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Aug 11, 2022

पर्व का मर्म

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में नया रंग भरने और प्यार के बंधन में और मिठास घोलने के लिए रक्षाबंधन मनाया जाता है। रक्षाबंधन किसी धर्म विशेष के लिए नहीं, बल्कि हर धर्म के लिए प्रेरक और आदर्श है। इस त्योहार के साथ हिंदू-मुस्लिम एकता को दर्शाने वाले उदाहरण भी हैं। हर त्योहार और पर्व को मनाने के साथ, उसके इतिहास को जानना चाहिए ताकि त्योहारों-पर्वों का मान बना रहे।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

सख्त कार्रवाई हो

प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का धरती या नदी-नालों में इकट्ठा होना प्लास्टिक प्रदूषण कहलाता है। प्लास्टिक भूमि प्रदूषण को भी बढ़ाता है। वहीं प्लास्टिक को जलाने से कई हानिकारक गैसें निकलती हैं जो मनुष्य और जीव-जंतुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं। हाल में ही सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाई है लेकिन अभी भी प्लास्टिक से बनी बहुत वस्तुओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार को ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। तभी हम धरती के स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं।

अकांक्षा कंसल, मंडी गोबिंदगढ़

चीन की बौखलाहट

दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘चीन से चौकन्ना’ में उल्लेखित है कि आजकल चीन भारत के खिलाफ अकारण जहर उगल रहा है। गलत जानकारी देकर चीन दुनिया को भी गुमराह कर रहा है। यद्यपि क्वाड की सक्रियता से भी चीन में बौखलाहट है। हाल ही के दिनों में पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीनी गतिविधियों को देखा गया, जिससे पता चलता है कि चीन विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का इच्छुक नहीं है। सीमा पर गतिरोध पैदा करके वह भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाना चाहता है। भारत के खिलाफ चीन चाहे जितना अपना पक्ष मजबूत करे किंतु अंततः असफलता ही हाथ लगेगी। फिर भी चीन के प्रति भारत को चौकन्ना रहना होगा।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

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Aug 10, 2022

स्मारक के मायने

आठ अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित खबर ‘विभाजन विभीषिका : शहीदों की सुध ली पहली बार’ भारत विभाजन से आहत लोगों तथा उनके परिवार के सदस्यों के लिए राहत देने वाली थी। ऐसे लोग प्रधानमंत्री, की इस बात के लिए प्रशंसा करते हैं कि हर साल 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाया जाएगा। भारत विभाजन के समय भारत आने वाले लोगों की याद में कुरुक्षेत्र में ‘शहीद स्मारक’ बनाने की योजना के लिए प्रभावित लोग ऋणी रहेंगे।

शामलाल कौशल, रोहतक

हॉकी का हश्र

कॉमनवेल्थ गेम में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हॉकी में 7-0 से शिकस्त दी। हॉकी प्रेमियों के लिए तो यह किसी आघात से कम नहीं है। वर्ष 2020 में भारतीय टीम ने टोक्यो में आयोजित ओलंपिक खेलों में जर्मनी को हराकर कांस्य पदक जीता था। तब लगा था कि भारत का स्वर्णमय इतिहास लौट आया है। लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में फाइनल मैच में आस्ट्रेलिया के सामने जिस प्रकार हॉकी टीम धराशायी हुई है, उसके लिए भारत के खेल मंत्रालय, हॉकी संघ और रणनीतिकारों को गंभीर मंथन करने की जरूरत है।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

मवेशियों में संक्रमण

राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में मवेशियों में संक्रमण फैल रहा है, जिसे लंपी स्किन रोग कहा जाता है। लोगों ने डेयरी उत्पादों पर भी विराम लगा दिया है ताकि संक्रमण मनुष्यों को नुकसान न पहुंचा पाए। जरूरी है कि मवेशियों की उचित चिकित्सा व देखभाल की जाये ताकि इससे जीवन के लिए खतरा न बढ़े। सरकारों को इसके लिए उचित कदम उठाने तथा रोग को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

पारुल गुप्ता, फतेहगढ़ साहिब

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

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Aug 09, 2022

खिलाड़ियों का दमखम

आठ अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘सोने चांदी का हरियाणा’ राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों द्वारा 9 स्वर्ण समेत 16 पदक देश की झोली में डालने पर सिर गर्व से ऊंचा कर गया। यह खिलाड़ियों की प्रतिभा तथा सरकारी नीतियों का ही परिणाम है। खिलाड़ियों द्वारा बेहतरीन उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व हरियाणा मंत्रिमंडल ने विजेताओं की हौसला अफजाई की है। खिलाड़ियों ने ओलंपिक के बाद राष्ट्रमंडल खेलों में भी देश का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमका दिया है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

