आपकी राय

धोनी के बिना क्रिकेट Other

Aug 31, 2020

धोनी जैसा कोई नहीं

हर बड़े खिलाड़ी को संन्यास लेना होता है। यही खेल है। गैर पारंपरिक शैली में कप्तानी और मैच को अंजाम तक ले जाने की कला के साथ महानतम क्रिकेटरों की जमात में खुद को शामिल करने वाले धोनी के इस फैसले के साथ ही क्रिकेट के एक युग का भी अंत हो गया। लोग धोनी के बाद उनके स्थान पर विकेटकीपर के तौर पर किसी अन्य खिलाड़ी को आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। चयनकर्ता भले ही धोनी का कोई विकल्प ढूंढ लें, सच तो ये है कि धोनी की जगह लेना असंभव है। धोनी के बाद भी टीम खेलेगी और जीतेगी भी पर धोनी की कमी हमेशा खलेगी।

दिव्येश चोवटिया, गुजरात

विकल्प नहीं

भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (माही) ने 15 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने का फैसला लेकर फैंस को असमंजस में डाल दिया है। धोनी की सबसे स्थायी विरासत यह है कि उन्होंने आईसीसी ट्रॉफी जीती। उन्होंने पहली बार भारत को टेस्ट रैंकिंग में भी शीर्ष पर पहुंचाया। उनके हेलीकॉप्टर शॉट को भारत के सर्वश्रेष्ठ सीमित ओवर प्रति मैच सबसे अच्छे खिलाड़ी के रूप में याद किया जाएगा। भले ही धोनी का कोई विकल्प ढूंढ लें पर सच तो यह है कि धोनी की जगह लेना बिल्कुल असंभव है। क्रिकेट में उनका प्यार हमेशा याद किया जायेगा।

नेहा, चंडीगढ़

कमी खलेगी

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले महेन्द्र सिंह धोनी भारतीय टीम के लिए एक बेहतर विकेटकीपर और एक बेहतरीन कप्तान साबित हुए। उनके कुशल नेतृत्व में टीम ने क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में सफलता हासिल की व विश्व विजेता का तमगा हासिल किया। मैच के रोमांच के क्षणों में उनके संयम और कैप्टन कूल की भूमिका को सभी खिलाड़ी हमेशा याद रखेंगे। उनकी कमी भी टीम को जरूर खलेगी लेकिन नए खिलाड़ियों को तराशने में उनके योगदान से हमारी टीम नित नई सफलता की ऊंचाइयों को छूने का प्रयास जरूर करती रहेगी।

देवी दयाल दिसोदिया, फरीदाबाद

खेलना चाहिए था

धोनी का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेना भारतीय क्रिकेट को बहुत बड़ा झटका है। अभी धोनी को खेलना चाहिए था, ऐसा सभी क्रिकेट प्रेमियों का कहना है। लेकिन धोनी के संन्यास से नये युवा खिलाड़ियों को सीख लेनी चाहिए कि धोनी से और अच्छा करके देश का नाम रोशन करें। भारतीय क्रिकेट में धोनी की कमी को दूर करने के लिए नये युवा खिलाड़ियों को मौका मिलना चाहिए। ऐसे खिलाड़ी के संन्यास लेने से क्रिकेट में एक स्वर्णिम युग समाप्त हुआ है।

सतपाल सिंह, करनाल

अनुभव बांटें

महेंद्र सिंह धोनी ने देश के स्वतंत्रता दिवस वाले दिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान किया। धोनी के इस फैसले से क्रिकेट प्रेमियों को निराशा हुई। धोनी के बिना भारतीय क्रिकेट में इनकी कमी तो जरूर महसूस होगी। मौजूदा खिलाड़ियों को धोनी की राह पर चलना चाहिए। भारत के जिन दिग्गज खिलाड़ियों ने क्रिकेट में देश को शानदार जीत दिलवा कर टीम का रुतबा बढ़ाया है, उन्हें चाहिए कि वे अपने हुनर का ज्ञान उन युवाओं को देने का प्रयास करें जो क्रिकेट में कुछ करने का जज्बा और जोश रखते हों।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

