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Dec 31, 2021

आप की ताकत

संपादकीय ‘आपकी छाप’ में उल्लेख है कि चंडीगढ़ में पहली बार आप पार्टी ने अपना दम दिखाकर अन्य पार्टियों को उनकी हैसियत बता दी। यह वही पार्टी है, जिसने पहली ही बार दिल्ली में विधानसभा चुनाव जीतकर वह दम दिखाया कि आज तक भाजपा सहित सभी विरोधी दल हार से उबर नहीं पाए। इस जीत ने पंजाब में विधानसभा के चुनाव से पूर्व अकाली और बसपा गठबंधन पर बड़ा प्रहार तथा कांग्रेस और भाजपा को चुनौती के साथ बड़ा सबक दिया है। यद्यपि मुफ्त की सुविधा देने वाली आप की जीत हुई हैं, किंतु इसे हल्के में लेना भी अन्य दलों के लिए सियासी गलती ही होगी।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

छात्रों की मदद

जब-जब चुनाव पास आते हैं, सरकारें झूठे वादे करने शुरू कर देती हैं। किसी को मुफ्त चीजें, बिजली, पानी इत्यादि। कोई भी सरकार मुफ्त शिक्षा देने का वादा क्यों नहीं करती। आज के समय में ऐसे लाखों विद्यार्थी हैं जो अपनी फीस तक नहीं दे पाते, जिसके कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करनी पड़ती है। जो गरीब विद्यार्थी कड़ी मेहनत करके नौकरी लेने के लिए अप्लाई करते हैं, उन्हें सैकड़ों रुपये देकर फ़ॉर्म लेने पड़ते हैं। सरकार को विद्यार्थियों के लिए ट्रेनों, बसों के किरायें में मुफ्त जैसी सुविधा देनी चाहिए।

परनीत कौर, जींद

सुरक्षा पहले

सरकार द्वारा वोटर कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ा जाना सराहनीय कदम है। ऐसा करने से फर्जी मतदान में कमी तो आयेगी ही, साथ में ज्यादा कार्ड रखने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। साथ ही अब वर्ष में चार बार वोटरलिस्ट में नाम दर्ज होगा। मगर लोगों के मन में जो शंकाएं राजनीतिक दलों द्वारा फैलाई जा रही हैं उसका समाधान किया जाना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि फर्जी आधार कार्ड न बन पायें। डाटा सुरक्षा पर कड़े कानून की दरकार है।

मंगल सिंह, आजमगढ़

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Dec 30, 2021

बदलाव की दस्तक

दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित ‘आप की छाप’ संपादकीय बहुत ही रोचक और विश्लेषण करने वाला है। निगम चुनाव में आप पार्टी ने परचम लहरा दिया। चंडीगढ़ के नौजवान युवाओं ने इस पार्टी पर विश्वास दिखाया है। इससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि मतदाताओं ने पहले से ही भाजपा और कांग्रेस को नकार दिया था। देश की राजधानी दिल्ली की तर्ज पर आप पार्टी ने चंडीगढ़ निगम चुनाव में प्रथम स्थान हासिल किया है। वहीं दूसरी ओर भाजपा के दो पूर्व मेयरों को हार का सामना करना पड़ा। इसका मुख्य कारण शहर के लोग स्वच्छता सर्वेक्षण में 66वें स्थान पर खिसक जाने से खुश नहीं हैं।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़

सेवा क्षेत्र का भविष्य

28 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘सेवा निर्यात से ओमीक्रोन संकट का सामना’ लेख विषय पर चर्चा करने वाला था। कोरोना के ज्यादा खतरनाक वेरिएंट ओमीक्रोन के कारण विभिन्न देशों में लगभग लॉकडाउन की स्थिति होने के कारण आयात और निर्यात पर बुरा प्रभाव पड़ा है इसलिए मैन्युफैक्चरिंग के मुकाबले सेवा क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान देकर इसका निर्यात करना ज्यादा किफायत तथा लाभ का काम है। लेकिन जब तक भौतिक पदार्थों का उत्पादन नहीं होगा, तब तक सेवा क्षेत्र भी किसी काम का नहीं।

शामलाल कौशल, रोहतक

सावधानी जरूरी

गत दिनों प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ओमीक्रोन से एक सफल लड़ाई के लिए जो घोषणाएं कीं, वह स्वागतयोग्य है। 15 से 18 वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं एवं सीनियर सिटीजन को बूस्टर खुराक देना नये वेरिएंट की रोकथाम में एक प्रभावी कदम होगा। एक तरफ जहां बच्चों की विद्यालयों को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी, वहीं माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति आश्वस्त हो सकेंगे। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारें भी अपनी ओर से प्रभावी कदम उठा रही हैं।

राजेंद्र कुमार शर्मा, रेवाड़ी

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Dec 29, 2021

मुफ्त का फॉर्मूला

केजरीवाल के पास चुनाव जीतने का नायाब तरीका है। मतदाताओं को पानी, बिजली और खाद्यान्न सामग्री में रियायत की ऑफर देकर चुनाव जीत लो। चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में यह सब देखने को मिला। आप ने चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में पहली बार चुनाव लड़ने के बाद 14 सीटें हासिल की हैं। भाजपा दूसरे पर रही तो वहीं कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान से परेशान मतदाताओं ने तीसरा विकल्प आप को चुना। आप सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस और भाजपा को नये सिरे से मंथन करने की जरूरत है।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

जागरूक रहें

नये साल पर सामाजिक जमावड़े को रोकना ओमीक्रोन के दृष्टिगत सरकार की एक बड़ी चुनौती है। नये साल के आते ही सार्वजनिक स्थानों और बाजारों में भीड़ बढ़ रही है। कई राज्य सरकारों ने प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन यह भी पूरी तरह से कारगर तभी संभव होगा जब लोग भी समर्थन करेंगे। कोरोना को लापरवाही में न लेकर जागरूक रहने की जरूरत है।

नैन्सी गर्ग, भीखी, मनसा

जनसंख्या पर अंकुश

जनसंख्या वृद्धि देश के विकास की राह में बाधा है। जब तक लोग जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक देश की कुछ समस्याएं तो कभी समाप्त नहीं होंगी, चाहे सरकार भी इनके लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा ले। अगर भारत को गरीबी मुक्त करना है तो देश में सबसे पहले बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाना जरूरी है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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Dec 28, 2021

सख्ती से बात हो

पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदू मंदिरों का अपमान हुआ। मूर्तियां तोड़ी गईं। मूर्तियों के आभूषण उठाकर ले गए। वहां के हिंदू समाज ने बहुत बड़ा आंदोलन किया। इससे पहले बंगलादेश में भी मंदिरों पर आक्रमण हुआ। हिंदुओं के घर जलाए। यह ठीक है कि भारत सरकार ने बंगलादेश सरकार से रोष प्रकट किया, पर लगातार मुस्लिम देशों में हिंदू मंदिरों, हमारी आस्था के केंद्रों पर हमला हो रहा है। भारत सरकार पड़ोसी देशों में आस्था पर आक्रमण करने वालों पर नियंत्रण करने के लिए उन देशों की सरकारों से सख्त शब्दों में बात करे।

लक्ष्मीकांता चावला, अमृतसर

सज़ा मिले

अमृतसर और कपूरथला में बेअदबी को लेकर अक्तूबर से दिसंबर के दौरान तीन हत्याएं हुईं, जिसमें दो दिन से लगातार हुई हत्या होना चिंतित करने वाली है। इस तरह की घटनाओं में पीट-पीट कर हत्या करने के बजाय पुलिस को सौंपते तो कानून के तहत सजा मिलती। यक्ष प्रश्न उठ रहे हैं कि घटना क्यों हुई, क्या यह कोई साजिश थी, या भावनाएं भड़काने का षड्यंत्र। आवश्यकता है कि इस घटना की जांच हो तथा हत्या की जवाबदेही तय कर अपराधी को शीघ्र सजा भी मिले। हत्या बड़ा अपराध है, जिसकी अनुमति मजहब और कानून नहीं देते।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

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महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा

Dec 27, 2021

जन-संसद की राय है कि महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ हुए गंभीर हादसे बताते हैं कि तमाम सुरक्षा उपायों के बीच कहीं न कहीं चूक हुई है। सजगता व सतर्कता के अभाव में दुर्घटनाएं घटती हैं। इन हादसों के कारणों की तह तक जाना व दुर्घटनाओं से सबक लेना जरूरी है। 

सुरक्षा का निर्धारण

यदि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए नियुक्त उच्च अधिकारी ही किन्हीं संदेहास्पद स्थितियों में मारे जायें तो इससे बढ़कर किसी देश का दुर्भाग्य क्या हो सकता है? सुरक्षा किसे दी जाये, किस स्तर की दी जाये और कब तक दी जाये, इस पर पुनर्विचार होना चाहिए। फुलप्रूफ़ सुरक्षा व्यवस्था के लिए गुप्तचर संस्थाओं को आधुनिक सुविधाओं से लैस, मज़बूत एवं व्यवस्थित करना चाहिए। सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल हो। साथ ही निजी सुरक्षा एजेंसियों को भी तैयार करना एवं अपराधियों को तत्काल दण्डित करना जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण है कि सुरक्षा को कई चक्रों के जरिये फुलप्रूफ बनाया जाये।

 कविता सूद, पंचकूला

अलग विभाग बने

महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा हेतु सर्वाधिक जरूरी है कि उनकी सु्रक्षा में लगे सुरक्षाकर्मी भी स्वयं को सुरक्षित समझेंें, अन्यथा सुरक्षा व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह लगना है। पहले भी वीआइपी लोगों की सुरक्षा में चूक के कारण हत्याएं हुई हैं, वहीं विगत में संसद पर हमला करके आतंकियों ने सुरक्षाकर्मियों की भी हत्या की थी। जरूरी है वीआईपी और सुरक्षा प्रमुखों की सुरक्षा हेतु एक विशेष विभाग गठित होना, जिसका काम वीआईपी सुरक्षा पर सतत निगरानी रखना हो। ताकि संभावित खतरों से निपटने की तैयारी हरदम और सख्त हो।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

