के समीकरण

दिल्ली नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी को जीत और भाजपा की 15 वर्ष के बाद हार हुई। वहीं गुजरात में भाजपा को ऐतिहासिक जीत और प्रचंड बहुमत के साथ सातवीं बार सत्ता मिली। हिमाचल में कांग्रेस को जीत और भाजपा को हार मिली है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट पर डिंपल यादव ने शानदार और ऐतिहासिक जीत हासिल की है, जिसका दूरगामी प्रभाव पूर्वांचल में जरूर पड़ेगा। हिमाचल में बीजेपी की रणनीति कामयाब नहीं हो पाई। सपा, आरएलडी और एसपी की तिकड़ी ने मैनपुरी में शानदार जीत दिलाई है।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

अभिव्यक्ति की आजादी

आठ दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘बीमार सोच से होनी चाहिए लड़ाई’ गोवा में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में नादेन लापिड का ‘कश्मीर फाइल्स’ को प्रोपेगेंडा फिल्म कहकर इसे फिल्म फेस्टिवल में शामिल करने को लेकर एतराज के बारे में चर्चा करने वाला था। अग्निहोत्री ने कश्मीरी पंडितों से संबंधित फिल्म का जो विषय चुना है, उसके बारे में किसी को कोई एतराज नहीं। बेशक लापिड के इस वक्तव्य की उन्होंने आलोचना की है। सभी को अभिव्यक्ति की आजादी है। कश्मीर में लोगों को मारने वाले किसी धर्म विशेष के नहीं, बल्कि आतंकवादी थे! बेशक हमारी हमदर्दी कश्मीरी पंडितों के साथ है लेकिन मारे गए सभी लोग भारतीय थे।

शामलाल कौशल, रोहतक

गहराता संकट

‘यूक्रेन पर परमाणु हमले की तैयारी में रूस’ खबर समाचार पत्रों में पढ़ने को मिली। यूक्रेन को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव गहराता जा रहा है। वर्तमान में परमाणु, जैव एवं रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की सोच विकसित हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वशांति के लिए परमाणु व जैविक हथियारों पर अंकुश की पहल की जानी चाहिए। एेसे हथियार पूरी मानव जाति के लिए विनाश का कारण बन सकते हैं।

संजय वर्मा, मनावर, धार

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Dec 08, 2022

महिलाओं की भागीदारी

पांच दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘घूंघट में लोकतंत्र’ हाल ही में संपन्न हुए हरियाणा पंचायत चुनावों में कुछ विजयी महिलाओं द्वारा घूंघट में शपथ ग्रहण करना जहां ग्रामीण महिलाओं की बढ़ी भागीदारी को दर्शाता है, वहीं कई सवाल पैदा करता है। उधर, इसे  लोकतंत्र की विडंबना ही कहा जायेगा कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर परिवार का कोई पुरुष सदस्य शपथ ले ले। निश्चित रूप से इससे महिलाओं के अधिकारों की बात बेमानी लगती है। जब लोग किसी महिला को अपना प्रतिनिधि चुनते हैं तो उसकी सार्वजनिक जीवन में उपस्थिति भी नजर आनी चाहिए। 

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

मातृभाषा में शिक्षा

दैनिक ट्रिब्यून में एक दिसंबर के अंक में नई शिक्षा नीति के विषय में पढ़कर, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा उच्चतर शिक्षण संस्थाओं में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में चुनौतियों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। नयी शिक्षा नीति में भारतीयता है और यह कि हम मातृभाषा के साथ ही विकास कर सकते हैं। वर्तमान  की आवश्यकतानुसार नई शिक्षा नीति में सब कुछ अपरिहार्य है। प्रत्येक विद्यार्थी में नयी शिक्षा नीति के अनुसार मौलिक चिंतन विकसित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

जयभगवान भारद्वाज, नाहड़

मतदान की प्रतिबद्धता

इस बार हिमाचल के चुनाव आयुक्त ने विभागों से विवरण मांगा है कि किस कर्मचारी ने वोट डाला  व किसने नहीं। वाेट डालने  को अवकाश घोषित किया जाता है ताकि प्रत्येक व्यक्ति मतदान कर सके। फिर भी कई कर्मचारी मतदान नहीं करते। इस बार ऐसे कर्मियों से जवाब मांगा गया जिन्होंने वोट नहीं डाला। चुनाव आयोग का यह सराहनीय कदम है कि वह मतदान करने के लिए  पूरी ईमानदारी से मतदाताओं को जागरूक करता है।

मुकेश विग, सोलन, हि.प्र.