खिलाड़ियों को सिखाएं

महेंद्र सिंह धोनी निश्चित ही क्रिकेट जगत के ऐसे कप्तान रहे हैं, जिन्होंने सफलता की ऊंचाइयों को छूकर टीम को टेस्ट क्रिकेट में नंबर वन बनाया है। यह हम सभी के लिए ख़ुशी की बात है। इनसे पूर्व कपिल देव और सचिन तेंदुलकर जैसे कप्तानों ने भी क्रिकेट में अच्छी ख्याति प्राप्त की है। अब धोनी जैसे कप्तान नये खिलाड़ियों का नेतृत्व कर और भी अधिक उपयोगी हो सकते हैं। धोनी की तरह देश में अनेक प्रतिभाएं इस क्षेत्र में और भी मिल सकती हैं, जिन्हें सही से तराशने की जरूरत है। इसलिए इन्हें सही से तलाश कर और प्रशिक्षित कर सही दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।

वेद मामूरपुर, नरेला

स्वर्णिम सफलता

भारतीय क्रिकेट का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें कई नामी खिलाड़ियों का ज़िक्र होगा लेकिन जिस एक खिलाड़ी का ज़िक्र सुनहरे अक्षरों में होगा वो नाम सिर्फ महेन्द्र सिंह धोनी का होगा। सफल कप्तान, सर्वश्रेष्ठ फिनिशर, विध्वंसक बल्लेबाज़, शांत खिलाड़ी, उनके बारे में जितना लिखो, उतना कम है। घर में ही नहीं, विदेश में भी धोनी की अगुवाई में भारतीय टीम ने नित नए शिखर छुए हैं। फैसला क्रिकेट के मैदान का हो या फिर जिंदगी का, धोनी के हर फैसले को दुनिया ने सराहा। जहां तक उनके संन्यास लेने का सवाल है तो उसे उचित ही कहा जाना चाहिए।

प्रदीप कुमार दुबे, देवास, म.प्र.

आपकी राय Other

Aug 29, 2020

तनाव में छात्र

जेईई और एनईईटी की परीक्षा के संबंध में कई प्रकार के तर्क दिये जा रहे हैं। लेकिन इन तर्कों के चक्कर में परीक्षा में देरी हो रही है। वहीं परीक्षार्थियों में तनाव बढ़ रहा है। उनका मनोबल गिर रहा है। परीक्षा को राजनीतिक एजेंडा बनाने के बजाय छात्रों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। छात्रों को एक निश्चित तारीख या फैसला दिया जाना चाहिए। उतार-चढ़ाव की तारीखें छात्रों की मदद नहीं कर रही हैं। ऐसे लोग हैं जो सोचते हैं कि छात्र घर पर हैं, वे तनाव और हर चीज से मुक्त हैं, लेकिन वे यह नहीं समझ रहे हैं कि कोविड-19 उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित कर रहा है, चाहे वह ऑनलाइन कक्षाएं हों या परीक्षाओं में भाग लेना।

नीतिका सिंह, चंडीगढ़

मजबूत विपक्ष

28 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में विश्वनाथ सचदेव का ‘जनतंत्र के हित में नहीं कमजोर कांग्रेस’ लेख सशक्त विपक्ष के न होने पर व्यथा प्रकट करने वाला था। कांग्रेस वर्किंग कमेटी में नेहरू-गांधी परिवार के परम भक्त शामिल हैं। इसलिए नेता के चुनाव के लिए सोनिया गांधी के नाम की सर्वसम्मति से सिफारिश करना स्वाभाविक था। कांग्रेस को पिछली शर्मनाक विफलता को देखते हुए हर दृष्टि से मंथन, मनन तथा चिंतन करने की जरूरत है। सशक्त विपक्ष के बिना सत्ता पक्ष उसी तरह निरंकुश हो जाता है जैसे 1975 में इमरजेंसी में इंदिरा गांधी हाे गई थी।

शामलाल कौशल, रोहतक

जड़ तलाशिये

केंद्र और राज्य सरकारें पोलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए हरसंभव कोशिशें कर रही हैं लेकिन इसका खमियाजा चालान के रूप में छोटे व्यापारियों, दुकानदारों व रेहड़ी-फड़ी वालों को भुगतना पड़ रहा है। चालान तो उन बड़ी कंपनियों के कटने चाहिए जो बेख़ौफ होकर धड़ल्ले से पोलिथीन का उत्पादन कर रहे हैं। जब पोलिथीन का उत्पादन ही नहीं होगा तो कोई क्या खरीदेगा और क्या कोई चालान करेगा।

