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आपकी राय Other

Aug 31, 2021

प्रतिशोध की राजनीति

27 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में सम्पादकीय ‘प्रतिशोध की राजनीति’ मौजूदा विषैले राजनीतिक परिदृश्य के बारे में आंखें खोलने वाला था। केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे तथा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा राजनीतिक मर्यादाओं को भंग करने से उत्पन्न अप्रिय स्थिति का चित्रण जिस प्रकार से शब्दों द्वारा किया गया है वह काबिलेतारीफ है। भारतीय राजनीति में मर्यादाओं को तोड़ने का जो फैशन हो गया है वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। अतः सभी दलों को इस पर गहन मंथन करना चाहिए।

एमएल शर्मा, कुरुक्षेत्र


खेलों का जुनून

टोक्यो में चल रहे पैरालिंपिक में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिल रहा है। रविवार को देश को दो मेडल मिले। खेलों के प्रति जागरूकता देश के लिए गर्व व प्रशंसनीय है। जबकि खेल के क्षेत्र में रुचि लेने वाले युवा-युवतियों के लिए सुनहरा दौर उपलब्ध करा रहा है। इससे देश में खेलों के प्रति प्रतिस्पर्धा भी तेजी से बढ़ेगी और कई ऐसे युवा प्रतिभागी होंगे जो खेल को पूरी तरह से अपना करिअर भी बनाएंगे। उम्मीद है आने वाले दिनों में देश खेल का बहुत बड़ा हब बनेगा।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

अमृत महोत्सव और उम्मीदें Other

Aug 30, 2021

महज सपना

प्रधानमंत्री ने देश की आजादी के 75वें साल में प्रवेश को ‘अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाने का जो प्रारूप पेश किया है, वह राजनीतिक लक्ष्यों से प्रेरित है। इस समय लोगों की मूलभूत आवश्यकताएं ही पूरी नहीं हो पा रही हैं। महंगाई, बेकारी, मंदी ने लोगों को परेशान कर रखा है। संसद में सांसद लोगों की अपेक्षाओं के अनुसार खरे नहीं उतर रहे हैं। सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग और एनआईए का दुरुपयोग कर रही है। विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव घोषणापत्रों को लागू नहीं करते। ऐसे में आजादी के अमृत महोत्सव को मनाने की बात सपना मात्र लगती है।

शामलाल कौशल, रोहतक

अमृत की तृष्णा

देश की आज़ादी के 75वें साल में प्रवेश पर घोषित नवोन्मेषी कार्यक्रमों की शृंखला का उद्देश्य नये भारत के निर्माण में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ तथा ‘सबका विश्वास, सबका प्रयास’ जैसे नारों से विकास का लाभ देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास है। लेकिन राजनीतिक विद्रूपताओं और तंत्र की काहिली के बीच फंसे ये लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं। लोकतंत्र के तीन स्तंभों में से विधायिका को चलने नहीं दिया जा रहा। अमृत की तलाश में भारत का आमजन सात दशकों से इसी मृगमरीचिका में भटक रहा है। कैबिनेट के नये चेहरे इन नीतियों को कैसे क्रियान्वित कर पाएंगे?

हरदीप कालड़ा, शाहाबाद मारकंडा, कुरुक्षेत्र

ईमानदार बनें

शासन और प्रशासन अगर एकजुट होकर देश के हितों के लिए काम करें तो अमृत महोत्सव के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री का लालकिले से संबोधन इतिहास के गौरव और वर्तमान की चुनौतियों के मंच से उज्ज्वल भविष्य की ओर देखने की एक कोशिश है। हमें आजादी आसानी से नहीं मिली थी। हमें भी देश को मजबूत बनाने में अपना पूरा योगदान देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने युवाओं का आह्वान करने के साथ ही कर्म के फल पर विश्वास जताया है। बिना कर्म स्वतंत्रता आदर्श नहीं बन सकती। इसलिए हमारा दायित्व बनता है कि हम अपने काम में सौ फीसदी ईमानदारी बरतें।

दिव्येश चोवटिया, गुजरात

राष्ट्रभक्ति का ज्वार

आजादी का अमृत महोत्सव सरकार ने साबरमती आश्रम से शुरू कर लगातार 75 सप्ताह तक 75वीं वर्षगांठ 15 अगस्त, 2022 तक मनाने का निर्णय लिया है। यह महोत्सव देश के हर नागरिक को एकता, अखंडता और देशभक्ति से सराबोर करेगा। इसकी शुरुआत राष्ट्रगान गाने से हुई। इसके लिए एक वेबसाइट बनाई गयी है, जिस पर देश के नौजवानों, बच्चों और बुजुर्गों ने अपनी आवाज में राष्ट्रगान रिकॉर्ड कर स्वतंत्रता दिवस को एक नया आयाम दिया। इससे उनमें देश के लिए नवचेतना, कुछ कर गुजरने की इच्छा और सबसे बड़ी बात राष्ट्रगान के प्रति उनके अवचेतन मन में देश प्रेम की छाप अंकित हुई। यह भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है।

भगवान दास छारिया, इंदौर, मध्य प्रदेश

राष्ट्रीय यज्ञ

प्रधानमंत्री ने आजादी की यात्रा के अमृतकाल में प्रवेश पर योजनाओं की जो रूपरेखा और लक्ष्यों का खाका खींचा है, उसने इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को जाहिर किया है। साथ ही युवा शक्ति को अपने सामर्थ्य से इस राष्ट्रीय यज्ञ में आहुति देने का आह्वान भी किया। आजादी के बाद हमने संसदीय लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को अपनाया। मगर आजाद भारत की जो परिकल्पना उभरती है, मौजूदा तस्वीर उस कसौटी पर खरी नहीं उतरती। सत्ता व्यवस्था पर काबिज लोगों को राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर देश हित में कार्य करना होगा। तभी स्वतंत्रता के वास्तविक सपने को पूरा किया जा सकता है।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़

साझे प्रयास जरूरी

प्रधानमंत्री ने अमृत महोत्सव कार्यक्रम के दौरान कहा कि स्वतंत्रता संग्राम, 75 पर विचार, 75 पर उपलब्धियां, 75 पर कार्य और संकल्प-ये स्तंभ देश को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री के ये स्तंभ तभी पूरे होंगे जब देश के सभी राजनेता, वे चाहे किसी भी राजनीतिक दल के हों, देश का हर नागरिक अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। लेकिन जब तक देश के हर गरीब को दो वक्त की रोटी, सिर ढकने के लिए छत और हर गरीब के बच्चे को आधुनिक और उचित शिक्षा का इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक अमृत महोत्सव का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

पुरस्कृत पत्र

कठोर यथार्थ

आजादी के 75वें साल पर अमृत महोत्सव का प्रारूप मात्र राजनीतिक संकल्पना है। वर्तमान में लोगों की मूलभूत आवश्यकतायें ही पूरी नहीं हो रही हैं, ऊपर से महंगाई, बेकारी, आर्थिक मंदी, लचर कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार से प्रत्येक नागरिक त्रस्त है। राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली जनता की कसौटी पर खरी नहीं उतर पा रही है। धनी वर्ग और धनी हो रहा है तो वहीं मजदूर को रोटी का संकट है। आजादी के अमृत महोत्सव की परिकल्पना तभी सार्थक होगी जब प्रत्येक युवा के हाथों को काम मिलेगा। सभी को उच्च शिक्षा मिले और वे अपने सपने पूरे कर सकें। तभी आजादी के अमृत महोत्सव की सार्थकता सफल होगी।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Aug 28, 2021

तालिबान से मुकाबला

अफगानिस्तान की अभिनेत्री के अनुसार तालिबान द्वारा महिलाओं का बहुत उत्पीड़न हो रहा है। महिलाओं को पीटना आम बात है। इतने कम समय में ही महिलाओं पर इतनी पाबंदियां लगा दी हैं कि उनका जीना दूभर हो गया है। तालिबान ने शुरू में घोषणा की थी कि अफगानिस्तान में तालिबान शान्ति स्थापित करेगा लेकिन यह उनका दोहरा चेहरा है। अब तो केवल पंजशीर के लड़ाकों पर ही उम्मीद टिकी है क्योंकि यही लड़ाके इनका मुकाबला कर जनता को राहत दिला सकते हैं।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर

मर्यादा का उल्लंघन

केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार द्वारा की गई गिरफ्तारी विशुद्ध राजनीतिक विद्वेष के चलते की गई। अमर्यादित शब्दों का उपयोग माननीयों को शोभा नहीं देता। विरोध का तरीका और भाषा दोनों ही अमर्यादित और असंवैधानिक नहीं होनी चाहिए तथा राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्री की गिरफ्तारी करने से केंद्र की छवि का जनमानस में गलत संदेश जाता है। पदासीन मंत्री की गिरफ्तारी को प्रतिशोध ही माना जाये और गिरफ्तारी जरूरी हो तो पहले इस्तीफा और बाद में गिरफ्तारी हो ताकि लोकतंत्र की मर्यादा का उल्लंघन न हो।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

सार्थक पहल

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को इस महीने दो करोड़ अतिरिक्त टीके उपलब्ध करवाये हैं ताकि शिक्षक दिवस से पहले सभी स्कूली शिक्षकों को कोरोना की वैक्सीन लग सके। एक मई से सभी वयस्क लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ जो पूरी तरह सफल रहा। 'शिक्षक दिवस' के अवसर पर शिक्षकों के सम्मान में देशभर के शिक्षकों के लिए टीकाकरण का पूर्व अभियान समाज, राष्ट्र में शिक्षकों के अहम योगदान के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

आपकी राय Other

Aug 27, 2021

सेना का दमखम

25 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में मेजर जन. अशोक के. मेहता (अ.प्रा.) ‘बदले हालात में भारत-पाक में बढ़ेगी तल्खी’ लेख तालिबान आतंकियों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद भारत-पाक रिश्तों में पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करने वाला था। अब पाकिस्तानी आतंकवादी तथा तालिबानी आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में भारत के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं। लेकिन भारतीय सेना ने पहले ही घोषणा कर रखी है कि जो आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करेगा वापस जिंदा नहीं जाएगा। भारतीय सेना में इतना दम है कि पाकिस्तानी तथा तालिबानी आतंकवादियों को जम्मू-कश्मीर में गड़बड़ी फैलाने से रोक सके।

शामलाल कौशल, रोहतक

बेटियों पर गर्व

22 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून लहरें अंक में रोहित महाजन का लेख ‘भूखे पेट पदक परेड’ गरीबी में भूखे पेट की पीड़ा का अहसास दिलाने वाला था। पदक विजेता मातृशक्ति की अपनी हिम्मत, मेहनत और लगन राष्ट्र के नाम चार चांद लगाने की प्रेरणा बिंदु बनी है। जिंदगी के कड़वे सच गरीबी की पीड़ा को नजदीकी से झेल मेडल अर्जित करना, नाम और दाम कमाने की नयी मिसाल है। विजय पताका फहराने में महिला वर्ग की भूमिका पुरुष वर्ग से कम नहीं है। देश को कुछ कर दिखाने वाली बेटियों पर गर्व क्यों न हो।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

सच सामने आए

बंगाल चुनाव के बाद जो हिंसा भड़की उसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। इस जांच के बाद दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए ताकि हिंसा के लिए दोषी चेहरों को बेनकाब किया जा सके। बंगाल में भाजपा व तृणमूल प्रमुख ममता दीदी में सांप-नेवले जैसी शत्रुता है। हालांकि, दूषित सियासत के चलते किसी को दूध का धुला तो नहीं कह सकते। लेकिन सीबीआई के लिए जांच अग्नि-परीक्षा है।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

स्वागतयोग्य पहल Other

Aug 26, 2021

23 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में संपादकीय ‘गिरफ्तारी का औचित्य’ में पीड़ित पक्ष की अपील पर दिए निर्णय में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि जरूरी न होने पर पुलिस द्वारा व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की जाये। वास्तव में अकारण अनुचित गिरफ्तारी से व्यक्ति को मानसिक आघात पहुंचता है। पुलिस किसी के दबाव में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार न करे, जब तक कि आरोप पत्र की गहन जांच नहीं हो जाती। अदालत का यह फैसला स्वागतयोग्य है।

बी एल शर्मा, तराना, उज्जैन

कांग्रेस के संकट

कांग्रेस में दरार चौड़ी होने की खबरों के संदर्भ में, कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावत, आप पार्टी और अकाली दल के लिए पंजाब चुनाव में आने का रास्ता खोल सकती है। पिछले चुनाव में पंजाब में आप की जीत की अटकलें लगाई जा रही थीं। टकराव कांग्रेस की छवि को खराब कर रहा है जो अन्य दलों को चुनाव प्रचार में एक प्लस प्वाइंट देता है।

सहज सिंह, चंडीगढ़

शरणार्थी समस्या

भारत को शरणस्थली नहीं बनना चाहिए। देश पहले ही संसाधनों की कमी का सामना कर रहा है। देश को शरणार्थियों की मदद करने के बजाय, अफ़गानों को उनके अधिकार प्राप्त करने में मदद करनी चाहिए। भारत को क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अपने रूसी भागीदारों के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

महक अरोड़ा, चंडीगढ़

नैतिकता का ज्ञान

संस्कृत वह अनमोल खजाना है जो विद्यार्थियों को इंसानियत और नैतिकता की राहों की ओर अग्रसर भी कराती है। स्वामी विवेकानंद ऐसी शिक्षा चाहते थे, जिससे बालक का सर्वांगीण विकास हो सके। संस्कृत के श्लोक ही बच्चों के मन में नैतिकता का बीज बो सकते हैं, बच्चे जिंदगी में कभी पथभ्रष्ट नहीं होंगे।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

समाज पर लानत Other

Aug 25, 2021

देश में विकास के दावे भी खूब हो रहे हैं। पर जिस समाज में एक पिता अपने बेटे के कफन के लिए पांच सौ रुपये का कर्ज लेने को मजबूर है और उसके लिए बंधुआ मजदूरी करता हुआ दुखी होकर आत्महत्या करता है वहां क्या विकास, क्या उन्नति, क्या खुशहाली? महाराष्ट्र के पालघर में क्या कोई दानी नहीं, दूसरों की पीड़ा समझने वाला नहीं? जनता का सेवक होने का नारा लगाने वाला जनप्रतिनिधि नहीं? आखिर हिंदुस्तान का एक आदमी 2021 के अगस्त महीने में भी इतना मजबूर क्यों कि उसके बेटे को कफन तब तक नसीब नहीं हुआ जब तक बाप ने पांच सौ रुपया कर्ज लेकर खुद को बंधुआ मजदूर न बना लिया और हमेशा के लिए मौत का बंधुआ बन गया। क्या सरकार की, धर्म गुरुओं की, मोटे-मोटे पूंजीपतियों की, मोटा टीए-डीए लेकर संसद में लड़ने-भिड़ने वालों की आंखें खुलेंगी या आम आदमी की यही किस्मत रहेगी?

लक्ष्मीकांता चावला, अमृतसर

सकारात्मक नजरिया हो

पंद्रह अगस्त पर देश के प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। इस घटना में 20 लाख लोग मारे गए और करीब दो करोड़ लोग विस्थापित हो गये। यह सब कुछ इतिहास की अन्य समतुल्य घटनाओं से बेहद अलग समय में हुआ। सामाजिक चेतना के लिए ऐतिहासिक घटनाओं का याद करना पूरी तरह एक सर्वमान्य क्रिया है, उन्हें याद किया जाना चाहिए मगर सकारात्मक तरीके से। इन सब बातों पर सोच-विचार करना होगा।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़

नैतिकता का ज्ञान

संस्कृत वह अनमोल खजाना है जो विद्यार्थियों को इनसानियत और नैतिकता की राह की ओर अग्रसर कराती है। स्वामी विवेकानंद ऐसी शिक्षा चाहते थे, जिससे बालक का सर्वांगीण विकास हो सके। संस्कृत के श्लोक ही बच्चों के मन में नैतिकता का बीज बो सकते हैं, बच्चे जिंदगी में कभी पथभ्रष्ट नहीं होंगे।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

आपकी राय Other

Aug 24, 2021

विवादास्पद बोल

शायर मुन्नवर राणा हमेशा विवादास्पद बयानों से जनता की भावनाओं से खेलते रहे हैं। राणा का जब भी मुंह खुलता है तो धर्म और पूर्वजों को निशाने पर लेते हैं। अब उन्होंने तालिबान और महर्षि वाल्मीकि की तुलना कर हिंदुस्तान के लोगों के दिलों को ठेस पहुंचाई हैं। विवादित बयान के बाद हमेशा की तरह गलती मानकर माफी मांग लेना कहां तक उचित है। अफगान में पहले भी तालिबान शासन था। उस दौर में भी महिलाओं और बच्चों पर तालिबानियों द्वारा अत्याचार किये गये थे। आज भी तालिबानी अफगानिस्तान में लोगों की हत्या कर रहे हैं। क्या इस समय भी तालिबानियों के क्रूरतापूर्ण व्यवहार को नजरअंदाज कर उनकी प्रशंसा करना ठीक है?