कोई चूक न हो

किसी भी प्रकार की हानि से बचाव ही वास्तव में असली सुरक्षा है। इसके लिए वीवीआईपी सुरक्षा के लिए तैनात जवानों का मुस्तैदी से तैनात, सक्रिय, तेजतर्रार होना अति आवश्यक है। वीवीआईपी के खाने, सोने, उठने-बैठने से लेकर उनकी हरेक एक्टिविटी पर पैनी व तेज नजर रखनी अति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, वीवीआईपी की यात्रा, उनके आमजन के बीच जाने, उनसे मिलने आदि पर भी कड़ी नजर व निगरानी रखनी अति आवश्यक है। किसी भी चीज, व्यक्ति पर थोड़ा-सा भी शक या संदेह होने पर उसकी हाथोहाथ जांच होनी चाहिए और तसल्ली के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए।

सुनील कुमार महला, पटियाला

दुर्घटना के सबक

जिस तरह से सीडीएस का हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ, वह देश के लिए बहुत ही चिंता का विषय है। ये हादसे सुरक्षा में चूक हैं। अकेले मौसम खराब होने का हवाला देकर जांच की लीपापोती नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा का सवाल है। ऐसे हेलिकॉप्टर, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और सेना में किया जाता है, का दुर्घटनाग्रस्त होना, किसी साजिश को इंगित करता है। कहीं न कहीं अंदरूनी तौर पर चूक हुई है। इसलिए यह जांच का विषय है। इस दुर्घटना से सबक लेना होगा।

जयदेव राठी, भराण, रोहतक

तह तक जायें

भारत में विभिन्न तरह की सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की जाती है, जिसमें सुरक्षा के कई व्यूह होते हैं, जो महत्वपूर्ण व्यक्तियों जैसे प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, अधिकारियों, कलाकारों, खिलाड़ियों एवं विशिष्ट नागरिकों को प्रदान की जाती है इसका निर्णय सरकार द्वारा लिया जाता है कि किसे कौन-सी वीआईपी सुरक्षा देनी है। प्रश्न यह है कि इतनी कड़ी सुरक्षा, जांच-पड़ताल के बावजूद हेलिकॉप्टर दुर्घटना कैसे हुई? मौसम का बिगड़ना, कोई विदेशी साजिश है या मानवीय भूल, यह सब दुर्घटना के बाद जांच की बातें हैं। कहीं न कहीं चूक हुई है।

भगवानदास छारिया, इंदौर, म.प्र.

कहीं तो चूक है

सीडीएस बिपिन रावत व अन्य अधिकारियों की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई मौत से राष्ट्र की अपूरणीय क्षति हुई। कहीं न कहीं निर्धारित नियमों की उपेक्षा से दुर्घटना हुई है। महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा तो पहले से ही निर्धारित होती है। यद्यपि यह जांच का विषय है। फिर भी कहा जा सकता है कि सुरक्षा में कहीं न कहीं चूक हुई है। यही चूक दुर्घटना का कारण बनी। दुर्घटना की प्रत्येक सिरे से जांच जरूरी है ताकि ऐसी दुर्घटनाओं से सबक लेकर भविष्य में और सतर्क हो सकें। ऐसे हालातों में महत्पूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा को लेकर पहले से सख्त नियम जरूरी हो जाते हैं।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

पुरस्कृत पत्र

अनुपालन में ही सुरक्षा

निस्संदेह महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा हेतु विस्तृत और सुस्पष्ट निर्देश रेखांकित किये गए होते हैं। फिर भी चूक होने के दो ही कारण प्रतीत होते हैं। एक निर्देशों का कड़ाई से पालन न करना। दूसरा सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के ध्यान में किसी कारण भटकाव हो जाना। सुरक्षा व्यवस्था को फुलप्रूफ बनाने हेतु ब्लूबुक में दिए गए निर्देशों की पूर्ण जानकारी महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात सभी अधिकारियों और जवानों को होनी चाहिए और वे अपनी गोलपोस्ट व ड्यूटी से तनिक भी विचलित न हों। खुफिया विभाग व आईबी से प्राप्त इनपुट्स को गंभीरता से लिया जाए और संभावित खतरों से निपटने के पुख्ता प्रबंध किए जाएं। महत्वपूर्ण व्यक्तियों को भी सुरक्षा स्टाफ का पूर्ण सहयोग करना आवश्यक है। प्रोटोकॉल का जरा भी उल्लंघन न करें। 

शेर सिंह, हिसार

दिल से करें दफ्तर का काम Other

Dec 27, 2021

पवन कुमार

यार मेरी नौकरी तो बहुत ज्यादा बोरिंग है। मैं तो तंग आ गया हूं ऐसी नौकरी से। यार मेरा तो मन ही नहीं लगता ऐसी नौकरी में। ऐसा कहने वाले लोगों के लिए तो सबसे बड़ी सलाह यही है कि काम वही करें जो मन को भाये। इंटरेस्ट होगा तो आप मनपसंद जॉब ढूंढ़ ही लेंगे। सबसे पहली सलाह तो यही है कि छोड़िये ऐसी नौकरी जो आपको पसंद नहीं है, ये मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन तो नहीं। थोड़ी परेशानी जरूर होगी लेकिन बाकी की जिंदगी मस्ती में कटेगी। जॉब चेंज करना कोई गेम नहीं है, लाइफ का रिस्क है। कुछ लोग कहते हैं कि ये जॉब करना तो मेरी मजबूरी है, मैं तो छोड़ ही नहीं सकता। तो चलिए आपके लिए भी एक कमाल का आइडिया है–सोचिये आपके घर कोई अपना एक छोटा बच्चा छोड़ जाये और आपको बोले कि आपको रोजाना इसकी देखभाल करनी है। तो क्या होगा? आपके दिमाग में टेंशन हो जाएगी। लेकिन जब आपका खुद का बच्चा होता है तो आपको कभी कोई परेशानी नहीं होती। आप ख़ुशी-ख़ुशी उसकी पूरी देखभाल भी करते हैं। 

बस यही फर्क है। हम हमेशा अपनी नौकरी यह सोच के करते हैं कि हम दूसरे का काम कर रहे हैं, ये काम हमारा नहीं है ये तो एक बोझ है। आप सोचिये कि ये कंपनी मेरी है, मुझे इसे आगे लेकर जाना है। मेरे दम पे ही यह कंपनी टिकी है। फिर देखिये आपका मन खुद काम में लगने लगेगा। हो सकता है आपके अच्छे काम के लिए लोग आपके लिए तालियां न बजाएं, आपके अच्छे काम के लिए आपको पुरस्कार न मिले, लेकिन मन में ख़ुशी तो मिलेगी, एक संतुष्टि तो मिलेगी। अब्दुल कलाम बचपन में अख़बार बांटा करते थे, लेकिन आगे चलकर एक सफल वैज्ञानिक बने क्योंकि जो भी किया दिल से किया, अपना मान के किया। बस यही खूबी उनको इतना आगे लेकर गयी। रजनीकांत बस में कंडक्टर थे लेकिन वहां भी जो कुछ करते स्टाइल से करते, शौक से करते, एक बोझ समझ कर नहीं और देखिये आज कितने बड़े सुपरस्टार हैं। तो आप भी जो भी कीजिए दिल से कीजिए फिर आपको आगे जाने से कोई रोक ही नहीं सकता भाई, गारंटी है। अब आपको काफी हद तक पॉजिटिव फीलिंग आ रही होगी। इसी फीलिंग के साथ जुटे रहिए अपने काम में। 

साभार : हिंदी सोच डॉट कॉम

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Dec 25, 2021

भीड़-तंत्र पर सवाल

23 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘संवैधानिक व्यवस्था में भीड़ के न्याय पर सवाल’ बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर तुरंत न्याय करने के लिए पीट-पीट कर मार देने वाली भीड़ तंत्र पर सवालिया निशान लगाने वाला था। अगर इन मामलों से संबंधित अपराधियों को पकड़ लिया जाता तो इनसे पूछताछ करके किसी प्रकार की साजिश का पता लगाया जा सकता था। आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के साथ इन घटनाओं को जोड़कर भी देखा जा सकता है। यही कारण है कि कोई भी राजनीतिक दल कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात नहीं कहना चाहता।

शामलाल कौशल, रोहतक

सतर्क रहें

संपादकीय लेख ‘सख्ती जायज’ पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ। लेख प्रासंगिक एवं सामयिक है। आज कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्रोन जिस तेजी से अपने पांव पसार रहा है, उसको देख कर चिकित्सक और वैज्ञानिक भी सकते में हैं। देखने में आ रहा है कि जिन लोगों ने वैक्सीन की एक ही खुराक ली है वो भी लापरवाह होकर, कोरोना प्रोटोकॉल की अनदेखी कर रहे हैं। राज्य सरकारों को सख्ती करनी होगी। ऐसा न हो कहीं देश में कोरोना की दूसरी लहर जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाए और देश फिर एक नए आर्थिक संकट के दौर में पहुंच जाए।

राजेंद्र कुमार शर्मा, रेवाड़ी

महिला सशक्तीकरण

देश के विकास में आधी आबादी का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी ज्वलंत मिसाल सेना में देखने को मिल रही है। सीआरपीएफ के 32 महिला कमांडो की एक टुकड़ी वीआईपी सुरक्षा सम्भालेंगी, जिसने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है। जनवरी से अलग-अलग राजनेताओं के ‘जेड प्लस’ कैटेगरी में महिला कमांडो तैनात हो सकती हैं। यह महिला सशक्तीकरण की एक मिसाल है।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