सतपाल सिंह, करनाल

आपकी राय Other

Aug 28, 2020

साइबर क्राइम

इन दिनों ऑनलाइन ठगी की वारदातों में काफ़ी वृद्धि हुई है। रोजाना अखबारों में इस से जुड़ी कई खबरें ध्यान खींचती हैं। अनपढ़ के साथ-साथ पढ़े-लिखे लोग भी इनकी ठगी का शिकार हो रहे हैं। हालांकि, सरकार ने साइबर क्राइम से सम्बन्धित मामलों पर सख्त कानून बनाये हुए हैं लेकिन फिर भी ऐसे मामलों पर लगाम नहीं लग रही। जरूरी है कि लोग खुद सचेत रहें ताकि भविष्य में ऐसी वारदातों पर अंकुश लगाया जा सके।

रमन कुमार कुकरेजा, मोहाली

जान और जहान

पंजाब सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन के नियमों में कुछ बदलाव किये हैं। उधर केंद्र सरकार ने भी देश के यातायात और आर्थिक व्यवस्था में मुख्य भूमिका निभाने वाली रेल को भी लगभग बंद ही रखा है। जहां एक तरफ सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश में बेरोजगारी बढ़ रही है। हमें बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

टाला जाये

सुप्रीम कोर्ट ने नीट व जेईई की परीक्षा को सितम्बर में करने के आदेश दिए हैं। क्या केंद्र व शिक्षा मंत्रालय फैसला नहीं ले सकते कि महामारी के इस दौर में बच्चों को पेपर के बहाने मौत के मुंह में धकेलने से रोक सकें। मामला कोर्ट में जाना ही नही चाहिए था। सरकार अगर संवेदनशील व युवा भविष्य को बचाने के हक़ में है तो परीक्षा को टालना होगा।

विनय मोहन, खारवन, जगाधरी

लावारिस पशु

लावारिस पशुओं की समस्या दिनप्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है। भिवानी जिले को छोटी काशी कहे जाने वाला शहर भी इस समस्या से अछूता नहीं है। लावारिस पशु बीच सड़क में बैठे रहते हैं जो कि हादसे को न्योता देते हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि समय रहते हुए इस समस्या पर काबू पाया जा सके।

संदीप कुमार, चंडीगढ़

सावधान रहें Other

Aug 27, 2020

सभी को बस यही इंतजार है कि अब जल्द से जल्द कोरोना महामारी खत्म हो जाए। इसी बीच डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस गेब्रियेसस का कहना है कि यह महामारी दो साल में खत्म हो सकती है। भारत में लोगों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है, ऐसे में संक्रमण बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है। वहीं, डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि भारत में कोरोना के जितने मामले हैं, वे 130 करोड़ की आबादी के हिसाब से बहुत ज्यादा नहीं हैं। हालांकि भारत में संक्रमण का रिस्क तो अभी भी बना हुआ ही है।

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

रोजगार बढ़ाएं

25 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘श्रम- पूंजी के संतुलन से निखरेगी आर्थिकी’ लेख विश्व बैंक द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए उपर्युक्त सुझाव पर चर्चा करने वाला था। इस समय भारत में प्रमुख समस्या बेकारी है, जिसके समाधान के लिए हम जिन आर्थिक क्रियाओं का विकास करें, उसका निष्कर्ष इस समस्या का समाधान होना चाहिए। कोरोना काल में मंदी से गुजर रही अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई की सुविधाओं के विस्तार, सड़कें व पुल निर्माण एवं लघु तथा कुटीर उद्योग को संरक्षण देना होगा।

शामलाल कौशल, रोहतक

चौकसी जरूरी

‘आतंक के मंसूबे’ शीर्षक से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय (24 अगस्त) पढ़ा। सीमा पार से हथियार और विस्फोटक सामग्री लेकर आतंकी देश में कड़ी चौकसी के बावजूद घुस कैसे जाते हैं, यह समझ नहीं आता। दिल्ली में पकड़े गए आतंकवादी और उसकी गतिविधियां बड़ी खतरनाक हैं। अगर वह अपने मकसद में कामयाब हो जाता तो एक बड़ा हादसा हमें झेलना पड़ता। पुलिस और खुफिया तंत्र की सजगता ने अनहोनी से बचा लिया है।

अमृतलाल मारू, धार, म.प्र.