कांतिलाल मांडोत, सूरत

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

पुरस्कार नीति Other

Aug 23, 2021

तर्कसंगत नीति बने

अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण रजत, कांस्य, पदक जीतने वाले खिलाड़ी देश का गौरव बढ़ाते हैं। ओलंपिक खेल में प्रत्येक प्रतिभागी जीतने का हरसंभव प्रयास करता है। विजेता होने पर केंद्र अथवा राज्य सरकारें उचित पुरस्कार, नौकरी प्रदान कर खिलाड़ी का उत्साहवर्धन करती हैं। लेकिन सम्मान पुरस्कार निधि में एकरूपता का अभाव पदक विजेता खिलाड़ियों में हीन भावना को जन्म देती है। केंद्र सरकार को कोई ठोस तर्कसंगत पुरस्कार नीति अपनाकर खिलाड़ियों को उनके योगदान के लिए समान सम्मान राशि प्रदान करनी चाहिए ताकि खिलाड़ियों में कोई कमी न खले।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

नीतिगत फैसला हो

इस तथ्य में कोई संदेह नहीं है कि विजेता पुरस्कार का हक़दार ही नहीं होता अपितु पुरस्कार उस का अपने खेल में नये कीर्तिमान स्थापित करने के लिये उत्साहित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि जो खिलाड़ी प्रतियोगिता में नहीं जीत पाया उसका परिश्रम भी किसी प्रकार से कम था। अत: पुरस्कार वितरण में संतुलन अत्यधिक आवश्यक है। विजेताओं के साथ-साथ उन सभी खिलाडि़यों को भी पुरस्कार मिलना चाहिए जिन्होंने ओलिम्पक में जाने का अवसर पाया ताकि वे भविष्य में विजयी होने के लिये प्रोत्साहित हो सकें।

अनिल शर्मा, चंडीगढ़

एकरूपता हो

अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं में एक पदक लाने में खिलाड़ी तथा परिवार वालों का त्याग और तपस्या भी होती है। कई सालों की मेहनत के बाद एक खिलाड़ी इस मुकाम पर पहुंचते हैं। मगर स्वदेश लौटने पर इन खिलाड़ियों को अपने अपने प्रदेश के हिसाब से अलग-अलग धनराशि से पुरस्कृत किया जाता है। इन खिलाड़ियों को मिलने वाली राशि में एकरूपता होनी चाहिए। एक राष्ट्रीय नीति के तहत इन खिलाड़ियों को राजनीति से ऊपर उठकर एक समान धनराशि देकर सम्मानित किया जाए तो वे और भी ज्यादा गौरवान्वित महसूस करेंगे।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़

केंद्र ही दे पुरस्कार

अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं में देश का मान बढ़ाकर पदक लाने वाले खिलाड़ियों को बड़े पुरस्कार देकर उनका सम्मान करना हम सब देशवासियों का कर्तव्य है। लेकिन इस में एकरूपता भी होनी चाहिए। भारतीय ओलम्पिक संघ की सिफारिश के अनुसार स्वर्ण पदक के लिए 75 लाख, रजत के लिए 40 लाख व कांस्य पदक के लिए 25 लाख रुपये की धनराशि पुरस्कार स्वरूप दी जानी चाहिए। इस प्रकार अलग-अलग प्रदेशों में पुरस्कार राशि भी अलग-अलग है। ऐसे में कम पुरस्कार राशि मिलने वाले खिलाड़ी का उत्साह कम होना स्वाभाविक है। खिलाड़ी किसी प्रदेश का हो वह प्रतिस्पर्धा में अपने देश भारत का प्रतिनिधित्व करता है। अतः ये पुरस्कार भी उन्हें भारत सरकार की ओर से मिलने चाहिए।

शेर सिंह, हिसार

मनोबल न गिरे

प्रत्येक खेल का खिलाड़ी अपनी तरफ से पूरी मेहनत करता है कि वह खेल में शानदार जीत हासिल करे। इसलिए पदक विजेताओं की पुरस्कार नीति ऐसी होनी चाहिए कि हर खेल के खिलाड़ियों के हर पदक, चाहे वो सोने का हो, चांदी, कांस्य या फिर अन्य कोई भी, सभी को एक जैसे पुरस्कार दिए जाने चाहिए, ताकि किसी भी खिलाड़ी का मनोबल कम न हो। अक्सर देखा गया है कि जब कोई खिलाड़ी किसी खेल प्रतियोगिता में जीतता है तो उस पर पुरस्कारों की बौछार की जाती है, लेकिन बाद में उसका हाल तक सरकारें नहीं पूछतीं।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

समान राशि मिले

देश की खेल नीति तब बेमानी-सी लगती है कि जब एक ही खेल के दो खिलाड़ियों को राज्य सरकारों द्वारा अलग-अलग नकद पुरस्कार दिए जाते हैं। कई राज्यों में तो खेलों के सम्बन्ध में कोई नीति ही नहीं है इसलिए मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को उचित प्रोत्साहन नहीं मिलता। इस बार छह खेलों में सात मेडल देश की झोली में आए हैं परन्तु मेडल लाने वाली खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि समान रूप से नहीं मिलेगी क्योंकि खेल नीति में कोई एकरूपता नहीं है। नकद राशि सभी खिलाड़ियों को समान रूप से मिलनी चाहिए अन्य सुविधाएं राज्य सरकारें अपने हिसाब से दे सकती हैं।

जगदीश श्योराण, हिसार

पुरस्कृत पत्र

खेल कोष बने

खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में राष्ट्र के लिए पदक जीतते हैं, मगर प्रांतीय आधार पर पुरस्कृत होते ही राष्ट्रीयता गौण हो जाती है। राष्ट्रीयता को क़ायम रखने और पुरस्कार राशि में एकरूपता लाने के लिए भारत सरकार के युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय खेल विकास कोष का उपयोग किया जा सकता है। राज्य और केंद्र सरकार पदक विजेताओं के लिए प्रतियोगिता से पहले ही इनाम की राशि घोषित करे। फिर जितने खिलाड़ी पदक जीतें उस हिसाब से कोष में राशि जमा करा दें। इस तरह से जमा राशि को पूल करके विजेता खिलाड़ियों में, जीते हुए पदक के अनुसार, बराबर रूप से बांट दिया जाये।

बृजेश माथुर, गाज़ियाबाद

आपकी राय Other

Aug 21, 2021

तालिबान का पुनर्जन्म

दैनिक टि्रब्यून में 19 अगस्त का सम्पादकीय ‘अमेरिका पर दाग’ में वर्णित तथ्य अकाट्य हैं, क्योंकि तालिबान और गठजोड़ देशों में जबरदस्त समन्वय होने से यह स्थिति बनी है। वस्तुत: बाइडेन ने चीन और पाकिस्तान के हित में भारत तथा आतंकवाद के विरोधी देशों के अहित में यह कदम उठाया है, जो मानवता के खिलाफ है। वास्तव में इसे बाइडेन की विफलता नहीं बल्कि व्यापारिक लाभ का कदम कहना होगा, वरना तालिबान का पुनर्जन्म नहीं होता। भारत इस समय असमंजस में है, क्योंकि भारत आतंकवाद के साथ पाकिस्तान और चीन का विरोधी रहा है।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन

आत्ममंथन जरूरी

पन्द्रह अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में प्रमोद जोशी का ‘आजादी की नींद और नयी सुबह के सपने’ लेख सत्तारूढ़ केंद्र सरकार के कार्यकाल का विकासात्मक, रचनात्मक और उपलब्धियों का लेखा-जोखा विस्तार सहित बताने वाला था। भले ही सरकार अपनी प्रशंसा स्वयं करती रहे, जनमत में लोकतंत्र की मान-मर्यादाओं का सरेआम उल्लंघन हुआ है। मनमानी और महंगाई जनता के हिस्से में आयी है। सत्ताधीशों को अपने गिरेबान में एक बार झांकने आवश्यकता है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