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Dec 24, 2021

सख्ती का शासन

बीते कुछ वर्षों से जबसे योगी आदित्यनाथ राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं, राज्य के कायदे-कानून को सख्त करने का काम किया है। नतीजतन आज उ.प्र. से गुंडा राज लगभग समाप्त हो चुका है। पहले महिलाएं सुरक्षित नहीं थीं। लेकिन इस मामले में काफी गिरावट आई है। अब गुंडागर्दी नाममात्र की बची है। किसी की मजाल नहीं कि सरेआम गुंडागर्दी करे। इसमें कोई दोराय नहीं कि उ.प्र. में भ्रष्टाचार काफी कम हुआ है, लोगों को अब डर-डर के नहीं जीना पड़ रहा है। अगर कोई भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है तो उसके ऊपर कड़ी कार्रवाई की जाती है। महिलाएं भी बिना डर के घर से बाहर आ-जा सकती हैं। प्रदेश अपराध मुक्त की ओर बढ़ रहा है। अब ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है।

अभिनव राज, नोएडा

बलिदान का स्मरण

19 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून लहरें अंक में कृष्ण प्रताप सिंह का ‘देश पर कुर्बान किया लाल, पर रहीं बेहाल... मां तुझे सलाम’ लेख शहीदों के पारिवारिक हालात का सारगर्भित विश्लेषण व सत्तारूढ़ सरकार का इस ओर ध्यान आकृष्ट करने वाला था। हर वर्ष नेता-मंत्री शहीदी दिवस पर चित्रों, स्मारकों पर पुष्प-श्रद्धांजलि देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेते हैं। माताओं की असुलझी-अनसुनी गहरी कसक को लेखक की पैनी कलम ने उजागर किया है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

बदहाल अफगानी

इस समय अफगानिस्तान बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। लोगों के पास अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे तक नहीं हैं। तालिबान के पास अपने कर्तव्यों की सेवा करने की कोई प्रतिबद्धता नहीं है। केवल चुनी हुई सरकार और लोकतंत्र ही देश की सेवा कर सकते हैं। अब इस्लामी देशों ने इस मुद्दे को हल करने के लिए पहल की है। इस्लामिक देश और अन्य लोग क्या करेंगे, यह आने वाला समय ही बतायेगा।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर

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Dec 23, 2021

सबक सिखाएं

दैनिक ट्रिब्यून के 20 दिसंबर का संपादकीय लेख ‘पाक में आतंकी ठिकाने’ पढ़ने के बाद दुख हुआ की आईएसआई में भारतीय मूल के लड़ाके भी शामिल है। भारत पाक के आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने के प्रमाण दुनिया के सामने रखता रहा है। वर्तमान सरकार ने जिस कूटनीति से पाकिस्तान और चीन को दबाव में ला रखा है वह तारीफ के काबिल है। अब समय आ चुका है कि पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद करवा के भारत में समाहित कर ले। वैसे भी वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ा है और ऐसे में भारत के पास अवसर है।

राजेंद्र कुमार शर्मा, रेवाड़ी

अनुचित टिप्पणी

पनामा पेपर्स लीक मामले में एक कथित कम्पनी को लेकर बहू ऐश्वर्या राय बच्चन से ईडी की पूछताछ क्या हुई, उसके कुछ घण्टे बाद ही उनकी सास और राज्यसभा सांसद सदन में ही गुस्से में आ गई और राज्यसभा के भीतर ही भाजपा को श्राप तक दे दिया। उन्होंने कहा कि मुझ पर निजी हमला किया गया, मैं आपको श्राप देती हूं कि आप लोगों के बुरे दिन आएंगे। आप गला ही घोंट दीजिए, हम लोगों का। जया को यह पसंद नहीं आया कि उनकी बहू को इस तरह से बुलाया जा रहा है। लेकिन यह लोकतांत्रिक व गरिमा अनुकूल व्यवहार नहीं है।

विकास बिश्नोई, हिसार

प्रतिभा का मान

22 दिसंबर उस महान भारतीय विद्वान को समर्पित है, जिसे मात्र 12 वर्ष की आयु में ही ‘बाल विद्वान’ घोषित कर दिया गया था। वर्ष 1887 में तमिलनाडु के इरोड में गणितज्ञ रामानुजन का जन्म हुआ था। मात्र कक्षा चार से ही त्रिकोणमिति पढ़ते देख सब लोग हैरान हो गये थे। रामानुजन का मन केवल गणित में ही लगता था अन्य विषयों से उन्हें कोई लगाव नहीं था। दुख की बात यह थी कि उनकी प्रतिभा को भारत में नहीं पहचाना गया। मात्र 33 वर्ष की आयु में 1920 में इस महान विभूति का निधन हो गया।

मंगल सिंह, आजमगढ़

आपकी राय

Dec 22, 2021

उ.प्र. में चुनावी रण

18 दिसंबर को दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित ‘क्या लखनऊ दिखायेगा दिल्ली की दिशा’ लेख में उत्तर प्रदेश के आसन्न चुनावों पर लेखक की गंभीर राय है कि भाजपा को गहराई से समझना-बूझना होगा कि कृषि क़ानूनों की वापसी जीत की गारंटी नहीं है। नि:संदेह दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर निकलता है। विपक्ष की संकरी गलियों में मोड़ इतने हैं कि रास्ते की सीध दिखाई ही नहीं दे रही है। रही गठबंधनों की बातें, तो जहां सब नेता मुख्यमंत्री के दावेदार होंगे और अवसरवाद की बिसात पर चालें चलेंगे तो कुछ पल्ले आने वाला नहीं उनके। 

मीरा गौतम, जीरकपुर


स्वावलंबी बनायें

पंजाब में पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने महिलाओं के लिए सरकार बनने के बाद एक हजार रुपया महीना देने की घोषणा की और इसके उत्तर में सुखबीर बादल ने दो हजार रुपये मासिक देने का सब्जबाग महिलाओं को दिखा दिया। ये महिलाओं को कमजोर, बेबस और अति गरीब समझकर घोषणाएं कर रहे हैं। अगर केजरीवाल और सुखबीर बादल में हिम्मत है तो यह कहें कि उनकी सरकारों में कोई गरीब नहीं रहेगा, सब अपनी आमदनी में से ही गुजारा कर सकेंगे और किसी प्रकार की भी सरकारी पेंशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। हमें अपने पांवों पर खड़े होना है, भिक्षा नहीं लेनी।

लक्ष्मीकांता चावला, अमृतसर


सतर्कता जरूरी

15 दिसम्बर का संपादकीय ‘लापरवाही पड़ेगी महंगी’ नये कोरोना वायरस ओमिक्राॅन के दुनिया में हो रहे फैलाव व इसके दुष्प्रभाव पर प्रकाश डालने वाला था। जरूरी है कि सरकारें इस संक्रमण के विस्तार को रोकें, वहीं यह भी आवश्यक है कि कोरोना महामारी से सम्बन्धित सभी नियमों का पालन कर आम लोग भी सरकार को पूरा सहयोग दें। संपादकीय में बिल्कुल उचित कहा गया है कि सजगता व सतर्कता ही प्राथमिक उपचार है।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

आपकी राय Other

Dec 21, 2021

भाजपा को चुनौती

18 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘क्या लखनऊ दिखाएगा दिल्ली की दिशा’ लेख उत्तर प्रदेश की राजनीति की बदलती फिजा की पड़ताल करता नजर आया। यह पक्की बात है समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल की जुगलबंदी और किसान आंदोलन से पैदा हुई खटास पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। उ.प्र. का मिजाज दि‌ल्ली की कुर्सी की दिशा तय कर सकता है। इस बात का इल्म भाजपा को भी है। तभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर योगी आदित्यनाथ खूब भाग-दौड़ कर रहे हैं। बाकी जनता जनार्दन के असली मूड का पता तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार

पारदर्शी हों परीक्षाएं

हरियाणा भी भ्रष्टाचार से अछूता नहीं है। हाल ही में भर्ती प्रकरण का मामला सामने आया है। इस घोटाले में हुई एचसीएच की आरंभिक परीक्षा में पैसे लेकर परीक्षा पास करवाने के आरोप लगे हैं। इससे पहले भी हरियाणा पुलिस में सिपाही के पद की परीक्षा का पेपर लीक हुआ। आखिर कब तक बेरोजगार युवाओं को ऐसे ही मानसिक यातना से गुजरना होगा। इसके लिए सरकार को सख्त से सख्त कदम उठाने होंगे।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़

ओमीक्रोन और हमारी जिम्मेदारी Other

Dec 20, 2021

पहले रोकथाम

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ओमीक्रोन पहले वायरसों से अधिक संक्रामक है। अगर हम कोढ़, पोलियो, मलेरिया, स्वाइन फ्लू, सार्स जैसी बीमारियों को देखें तो इन सबकी औषधियां आज उपलब्ध हैं और जब तक उपलब्ध नहीं थी तब हम इन बीमारियों से बचाव के साधन प्रयोग में ला रहे थे। आज भी वही स्थिति हमारे सामने है। वैक्सीन लेने के बाद लापरवाह होना, कोरोना को हम पर हमला करने का मौका देने जैसा है। इलाज से रोकथाम ज्यादा बेहतर है। युवा और वयस्कों के टीकाकरण के साथ बच्चों के टीकाकरण का मार्ग भी प्रशस्त होना चाहिए।

योगिता शर्मा, सुधोवाला, देहरादून, उत्तराखंड

सचेतक जीवनशैली

ओमीक्रोन भले ही खतरनाक न हो लेकिन मानव को परेशान करने की पर्याप्त क्षमता तो रखता ही है। इसलिए सतर्कता जरूरी है। देश के बाहर की यात्रा आवश्यक न होने पर टालना जरूरी है। अपने आसपास टीकाकरण को शत-प्रतिशत कराने हेतु जागरूकता पैदा करना हमारी जिम्मेदारी है। ओमीक्रोन के लक्षण मिलने पर जांच से गुजरना तथा चिकित्सकीय परामर्श के साथ एकांतवास में रहना नैतिक आवश्यकता है। व्यक्तिगत स्वच्छता को अपनाना आवश्यक है। कुछ महीने सावधानी रखने की विशेष जरूरत है। वहीं अपने उद्योग-धंधे पर सतर्कता अपनाते हुए कार्य करें।

प्रदीप गौतम सुमन, रीवा, म.प्र.