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Aug 26, 2020

बेरोजगारों को लाभ

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी का गठन करके करोड़ों युवाओं के हित में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इससे बेरोजगारों के बार-बार परीक्षा शुल्क और साक्षात्कार आदि पर होने वाले खर्च में कटौती होगी। इस निर्णय से युवा शक्ति के समय और संसाधनों की बचत होगी। राष्ट्र के सकारात्मक कार्यों में समय और संसाधनों का उचित उपयोग हो सकेगा। केंद्र सरकार को सभी नौकरियों की भर्ती इस एजेंसी के माध्यम से करे और राज्य सरकारें भी इस प्रक्रिया में शामिल हों।

देवीप्रसन्न उज्ज्वल, उचाना, जींद

जानलेवा इमारतें

दिल्ली के बाड़ा हिन्दू राव क्षेत्र में जर्जर इमारत के सत्यापन के लिए गए दिल्ली पुलिस के एएसआई की मौत हुई और एक सिपाही घायल हो गया। इस इमारत में कई फैक्टरियां भी चल रही हैं। इस तरह की सरकारी और गैर-सरकारी इमारतों का सर्वे होना चाहिए ताकि समय रहते लोगों की जान की हिफाजत हो सके। उम्मीद है कि सरकार भविष्य में ऐसे मुद्दों पर विचार करेगी।

वेद मामूरपुर, नरेला

डरावने आंकड़े

सीएमआईई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जुलाई के महीने में 50 लाख वेतनभोगी वर्ग ने अपनी नौकरी खो दी और अप्रैल से अब तक लगभग 2 करोड नौकरियां गई है। यह डेटा वास्तव में डरावना है और सरकार द्वारा इस समस्या का समाधान किए जाने की आवश्यकता है। सरकार को रोज़गार दिलाने की कवायद जल्द से जल्द हल करना चाहिए।

गौरव कुमार, राजपुरा

सच पर पर्दा

पाकिस्तान में दाउद इब्राहिम के होने के अपने कबूलनामे के एक ही दिन बाद वह अपनी बात से मुकर गया। पाकिस्तान चीन का चेला है। बात-बात में पलटना धूर्त चीन की फितरत है। उसी प्रकार पाकिस्तान भी धूर्तता, मुकरना शामिल है।

हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, म.प्र.

आपकी राय Other

Aug 25, 2020

वक्त की नब्ज पर हाथ

22 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का ‘नीति-नीयत-नेतृत्व की कसौटी पर कांग्रेस’ लेख देश के राजनीतिक परिदृश्य का आईना दिखाने वाला था। लेख के प्रकाशन के बाद नेतृत्व को लेकर मची उठापटक लेख की सार्थकता को संबल दे गई। थोपा गया कमजोर नेतृत्व तथा देश के जनमानस के अहसासों को नजरअंदाज करने की कीमत चुका रही है कांग्रेस। जनाधार वाले नेताओं को किनारे लगाने का खमियाजा कांग्रेस भुगत रही है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में पार्टी कार्यकर्ताओं का असंतोष इसका गवाह है।

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार, उत्तराखंड

रोजगार बढ़ाएं

24 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में क्षमा शर्मा का लेख ‘युवाओं को अवसाद से उबारें सरकारें’ बेरोजगारी के कारणों का खुलासा करने वाला रहा। तकनीकी शिक्षा बेरोजगारी में उत्तरोत्तर वृद्धि करने में सहायक हुई है। कोरोना वायरस के संकट काल में युवाओं को रोजगार मुहैया करवाने के उपायों पर सरकारें गंभीरता से विचार करें। लघु उद्योग-धंधों को बढ़ावा देकर सस्ती दरों पर बैंकों से ऋण उपलब्ध करवाए जा सकते हैं।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