चौकन्ना रहें

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से हर दिन हालात खराब होते जा रहे हैं। अब तालिबान के सत्ता में आने से न केवल अफगानिस्तान के लोगों पर अत्याचार होगा बल्कि भारत पर भी इसका असर पड़ेगा। चीन पहले ही कह चुका है कि वह अफगानिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते बनाएगा। चीन के मंसूबे से हर देश वाकिफ है। कभी चीन पाकिस्तान के कंधे पर बंदूक रख कर चलाता है, तो कभी एलएसी पर परेशानी खड़ा करता है। भारत को और अधिक चौकन्ना होने की जरूरत है।

नंदनी जांगिड़, पंचकूला

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Aug 20, 2021

राहत का इंतजार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बढ़े हुए पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में कमी नहीं होगी। देश की आम जनता आस लगाए बैठी थी कि सरकार पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में कमी कर राहत देगी, लेकिन उनकी आस पर तुषारापात वित्त मंत्री ने अपने बयान से कर दिया है। आखिर केंद्र व राज्य सरकारें पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए विभिन्न टैक्सों की दरों में कटौती कर राहत क्यों नहीं देतीं? सभी टैक्स हटाकर पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

अमेरिका दोषी

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सशस्त्र बलों के साथ तालिबान ने अपना कब्जा कर लिया है। आख़िर अफगानिस्तान की सेना ने तालिबानियों के सामने हथियार क्यों डाल दिए? अमेरिका की क्या मजबूरी थी कि उसने अरबों रुपये का अफगानिस्तान में इन्वेस्ट किया और उसके बाद अपनी सेना को वापस बुला लिया। सही मायनो में देखा जाए तो अफगानिस्तान की दुर्दशा का कारण अमेरिका ही है।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

मारक महंगाई

बढ़ती महंगाई ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। लोग पहले से ही तेल, घी और पेट्रोल आदि की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, वहीं अब गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने आग में घी का काम किया है। अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब लोग एक वक्त के खाने के लिऐ तरसेंगे। महंगाई की इस समस्या पर सरकार को प्राथमिकता के आधार पर काम करना चाहिए।

लवनीत वशिष्ठ, मोरिंडा

जख्मों पर नमक

रसोई गैस की कीमतों में फिर से वृद्धि हो गई। यह वृद्धि आमजन के महंगाई के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है। देश के लगभग सभी राज्यों में इसकी कीमत 900 रुपये पार हो चुकी है। इसकी सब्सिडी भी ऊंट के मंुह में जीरे जैसी ही आती है। न जाने कब सरकार महंगाई कम करने के प्रयास करेगी?

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

आपकी राय Other

Aug 19, 2021

अमर्यादित आचरण

चौदह अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का ‘आजादी के महोत्सव में अमृत की मृगतृष्णा’ लेख आजाद भारत के 75वें वर्ष के शुरू होने पर संविधान तथा संसदीय प्रणाली का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने वाला था। वर्तमान सरकार अपनी उपलब्धियों की कितनी भी शेखियां मारे लेकिन कटु सत्य है कि मतदाताओं द्वारा प्रचंड बहुमत दिए जाने के बाद भी सरकार लोगों की अपेक्षा के अनुसार खरी नहीं उतरी। जिस तरह सत्तापक्ष तथा विपक्ष ने मानसून सत्र में संसद का संचालन किया है उसे लोकतंत्र का चीर हरण कहा जा सकता है। माननीयों का आचरण कहीं भी संसदीय मर्यादा तथा संविधान के अनुरूप नहीं रहा।

शामलाल कौशल, रोहतक

भारतीयों की फिक्र

अफ़ग़ानिस्तान में दो दशकों तक छद्म युद्ध करने के बाद, तालिबान ने अंततः काबुल में शासन पर कब्जा कर लिया है। तालिबान अफगान सेना को पछाड़ने में सफल रहा। तालिबान को कम करके आंकने को अमेरिका की घातक भूल कहा जा सकता है। भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें अफगान बलों से जुड़ी थीं और वे तालिबान की संगठित रणनीति का मुकाबला करने में विफल रहे। इस कठिन समय में, मोदी सरकार को आप्रवासी भारतीयों को अफगानिस्तान से सुरक्षित निकालने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए।

युगल किशोर शर्मा, फरीदाबाद

मारक मांझा

मंगोलपुरी क्षेत्र में चीनी मेटैलिक मांझे की चपेट में आने से 23 वर्षीय युवक की गर्दन कटने से मौत हो गई। सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं है। एक तरफ तो यह ऐसे अनेक चीनी उत्पादों के आयात पर सख्त प्रतिबन्ध की बात करती है मगर दूसरी ओर यह सब धड़ल्ले से बिक रहे हैं। यही नहीं इसके आलावा 200 से अधिक पक्षी इसकी चपेट में आ चुके हैं। सरकार को इस चीनी मांझे पर तुरंत बेचने और प्रयोग करने पर रोक लगानी चाहिए।

वेद मामूरपुर, नरेला

साकार हों सपने Other

Aug 18, 2021

चौदह अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का ‘आजादी के महोत्सव में अमृत की मृगतृष्णा’ लेख में गंभीर प्रश्न यह उठाया गया है कि आजादी के अमृत महोत्सव के आयोजन का तात्पर्य यह तो नहीं कि देश की आंखों में सुखद स्वप्न भर जगाकर, इतिश्री मान ली जाए? लेखक की आकांक्षा है कि राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक आज़ादी का लाभ देश के हर आम आदमी को मिले-तब ही यह आयोजन सफल माना जा सकेगा। लोकतंत्र के शीर्ष मंदिर, हमारी भारतीय संसद में नकारात्मक कारणों से हाहाकार है। कोरोना के विषाद और समाधान नहीं बल्कि सत्ता खो देने का महाविलाप है। लेखक का मानना है कि ऐसे में सत्ता पक्ष की ज़िम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है। पक्ष और विपक्ष में तालमेल होना अनिवार्य है। आज़ादी की पहली शर्त समानता है। आज़ादी का अमृत-महोत्सव आम आदमी की मृगतृष्णा न बनकर रह जाए, सरकार की यही कोशिश रहनी चाहिए।

मीरा गौतम, जीरकपुर

राष्ट्रीयता का मर्म

यह खबर देख कर कि कश्मीर तिरंगे से नहा लिया, मन प्रफुल्लित हो गया। इतनी खुशी स्वाभाविक थी क्योंकि बरसों बाद भारत सरकार के अथक प्रयास से कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस की भावना दिखायी पड़ी। वहां के हजारों स्कूलों में, नगर निकाय से पंचायतों, लाल चौक का घंटा घर तिरंगे के रंगों से रौशन हुआ। इस बार का ध्वजारोहण कार्यक्रम सिर्फ सरकारी कार्यालयों तक ही सीमित नहीं होकर बल्कि युवाओं के बीच पूरे जुनून में था।

भगवान दास छारिया, इंदौर

अमेरिका का भस्मासुर

अमेरिका द्वारा उठाए कदमों का खमियाजा आज पूरी मानव जाति को झेलना पड़ रहा है। अफगानिस्तान की स्थिति का जिम्मेदार अमेरिका ही है। अमेरिका ने शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने के लिए आतंकी संगठनों का सहारा लिया। वर्चस्व की लड़ाई के कारण देश इतने अंधे हो चुके हैं कि किसी भी हद तक जा सकते हैं। आज वही तालिबान सभी देशों के लिए भस्मासुर साबित हो रहा है।

अजय धनगर, दिल्ली

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Aug 17, 2021

अमृतकाल की मृगतृष्णा

चौदह अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का ‘आजादी के महोत्सव में अमृत की मृगतृष्णा’ लेख राजनीतिक नारों के बीच जनाकांक्षाओं की वास्तविकता बताने वाला था। सही अर्थों में लेख राजनीति की घोषणाओं और हकीकत का चित्र दर्शाता है। लेख यह सोचने पर विवश करता है कि जो राजनेता मंचों से घोषणाएं करते हैं वे कितनी हकीकत बनती हैं। सच्ची बात तो ये ही कि जनता की वास्तविक इच्छाएं मृगतृष्णा ही बनी हुई हैं।  सच्चाई तो यही है कि जनता के हिस्से राजनीति की रेतीली जमीन में मृगतृष्णाएं ही आती हैं। लेख राजनीति का यथार्थ बताने में कामयाब रहा है।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार


लाल चौक पर तिरंगा

कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद श्रीनगर के लाल चौक पर जिस गर्मजोशी से तिरंग झण्डा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, उसके लिए केंद्र सरकार की नीतियों का अभिवादन किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने कश्मीर के भ्रमित पत्थरबाजों को राष्ट्र की मुख्यधारा में लाकर अनुकरणीय कार्य किया है। कश्मीर अब शान्ति की ओर अग्रसर है। पर्यटक बेख़ौफ़ अपने कश्मीर के सौंदर्य का लुत्फ़ ले रहे हैं। 

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी

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Aug 14, 2021

खेल नीति बने

हाल ही में हुए ओलपिंक में अमेरिका के युवा सबसे ज्यादा सोना-चांदी बटोर ले गए लेकिन कोई शोरशराबा नहीं है। हमारे देश में नेताओं ने खिलाड़िय़ों के स्वागत में आसमान सिर पर उठा लिया है। आम आदमी इनकी जीत से खुश जरूर है। एक सौ तीस करोड़ की आबादी में केवल सात मेडल। इसके लिए किसी एक सरकार को दोष देना सही नहीं रहेगा। यह प्रबंधन की कमी है जो मठाधीशों के चंगुल में फंसी है। महज 25 साल में ब्रिटेन एक गोल्ड मेडल से 22 तक पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण उसका चुनिंदा खेलों पर फोकस करना रहा है। भारत को भी चाहिए कि कुछ खास खेलों पर ईमानदारी से विशेष ध्यान दे।

मनोज प्रभाकर, चंडीगढ़

मानवता का धर्म

हाल ही में धर्म को लेकर बहुत अराजकता हुई है। धर्म विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं जबकि कुछ को सिर्फ इसलिए पीटा जा रहा है क्योंकि वे दूसरे समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। महामारी के इस दौर में लोगों को यह समझने की जरूरत है कि जहां एकजुट होने की आवश्यकता है, वे अराजकता पैदा कर रहे हैं। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि धर्म के नाम पर लड़ना अनुचित है क्योंकि हम सभी ‘मानवता’ नामक धर्म से ताल्लुक रखते हैं। सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

निष्ठा, यमुनानगर

चिंता जायज

लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभ विधायिका में बढ़ रही अपराधियों की संख्या ने सुप्रीम कोर्ट को चिंता में डाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी में बताया है कि आपराधिक छवि वाले नेताओं को कानून बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ‘दागी नहीं मंजूर’ सम्पादकीय के मद्देनजर सत्ता में बैठे आपराधिक प्रवृत्ति के नेताओं पर नकेल कसने के लिए चुनाव आयोग को आगे आना होगा, वरना न्यायालयों पर कायम भरोसे एवं निष्ठा में कमी होगी और अपराधी तंत्र मजबूत होगा।

बीएल शर्मा ‘अकिंचन’, तराना, उज्जैन

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Aug 13, 2021

साझी जिम्मेदारी

दस अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में संपादकीय ‘उम्मीदों के निष्कर्ष’ कोरोना को रोकने के लिए 50 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन लगाये जाने पर संतोष प्रकट करने वाला था। चिकित्सा विज्ञानी डेल्टा वेरिएंट के कारण तीसरी लहर से बचने के लिए सावधान कर रहे हैं। यूरोप तथा अमेरिका में यह लहर दस्तक दे रही है। चिकित्सा विज्ञानियों का मानना है कि अगर कोवैक्सीन तथा कोविशील्ड दोनों का इस्तेमाल किया जाये तो परिणाम सुखद हो सकते हैं। देश में अभी भी लोग लापरवाही कर रहे हैं। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं। कोरोना वायरस की तीसरी लहर को रोकने के लिए सरकार को और सख्त कदम उठाने चाहिए।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

जागे चुनाव आयोग

राजनीति में शुद्धीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में भी टिप्पणियां की हैं। लेकिन राजनीतिक दलों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। कोर्ट ने कहा है कि राजनीति में जिस तरह अपराधीकरण बढ़ रहा है और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेता चुनाव जीत कर सत्ता में आ रहे हैं, उससे लोगों में गलत संदेश जा रहा है। बाहुबल और धनबल से सत्ता में आने वाले नेता केवल अपने और अपने परिवार वालों के लिए राजनीति करते हैं। चुनाव आयोग को भी संज्ञान लेना होगा।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

कारण जानिए

हि.प्र. के किन्नौर में पहाड़ दरकने से दस लोग काल के ग्रास बन गये। इससे पहले भी दूसरे पहाड़ी राज्यों में भी पहाड़ लोगों की जान के दुश्मन बन चुके हैं। सरकार, प्रशासन और संबंधित क्षेत्र के वैज्ञानिकों को पहाड़ों का सर्वेक्षण कर जानना चाहिए कि आखिर पहाड़ों के दरकने का क्या कारण है? पहाड़ों के नीचे से गुजरने वाली सड़कों पर चेतावनी के नोटिस लगाए जाएं। पहाड़ों के खिसकने से होने वाले हादसों से बचने के लिए सरकार, प्रशासन और आमजन को लापरवाही छोड़नी होगी।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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Aug 12, 2021

असंगत विकास

दस अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का लेख ‘बुनियादी संरचना में निवेश की दिशा बदलें’ विषय पर चर्चा करने वाला था। मोदी सरकार ने बुनियादी संरचना जैसे हाईवे, विद्युत, इंटरनेट आदि पर जितना निवेश किया है, उसके मुकाबले आर्थिक विकास में वृद्धि नहीं हुई। दरअसल, बुनियादी संरचना में निवेश के फलस्वरूप उच्च वर्ग को ज्यादा फायदा हुआ है। चाहे फुट ओवर ब्रिज की बात हो, हाईवे की बात हो, जलमार्ग के विकास की बात करें, जंगलों के नीचे दबे हुए खनिज पदार्थों को बाहर निकालने की बात करें या इंटरनेट में सुधार की बात करें, ये सब अमीरों के लिए ज्यादा फायदेमंद हुए हैं। एक तो अमीरों पर कर लगाना चाहिए और दूसरी तरफ इस तरह निवेश करना चाहिए कि आम लोगों को इसका ज्यादा लाभ मिले।

शामलाल कौशल, रोहतक

संकट में पढ़ाई

देश में शैक्षणिक गतिविधियां फिर से आरंभ हो चुकी हैं। कोरोना की वजह से शिक्षा क्षेत्र सबसे अधिक आहत हुआ है। बच्चों के उत्साह में गिरावट के साथ ही उनकी जिज्ञासा में भी कमी आई है। इस समय स्कूल खोलना वाकई एक चुनौती है, जिसे विद्यार्थियों की सजगता से ही सफल किया जा सकता है। कई राज्यों में स्कूलों को खोलने के प्रयास पिछले समय हुए हैं मगर संक्रमण के बड़े आंकड़ों ने सरकार के इरादों पर पानी फिरा है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि गाइडलाइन का अक्षरशः पालन हो वहीं पालक भी बच्चों को खतरों के प्रति सजग रखें।

अमृतलाल मारू ‘रवि’, धार, म.प्र.

मारक महंगाई

देश में उपभोक्ता सामग्रियों से लेकर पेट्रोल-डीजल तथा बढ़ती महंगाई ने भयानक रूप ले लिया है। लेकिन बढ़ती महंगाई के ऊपर रोक लगाने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। जो लोग मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं उन लोगों की हालत दिनों दिन पतली होती जा रही है। सरकार को खासकर खाने वाली सामग्री सब्जी, दाल, खाना पकाने का तेल इत्यादि सामग्रियों की कीमतों पर नियंत्रण करना चाहिए।

चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी, असम

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Aug 11, 2021

संवाद जरूरी

संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने पहली बार सरकार को अन्य पिछड़ा वर्ग संबंधित विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने का आश्वासन दिया है। विपक्ष ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे इस श्रेणी से संबंधित जातियों की सूची बनाएं। विपक्ष का अच्छा इशारा है, क्योंकि इस श्रेणी में कई जातियों को इस सूची में शामिल करने के लिए छोड़ दिया गया और वे सरकारी सेवाओं और अन्य योजनाओं में लाभ से वंचित रह गई हैं। सरकार भी आम सहमति बनाना चाहती है ताकि अन्य महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो सकें।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर


पेपर लीक का दंश

हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के लिए पेपर लेना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। लगभग हर पेपर लीक हो जाता है। प्रत्येक पेपर के लिए सिलेबस पर बहस होती है। न पेपर लेने का कोई पैटर्न है, न ही कोई शेड्यूल। सालों बाद किसी भर्ती का पेपर होता है और वह भी लीक हो जाता है। पारदर्शिता का दम्भ भरने वाली सरकार क्यों हर बार नाकाम हो रही है। युवा आखिकार कब तक यूं ही मानसिक अवसाद का शिकार होते रहेंगे?