जान और जहान

सरकारी प्रयासों तथा लोगों द्वारा आवश्यक सावधानियों के बावजूद अब नये ओमीक्रोन ने तीसरी लहर के रूप में दस्तक दे दी है। इससे बचने के लिए जहां सरकार को और ज्यादा प्रबंध करने चाहिए वहां लोगों को मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना, बार-बार साबुन से हाथ साफ करना, कोरोना के दोनों इंजेक्शन लगवाना, वरिष्ठ नागरिकों तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को बूस्टर डोज लगवाना, छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखना तथा हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों को अलग-थलग करना आदि कुछ उपाय हो सकते हैं। देश एक और लॉकडाउन बर्दाश्त नहीं कर सकता।

शामलाल कौशल, रोहतक

तैयारी करें

कोरोना वायरस के नये वेरिएंट ओमीक्रोन की दस्तक ने डेल्टा की तरह चौंका दिया है। डेल्टा की तरह ओमीक्रोन भी उस समय आया जब देश में हालात सामान्य होते जा रहे हैं। सरकार को विदेशों से आने वाले यात्रियों पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए। शहरी और ग्रामीण अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं विशेष रूप से ऑक्सीजन का पूरा प्रबंध करना चाहिए। भविष्य में किसी चीज की कालाबाजारी न हो, उसके प्रबंध अभी से किए जाने चाहिए। लेकिन सबसे पहले जन जागरूकता बहुत जरूरी है। सावधानी ही कोरोना से सबसे बड़ा बचाव है।

सुचिता गौड़, कैथल

सख्ती जरूरी

स्वास्थ्य कर्मियों की एकजुटता, सरकारी प्रयास, लॉकडाउन को झेलने में जन-जन का सहयोग के बावजूद अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने लगी थी कि ओमीक्रोन ने तीसरी लहर के रूप में तहलका मचाना प्रारंभ कर दिया। लोगों को सावधानी के साथ मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंस का अनुपालन, साबुन से हाथों की सफाई व कोरोना की डोज लगवाने, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से बचाव एवं बच्चों के प्रति विशेष सावधानी रखनी होगी। हमें पहले आई कोराेना चुनौतियों से मुकाबले के सबक लेकर उठाये गये कदमों का सख्ती से पालन करना होगा।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

कोताही न बरतें

आज ओमीक्रोन से निपटने की कठिन चुनौती हमारे समक्ष मौजूद है। इसके संक्रमण से बचने के लिए प्राथमिक तौर पर मास्क का प्रयोग, शारीरिक दूरी, सैनिटाइजर का प्रयोग एवं आवश्यक कार्य होने पर ही घर से बाहर निकलने के नियमों को फिर से अपनाया जाना चाहिए। विदेशों से आने वाले लोगों के साथ कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार कड़ाई से सख्त व्यवहार होना चाहिए। सरकार को देश के सभी हवाई अड्डों पर कोरोना के टेस्ट की व्यवस्था आवश्यक करनी चाहिए। हॉस्पिटलों को अपडेट करना भी आवश्यक है। वैक्सीन के दोनों डोज़ लगवाने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

ललित महालकरी, इंदौर, म.प्र.

पुरस्कृत पत्र

जनक्रांति हो

ओमीक्रोन की चुनौती आते ही कोरोना की तीसरी लहर की आशंका दिख रही है, जिससे सजग रहना जरूरी हो गया है। यह महामारी एक ऐसी चुनौती हो गई है, जिससे निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास ही पर्याप्त नहीं बल्कि पूरे समाज को आगे आना होगा। कोरोना के विरुद्ध आज जनक्रांति की आवश्यकता है। देश का प्रत्येक व्यक्ति सचेत रहे और औरों को भी जाग्रत करे। कोरोना के नियमों का सख्ती से पालन करें। यह मानना होगा कि यह न तो असाध्य है न ही स्थाई, मगर जागरूकता बहुत जरूरी है। हम सबको मिलकर काम करना होगा।

श्रीमती केरा सिंह, नरवाना

आपकी राय

Dec 18, 2021

कंटीली राहें

लाॅकडाउन के दौरान सारे सिनेमा हाल बंद पड़े थे तो उस समय ओवर दी टाप प्लेटफार्म ने भरपूर मनोरंजन उपलब्ध कराया। किंतु न जाने कब इसने भारतीय युवाओं के जनमानस पर अपना अधिकार कर लिया, पता ही नहीं चला। आज का युवा एक सीरीज देखता है और फिर अपना दिमाग और समय उसके अगले सीजन में लगा देता है। अश्लीलता का अड्डा बन गयी थीं ये वेब सीरीज। सरकार को इसके नियमन हेतु कानून बनाना पड़ा। आजकल ऐसे पात्र रचित किये जा रहे हैं, जिसका वास्तविक जीवन से कोई वास्ता ही नहीं। इस तरह से रोमांच पैदा किया जाता है कि युवा पीढ़ी ‘बिंग वाच’ करना एक उपलब्धि मानने लग गयी। जरूरत है अपने समय को सही समय पर सही जगह लगाने की ताकि आने वाला वक्त वास्तव में युवा वर्ग का ही हो।

मंगल सिंह, आजमगढ़, उ.प्र.

बदलाव का विधेयक

कैबिनेट ने लड़कों और लड़कियों का शादी की न्यूनतम उम्र एक समान करने के विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। इस कानून के आने के बाद समाज में बहुत बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। जो बराबरी की बात वर्षों से की जा रही थी, आखिरकार उस बिल को भी मंजूरी मिल चुकी है। इस वैवाहिक कानून की देशभर में खूब प्रशंसा की जा रही है। यानी अब 16 करोड़ लड़कियों के साथ परिजनों द्वारा जबरन शादी के लिए नहीं कहा जाएगा।

अभिनव राज, नोएडा

लोकतंत्र की शक्ति

12 दिसंबर को दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में सुजीत कुमार का 'जब सड़क पर आता है किसान‌' लेख शांतिपूर्वक निपटे किसान आंदोलन की समस्याओं का विश्लेषण करने वाला था। राष्ट्र के विकास की रीढ़ कहे जाने वाले किसान ने दिखा दिया कि लोकतंत्र की शक्ति के समक्ष राजनीतिक ताकत असहाय हैं।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

आपकी राय Other

Dec 17, 2021

शाकाहार संरक्षण

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को आदेश दिया है कि धोखे से किसी की थाली में कुछ भी नहीं परोसा जा सकता। उन्हें साफ तौर पर खुलासा करना होगा कि वे खाने में किस सामग्री का प्रयोग कर रहे हैं। वास्तव में अदालत का फैसला शाकाहारी भोजन करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत है। देखने में आता है कि फूड बिजनेस ऑपरेटर्स लोगों की भावनाओं की परवाह किए बिना कुछ भी परोसते हैं। भारत जैसे ऋषि-मुनियों, संतों के देश में पूर्ण शाकाहार का पालन करने वालों की संख्या कम नहीं है। अदालत का फैसला स्वागतयोग्य है।

योगिता शर्मा, सुधोवाला, देहरादून

मुफ्तखोरी की लत

वोट व सत्ता को प्राप्त करने के लिए अमूमन सभी राजनीतिक दल मुफ्तखोरी की घोषणा पत्र में करते रहते हैं। जबकि मुफ्तखोरी देश के आर्थिक विकास के लिए अभिशाप बनी हुई हैं। मुफ्तखोरी की जितनी योजनाएं लागू की जाती हैं, उससे साबित होता है कि भारत में गरीबी मिटने की बजाय बढ़ती जा रही है। जब गरीबों को दी जाने वाली मुफ्तखोरी हम सब करदाताओं की आंखों की किरकिरी होती है, तो सांसदों, विधायकों, मंत्रियों को विभिन्न प्रकार की सुख-सुविधा दी जाती है, वह भी तो कोढ़ में खाज है! यह पेशा सेवा का है न कि सुख-सुविधाएं भोगने का।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

सुरक्षा हेतु जरूरी

ओमिक्रॉन वेरिएंट के मद्देनजर ठाणे महाराष्ट्र प्रशासन काफी सख्त हुआ है। ठाणे मनपा परिवहन की बसों में जिन्होंने दूसरी डोज का टीकाकरण नहीं कराया है, उन्हें बसों में यात्रा का अवसर नहीं मिलेगा। इसके साथ ही मास्क का उपयोग न करने वालों पर सख्त एवं दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी हुए हैं। अतः अब बसों में बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए टीकाकरण का प्रमाण पत्र जांचना भी अब अनिवार्य हो गया है। अपने बचाव के लिए हमें हर तरह की सुरक्षा अपनानी चाहिए।

मनमोहन राजावत, शाजापुर, म.प्र.