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

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Dec 07, 2022

उलटफेर का खेल

विश्व फुटबॉल कप 2022 में दिग्गज टीमों की अप्रत्याशित हार ने टूर्नामेंट को रोचक बना दिया है। शुरुआत में ही सऊदी अरब ने अर्जेंटीना को 2-1 से हराकर फुटबॉल जगत में सनसनी पैदा कर दी थी जबकि अर्जेंटीना की टीम में लियोनेल मेसी जैसा शानदार खिलाड़ी मौजूद था। वहीं जापान ने चार बार के विश्व कप फुटबॉल विजेता जर्मनी को हराकर सबको चौंका दिया। ब्राज़ील की टीम को भी कैमरुन से हार का सामना करना पड़ा है। इस प्रकार कोरिया ने पुर्तगाल को हराकर बड़ी जीत दर्ज हासिल की है। इस उलटफेर के क्रम में यदि अफ्रीकन या एशियन टीम विश्व विजेता बन जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

वीरेंद्र कुमार जाटव,  दिल्ली

रिश्तों की मर्यादा

बदलते सामाजिक परिवेश ने रिश्तों की न केवल परिभाषा बदली  बल्कि रिश्तों  की बुनियाद हिला दी है। पिछले दशकों में रिश्तों को भयंकर अंजाम तक पहुंचते देखा गया है। आम तौर से प्रचलित रिश्तों के क़त्ल के पीछे कुछ चुनींदा वजहें आम  हैं। अहं के टकराव से मानसिक तनाव तक ने रिश्तों को रक्तरंजित करने में खूब सहयोग किया है। रिश्तों को क़त्ल करते सामाजिक विकार को नियंत्रित करना आसान नहीं है। फिर भी समाज में फैलते विष को रोकना होगा ताकि रिश्तों की मर्यादा बची रहे।

एमके मिश्रा,  रांची, झारखंड

रंग लाया संघर्ष 

ईरान में हिजाब के खिलाफ महिलाओं का संघर्ष आखिरकार रंग लाया। देश में मोरल पुलिसिंग को खत्म करने का फैसला हुआ। महासा अमीन की शहादत रंग लाई और ईरान की महिलाओं ने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि दमन और आतंक द्वारा धार्मिक आडंबर  के नाम पर किसी को भी अधिक समय तक दबाकर नहीं रखा जा सकता है। अफगानिस्तान की महिलाओं को भी अब आगे बढ़ कर तालिबानियों के अनुचित दबाव को जवाब देना चाहिए।

सुभाष बुड़ावन वाला, रतलाम, एमपी

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आपकी राय Other

Dec 06, 2022

राजनीति-अपराध का गठजोड़

दो दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘मतदाता तोड़ें राजनीति-अपराध का गठजोड़’ राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण पर व्यथा प्रकट करने वाला था। दरअसल राजनीतिक दलों के लिए ऐसे उम्मीदवारों को जीत की उम्मीद में खड़ा करना मजबूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को आदेश दिया है कि चुनावों के समय आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के बारे में मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रचारित करना होगा। मतदाताओं को जागरूक होकर आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को चुनावों में नकार देना चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

ज्वलंत प्रश्न

‘ताई की जगह ताऊ ले गया शपथ’ शीर्षक से प्रकाशित खबर ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। संस्कारों के नाम पर रूढ़ियों की कैद में छटपटा रहे हमारे कार्यकलाप तो प्रश्नों के घेरे में हैं ही, एक ज्वलंत प्रश्न यह भी है कि नामांकन से लेकर शपथ ग्रहण तक की लंबी और जवाबदेह प्रक्रिया से जुड़े सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति में विजयी महिला के स्थान पर पुरुष कैसे शपथ ले गया? सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली और कर्तव्य बोध को क्यों काठ मार गया है? 