तिरंगे की शान

राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए सरकार ने बड़े बदलाव किए हैं। नये बदलाव के बाद अब लोग अपने घरों या खुले स्थान पर दिन-रात दोनों समय झंडा फहरा सकेंगे। इसके अलावा पॉलिएस्टर से बने झंडे फहराने की अनुमति भी दी गई है। निश्चित रूप से सरकार का यह कदम लोगों की देश और झंडे के प्रति वफादारी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

अमृतलाल मारू, महालक्ष्मी नगर, इंदौर

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प्राकृतिक संपदा संरक्षण Other

Aug 08, 2022

सबका सहयोग

कई सरकारें आयी-गयी लेकिन हरियाणा में खनन माफिया का अवैध धंधा प्रशासन की आंखों तले फलता-फूलता रहा है जिसे रोकने का प्रयास करने के दौरान एक कर्तव्यनिष्ठ डीएसपी की हत्या कर दी गई। वह अपराधियों को अवैध खनन से रोक रहा था। लेकिन अवैध खनन रोकना अकेले प्रशासन की जिम्मेवारी नहीं है अपितु इसके लिए जन जागरूकता की जरूरत है। वहीं अवैध खनन में लिप्त लोगों की सूचना पुलिस प्रशासन तक पहुंचाने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाना चाहिए। प्राकृतिक संपदा के रखरखाव के लिए आम आदमी का सहयोग जरूरी है। पर्याप्त पुलिस बल की मदद से कानून सख्ती से लागू करना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

हमारी जिम्मेदारी

हम सदियों से पहाड़ों, नदियों वृक्षों आदि प्राकृतिक संपदा की पूजा-अर्चना और संरक्षण करते आए हैं, क्योंकि इनकी वजह से ही हमारा जीवन-प्राण कायम हैं। मगर अनेक वर्षों से हम विकास के नाम पर एवं स्वार्थवश अपने इन जीवन के आधारों का विनाश करने में लगे हैं, जिसके परिणाम आज भिन्न-भिन्न त्रासदियों के रूप में भुगत रहे हैं। इसलिए सरकारी एजेंसियों की ओर न देखते हुए हमें अपना दायित्व निभाने के लिए इनके संरक्षण की जिम्मेदारी स्वयं संभालनी होगी।

एमएल शर्मा, कुरुक्षेत्र

पौधरोपण करें

प्रकृति में संतुलन के लिए प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि घर, मोहल्ले, शहर के बाग-बगीचों में पौधरोपण करे। हर घर में पानी का रिचार्ज प्लांट लगाना चाहिए जिससे जमीन में पानी संगृहीत हो सके। ड्रेनेज लाइन सड़कों के आसपास होनी चाहिए जिससे पानी बह कर नालों एवं नदियों में मिल सके। नदी-नालों की गाद समय-समय पर निकलती रहे, जिससे पानी गहराई तक संचित रहे। वहीं सोलर ऊर्जा का भरपूर इस्तेमाल किया जाए ताकि पानी की ऊर्जा से बिजली बनाने में खर्च कम हो। लोगों को घरों में सोलर एनर्जी उपकरण लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

भगवानदास छारिया, सोमानी नगर, इंदौर

सख्त कार्रवाई हो

देश की प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा की जितनी जिम्मेदारी सरकार, पुलिस तथा कोर्ट की है उतनी ही देश के प्रत्येक नागरिक की भी है। इस संबंध में सभी नागरिकों को सरकार के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त यह भी जरूरी है कि सरकारी तंत्र भी सजग रह कर इस दिशा में कार्य करे ताकि माफिया मजबूत न हो सके। माफिया तंत्र पर अंकुश लगाने के लिए कानून को और अधिक सख्त बनाया जाए तथा इस प्रकार के अपराधियों के विरुद्ध अविलंब सख्त कार्रवाई की जाए, तभी प्राकृतिक संपदा का संरक्षण हो सकेगा।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