कोरोना संकट में जवाबदेही Other

Aug 24, 2020

साझी जिम्मेदारी

जब से महामारी कोरोना ने दस्तक दी थी, तब से सरकार ने कर्फ्यू और लॉकडाउन कर दिया था। पुलिस भी गली-मोहल्लों में गश्त लगाती थी, लेकिन सरकार ने देश की आर्थिक व्यवस्था के पहिए को गतिमान करने के लिए अनलॉक करना शुरू कर दिया। उस समय सरकार, प्रशासन और समाज कोरोना के प्रति लापरवाह हो गए। वहीं समाज ने भी इन नियमों को ठेंगा दिखाना शुरू कर दिया। अभी भी वक्त है सरकार, प्रशासन के साथ समाज को भी कोरोना के प्रति गंभीर हो जाना चाहिए।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

चूके तो हैं

समय रहते लॉकडाउन लागू करने और सरकार के दावों के बीच कोरोना संकट लगातार विकट हुआ है। सरकार ने शुरुआती दिनों में गरीब वर्ग के लोगों के लिए अनाज, दालों का इंतजाम किया, हर तरह से एहतियाती कदम उठाये। लेकिन सरकार के अनलॉक के कदम उठाने के बाद स्थिति भयावह हो गई। सरकार के साथ समाज ने भी लापरवाही दिखाई। अस्पतालों में भी मरीजों के इलाज में लापरवाही दिखी। आलम यह है कि सरकार ने सख्ती के स्थान पर ढिलाई से काम लिया, जिसका परिणाम आज हमारे सामने भयंकर रूप में देखने को मिल रहा है।

नेहा, चंडीगढ़

जान है तो जहान

सरकार द्वारा ‘जान है तो जहान है’ का नारा देकर लॉकडाउन लागू किया गया तो लोगों ने भी इसका भरपूर समर्थन किया। चिकित्सा, पुलिस व सफाई कर्मचारियों की हौसलाअफजाई की गई। इसी बीच संक्रमण की रफ़्तार भी बढ़ती चली गई। संक्रमण की बढ़ती गति ने सरकार की नीतियों पर प्रश्नचिन्ह लगाया है तो दूसरी तरफ समाज पर भी संक्रमण को गंभीरता से नहीं लेने का सवाल खड़ा किया गया। देश की कमजोर आर्थिक स्थिति, घनी आबादी और आर्थिक विषमता भी संक्रमण बढ़ने के कारण हैं। बेलगाम कोरोना संक्रमण पर मज़बूत चिकित्सा तंत्र ही लगाम कस सकेगा।

देवी दयाल दिसोदिया, फरीदाबाद

बचाव में ही बचाव

वैश्विक महामारी कोरोना देश और दुनिया में विकराल रूप धारण करती जा रही है, यह बेहद चिंतनीय है। भले ही लॉकडाउन हटा लिया गया हो, किंतु हम सब का नैतिक दायित्व है कि सामाजिक दूरी, मास्क, सैनिटाइजर आदि मूलभूत प्राथमिकताओं की पालना करें। प्राणायाम, व्यायाम को अपनी जीवनशैली बनाएं तथा रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने के लिए संतुलित आहार को प्राथमिकता दें ताकि संक्रमण से बच सकें। हमें लापरवाही त्याग कर, बचाव में ही बचाव है की मूल अवधारणा को अपनाना होगा। तभी संक्रमण को रोका जा सकता है। देश में बढ़ते संक्रमण के मामले हम सबकी लापरवाही का परिणाम हैं।

आचार्य रामतीर्थ, रेवाड़ी

तालमेल जरूरी

समय पर किए गए लाॅकडाउन से देश में कोरोना पर लगाम लगी थी। कोरोना से निपटने का एकमात्र रास्ता लाॅकडाउन ही था। तब लाॅकडाउन के दो फायदे हुए; पहला, देश ने सीमित संसाधनों में जीना सीखा, दूसरा सरकार ने चिकित्सा संबंधी बंदोबस्त कर लिया। लेकिन लाॅकडाउन कोरोना का समाधान नहीं है। इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार स्वयं हम हैं। अनलाॅक होते ही हम लाॅकडाउन के नियमों को भूल गए। बाजारों में इतनी भीड़ उमड़ी जैसे कोरोना खत्म हो गया हो। प्रशासन भी उतना गंभीर नहीं हुआ। देश में चिकित्सा व्यवस्था भी अच्छी नहीं है। कहीं न कहीं सरकार व देश के नागरिकों में तालमेल का अभाव रहा।