सुनील सहारण, फतेहाबाद


समय की मांग

कश्मीर में बहुत कुछ नियंत्रित होने के बावजूद कुछ कट्टरपंथी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। अभी तक शासन-प्रशासन ने पत्थरबाजों को मुख्यधारा से जोड़ने के काफी प्रयास किए, किंतु रोजगार के अभाव में भी कुछ लोग पत्थरबाजों से जुड़ गए हैं। जो लोग मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी है। इसी तरह कट्टरपंथियों को पासपोर्ट तथा नौकरी के लिए अपात्र घोषित करना अब समय की मांग है।

बीएल शर्मा, तराना, उज्जैन


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Aug 10, 2021

सुनहरे भविष्य के लिए

सात अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित राजकुमार सिंह के ‘ताकि भविष्य भी सुनहरा हो हॉकी का’ शीर्षक लेख हॉकी में हमारी विगत की नाकामियों की हकीकत बयां करने वाला था। हमारी हॉकी की सुनहरी चमक यूं ही नहीं गई बल्कि हॉकी बाहर-भीतर की साजिशों की शिकार हुई। हॉकी इंडिया के शीर्ष पदों पर बैठे मठाधीशों ने अपने स्वार्थों के लिए हॉकी के भविष्य से खिलवाड़ किया। बाकी कसर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की नियम बदलने की साजिशों ने पूरी कर दी। आंख खोलने वाले लेख के लिए हार्दिक आभार।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार

 

सपूत ले आया सोना

टोक्यो ओलंपिक में जब नीरज चोपड़ा को स्वर्ण पदक दिया जा रहा था तो मन में एक ही खयाल आया कि नीरज जैसे महान सपूत जब यहां जन्म लेंगे तो भारतवर्ष को दुनिया सोने की चिड़िया कहने को मजबूर होगी। सच है कि खेल और खेल-भावना हर जात-पात, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर होती है। कोरोना की वजह से देश-दुनिया में जब उदासी छा गयी थी, तब ऐसे समय में भारत के सपूतों का ओलंपिक में प्रदर्शन वैक्सीन साबित हुआ है। सत्य है समय और स्थिति कभी भी बदल सकती है। 

कमलेश, पंचकूला

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फसल चक्र में बदलाव Other

Aug 09, 2021

भविष्य के संकट

किसान कम लागत पर अधिक लाभ के प्रयास में धान की फसल के लिए भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन कर रहा है। जल दोहन से भूमिगत जल स्तर खतरनाक स्थिति तक पहुंच चुका है, जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए अशुभ संकेत है। किसान द्वारा अत्यधिक जल आधारित परंपरागत कृषि और सिंचाई तकनीक में परिवर्तन अपेक्षित है। हमें कदापि नहीं भूलना चाहिए कि ‘जल ही जीवन है’ और नि:संदेह ‘जल बर्बादी-भविष्य बर्बादी’ है। केंद्र एवं प्रदेश सरकारों द्वारा जल संरक्षण की दिशा में कठोर कदम उठाना समय की मांग है।

सुखबीर तंवर, गढ़ी नत्थे खां, गुरुग्राम

नकद फसल लाभकारी

हरियाणा सरकार द्वारा चलायी जा रही ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ मुहिम का स्वागत किया जाना चाहिए। अधिक पानी की खपत वाली फसलों को त्याग कर कम पानी की आवश्यकता वाली दालों के उत्पादन से जल संचय किया जा सकता है। सरकार द्वारा जारी प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर किसान अधिक जल की खपत वाली धान की फसल से किनारा करने लगे हैं। अन्य फसलों में कम लागत होने व सरकार की प्रोत्साहन राशि से पैसा और पानी की बचत दोनों की सुविधा प्राप्ति होती है। इससे जल की बचत के साथ नकदी फसल की अत्यधिक उपज होगी और इसके प्रतिफल भी बेहतर होंगे।

डॉ. अशोक, पटना, बिहार

कारगर कदम

किसानों के एक ही फसल को बार-बार उगाने से पानी की किल्लत बढ़ेगी क्योंकि किसान जरूरत के अनुसार खेती न करके हर साल गेहूं और चावल की खेती ही करता रहेगा तो भला पानी कहां से आएगा। गेहूं-चावल की बजाय किसानों को दाल की फसलों की ओर रुख कर जरूरत के अनुसार ही कम पानी वाली फसलें उगानी चाहिए। हरियाणा सरकार द्वारा कम पानी की खपत वाली फसलों के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना सराहनीय कदम है। इसी कड़ी में ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ मुहिम भी कारगर साबित होगी।

सतपाल सिंह, करनाल

कल के लिए जल

भू-जल स्तर में निरन्तर आ रही गिरावट को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार की मुहिम ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’, एक स्वागतयोग्य कदम है। सरकार द्वारा किसानों को कम पानी की खपत वाली फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसा करने से निश्चित रूप से भावी पीढ़ी के लिए पानी बचाने में सहायता मिलेगी। इस कार्यक्रम की सफलता के लिए जरूरी है कि सभी लोग मिलकर इसे जन-आन्दोलन का रूप दें। किसान कम पानी की खपत वाली फसलों को उगाने की ओर ध्यान दें। सभी ‘जल ही जीवन है’ मंत्र को अपनाएं।

सतीश शर्मा, माजरा, कैथल

जन आंदोलन बने

हरियाणा में भूमि जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इसका मुख्य कारण धान जैसी फसलों का लगातार उगाया जाना है। प्रदेश के कई इलाकों में जहां पीने के पानी की किल्लत रहती है वहां पर भी किसान द्वारा दूसरों की देखा-देखी लगातार धान की फसल उगाने की होड़-सी लग रही है। हरियाणा सरकार द्वारा ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ मुहिम चलाई जा रही है। धान की जगह अन्य फसलें भी किसानों के लिए लाभप्रद हो सकती हैं। यह बात किसानों को समझनी होगी। हमें आने वाली पीढ़ी के लिए भी जल को बचाना है।

सत्यप्रकाश गुप्ता, खलीलपुर, गुरुग्राम

जागने का वक्त

बारिश के पानी के संचय के प्रति सरकारें और जनता दोनों ही लापरवाह हैं। हर खेत में जल संचय और मकान की छत का पानी जमीन में उतारने के लिए सख्त कानून बनाये जाने की जरूरत है। वहीं किसानों को कम पानी खपत वाली फसलों को अपनाने की जरूरत है। वहीं अब स्वयंसेवी संस्थाओं और जनता को मिलकर बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सहेजने का राष्ट्रव्यापी अभियान चलाना चाहिए। इसके साथ ही सीरिया से समुद्री पानी को पेयजल में बदलने की तकनीक प्राप्त कर इसका उपयोग किया जाना चाहिए। यदि अभी नहीं जागे तो फिर बाद में पानी संकट और गहरायेगा।

विभूति बुपक्या, आष्टा, म.प्र.

पुरस्कृत पत्र

बूंद-बूंद बचाइए

आज मानव पानी का आवश्यकता से अधिक दोहन कर रहा है, यदि ऐसा ही चलता रहा तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए होगा। पानी की बचत जरूरी है और इसके लिए हमें फसल चक्रों में बदलाव करना होगा और इस्राइल की भांति बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति को अपनाना होगा। आज इस्राइल विश्व के देशों के समक्ष एक प्रेरणा के रूप में साबित हो रहा है, जहां न तो जमीन की ही अधिकता है और न ही पानी की, लेकिन विभिन्न फसलों के उत्पादन में एक अमिट छाप विश्व पटल पर छोड़ी है। पानी की बचत के लिए निश्चित ही हमारे देश को इस्राइल से प्रेरणा लेनी चाहिए।

सुनील महला, पटियाला, पंजाब

प्रशंसनीय प्रोत्साहन Other

Aug 07, 2021

सरकार द्वारा बनाई गई नीतियां चाहे वे खिलाड़ियों के लिए हों, सेना के जवानों के लिए हों, उत्साहवर्धक हैं। देश के दिग्गज नेता जिस प्रकार हमारे ओलंपिक खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ा रहे हैं, वह सराहनीय है। ओलंपिक के महाकुंभ से पहले ही देश के प्रधानमंत्री ने जिस तरह से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया, वह काबिलेतारीफ था। इससे युवा खिलाड़ियों में जोश व जुनून भरता है। देश का गौरव बढ़ाने वालों को सिर्फ पैसा और नौकरी देकर ही प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता बल्कि देश के राजनेता जिस प्रकार उनके साथ स्वयं को जोड़ रहे हैं, वह वास्तव में ही प्रशंसनीय है।