गंभीर प्रयास जरूरी

प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए हमें उतना ही गंभीर होना चाहिए, जितना कि हम अपनी सुख-सुविधाओं और खानपान के लिए होते हैं। हम भौतिकतावाद और आधुनिकता की चकाचौंध में सही दृष्टि गंवा चुके हैं, और अपने स्वार्थ के लिए प्राकृतिक संपदा को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी गलतियों का खमियाजा हमें आज नहीं तो कल भुगतना पड़ेगा। अगर भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से बचना है तो अभी से प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। इसके लिए सरकारों का मुंह नहीं ताकना चाहिए।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

आम आदमी मूकदर्शक

अवैध खनन का कारोबार देश के हर कोने में धड़ल्ले से चल रहा है। देश का एक वर्ग जिसे राजनीतिक दलों का संरक्षण भी प्राप्त है, विभिन्न प्राकृतिक संपदाओं को दोनों हाथों से लूटने पर लगा है। कानून का खौफ इस माफिया को नहीं है। तावड़ू हत्याकांड से पूर्व भी कई पुलिस अधिकारियों की जानें जा चुकी हैं लेकिन सरकारों सब कुछ देखते हुए भी अनदेखी कर देती हैं। लकड़ी, रेत और पहाड़ों की इस लूट में कई विभागों के कुछ लोग भी लिप्त हैं। कुछ दिन सुर्खियां बनने के बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है। वहीं प्राकृतिक संपदा के संरक्षण में आम आदमी मूकदर्शक है।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

पुरस्कृत पत्र

नीतियों में खामियां

सरकारी तंत्र की खामियों के चलते देश में खनन माफिया मजबूत होता जा रहा है। दशकों से जारी अवैध खनन पर तंत्र की उदासीनता के चलते नकेल नहीं कसी जा सकी। अवैध खनन को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बलों के साथ ही छापेमारी की जानी चाहिए। आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन आदि का सहारा लेकर निगरानी की जानी चाहिए। दरअसल, जनसंख्या वृद्धि और भौतिक जरूरतों के लिए हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से दोहन करते जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने लगा है। प्रकृतिक संपदा हमारी पूंजी है जिसका लाभकारी कार्यों में सुनियोजित ढंग से उपयोग होना चाहिए।

पूनम कश्यप, नयी दिल्ली

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Aug 06, 2022

असफल प्रयास

पाकिस्तान ने आजकल तुर्की को भारत विरोध का नया अड्डा बनाया है। चाहे मदरसों के लिए फंडिंग हो या फिर अन्य कोई फंडिंग- हर मामले में पाकिस्तान तुर्की को आगे बढ़ा कर काम करवा रहा है। अब कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा वार में तुर्की उसकी मदद कर रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद से आज वहां शांति की स्थापना हुई है। उससे पाकिस्तान सरकार बौखला गई है। अतः अब उसने तुर्की को मोहरा बनाकर भारत एवं कश्मीर विरोधी अड्डा बनाने का एक प्रयास किया है।

एमएम राजावत राज, शाजापुर

कमजोर विपक्ष

हाल ही में अमित शाह ने पटना में कहा कि आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पिछले दो बार की तुलना में और अधिक सीटें जीतेगी। यह सही है कि भाजपा अपने मजबूत कदमों से विपक्ष को पछाड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके अलावा उसके पास बड़ा संगठन भी है जो निरंतर काम में लगा है। दूसरी ओर विपक्ष अब प्रायः कमजोर ही है। तृणमूल कांग्रेस समेत आज कई विपक्षी पार्टियों के दामन पर भी दाग दिखाई दे रहे हैं। आम आदमी पार्टी की भी कलई खुलने लगी है।

वेद मामूरपुर, नरेला

मानव ही दोषी

इकतीस जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून लहरें अंक में डॉ. संजय वर्मा का ‘मौसम को बम बनाने वाला कौन’ लेख मानवता को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सजग करने वाला व विश्लेषण परक रहा। विकास की अंधी दौड़ में औद्योगिक फैक्टरियों से विषैला रासायनिक जल, चिमनियों का धुआं, वृक्षों का कटान, अवैध खनन इत्यादि ग्लोबल वार्मिंग के लिये उत्तरदायी हैं। शासनाधीशों को आपदाओं के उपचार-निदान के विषय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार करना चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Aug 05, 2022