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Dec 16, 2021

एमएसपी का विकल्प

चौदह दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘ऊंची कीमत की फसलें एमएसपी का विकल्प’ विषय पर चर्चा करने वाला था। किसानों को अगर उनकी लागत के बराबर उत्पादन की एमएसपी दे दी जाए तो उनकी आमदनी बढ़ जाएगी। लेखक ने किसानों को ऐसा उत्पादन करने का सुझाव दिया है, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कीमत ज्यादा है। अगर एमएसपी के फलस्वरूप कृषि उत्पादन बढ़ता है तो उसे विदेशी बाजार में कम कीमत पर क्यों बेचना पड़ेगा! इसके अलावा वैकल्पिक उत्पादन पैदा करने के लिए देश में आवश्यक अनुसंधानशालाओं की कमी है। अमेरिका जैसे देशों में सरकार किसानों को भारी सब्सिडी देकर भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में किस तरह अपना उत्पादन बेचते हैं।

शामलाल कौशल, रोहतक

महिला सशक्तीकरण

तेरह दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून अंक में क्षमा शर्मा का ‘नाजायज को जायज ठहराने की कूपमंडूकता’ लेख महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों का विश्लेषण करने वाला था। महिलाओं द्वारा ही मारपीट करने वाले पतियों का समर्थन महिला सशक्तीकरण पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा था। समाज का सृजन करने वाली मातृशक्ति आज भी स्वयं को बेसहारा अनुभव कर रही है। सरकार को महिलाओं की समस्याओं के निदान हेतु कदम उठाने चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

समन्वय जरूरी

चार दिसंबर को नागालैंड में 14 लोगों की जान चली गई क्योंकि असम राइफल्स और भारतीय सेना को लगा कि वे विद्रोही हैं लेकिन वे साधारण मजदूर थे। सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम लागू वाले क्षेत्रों को एकीकरण और आर्थिक विकास की आवश्यकता है। साथ ही सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच अधिक समन्वय वास्तविक विद्रोहियों की सही पहचान करने और भविष्य में इस तरह के हादसे रोकने में मदद कर सकता है।

आयुशी उपाध्याय, चंडीगढ़

आपकी राय

Dec 15, 2021

खलेगी कमी

देश ने न केवल कई जवानों बल्कि सीडीएस बिपिन रावत जैसे बहुआयामी नेतृत्व के धनी को खोया है। उनका ब्रह्मवाक्य ‘पहली गोली दुश्मन की चलेगी तो इसके बाद हमारी गोलियों की दुश्मन गिनती नहीं कर पाएगा।’ उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति तथा जीवटता को प्रदर्शित करता था। वे न केवल मानवीय रूप से संवेदनशील थे, बल्कि छोटी-छोटी बातों को भी सुनकर, छोटे पद वालों की समस्याओं व उनके समाधान का भी विशेष ध्यान रखते थे। वास्तव में वे भारत माता के सच्चे सपूत थे, जो राष्ट्र के महानायक हैं। उनकी कमी को पूरा राष्ट्र महसूस करेगा।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद उज्जैन

आय बढ़ाने की राह

समय आ गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की बजाय किसानों की आय दुगनी करने के लिए अन्य उपाय खोजने होंगे। पानी की अधिक खपत करने वाली फसलों को त्याग कर ऊंची कीमत वाली फसलों के उत्पादन की तरफ उन्मुख होना होगा। ट्यूनीशिया जैसे छोटे से देश में जैतून की खेती होती है, उसी तरह नीदरलैंड में ट्यूलिप के फूल और सऊदी अरब में खजूर की खेती होती है। हमें देश के हर जिले में जलवायु के हिसाब से उच्च कीमत की फसलें बोनी होंगी ताकि किसानी को उच्च दाम मिल सके।

चंद्र प्रकाश शर्मा, दिल्ली

बड़ी उपलब्धि

चंडीगढ़ की मिस हरनाज संधू इस साल की ब्रह्माण्ड सुंदरी बनी। यह देशवासियों के लिए बहुत बड़ा सम्मान है। आधुनिक युग में लड़कियों को लड़कों के बराबर माना जाता है। इसलिए लड़कियों को सफलता पाने का पूरा मौका मिलता है और लड़कियां हर क्षेत्र में अपना हुनर ​​दिखा रही हैं। अब लड़कियों को अधिक से अधिक सशक्त बनाने का समय है। जिस घर में स्त्रियां शिक्षित होती हैं, वही घर शिक्षित और प्रगतिशील है। इसके साथ ही समाज भी शिक्षित होता है। आधी आबादी को शिक्षित और सम्मानित किया जाना चाहिए।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर, मंडी

आपकी राय Other

Dec 14, 2021

जीत-हार की राजनीति

दस दिसम्बर के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का लेख ‘जीत गए किसान, क्या भाजपा भी जीतेगी’ किसान आंदोलनकारियों और मोदी सरकार के बीच हुए समझौते के बाद उत्पन्न सवाल-जवाबों का मंथन करने वाला था। फिलहाल कहना जल्दबाजी होगी कि सालभर से जारी आंदोलन की कड़वाहट इतनी जल्द खत्म हो जाएगी। बाकी भारतीय जनता पार्टी के पास सबल तंत्र और संसाधन हैं, वे नये समीकरण गढ़ सकते हैं।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार

आंदोलन की सीख

साल भर से ज्यादा लंबे समय तक चले किसान आंदोलन की जत्थेबंदियां एक सुखद और उत्साहजनक अहसास के साथ वापस लौट रही हैं। बॉर्डरों से वापस लौट रहे किसानों के चेहरे पर जीत की खुशी साफ दिखाई दी‌। इस आंदोलन से बनी ऐतिहासिक एकता आने वाले दिनों में तमाम जनतंत्र प्रेमियों और संयुक्त संघर्षों में यकीन रखने वाले तमाम संगठनों और नागरिकों के लिए एक मिशाल बनेगी। किसानों के बीच अपने आंदोलन को अनुशासित तरीके से इस मुकाम पर ले जाने का यह एक अनूठा आंदोलन रहा है।

नरेश कुमार, रोहतक

एमएसपी की तार्किकता Other

Dec 13, 2021

जन संसद की राय है कि किसानों की आय बढ़ाने और आर्थिक सुरक्षा के लिये सरकार को पहल करनी चाहिए। लेकिन इसके साथ ही उन विसंगतियों को भी दूर करना चाहिए जो खेती के विविधीकरण, नकदी और ऊंची कीमत वाली फसलों के उत्पादन को निरुत्साहित करती हैं।

राजनीतिक विफलता

स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों के अनुरूप तैयार फॉर्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय नहीं करना सरकारों की वादाखिलाफी ही नहीं, एक राजनीतिक विफलता भी है। सत्तर के दशक से कृषि लागत, जिसमें डीजल, कृषि यंत्र, रासायनिक उर्वरक, बीज और श्रम के अनुपात में कृषि उत्पाद के मूल्यों में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई। किसान की आर्थिक दशा सुधारने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य संरक्षण कानून ही एकमात्र विकल्प है। संरक्षित न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए किसान फसल विविधीकरण और नकदी फसलों को ज्यादा उत्साह से अपनाएगा।

सुखबीर तंवर, गढ़ी नत्थे खां, गुरुग्राम

जागरूकता बढ़ेगी

न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों के लिए सुरक्षा के रूप में कार्य करता है, जिससे उनके उत्पादों के लिए एक तय धनराशि मिले और कीमतों में गिरावट पर उन पर अत्यधिक आर्थिक दुष्प्रभाव न पड़े। फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने से पोषक अनाजों की सुरक्षा और किसानों की आय में सुधार होगा। किसानों की आय बढ़ाने में फसलों की विविधता लाभप्रद साबित होगी। सरकार यदि अधिक फसलों को एमएसपी के दायरे में लाती है तो इससे फसलों के विविधीकरण के साथ ही नकदी फसलों के प्रति भी किसानों की जागरूकता बढ़ेगी।

सुनील महला, पटियाला, पंजाब

न्यायसंगत फैसला हो

यह बात समझ से परे है कि सरकार किसानों को एमएसपी की गारंटी क्यों नहीं देती। आज का किसान समझदार है, उसकी सोच वैज्ञानिक है। सरकार ने डॉ. स्वामीनाथन की सिफारिश पर एमएसपी मूल्य निर्धारण के फार्मूले को लागू करने में ईमानदारी नहीं दिखाई। सरकार किसानों को यह भरोसा भी नहीं दिला सकी कि नये कृषि कानून से किसानों का कोई अहित नहीं होगा। कृषि के क्षेत्र में हर राज्य में बहुत से अंतर हैं, चाहे जलवायु का, वातावरण का हो या अन्य। केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य में जो वृद्धि तय करती है, इससे कुछ राज्य के किसानों को इसका फायदा नहीं मिलता।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

शीघ्र फैसला हो

कृषि उत्थान हेतु गठित स्वामीनाथन कमेटी ने सरकार को अपनी तार्किक रिपोर्ट दी थी। गुजरात के मुख्यमंत्रित्व के कार्यकाल में ही इस कमेटी की सिफारिशों को नरेंद्र मोदी द्वारा समर्थन किये जाने से स्पष्ट होता है कि एमएसपी का लाभ किसानों को पहुंचाने में तार्किक आधार हैं। जिस तरह किसानों के हित में कृषि कानून वापस लिए गये हैं उसी तरह एमएसपी कानून बनाने की मांग में विलंब नहीं होना चाहिए। एमएसपी का मसला क्लिष्ट है, किंतु समाधान तो खोजना ही होगा। एमएसपी पर प्रधानमंत्री को अधिक लचीला रुख अपनाते हुए त्वरित निर्णय लेना होगा, क्योंकि स्वामीनाथन कमेटी ने पहले ही बहुत कुछ तय कर दिया है।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

मुश्किलें होंगी

न्यूनतम समर्थन मूल्य को किसान न्यूनतम बिक्री मूल्य बनाना चाहते हैं। दुनिया भर में गुणवत्ता के आधार पर चीज़ों का बिक्री मूल्य तय होता है और अप्रत्याशित लाभ को रोकने के लिए अधिकतम बिक्री मूल्य तो तय कर दिया जाता है किन्तु न्यूनतम नहीं। मशीनों में कंप्यूटरीकृत तरीकों से नहीं बनने के कारण कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव होता रहता है। अभी किसान निम्न गुणवत्ता की उपज एमएसपी से कम दाम पर आराम से बेच लेता है लेकिन एमएसपी के कानूनन बाध्य होते ही ऐसी फसलों को खरीदार आसानी से नहीं मिलेगा।