केरा सिंह, नरवाना

प्रेरक प्रस्तुति

अगस्त माह के दैनिक ट्रिब्यून में लहरें अंक में तेनजिंग सोनम का ‘कांगड़ा में दीदी का नायाब शिल्प’ लेख प्रकृति की सुरम्य पर्वतीय स्थली पर अनुपम शैली रोचक व ज्ञानवर्धक थी। प्रकृति की हरियाली गोद में रचा-बसा स्वस्थ शरीर स्वस्थ मस्तिष्क अद्भुत खजानों की मिसाल है। शुद्ध स्वच्छ वातावरण का सान्निध्य प्रकृति के अद‍्भुत सौम्य, मंद-मंद बहती शीतल समीर आनंददायक अनुभूति का अहसास कराने में सफल रही। भवन निर्माण कला की सचित्र प्रस्तुति प्रेरक, शिक्षाप्रद रही।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

स्थिति सुधारें

41 वर्षों बाद भारतीय पुरुष टीम का कांस्य पदक जीतना आनंददायक व उत्साहित करने वाला रहा। अन्य खेलों में मिलाकर अब तक भारत को 5 पदक प्राप्त हो चुके हैं। पूरे देश में हाकी में मिले पदक को लेकर बड़ा ही उत्साह है। विडंबना तो यह है कि क्रिकेट को छोड़ दें तो खेल मंत्रालय के कर्मचारियों पर जो पैसा खर्च होता है, उतना पैसा देशभर के खिलाड़ियों पर भी खर्च नहीं होता। ऐसी स्थिति को शीघ्रता से सुधारा जाना चाहिए।

सुभाष बुड़ावनवाला, रतलाम, म.प्र.

विध्वंसकारी तालिबान Other

Aug 06, 2021

अफगानिस्तान में तालिबान का आतंक बढ़ता जा रहा है। तालिबान आतंक के बल पर जिस रफ्तार से अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों को अपने कब्ज़े में लिए जा रहा है, उससे यह साफ़ जाहिर है कि उसकी देश में शांति व्यवस्था बनाए रखने एवं राजनीतिक समझौते की कोई मंशा नहीं है। यदि तालिबान अफगानी सरकार को अपने गिरफ्त में ले लेता है तो संभवतः पाकिस्तान उसका इस्तेमाल भारत में आतंकी हमले कराने के लिए करेगा। अगर अफगानी सेना ऐसा होने से रोक भी लेती है तो भी तालिबान उन उद्योगों एवं परियोजनाओं को ध्वस्त कर सकता है, जिनमें भारत ने अरबों डॉलर का निवेश किया है। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने अफगानिस्तान को तालिबान से निपटने के लिए 1 अरब डॉलर प्रतिवर्ष देने का वादा किया है।

तुषार आनंद, पटना, बिहार

पटनायक को बधाई

41 वर्षों के सूखे के बाद टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम द्वारा कांस्य पदक जीतना सुखद अनुभूति के साथ हॉकी के स्वर्णिम दौर की ओर लौटने के शुभ संकेत हैं। यह जीत न केवल मरणासन्न हालत में पहुंच चुकी भारतीय हॉकी को प्राणवायु देगी बल्कि नई ऊर्जा से सराबोर भी करेगी। वहीं उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने नाजुक वक्त में टीम का प्रायोजक बनकर खिलाड़ियों में ऊर्जा का संचार किया।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद उज्जैन

बेरोजगारों को प्राथमिकता

देश में बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। देश में कुछ सरकारी विभाग ऐसे हैं, जिनमें अगर कोई कर्मचारी रिटायर होता है तो उनके लिए अन्य कुछ विभागों में फिर से नौकरी करने के द्वार सरकारों ने खुले रखे हैं। प्राइवेट सेक्टर में भी ऐसी व्यवस्था है। जो लोग किसी विभाग से रिटायर होते हैं और पेंशन लेते हैं, उनका भी नैतिक दायित्व बनता है कि वे न तो सरकारी और न ही किसी प्राइवेट विभाग में नौकरी के लिए आवेदन करें, ताकि बेरोजगारों युवाओं को नौकरी करने का मौका मिले।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

आपकी राय Other

Aug 05, 2021

अमीरों पर टैक्स

तीन अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का लेख ‘अमीरों के पलायन से उपजे प्रश्न’ अमीर लोगों द्वारा अपनी पूंजी के साथ, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा तथा मॉरीशस आदि देशों में पलायन का विश्लेषण करने वाला था। वर्ष 2020 में भारत से अमीर लोगों के पलायन की दर में 63 फीसदी की वृद्धि हुई। हमें अमेरिका की तर्ज पर पलायन करने वाले अमीर लोगों पर एग्जिट टैक्स लगाना चाहिए क्योंकि उन्होंने यहीं रहकर देश के साधनों का दोहन किया और अमीर बने। इसके साथ ही जो विद्यार्थी भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करके विदेशों में पैसा कमाने जाते हैं, उन पर भी टैक्स लगाना चाहिए। 

शामलाल कौशल, रोहतक

 

झुका चीन

भारत-चीन के बीच अवरोध धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। अब गतिरोध खत्म करने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। दोनोें देशों की बातचीत के बाद चीन अपनी सेना हटाने को तैयार है। यह बदलाव हमारे देश की सैन्य शक्ति की बढ़ती ताकत का नतीजा है। चीन ने शुरुआती दौर में मोदी सरकार की एक नहीं चलने दी। बाद में भारत की ताकत देख कर वह नतमस्तक हो गया। दोनों देश पूर्वी लद्दाख के गोगरा हाइट्स से सेना हटाने को राजी हो गए हैं। भारत-चीन के कमांडर स्तर की बाहरवीं दौर की बातचीत सफलतापूर्वक पूरी हो गयी है।

कांतिलाल मांडोत, सूरत

 

अड़ियल रुख से त्रस्त

सरकार के अड़ियल रुख और किसानों की जिद की वजह से लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली से हर रोज हज़ारों लोग हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, कश्मीर जाते-आते हैं। कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर किसानों के धरने की वजह से इतना जाम लग जाता है कि लोगों को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ता है। मीडिया में भी कृषि कानून का तो जिक्र किया जाता है लेकिन उसके कारण बॉर्डर पर जो लम्बा और थका देने वाला जाम लग जाता है, उसका कोई जिक्र नहीं होता। 

चंद्र प्रकाश शर्मा, दिल्ली 

 

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

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Aug 04, 2021

भावी राजनीतिक परिदृश्य

31 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित राजकुमार सिंह का ‘दीदी को मिलेगी भाजपा विरोधियों की ममता!’ लेख संकेत देता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए ममता दीदी की महत्वाकांक्षाएं कुछ ज्यादा ही जोर पकड़ गयी हैं। वैसे दीदी जिस दबंगई से दिल्ली आयीं, उसे गैर-भाजपा दल भी आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। पश्चिम बंगाल में 3 से 77 सीटों पर पहुंची भाजपा को कमतर नहीं आंका जा सकता। महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनावों से विपक्षी दलों में यह संदेश अवश्य गया है कि मोदी और शाह के रहते हुए भी भाजपा को जीता जा सकता है। ममता दीदी के अलावा शरद पवार जैसे खांटी नेता लाइन में हैं। विपक्ष कोरोना महामारी की चिकित्सकीय अव्यवस्था, महंगाई और किसान-आंदोलन पर लंबित फैसले काे मुद्दा बनाएगा। विपक्षी दलों का महागठबंधन चलने वाला नहीं है। कारण, जहां सभी प्रधानमंत्री-पद की उम्मीदवारी में खड़े हों, वहां राजनीतिक खांडे बजना स्वाभाविक है। लेखक ने भावी राजनीति का परिदृश्य सामने रख ही दिया है। 

मीरा गौतम, जीरकपुर

विवाद टालें 

असम और मिजोरम के सीमा विवाद में गोली और पत्थरबाजी के परिणति में असम पुलिस के 6 जवान शहीद हो गए। इन दोनों राज्यों के बीच चले सीमा विवादों पर गृह मंत्री अमित शाह ने असम और मिजोरम, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की। उम्मीद है कि दोनों राज्यों के बीच सीमा को लेकर भविष्य में विवाद नहीं होगा। 

चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी 

मेडल की उम्मीद

ओलंपिक में देश के खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। एक तरफ सुपरस्टार शटलर पीवी सिंधू ने कांस्य पदक जीतकर तोू वहीं दूसरी तरफ महिला हॉकी टीम ने भी सेमीफाइनल में जगह बनाकर देश का मान बढ़ाया। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार महिला हॉकी टीम मेडल जरूर लायेगी।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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आपकी राय Other

Aug 03, 2021

बालश्रम का संकट

बालश्रम किसी भी देश के लिए एक जटिल समस्या है, जिसके निदान के बिना हम बेहतर भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते है। हाल के यूनिसेफ के आंकड़े को देखें तो आज के समय दुनिया भर में लगभग 200 मिलियन बच्चे बाल-मजदूरी करने को मजबूर हैं, जिसमें इनकी संख्या विकसित देशों के मुकाबले विकासशील में अधिक है। भारत में सरकारी आंकड़े के अनुसार यहां बाल-श्रम की संख्या मात्र 50 लाख है। वही गैर-सरकारी आंकड़े इनकी संख्या 3 करोड़ बताते हैं जो निरंतर बढ़ती जा रही है। ऐसे जटिल विषय पर सरकार को एक बार ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

श्याम मिश्रा, उ.प्र.


सुरक्षा चुनौती

संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक सेना के तीनों अंगों में 1 लाख से भी अधिक सैनिकों की कमी है। सेना में सैनिकों की कमी चिंता का विषय होना चाहिए। सीमा पर पुख्ता जवाब देने के लिए न केवल पर्याप्त सैनिक बल होना चाहिए, बल्कि सर्व सुविधायुक्त व मारक क्षमता वाले अत्याधुनिक हथियारों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। सरकार को सैनिकों की भर्ती के लिए पूरे देश के कोने-कोने में अविलंब अभियान चलाना चाहिए। देश की रक्षा के लिए किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद उज्जैन


आरक्षण की तार्किकता

केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय आरक्षण योजना के अंतर्गत मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2021-22 से स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सा एवं दंत पाठ्यक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 तथा ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है। इस व्यवस्था से एक बड़े समुदाय को उनका वास्तविक हक मिल जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के छात्र मेडिकल परीक्षा पास करके सेवा को मजबूती प्रदान करेंगे। कई पिछड़ा वर्ग के समुदाय इसे सामाजिक न्याय की जीत बता रहे हैं।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

जनसंख्या नियंत्रण की नीति Other

Aug 02, 2021

कल्याणकारी हो नीति

जनसंख्या नियंत्रण नीति जाति, धर्म, मजहब, समुदाय से ऊपर उठकर सब पर समान दृष्टि से लागू हो ताकि समस्त जनता सहर्ष स्वीकार कर सके। नीति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की गारंटी, बुजुर्गों व महिलाओं की सुरक्षा निश्चित हो। यदि नई जनसंख्या नियंत्रण नीति में यह सब होगा तो उसे मानने से कोई इनकार नहीं करेगा। वहीं सख्त नियम बनाए जाएं कि किसी भी धर्म का व्यक्ति हो, वह एक ही शादी करेगा। दूसरी शादी करने का प्रावधान तब हो जब तलाक या पहली पत्नी का देहांत हो गया हो।

दलबीर मलिक, कुरुक्षेत्र


समृद्धि की राह

देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, चरमराती कानून व्यवस्था, उत्तरोत्तर बढ़ती आर्थिक मंदी जनसंख्या वृद्धि का ही परिणाम है। सरकार को परिवार नियोजन संबंधी ठोस नीति जाति, समुदाय की संकीर्ण भावना से ऊपर उठकर लागू करने की आवश्यकता है। दो से अधिक बच्चों के बाद सरकारी नौकरी, चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य, किसी प्रकार की बैंक सब्सिडी, सरकारी आर्थिक मदद बंद कर दी जाये। आर्थिक तंत्र की मजबूती खुशहाल राष्ट्र की रीढ़ है न कि बढ़ती आबादी।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


सुविधाओं से वंचित हों

देश निरन्तर विकास के पथ पर अग्रसर है परन्तु जनसंख्या विस्फोट इसके मार्ग में सबसे बड़ा, अवरोधक है। यद्यपि समाज का प्रबुद्ध वर्ग साधन-सम्पन्न होते हुए भी सीमित परिवार प्रणाली पर अमल कर रहा है लेकिन अनेक वर्ग ऐसे हैं, जिनको समझाने के बावजूद उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती। हालांकि, सरकार की ओर से अनेक स्कीमों के तहत खुलकर मदद भी की जा रही है। इस समस्या का प्रभावशाली उपाय यही है कि देश में समान संहिता लागू की जाए तथा जो परिवार नियोजन सीमा का उल्लंघन करे, उसे सरकारी सुविधाओं से वंचित कर दिया जाए।

एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र


संसाधनों पर संकट

जनसंख्या में वृद्धि देश की एक ज्वलंत समस्या है। जनसंख्या वृद्धि में संतुलन बनाए रखने के लिए परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत देशभर में कठोर कानून की आवश्यकता है जिसे पूरे देश में समान रूप से लागू किया जा सके। सामाजिक स्तर पर लोगों को सीमित परिवार के संबंध में जागरूक करने की आवश्यकता है। जनसंख्या वृद्धि के कारण देश के संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है। स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवनस्तर को जनसंख्या वृद्धि सीधे तौर पर प्रभावित करती है। ‘एक दंपति दो संतान’ का कानून देशभर में लागू किया जाना उचित होगा।

ललित महालकरी, इंदौर


जागरूक करें

हमारे पास भूमि, जल, जंगल, खनिज आदि संसाधन सीमित मात्रा में हैं। जनसंख्या विस्फोट इन संसाधनों पर संकट पैदा कर रहा है। भावी पीढ़ियों के भविष्य और वर्तमान में हमारे हित में जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है। इसे राजनीतिक व साम्प्रदायिक चश्मे से न देखा जाए बल्कि इसे राष्ट्रहित के मुद्दे के रूप में लिया जाए। कानून बनाने के साथ-साथ जनता को इस गम्भीर समस्या के प्रति जागरूक किया जाना आवश्यक है। हमें समझना चाहिए कि जनसंख्या वृद्धि और गरीबी का चोली-दामन का साथ है। जहां-जहां शिक्षा का प्रसार हुआ है वहां जनसंख्या वृद्धि की दर कम रही है। अतः जनता और विशेषकर महिलाओं को शिक्षित करने का जोरदार प्रयास किया जाना चाहिए।

शेर सिंह, हिसार


प्रोत्साहन नीति

सीमित संसाधनों पर बढ़ता आबादी का बोझ संकट पैदा कर रहा है। बेहतर जीवन परिस्थितियों के लिए जनसंख्या नियंत्रण और शैक्षिक स्तर ऊंचा करने की जरूरत है। जनसंख्या नीति में उन प्रावधानों का स्वागत किया जाना चाहिए, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को परिवार नियोजन अपनाने पर पदोन्नति, विशेष इंक्रीमेंट, मकानों में सब्सिडी, सस्ता लोन देने की योजनाएं हों। आम आदमी को परिवार नियोजन अपनाने पर बिजली-पानी के बिलों में रियायत दी जा सकती है। सरकारी योजनाओं का लाभ भी उन्हीं जनमानस को मिले जो जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन को अपनाएं।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़


पुरस्कृत पत्र

केंद्र करे पहल

वोट बैंक खराब न हो इसलिए कोई भी सरकार जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए गम्भीर नजर नहीं आती। जिन दो राज्यों ने जनसंख्या पर काबू पाने के लिए मसौदा तैयार किया है वह अभी आधा-अधूरा ही कहा जाएगा क्योंकि बढ़ती जनसंख्या किसी राज्य की नहीं, राष्ट्र की समस्या है। इस विषय पर प्रभावी कानून केन्द्र सरकार द्वारा बनाया जाना चाहिए। सर्वप्रथम तो संसद, विधायकों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों पर नियम लागू होना चाहिए। कानून ऐसा बनाया जाए कि आम नागरिक यह न सोचे कि यह कानून केवल आम लोगों के लिए है।

जगदीश श्योराण, हिसार