पीड़ा का हो अहसास

तीन अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का लेख ‘आम आदमी की पीड़ा का भी हो अहसास’ महंगाई के मुद्दे पर सदन में चर्चा के बाद सत्तापक्ष तथा विपक्ष को जनता की समस्याओं पर विचार करने तथा समाधान करने का सुझाव देने वाला था। इस बार दोनों पक्षों के रवैये के कारण संसद में जो गतिरोध उत्पन्न हुआ उससे जनता के करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। संसद में बहस का मतलब यह होता है कि किसी मुद्दे पर गंभीरता से चिंतन हो और बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान हो। दोनों पक्षों को सौहार्दपूर्ण तथा गरिमामय ढंग से विभिन्न समस्याओं को हल करने के लिए सदन को चलाना चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

महंगाई की मार

संसद में महंगाई पर चर्चा के दौरान सांसद जयंत सिन्हा ने जिस ढंग से कहा कि मुझे तो महंगाई ढूंढ़ने से भी नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने सही तो कहा है। महंगाई है कहां? जनता के वोट से चुने गए जनप्रतिनिधियों को इतने भारी-भरकम वेतन, भत्ते व सुख-सुविधाएं मिलती हैं तो भला इन्हें महंगाई ढूंढ़ने से भी कहां मिलेगी! असल में महंगाई तो नजर उस आम आदमी को ही आयेगी जिसकी मेहनत की सीमित कमाई हो और उपलब्ध साधनों में ही घर खर्च चलाना हो।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

बेटियों का जज्बा

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की बेटियों ने लॉन बॉल्स प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड को करारी मात देने के बाद भारतीय महिला टीम ने दक्षिण अफ्रीका को फाइनल में हराया। यह जानकर बेहद आश्चर्य हुआ कि कोई सरकारी मदद और कोच न होने के बावजूद इन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। भारत के खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण, ओलंपिक संघ आदि संस्थाओं को इन खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देना चाहिए।

वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

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Aug 04, 2022

संस्कृति संरक्षण जरूरी

भारत में भाषा-वेशभूषा-खान-पान और रीति-रिवाजों की विभिन्नताओं में एकता व समानता देखने में आती है। लेकिन पिछले कई वर्षों से अब बहुत कुछ बदल गया है। तीज के त्योहार में महिलाएं झूला झूलती हैं। यह एक परंपरा भी है। लेकिन समय के साथ आज गांवों में पीपल के पेड़ नहीं रहे। त्योहार आज रस्म अदायगी तक सीमित रह गये हैं। विकल्प तलाशे जाएं तो गांवों और नगरों में भी सरकारी तौर पर ‘तीज पार्क’ बनाये जा सकते हैं। उनमें पीपल के पौधे रोपे जायें तो कुछ वर्षों बाद हमारी तीज की परंपरा रंग बरसाना शुरू कर देगी। हरियाणा सरकार की ओर से ‘तीज पार्क’ बनाने की दिशा में ध्यान दिया जाये।

सरोज दहिया, हलालपुर, सोनीपत

प्रदूषण समस्या

आज दिन-प्रतिदिन दूषित होता पर्यावरण लोगों के लिए जटिल समस्या बनता जा रहा है। दरअसल, पर्यावरण प्रदूषित करने वाली फैक्टरियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। पर्यावरण हितैषी उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। हानिकारक कीटनाशकों को प्रतिबंधित कर जैविक व इको फ्रेंडली उत्पादों पर जोर दिया जाना चाहिए। पर्यावरण को बचाने के लिए आमजन को भी मिलकर उचित कदम उठाने चाहिए।

श्याम मिश्रा, दिल्ली

परेशानी में मरीज

अफसोस की बात है कि पीजीआई ने पंजाब के मरीजों का इलाज रोक दिया क्योंकि बकाया भुगतान नहीं किया गया था। पंजाब सरकार पर लगभग 16 करोड़ रुपये का बोझ है, जो कि बहुत बड़ी राशि है। इस कारण योजना के तहत इलाज करवाने वाले लोगों का इलाज बंद हो गया है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को हो रही है। सरकार को जल्द से जल्द बिलों का भुगतान करना चाहिए ताकि लोगों को परेशानी न हो।