बृजेश माथुर, गाज़ियाबाद

आधार बढ़ाएं

केंद्र सरकार द्वारा खेती कानून वापस लेने के बाद भी किसान असंतुष्ट हैं। कारण सरकार द्वारा एमएसपी निर्धारण कानून को मंजूरी न देना। आज तक कई बैठकें इस विषय पर एक मत न हो सकी। इनका कथन है कि किसान वे ही फसलें उगा सकते हैं जो एमएसपी के तहत हों, अन्य दूसरी नहीं। ऐसे में फसलीय विविधता के अभाव में किसानों को विवश होकर कम कीमत पर अपना उत्पादन भारी नुकसान के साथ मंडियों में बेचना पड़ेगा। केंद्र सरकार को सभी फसलें एमएसपी में सम्मिलित कर किसान को लाभान्वित करना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

पुरस्कृत पत्र

ऊंचे दाम की फसलें

किसानों की सोच है कि एमएसपी कानून बनने से किसानों की आय बढ़ेगी, वहीं सरकार को पता है कि एमएसपी कानून बनने से देश पर बहुत ज्यादा अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। एमएसपी कानून बनने से किसान उस फसल की अधिक पैदावार करेगा और सरकार को वह फसल न चाहते हुए भी खरीदनी पड़ेगी। किसान व देश का हित इसी में है कि किसान ऊंची दाम वाली फसलों का उत्पादन करे, क्योंकि जहां अधिक कीमत वाली फसलों का उत्पादन होता है वहां एमएसपी की मांग नहीं होती। एमएसपी से भविष्य में कृषि व किसान की दिशा व दशा सुधारने के रास्ते बंद हो जाएंगे। देश में खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था भी असंतुलित हो सकती है।

सोहन लाल गौड़, बाहमनीवाला, कैथल

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Dec 11, 2021

बदलाव के अगुआ

हेलीकॉप्टर क्रैश में पहले चीफ और डिफेंस स्टाफ जनरल रावत, उनकी पत्नी और अन्य सभी सैनिकों की असामयिक मौत से पूरा राष्ट्र दुखी और सदमे में है। थल, जल और वायु सेना के बीच समन्वय से लेकर थियेटर कमांड बनाने तक की अहम जिम्मेदारी सीडीएस के पास थी। सीडीएस का जोर सेना के आधुनिकीकरण से लेकर स्वदेशीकरण तक रहा। सीडीएस रावत का हमेशा जोर तकनीक पर रहा। जनरल रावत साफ़ कहते थे कि हम तकनीक के मामले में चीन से पीछे हैं, ये कमी दूर करनी होगी। जनरल रावत सेना में रिफार्म करने वाले जनरल के रूप में याद किये जायेंगे।

चंद्र प्रकाश शर्मा, दिल्ली

शिक्षकों की बेकद्री

9 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का ‘मजदूर की दिहाड़ी से कम वेतन में शिक्षक’ पंजाब के मोहाली में मात्र छह हजार के मासिक वेतन पर पिछले 18 साल से कच्चे अध्यापकों द्वारा स्थाई नियुक्ति को लेकर प्रदर्शन हैरान करने वाला था। ऐसे अध्यापकों को राष्ट्र निर्माता कहना एक भद्दा मजाक लगता है। इतने लंबे समय तक कार्यरत मजदूरों से भी कम वेतन पाने वाले ऐसे शिक्षकों को पक्का करके उन्हें अन्य स्थाई सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतनमान तथा सुविधाएं अविलंब देनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

राहत दी जाये

नगालैंड में उग्रवाद से निपटने के लिए तैनात सेना द्वारा की गई कार्रवाई, संवेदनशील घटना है। माना कि सेना को ऐसे क्षेत्रों में बहुत संवेदनशील रहने की जरूरत होती है। इस घटना ने एक बार फिर चौकस निगरानी और अधिकतम सतर्कता बरतने की जरूरत दर्शायी है ताकि ऐसी घटना दुबारा न हो। सरकार पीड़ित परिवार को उचित मदद और उनके भरण-पोषण का जिम्मा ले ताकि वहां के लोगों में सरकार और सुरक्षा बलों के प्रति आक्रोश न पनपे।

अमृतलाल मारू, धार, म.प्र.

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Dec 10, 2021

स्वच्छता के अवरोध

वर्तमान सरकार स्वच्छता अभियान को लेकर बहुत गंभीर है। वहीं शौचालयों के निर्माण में भी विशेष उपलब्धियां हासिल की जा रही हैं। लेकिन यह देखकर हैरानी हुई कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित है। देवभूमि द्वारका की यात्रा पर पड़ने वाले ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर शौचालय तो बने हैं परंतु उसमें से सिर्फ पुरुष शौचालय ही खुले होते हैं। लेकिन उनकी दशा भी दयनीय ही है। महिला शौचालयों पर तो ताला ही जड़ा हुआ होता है। ऐसे में महिलाएं शौच के लिए कहां जाएं? ऐसी ही स्थिति धार्मिक स्थलों की भी देखने को मिली। पार्किंग में बने सार्वजनिक शौचालय पर भी ताला लगा पाया गया।

राजेंद्र कुमार शर्मा, रेवाड़ी

सावधानी में बचाव

कोविड-19 वायरस के अब तक के सबसे संक्रामक रूप ओमिक्रॉन के मरीज कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में भी मिले हैं। यह बात सही है कि अभी भारत में इसके मामले बहुत कम हैं, लेकिन इसकी संक्रामकता को ध्यान में रखते हुए जानकार यहां कोविड की तीसरी लहर की भविष्यवाणी करने लगे हैं। जाहिर है देर-सवेर इसका विस्फोटक रूप तीसरी लहर के रूप में सामने आ सकता है। केंद्र व राज्य सरकारों ने अभी से एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए जो कि स्वागतयोग्य है। सावधानी ही बचाव का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।

विभूति बुपक्या, आष्टा, म.प्र.

दुर्भाग्यपूर्ण घटना

बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर के जंगलों में हुई हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना में सीडीएस बिपिन रावत की मृत्यु से देश भर में शोक की लहर दौड़ गई। तीनों सेना के प्रमुख रावत ने देश को सैन्य शक्ति में एक अलग पहचान दिलायी है। यह हादसा देशवासियों के लिए बेहद दर्दनाक है। बिपिन रावत देश की सैन्य शक्ति को मजबूती प्रदान करने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। भारत को उनके जैसा लगनशील और मेहनती सीडीएस शायद ही मिल सकेगा।

अभिनव राज, नोएडा

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Dec 10, 2021

स्वच्छता के अवरोध

वर्तमान सरकार स्वच्छता अभियान को लेकर बहुत गंभीर है। वहीं शौचालयों के निर्माण में भी विशेष उपलब्धियां हासिल की जा रही हैं। लेकिन यह देखकर हैरानी हुई कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित है। देवभूमि द्वारका की यात्रा पर पड़ने वाले ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर शौचालय तो बने हैं परंतु उसमें से सिर्फ पुरुष शौचालय ही खुले होते हैं। लेकिन उनकी दशा भी दयनीय ही है। महिला शौचालयों पर तो ताला ही जड़ा हुआ होता है। ऐसे में महिलाएं शौच के लिए कहां जाएं? ऐसी ही स्थिति धार्मिक स्थलों की भी देखने को मिली। पार्किंग में बने सार्वजनिक शौचालय पर भी ताला लगा पाया गया।

राजेंद्र कुमार शर्मा, रेवाड़ी

सावधानी में बचाव

कोविड-19 वायरस के अब तक के सबसे संक्रामक रूप ओमिक्रॉन के मरीज कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में भी मिले हैं। यह बात सही है कि अभी भारत में इसके मामले बहुत कम हैं, लेकिन इसकी संक्रामकता को ध्यान में रखते हुए जानकार यहां कोविड की तीसरी लहर की भविष्यवाणी करने लगे हैं। जाहिर है देर-सवेर इसका विस्फोटक रूप तीसरी लहर के रूप में सामने आ सकता है। केंद्र व राज्य सरकारों ने अभी से एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए जो कि स्वागतयोग्य है। सावधानी ही बचाव का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।

विभूति बुपक्या, आष्टा, म.प्र.

दुर्भाग्यपूर्ण घटना

बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर के जंगलों में हुई हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना में सीडीएस बिपिन रावत की मृत्यु से देश भर में शोक की लहर दौड़ गई। तीनों सेना के प्रमुख रावत ने देश को सैन्य शक्ति में एक अलग पहचान दिलायी है। यह हादसा देशवासियों के लिए बेहद दर्दनाक है। बिपिन रावत देश की सैन्य शक्ति को मजबूती प्रदान करने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। भारत को उनके जैसा लगनशील और मेहनती सीडीएस शायद ही मिल सकेगा।

अभिनव राज, नोएडा

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Dec 09, 2021

प्रदूषण का संकट

देश में लगातार वायु प्रदूषण में हो रही वृद्धि से कई शहरों में एक्यूआई 300 से ऊपर पाए जाने की पुष्टि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों ने की है। प्रदूषित शहरों के नागरिक दमा, खांसी, फेफड़ों तथा चर्म आदि से रोगग्रस्त हैं। ‘ढाक के तीन पात’ संपादकीय में इस दिशा में हुए प्रयासों को नाकाफी मानना सही है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी राज्य सरकारें तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग व्यावहारिक रूप में पालन नहीं कर पा रहे हैं। समय रहते राज्य बोर्ड को तथा केंद्रीय बोर्ड को ही विशेषाधिकार और संसाधनों से लेस करना होगा।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

मुश्किल राह

उ.प्र. की सियासत आज कल चर्चाओं में है। एक ओर वर्तमान सत्ता है जो लगभग तीन दशकों से ज्यादा से निरंतर जारी सत्ता परिवर्तन के रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए हर कदम प्रयासरत है तो वहीं विपक्ष इस सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहता है। इसी क्रम में एनडीए अपने सहयोगी दलों के साथ लगातार सियासी समीकरण को साध रहा है। टिप्पणीकारों की मानें तो यूपी में आगामी वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बिगुल बज चुका है। इनका कहना है कि आगामी चुनाव किसी भी दल के लिए आसान नहीं होने वाला है।

गौरव दीक्षित, नोएडा, उ.प्र.