ईश्वर चन्द गर्ग, कैथल

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जन संसद Other

Dec 05, 2022

उचित प्रशिक्षण मिले

विडंबना है कि देश फुटबॉल के इस महाकुंभ में शिरकत की कोई ठोस नीति न बना पाया और न ही विशेष रुचि दिखा सका। देश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ियों को शिक्षण प्रशिक्षण हेतु सरकारों को खेल केंद्रों में आवश्यक सुविधाएं व अनुभवी कोच उपलब्ध कराने होंगे। खेल प्रबंधन समिति को खिलाड़ियों के लिए पौष्टिक आहार की नि:शुल्क व्यवस्था करना आवश्यक है। फुटबॉल की लोकप्रियता कायम रखने के लिए मीडिया को अहम भूमिका निभानी होगी। ‌फुटबॉल खिलाड़ियों के विकास एवं कल्याण अभियान की शुरुआत हेतु सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

उद्योगपति आगे आयें

देश में किसी भी क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत है खिलाडि़यों को निखारने और प्रोत्साहित करने की। भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री के बयान से खिलाडि़यों के दर्द को समझा जा सकता है। अभाव में जीने और न्यूनतम खेल सामानों के लिए तरसते खिलाड़ियों से विश्वस्तरीय टीम की कल्पना कैसे की जा सकती है? फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ियों के रहते प्रायोजकों के अभाव में खेल वांछित प्रगति से दूर है। फुटबॉल को विश्वपटल पर खड़ा करने के लिए सरकारों को उचित कदम उठाना चाहिए। देश के मशहूर उद्योगपतियों को फुटबॉल को व्यावसायिक पहचान देने का हर उपाय करना होगा।

एमके मिश्रा, रांची, झारखंड

प्रोत्साहन मिले

वर्तमान में भारतीय फुटबॉल टीम फीफा रैंकिंग में 104वें स्थान पर है। हालांकि, सर्वश्रेष्ठ भारतीय फुटबॉल टीम बनाने के लिए ठोस प्रयास की आवश्यकता है। विभिन्न फुटबॉल क्लब एवं अकादमियों में से श्रेष्ठ खिलाड़ियों का चयन करके उन्हें राष्ट्रीय स्तर की टीम हेतु प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। प्रशिक्षण हेतु बेहतर कोच की नियुक्ति हो। फुटबॉल के लिए आवश्यक सभी संसाधन और सुविधाएं सरकार को उपलब्ध करानी चाहिए तभी हम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल में अपनी धाक जमा सकते हैं। क्रिकेट की तरह फुटबॉल को भी बेहतर स्पॉन्सर एवं प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

ललित महालकरी, इंदौर, म.प्र.

ठोस रणनीति बने

भारतीय फुटबॉल टीम ने 1948 में पहली बार ओलंपिक में भाग लिया और 1956 के ओलंपिक खेलों में भारत सेमीफाइनल में पहुंचा जो एक बहुत बड़ी बात थी। एशियन गेम में भारत का शानदार प्रदर्शन रहा है। 1951 के प्रथम एशियन गेम्स में भारत ने गोल्ड जीता था, इसके बाद भारत 1962 में भी गोल्ड जीता था। भारत में फुटबॉल प्रेमियों की कमी नहीं है लेकिन भारत की फुटबॉल टीम विश्व फुटबॉल टूर्नामेंट में कोई बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाती है, इसलिए केंद्र सरकार, फुटबॉल महासंघ और फुटबॉल प्रेमियों को जरूर सोचना होगा कि कैसे हम विश्व फुटबॉल टूर्नामेंट में भारत की धाक जमा सकें।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

भविष्य सुरक्षित हो

आश्चर्य की बात है कि भारत में अभी तक विश्वस्तरीय फुटबॉल टीम नहीं बनी है। इसके लिए क्रिकेट की तरह इस खेल को अधिक तवज्जो देना, खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, आर्थिक मदद, नौकरी में प्राथमिकता, टीवी पर विज्ञापन दिखाना तथा खिलाड़ियों में खेलने का जज्बा विकसित करना होगा। जब खिलाड़ी इसमें अपना भविष्य सुरक्षित देखेगा, आर्थिक स्थिति से मजबूत होगा तो वह लगन, एकाग्रता, मेहनत से विश्वस्तरीय टीमों से खेल खेल कर अपने खेल को और निखारेगा। तब एक विश्वस्तरीय टीम बन सकेगी।

भगवानदास छारिया, इंदौर

विज्ञापनों से प्रोत्साहन

फीफा रैंकिंग में भारतीय फुटबॉल टीम टॉप-100 देशों में भी शामिल नहीं है। देश में फुटबाल के लिए सरकारी आर्थिक मदद, प्रोत्साहन, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और सुविधाओं का अभाव है। कहीं न कहीं फुटबाल खिलाड़ियों को सरकार और दर्शकों द्वारा वो तवज्जो नहीं मिलती जो क्रिकेट और उसके खिलाड़ियों को मिलती है। विज्ञापनों में भी क्रिकेट खिलाड़ियों के अलावा अन्य खेल के खिलाड़ी को स्थान नहीं मिल पाता है। इसी प्रोत्साहन के अभाव में न तो हम विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार कर सके और न आज तक इस खेल के लिए अपनी मानसिकता बदल सके हैं।