पारुल गुप्ता, फतेहगढ़ साहिब

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Aug 03, 2022

बर्बाद होता अनाज

सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के अनुसार पिछले वित्तवर्ष के दौरान अनाज के ठीक से भण्डारण व रखरखाव के अभाव में करीब सत्रह सौ टन अनाज बर्बाद हो गया। सोचा जा सकता है कि इतने अनाज से कितने परिवारों का कितने वक्त तक पेट भरा जा सकता था। वहीं, समय पर सरकारी खरीद न हो पाने बेमौसम बरसात, अंधड़ आदि के कारण किसानों का कितना अनाज बर्बाद चला जाता है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। आज विश्व के अधिकांश देश खाद्यान्न संकट से जूझ रहे हैं। वहीं भारत में भी खाद्यान्न के दाम निरंतर बढ़ते ही जा रहे हैं। इसी विकट स्थिति में रखरखाव के अभाव में हजारों टन गेहूं बर्बाद हो जाना एक अपराध है। जीवन की मूलभूत आवश्यकता अनाज का बड़े गोदामों के अभाव में बर्बाद हो जाना एक विचारणीय प्रश्न है।

सुभाष बुड़ावनवाला, रतलाम, म.प्र.

सख्त सज़ा मिले

पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मामले की जांच में राज्य के मंत्री और उनकी करीबी के पास से ईडी को जो कुबेर का खजाना मिल रहा है, वह हैरान करने वाला है। विडंबना की बात है कि एक तरफ जनता भुखमरी, गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी से दो-दो हाथ कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उसी जनता के वोटों से जीते मंत्री घोटाले, भ्रष्टाचार कर खजाना भर रहे हैं। इनकी न केवल सम्पूर्ण संपत्ति जब्त की जाए, बल्कि जनता को धोखा देने के आरोप में ऐसे लोगों को सख्त सजा भी मिले।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

ताकत का नशा

प्रथम अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘अभद्रता की राजनीति’ राजनेताओं द्वारा सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए संबंधित अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करने का पर्दाफाश करने वाला था। पंजाब के सेहत मंत्री द्वारा डॉ. राजबहादुर को मेडिकल यूनिवर्सिटी में सुविधाओं के अभाव के मामले में व्यक्तिगत तौर पर अपमानित करना निंदनीय है। ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए कि डॉ. राजबहादुर को सम्मान के साथ वही पद दोबारा सौंपा जा सके।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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आपकी राय Other

Aug 02, 2022

रेल यात्रा में छूट मिले

भारत में लगभग 14 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं। अफसोस की बात है कि सरकार ने वित्तीय संकट का मुकाबला करने के लिए वरिष्ठ नागरिकों को रेल यात्रा करते समय जो 50 प्रतिशत छूट दे रखी थी उसे वापस ले लिया है। सरकार कॉर्पोरेट जगत को हर साल अरबों रुपए की सब्सिडी देती है, उसके मुकाबले में वरिष्ठ नागरिकों को रेल यात्रा में 50 प्रतिशत छूट देकर केवल 1500 करोड़ रुपये खर्च करना सरकार के लिए बहुत मामूली बात है। सरकार से निवेदन है कि वरिष्ठ नागरिकों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए छूट देकर उनका सम्मान बढ़ाए।

शामलाल कौशल, रोहतक

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रेवड़ी कल्चर के खतरे Other

Aug 01, 2022

विकास में बाधक

‘रेवड़ी कल्चर’ यानी कि मुफ्त की सौगातें देश के विकास के लिए नुकसानदेह हैं। ऐसे चलन से एक तरफ तो वित्तीय अस्त-व्यस्तता होती है तो दूसरी तरफ सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है। जिसकी मार कर दाताओं पर पड़ती है तथा सेवाओं की गुणवत्ता की कमी से आमजन को इसके परिणाम झेलने पड़ते हैं। श्रीलंका संकट हमारे सम्मुख है। मुफ्त की सौगातें देने की बजाय सरकारें जनता को रोजगार, महंगाई से राहत, बिजली-पानी का उचित प्रबंध करें। केवल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं ही मुफ्त हों बाकी मुफ्त की चीजें इंसान को निकम्मा बना देती हैं।

रवि नागरा नौशहरा, साढौरा

वित्तीय असंतुलन

राजनीतिक दलों द्वारा वोटों के धुव्रीकरण के लिए मुफ्त सेवाएं देने की योजनाएं बनाना राष्ट्र को पराभव की ओर धकेलने के समान है। इस मामले में कोई भी दल एक-दूसरे पर उंगली उठाने लायक नहीं है। हमाम में सब एक जैसे हैं। ऐसी योजनाओं से लोगों में अकर्मण्यता पैदा होती है। सामाजिक विद्वेष बढ़ता है। वित्तीय संतुलन डगमगाने लगता है। जिन्हें इस तरह की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता वे भ्रष्टाचार का सहारा लेते हैं। उच्चतम न्यायालय ऐसी योजनाओं पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाए।

सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’, महम

घातक प्रभाव

रेवड़ी कल्चर देश के विकास के लिए घातक है। चुनावों के समय विभिन्न राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने जाल में फंसाने के लिए जो मुफ्त की सुविधाएं देने का वादा करते हैं उन्हें पूरा करने के लिए सरकार को या तो नए टैक्स लगाने पड़ते हैं या फिर उधार लेना पड़ता है जिसका कि विकास, कल्याण तथा देश की सुरक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ता है। सार्वजनिक निवेश कम होता है, उत्पादन तथा रोजगार कम होता है और महंगाई बढ़ती है और स्थिति श्रीलंका की तरह हो जाती है। अतः आर्थिक सुशासन यही कहता है कि रेवड़ी कल्चर समाप्त कर दी जाए।

शामलाल कौशल, रोहतक

निहित स्वार्थ त्यागें

चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों द्वारा सत्ता के लालच में लोकलुभावन वादों की झड़ी लगा दी जाती है। यानी जनता के लिए सब ओर मुफ्त की रेवड़ियां तैयार होती हैं। देश के माननीय ये सब सुविधाएं कहां से लायेंगे। ऐसे में विदेशी कर्ज की गठरी लगातार भारी होती जाती है। अर्थव्यवस्था बढ़ते अतिरिक्त व्यय के भार से चरमराने लगती है। श्रीलंका का ताजा उदाहरण हमारे सामने है। जनता को पंगु बनाने से अच्छा है कि उन्हें स्वाभिमान के साथ जीने के अवसर दिये जायें। निहित स्वार्थ त्यागकर देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाये।

नरेन्द्र सिंह नीहार, नयी दिल्ली

भविष्य के लिए खतरनाक

रेवड़ी कल्चर देश के भविष्य के लिए खतरनाक है। मुफ्त वाली योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी सख्त है। मुफ्त के सामान बांटने की राजनीतिक दलों की प्रवृत्ति अंततः देश के राजकोष को पलीता ही लगाती है। मुफ्त की योजनाओं के कारण ईमानदारी के साथ अपना टैक्स अदा करने वाले समुदाय के साथ अन्याय होता है। इसके साथ ही सरकारें मुफ्त की स्कीम चला कर लोगों को पंगु भी बना रही हैं। ऐसी योजनाओं के कारण लोग काम करना नहीं चाहते हैं।

ललित महालकरी, इंदौर, म.प्र.

वोट बैंक की राजनीति

चुनावी दौर में राजनीतिक दल जनता को भरमाने के लिए लोकलुभावने वादे करके वोट बैंक बनाने में जुटे रहते हैं। फ्री सुविधाओं से राजकोष का घाटा बढ़ता है। जनकल्याण की अनदेखी कर दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दामों में वृद्धि कर घाटे की भरपायी की जाती है अथवा अन्य टैक्स लगाकर आमजन की सुख-सुविधाओं की बलि चढ़ा कर पूरा किया जाता है। ऐसे में व्यवसाय व उत्पादन प्रभावित होते हैं। आर्थिक व्यवस्था की मजबूती के लिए रेवड़ी कल्चर की स्वार्थी भावना से ऊपर उठना चाहिए। सरकार को पूंजीपति व्यवसायियों पर सब्सिडी समाप्त कर देनी चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

पुरस्कृत पत्र

करदाताओं पर भार

मुफ्त में सौगात बांटना, राष्ट्र के विकास के लिए अवरोध उत्पन्न करना है। मुफ्त की योजनाओं की घोषणाएं पूरी करने के लिए सरकार को करदाताओं पर अतिरिक्त भार डालना पड़ता है। जिसके कारण कर्मठ, अनुशासन प्रिय, कर्तव्यनिष्ठ राष्ट्रभक्त लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसकी कीमत राष्ट्र को किसी न किसी रूप में चुकानी पड़ती है। सरकार को मुफ्त की योजनाएं वास्तव में असहाय, विकलांग, जरूरतमंद लोगों के लिए ही बनानी चाहिए, जिससे सरकार को राष्ट्र के विकास की गति में वित्तीय संकट का सामना न करना पड़े।

जय भगवान भारद्वाज, नाहड़