मूल्यों का संरक्षण

शिकागो में स्थापित होगा वैदिक कल्याण विश्वविद्यालय की ख़बर पढ़ी। इस विश्वविद्यालय में सनातन धर्म और हिंदू दर्शन से संबंधित विभिन्न कोर्स शुरू किए जाने की पहल प्रशंसनीय है। स्थापना का उद्देश्य सनातन धर्म के आदर्श और मूल्यों की शिक्षा देना, उनका संरक्षण करना और प्रचार-प्रसार कर आगे बढ़ाना है। इससे सनातन धर्म की समृद्धि का ही पता चलता है। विदेशों में सनातन धर्म और हिंदू दर्शन के प्रति बढ़ता आकर्षण उसकी महत्वता को दर्शाता है।

संजय वर्मा, मनावर, धार

आपकी राय Other

Dec 08, 2021

विश्वास बहाली हो

चार दिसंबर को दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित राजकुमार सिंह का ‘संवाद से पटेगी अविश्वास की खाई’ लेख किसान आंदोलन का महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो बताता है कि कृषि कानूनों की वापसी के बावजूद समस्या नहीं सुलझी है। उनकी और मांगें सामने खड़ी हो गयी हैं कि बिजली क़ानून की वापसी, एमएसपी क़ानून का बनाया जाना, दर्ज़ मुकदमों की वापसी और मृत किसानों को मुआवजा व शहीद का दर्जा दिया जाना। लेखक का आग्रह है कि सरकार व किसानों के बीच अविश्वास की बढ़ रही खाई को आपसी संवाद से ही पाटा जा सकता है। कृषि हमारे देश की मूल व्यवस्था है, इसीलिए राष्ट्रहित में सौहार्दपूर्ण ढंग से विचार-विमर्श करके दोनों पक्ष इसे शीघ्र सुलझा लें।

मीरा गौतम, जीरकपुर

राहत मिले

पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल क्यों नहीं किया गया। यूं तो सरकार एक देश एक टैक्स की बात करती है फिर पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच अनबन क्यों है। सरकार अगर ईंधन की कीमत में सुधार करना चाहती है तो केंद्र और राज्य सरकार आपसी बातचीत कर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल कर दें ताकि जनता को भी राहत मिले।

अभिनव राज, नोएडा

शीघ्र हल निकले

नीट काउंसलिंग में देरी की वजह से दिल्ली में रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर गये हैं। दिल्ली के कई अस्पतालों में डॉक्टर्स ओपीडी में नहीं पहुंच रहे। केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सभी अस्पतालों में मरीज इलाज के अभाव में मारे-मारे फिर रहे हैं। डॉक्टरों ने ओपीडी के साथ-साथ इमरजेंसी सेवा का भी बहिष्कार कर रखा है। सरकार डाक्टरों की समस्याओं का हल शीघ्र निकाले।

चंद्र प्रकाश शर्मा, दिल्ली

आपकी राय Other

Dec 07, 2021

संवाद से पटेगी खाई

चार दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का लेख ‘संवाद से पटेगी अविश्वास की खाई’ जहां किसान आंदोलन की मूल वजह को दर्शाता है, वहीं इसी समस्या का समाधान भी देता है। वहीं एक पक्ष यह भी है कि किसान आंदोलन के बहाने जमकर राजनीति हो रही थी, जिसका मकसद उत्तर प्रदेश, पंजाब व उत्तराखंड के आसन्न चुनावों पर प्रभाव डालना है। लेकिन यह भी हकीकत है दोनों पक्षों में अविश्वास की खाई गहरी बनी हुई है। प्रधानमंत्री का यह कहना वाजिब लगता है कि सरकार कृषि सुधारों की हकीकत को किसानों को समझाने में विफल रही है। लेकिन सबसे बड़ा संकट अविश्वास का है। यह अविश्वास कानूनों को लाते वक्त भी था। सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद किसान आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं है। किसानों को भरोसे में लेकर समस्या का हल निकाला जा सकता है।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, उत्तराखंड

असहनीय स्थिति

संसद लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है, जिसमें देश व जन हितैषी मुद्दों पर न केवल चर्चा होती है, बल्कि कानून बनाए जाते हैं। लेकिन विडंबना की बात है कि संसद की पवित्रता व गरिमा तथा उसके औचित्य को सांसद ही ठेस पहुंचा रहे हैं। जबकि मुद्दों पर तर्कसंगत बहस व चर्चा होनी चाहिए। अब ये हरकतें असहनीय होती जा रही हैं।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

अंगदान के लिए जागरूकता Other

Dec 06, 2021

सम्मानित करें

भारत में वर्ष 2019 में 12746 लोगों ने अंगदान किया था। देश में प्रतिवर्ष डेढ़ से दो लाख किडनी की आवश्यकता होती है जबकि केवल 4 प्रतिशत रोगियों को ही मिल पाती है। अस्सी हज़ार लोगों को लीवर की आवश्यकता होने पर केवल 1800 लोगों को ही इसका लाभ मिल पाता है। लगभग एक लाख लोगों को आंखों की आवश्यकता होती है जबकि पूर्ति आधे से भी कम है। इसकी वजह जागरूकता की कमी और अन्धविश्वास है। देहदान करने के इच्छुक व्यक्ति के परिवार को मरणोपरांत सम्मानित किया जाना चाहिए।

अशोक कुमार वर्मा, कुरुक्षेत्र


संस्थाएं आगे आएं

अंगदान को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रूप से अंगदान जागृति अभियान चलाए जाने की जरूरत है। इससे संबंधित मिथकों को भी दूर किए जाना चाहिए। धार्मिक आस्था के चलते भी कई लोग इससे किनारा कर लेते हैं। देशभर की सामाजिक संस्थाएं व सरकारें आम नागरिकों को यह जानकारी दें कि अंगदान करने से उन लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है जो कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। अंगदान करने से कई लोगों का जीवन बदला जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा से एक व्यक्ति के अंग दूसरे व्यक्ति में प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं। अंगदान करने वाले परिवारों को भी सम्मानित किया जाना चाहिए।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़


उदारता जरूरी

प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को अपनी मृत्यु होने की दशा में अंगदान के लिए घोषणा करनी चाहिए। जिससे अंग प्राप्त करने वाले का जीवन बच सके। ईश्वर ने किसी को सशक्त अंग दिए हैं तो उसे उनका धन्यवाद करना चाहिए और यह कोशिश करनी चाहिए कि वह किसी के काम आ सके। इस पुण्य काम के लिए प्रोत्साहन, आर्थिक लाभ आदि सरकार द्वारा घोषित करना चाहिए। ऐसे व्यक्तियों का सम्मान समाज और देश को करना चाहिए जो अन्यों के लिए प्रेरणा बन सके। परहित, दयालुता प्रत्येक की आदत में शुमार होना चाहिए।

भगवानदास छारिया, इंदौर


प्रेरक पहल हो

अंगदान के लिए आमजन को जागरूक करने के दो ही तरीके हैं। पहला प्रचार तंत्र को सशक्त किया जाये। दूसरा, लोगों की सोच में परिवर्तन लाना होगा कि देहदान द्वारा आप कई लोगों को एक नयी जिंदगी दे सकते हैं। इसके साथ ही चिकित्सा-तंत्र इतना व्यवस्थित, जागरूक हो कि आमजन के लिए उपलब्ध हो। इसलिए जरूरी है कि सरकार पहले संसाधन विकसित करे, चिकित्सा-तंत्र का विकास करे, सुविधाएं उपलब्ध करवाये, और विश्वास बहाल हो उसके उपरान्त जागरूकता अभियान, तब कहीं जाकर किसी की मृत्यु के पश्चात उससे अंगदान की आशा करनी चाहिए।

कविता सूद, पंचकूला


प्रचार-प्रसार हो

देश में अंगदान जहां मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए लाभदायक है वहीं अंगों का प्रत्यारोपण करके कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। अंगदान को बढ़ावा देने की उपयोगिता के बारे में बताया जाना चाहिए। कोई भी मनुष्य नेत्रदान, लीवर तथा किडनी दान कर सकता है। अंगदान के लिए लोगों को प्रेरित करना चाहिए। अंगदान करने वाले व्यक्ति के परिवार को सम्मानित किया जाना चाहिए। ऐसे व्यक्ति के परिवार को इलाज के लिए व्यय में छूट दी जा सकती है। लावारिस शरीर का उपयोग अंगदान के लिए किया जा सकता है। इसके प्रभावशाली प्रचार की बहुत ही जरूरत है।

शामलाल कौशल, रोहतक


जागरूकता जरूरी

अंगदान महापुण्य का काम है। अंगदान जीते जी और इंसान की मृत्यु के बाद भी किया जा सकता है। अगर समय पर शरीर का कोई अंग खराब हो जाने पर नहीं मिल पाए तो उस व्यक्ति की जिन्दगी खराब हो जाती है। देश में लोगों को अंगदान प्रेरित करने की जरूरत है। सरकारी तंत्र और सामाजिक संगठनों द्वारा लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए कि अंगदान द्वारा कई लोगों की जिन्दगी को संवारने का काम किया जा सकता है। यह सब सरकारी तंत्र के सहयोग ओर सामाजिक संगठनों द्वारा किया जा सकता है। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें सम्मानित करने की भी जरूरत है।