राजेंद्र कुमार शर्मा, देहरादून, उत्तराखंड

कोष की स्थापना

विडंबना ही कहेंगे कि भारत फुटबॉल के इस महाकुंभ में शामिल होने के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर सका। हालांकि फुटबॉल सबसे सस्ता व गांवों तथा शहरों में खेला जाने वाला सेहतमंद खेल है। हमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर की टीम बनाने के लिए नीति बनाने पर विचार करना पड़ेगा। खेल को प्रोत्साहन देने के लिए आवश्यक सुविधाएं देनी होंगी, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुभवी कोच उपलब्ध कराने होंगे। इस खेल को खेलने वाले खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से पर्याप्त प्रोत्साहन तथा सुविधाएं देनी चाहिए। इस खेल के विकास के लिए विशेष कोष की स्थापना करनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

बहुआयामी प्रयास हों

भारतीय फुटबॉल टीम को विश्वस्तरीय बनाने के लिए देश में स्कूली स्तर से ही खेल को समर्पित होना होगा। बच्चों को फुटबॉल खेलने के लिए प्रोत्साहित करना होगा, उचित व पर्याप्त बजट की भी व्यवस्था करनी होगी। जो बच्चे फुटबॉल में विशेष रुचि दिखायें, उनके लिए सरकार को विशेष सहायता करनी होगी। ग्राउंड लेवल से ही फुटबॉल ट्रेनिंग की व्यवस्था करनी होगी। बेहतर तकनीक का उपयोग, स्पोर्ट्स बजट का सदुपयोग करके फुटबॉल में विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार किये जा सकते हैं। स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ ही खेल खेलने के लिए उचित इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और प्रतिभाओं की तलाश कर फुटबॉल टीम तैयार करनी होगी।

ज्योति कटेवा, पटियाला, पंजाब

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Dec 03, 2022

गांव में रोजगार

देश में अभी भी जीडीपी की दर को बढ़ाकर दोगुना तक कर लेने की क्षमता है। मगर इसके लिए हर बेरोजगार को काम देना पहली प्राथमिकता होना चाहिए। ग्रामीण युवा रोजगार के लिए शहरों की ओर भागते हैं। यदि गांव में युवकों के लिए व्यवस्थित रोजगार उपलब्ध किया जा सके जो कि कृषि आधारित प्रसंस्करण फैक्टरियां लगाकर किया जाना संभव है। इससे जहां कृषकों की आय बढ़ेगी वहीं गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार मिलेगा।

सुभाष बुड़ावन वाला, रतलाम, म.प्र.

कैदियों की फिक्र

भारत की राष्ट्रपति ने संविधान दिवस के अपने प्रथम संबोधन में बेहद मार्मिक शब्दों में आदिवासी कैदियों का प्रश्न उठाया है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश एवं न्यायिक क्षेत्र के जानकारों एवं वकीलों के समक्ष देश की राष्ट्रपति ने जेलों में हजारों कैदियों के भविष्य की चिंता रखते हुए कुछ करने का आह्वान किया था। महामहिम ने भारत की न्यायिक प्रणाली एवं न्यायिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तरफ इशारा किया है।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

सत्य की जीत

सत्य परेशान हो सकता है लेकिन कभी पराजित नहीं। क्या खूब कहा है कि चिड़िया का घोसला कोई ले गया है लेकिन पूरा आसमान है स्वतंत्र रहने के लिए। किसी ने सच ही कहा है– ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है, यह जीवन में वफादारी, अखंडता और सच्चाई के महत्व को दर्शाता है।

थुपस्तान डोलकर, चंडीगढ़

साइबर सुरक्षा

कुछ दिन पहले दिल्ली स्थित एम्स के सर्वर में साइबर अपराधियों द्वारा सेंध लगाने से सर्वर से जुड़ी सेवाएं बहुत बुरी तरह प्रभावित हो गई थीं। डॉक्टरों को भी मरीजों का इलाज करने में दिक्कत आई। देश डिजिटल लेनदेन की ओर बढ़ रहा है, लेकिन एम्स में हुए अटैक ने देश की साइबर सुरक्षा को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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Dec 02, 2022

विजन जरूरी

इन दिनों राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हुए हैं। पार्टी को मजबूत बनाने और आगामी आम चुनाव से पहले अपनी जड़ें मजबूत करने के मकसद से भारत जोड़ो यात्रा पर निकले कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बॉलीवुड का साथ भी समय-समय पर मिल रहा है। यात्रा का मकसद कांग्रेस पार्टी का खोया हुआ जनाधार पुनः प्राप्त करना है और दूसरा महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाकर भाजपा के खिलाफ़ माहौल तैयार करना है। क्या इस यात्रा से यह सब हासिल हो जाएगा। क्या 2024 के आम चुनावों में यह जनसमर्थन वोटों में तब्दील होगा। राहुल कांग्रेस पार्टी को दोबारा अच्छी स्थिति में लाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन पार्टी को केंद्र की सत्ता में लाने के लिए जनता के सामने एक स्पष्ट विज़न रखना होगा। 

नरेंद्र कुमार शर्मा, जोगिंद्र नगर 

आपसी सौहार्द

एक दिसंबर का संपादकीय ‘सार्थक पहल’ भारत और इंडोनेशिया द्वारा दोनों देशों के बीच अंतर-धार्मिक शांति एवं सौहार्द को बढ़ाने के लिए किये जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालने वाला था। निःसंदेह सभी धर्मों का उद्देश्य समाज में शांति व सौहार्द को बढ़ाना है। अतः यहां यह भी आवश्यक है कि आतंकवाद को शरण देने वाले देश इन धार्मिक निहितार्थों से सबक लें व अपने देश में पाले चरमपंथियों को दूसरे देशों में शांति भंग करने के लिए न भेजें। साथ ही कट्टरता को छोड़ लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाएं।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

भारत को जिम्मेदारी 

वसुधैव कुटुंबकम‍ भारत की एक सोच है जिसमें एक भूमि, एक परिवार, एक भविष्य की अवधारणा है। भारत को इसी सोच के साथ बड़ी जिम्मेदारी और बुलंद ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए जी-20 की अध्यक्षता दी जा रही है। भारत द्वारा जी-20 देशों के संगठन की अध्यक्षता, महत्वाकांक्षाओं से परिपूर्ण, निर्णायक होगी। पूरे विश्व की निगाहें अब भारत पर हैं और भारत इससे विश्व का कल्याण करेगा।

भगवानदास छारिया, इंदौर 

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Dec 01, 2022

हमारी जिम्मेदारी

भारतीय नागरिकों को संविधान में उल्लेखित कर्तव्य और अधिकार का पालन करना होगा, किंतु सामान्यत: अधिकारों की पूर्ति के लिए व्यक्ति अपने दायित्व की उपेक्षा और कर्तव्य बोध से हटकर निजी हितों को प्राथमिकता देकर राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान करने पर तुल जाते हैं, जो गलत और असंवैधानिक है। संपादकीय ‘पहली जिम्मेदारी’ में भी कर्तव्य बोध पर सर्वाधिक जोर देते हुए बताया है कि मांग मनवाने हेतु कर्तव्यबोध होना जरूरी है। वास्तव में समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिये नागरिकों में कर्तव्यबोध पहली शर्त है। इसीलिए ईमानदारी से टैक्स देने और सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करते हुए ईमानदार रहना चाहिए। हमारी मेहनत की कमाई से ही राष्ट्र समृद्ध होता है। 

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन 

चीन में विरोध

उनतीस नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘चीन में उबाल’ चीन में कोरोना के प्रति जीरो पॉलिसी अपनाते हुए लॉकडाउन लगाकर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसके विरोध में नागरिक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, का विश्लेषण करने वाला था। असल में लोग निरंतर दमन से तंग आ गए हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि उन्हें स्वतंत्रता चाहिए, तानाशाही नहीं। पुलिस भी दमन के सारे हथकंडे अपना रही है। चीन में पहले ही जीडीपी कम हो रही है, इन प्रदर्शनों के कारण अर्थव्यवस्था पर और ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ेगा। 

शामलाल कौशल, रोहतक

पुरानी पेंशन बहाली

नीति आयोग ने ओल्ड पेंशन योजना पुन: लागू करने संबंधी राज्यों की घोषणा पर गंभीर चिंता जाहिर की है। इस मुद्दे पर लगातार देशभर में बहस जारी है एवं कर्मचारियों का आक्रोश भी देखने को मिला है। पुरानी पेंशन स्कीम का मुद्दा भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों ने प्रमुखता से उठाया है। राजस्थान, हिमाचल, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार और पंजाब में आम आदमी सरकार द्वारा पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करने का ऐलान किया जा चुका है। 

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

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