जयदेव राठी, भराण, रोहतक


पुरस्कृत पत्र

अंगदान महादान

यूं तो हर दान महत्वपूर्ण और कल्याणकारक है फिर भी अंगदान को महादान कहा जाता है। अंगदान-देहदान की देश में पुरानी परम्परा रही है। शिवि, दधीचि के उदाहरण हमारे समक्ष हैं। वर्तमान में देहांगों की मांग व आपूर्ति में बड़ा अन्तर है। प्राय: लोग यह मान लेते हैं कि अंग भंग होने की स्थिति में मुक्ति नहीं मिलती, अगले जन्म में उस अंग से वंचित होना पड़ता है। यह मान्यता अंगदान अभियान की बाधक है। लोगों में विभिन्न माध्यमों से संवेदनशीलता, जागरूकता व तर्कशीलता जगाने, अंगदान की समुचित प्रणाली विकसित करने तथा मन में भ्रम की काई को हटाने की जरूरत है।

कृष्णलता यादव, गुरुग्राम

आपकी राय Other

Dec 04, 2021

सामंजस्य जरूरी

2 दिसंबर के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘स्वस्थ परंपराओं का निर्वहन करें पक्ष-विपक्ष’ संसद की कार्रवाई चलाने में जनप्रतिनिधियों द्वारा एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाकर विभिन्न बिलों तथा बजट पर बहस करके उन्हें पास करने का सुझाव देने वाला था। किसी भी विषय को दोनों पक्ष अपनी झूठी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने के बदले एक-दूसरे का मान-सम्मान करते हुए मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करें। बेशक संसद की कार्रवाई सुचारु ढंग से चलाने की जिम्मेवारी सत्तापक्ष की है लेकिन विपक्ष को भी विरोध के बदले में विरोध की नीति नहीं अपनानी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

भटकाव की राजनीति

भारतीय राजनीति में आज एक-दूसरे की नीतियों की बजाय व्यक्तिगत आक्षेप अधिक लगने लगे हैं। सरकार की किसी भी उपलब्धि को स्वीकार करना तो दूर, उसे असंवैधानिक और देश के लिए घातक बताने का प्रयास किया जाता है। चाहे वह देशहित में ही क्यों न हो। पुलवामा अटैक के प्रत्युत्तर में भारत सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक करवाई तो विपक्षियों ने इसे झूठी कार्रवाई बताया। सरकार कोई कानून अपनी प्रजा के हित के लिए ही बनाती है। ऐसा हो नहीं सकता कि चंद उद्यमियों के फायदे के लिये सरकार कोई कानून बनाये।

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी

गरीबी का दंश

28 नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून के अध्ययन कक्ष अंक में धर्मवीर भारती की ‘मुरदों का गांव’ कहानी आजादी से पूर्व ग्रामीण भारत में गरीबी के हालातों का खुलासा करने वाली थी। गांव की दर्दनाक पीड़ा का दृश्य दिल दहलाने वाला था। 21वीं सदी में जीते हुए भी गरीबी का आलम कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान भूखे प्यासे मरते लोगों का स्मरण रोंगटे खड़ा करने वाला था। सत्तारूढ़ दल गरीबी हटाने- मिटाने के लिए दृढ़ संकल्प है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Dec 03, 2021

सावधानी ही उपचार

अभी बीते कुछ माह से जनता ने कोविड के संक्रमण मामलों से थोड़ी राहत भरी सांस ली ही थी कि महामारी के रूप में नये ओमीक्रॉन वायरस के संक्रमण की खबरें आने लगी हैं। इसकी म्यूटेशन क्षमता अन्य की अपेक्षा ज्यादा ही है। दक्षिण अफ्रीका से निकले इस वायरस ने यूरोपीय देशों में डर का माहौल पैदा कर रखा है। कुछ दिनों के अंदर ही दो दर्जन से ज्यादा देशों में यह खतरनाक वैरियंट पहुंच चुका है। यूरोप के प्रमुख देशों ने इसको लेकर एमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया है। अनेक राष्ट्रों ने अपने अपने बॉर्डर सील कर रखे हैं। भारत सरकार भी इसको लेकर सख्त नजर आ रही है। 

गौरव दीक्षित, नोएडा, उ.प्र.


उपेक्षित न रहें

तीन दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दिव्यांगों का सशक्तीकरण और इनके लिए समान अधिकार और विकास संभावनाओं की सुनिश्चितता करना भी है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि दिव्यांगों के लिए सरकार ने कोई नीति अमल में न लाई हो, बेशक उन नीतियों को भ्रष्टाचार का ग्रहण भी लगता हो। बहुत-सी सामाजिक संस्थाएं आज भी इनकी भलाई के लिए अग्रसर हैं ताकि दिव्यांग अपने आप को समाज में उपेक्षित न समझें। 

राजेश कुमार चौहान, जालंधर


सतर्कता जरूरी

कोरोना महामारी के दौर में एक चिंता बढ़ा देने वाली खबर ने पिछले कुछ दिनों से लोगों को पशोपेश में डाला हुआ है। कोरोना के एक नये वैरिएंट ओमिक्राॅन की पहचान कई देशों में की गई जो पिछले सभी वैरिएंटों से भी घातक बताया जा रहा है। साथ ही इसे कोरोना का तीसरा चरण भी बताया जा रहा है। ऐसे में हमें बच्चों पर खास ध्यान देने की जरूरत है। टीकाकरण भी बच्चों का नहीं हो पाया है। ऐसे में बेवजह खुद और बच्चों को घर से बाहर जाने से रोकें। इसके साथ ही सरकार द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करना भी हमारी जिम्मेवारी है। 

श्याम मिश्रा, दिल्ली

आपकी राय

Dec 02, 2021

निर्यात मोह

30 नवंबर के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का लेख ‘घरेलू उद्योगों की कीमत पर ना हो निर्यात’ इस विषय पर चर्चा करने वाला था। सस्ती वस्तुएं आयात करने से हमारी क्रय शक्ति कम हो जाती है। देश में मांग के कम हो जाने से उद्योगों को नुकसान पहुंचता है। हमें महंगा होने के बावजूद भी वस्तुओं को अपने देश में पैदा करना चाहिए। इससे रोजगार बढ़ेगा। हमें विदेशों से केवल वही वस्तुएं आयात करनी चाहिए जो बहुत जरूरी हैं। 

शाम लाल कौशल, रोहतक


जीना मुहाल

इस महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है। वेतनभोगी लोगों, श्रमिक वर्ग और पेंशनभोगियों जैसे निश्चित आय समूह सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उनके लिए गेहूं, दाल, अनाज, सब्जियां आदि मूलभूत आवश्यकताओं की वस्तुएं भी पहुंच से बाहर हो रही हैं। कीमत में हर वृद्धि उनके बजट को बिगाड़ देती है। सरकार को इस समस्या से हर संभव तरीके से निपटना चाहिए। जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। 

नैन्सी गर्ग, भिखी, पंजाब


सबक लें

चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र हादसा और भोपाल गैस कांड दो ऐसी घटनाएं हैं, जिन्होंने आधुनिक दुनिया में औद्योगिक सभ्यता के खतरों को उभारा है। ऊंचे मानदंडों का पालन करना, पर्यावरण रक्षा के कानून सख्त बनाने के साथ उन पर अमल की कुशल व्यवस्था रखने से ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। इस दर्द को हम भूल नहीं सकते, लेकिन इससे सीख लेकर भविष्य को जरूर सुधारा जा सकता है।

 विभूति बुपक्या, आष्टा, म. प्र. 


सतर्कता जरूरी

दक्षिण अफ्रीका में मिले नए कोरोना वेरिएंट बी.1.1. 529 से इस समय दुनिया में हलचल मची हुई है। हालांकि प्रारंभिक तौर पर इसकी विस्तृत जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन भी नहीं दे पाया है कि इसकी घातकता कितनी होगी या टीकाकरण के बावजूद कितना असर डालेगा? फिर भी सतर्कता जरूरी है। 

अमृतलाल मारू 'रवि', धार

आपकी राय Other

Dec 01, 2021

दिल्ली दूर है

27 नवंबर को दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित राजकुमार सिंह का ‘मोदी से पहले राहुल का विकल्प बनती ममता’ लेख में ममता को राहुल का विकल्प बन जाने की बात कही गयी है, परन्तु ममता हर स्थिति में राहुल से मजबूत हैं। अनुभव और अपने प्रदेश की जड़ों को समझने वाली बंगाल की शेरनी को यदि मोदी का विकल्प बनना है तो उन्हें अपनी राजनीति को संयमित करना होगा। ममता बंगाल से आगे बढ़ने के लिए पहले देश की नब्ज़ पकड़े, न कि राजा बनने के लिए गठजोड़ बैठाती फिरें।

मीरा गौतम, जीरकपुर

विकास पर मोहर

भाजपा ने त्रिपुरा महानगरपालिका में बहुमत हासिल कर विपक्ष को शिकस्त दी है। 334 में से 329 भाजपा की क्लीन स्वीप से भाजपा में एक बार फिर उत्साह देखने को मिल रहा है। मतदाताओं ने विकास को पसंद कर भाजपा को वोट दिया। सीपीआईएम और तृणमूल कांग्रेस को कुल चार सीटें हासिल हुई हैं। आज के दौर में मतदाताओं को भ्रमित नहीं किया जा सकता है। झूठे सपने दिखाकर वोट नहीं लिया जा सकता है।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

फिर खतरा

दस नवंबर से अब तक दक्षिण अफ्रीका से देश में करीब 1000 यात्री आ चुके हैं। उन यात्रियों की वजह से ओमीक्रॉन भारत में भी दस्तक दे सकता है। भारत को लॉकडाउन के बजाय आने वाले वायरस की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। साथ ही मास्क सेनिटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।

निष्ठा, यमुनानगर