सोहन लाल गौड़, कैथल

दोनों लापरवाह

कोरोना जैसी बड़ी महामारी और अन्य किसी भी आपदा से मुक्ति के लिए सरकार और समाज दोनों का ही सही समन्वय और सहयोग जरूरी है। बड़ी आबादी जैसे कई कारणों के बावजूद समाज के कुछ लापरवाह और कट्टरपंथी लोगों को छोड़ सभी ने पूरा सहयोग दिया है। यदि विदेशों से आने वाले प्रवासियों को देश में प्रवेश से पहले ही एयरपोर्टों पर ही जांच कर रोक लिया जाता तो यह संकट आगे ही न बढ़ता। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन सुनियोजित न होने से अनेक प्रवासी श्रमिकों और संबंधित आर्थिक समस्याएं हुई हैं। सरकार और समाज दोनों ही कई कारणों से लापरवाह दिखे।

वेद मामूरपुर, नरेला

पुरस्कृत पत्र

गंभीरता से नहीं लिया

भारत में कोरोना संक्रमण की दर दुनिया में सबसे तेज हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकार की ढुलमुल नीतियां हैं। प्रारम्भ से ही इस भयावह रोग से मुकाबले के लिए, दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसे देश वृहद स्तर पर आधुनिक विज्ञान और मेडिकल तकनीक का सहारा ले रहे थे। हम यहां नमस्ते ट्रंप, शिवराज का राज्याभिषेक करा रहे थे। इससे बचाव के लिए ताली-थाली व शंख बजाने तथा मोमबत्ती जलाने के उपक्रम कर रहे थे। प्रारंभ में कोरोना को हल्के में लेना, सरकारी चिकित्सा तंत्र की कमजोरी, गरीबी, निजी अस्पतालों की लूट और राज्य सरकारों की लचर नीतियां कोरोना संकट को बढ़ाने के मुख्य कारण हैं।

निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उ.प्र.

आपकी राय Other

Aug 22, 2020

राष्ट्रीय राशन-कार्ड

चंडीगढ़ में ‘एक देश-एक राशन कार्ड’ योजना लागू कर दी गई है। इसी के साथ चंडीगढ़ योजना लागू करने वाला पहला शहर बन गया है। योजना का लाभ सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों को होगा क्योंकि एक ठिकाना न होने के कारण राशन न मिलना सबसे बड़ी दिक्कत थी। इस योजना से देश के किसी भी कोने में एक राशन कार्ड से राशन लिया जा सकता है। भविष्य में राशन कार्ड के लिए उन्हें चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

कनिका, धर्मशाला

सार्थक पहल

केंद्र सरकार ने केन्द्रीय भर्ती संगठन को मंजूरी दे दी है। यह कदम देश में राष्ट्रीय स्तर की रिक्तियों में चयन के लिए परीक्षा तंत्र को और अधिक मज़बूत करने के लिए उठाया गया है। लेकिन यह पहल तभी अच्छे नतीजे दे सकेगी, जब परीक्षा तंत्र से पहले शिक्षा तंत्र को और अधिक मज़बूत एवं आधुनिक किया जाए। देश के सभी बच्चों को शिक्षा का अवसर सिर्फ कागज़ों में नहीं बल्कि हक़ीक़त में मिले। 

यशपाल माहवर, श्री मुक्तसर साहिब, पंजाब

अंतिम विकल्प

कई राज्यों के बीच पानी के बंटवारे पर वर्षों से विवाद चल रहे हैं, जिनको निपटाने में सरकार, न्यायालय एवं ट्रिब्यूनल सभी असफल रहे हैं । इसके समाधान हेतु सरकार को बिजली सम्प्रेषण की तरह पानी के लिए भी राष्ट्रीय ग्रिड की स्थापना कर देनी चाहिए, जो प्रत्येक राज्य को उसकी आवश्यकता अनुसार पानी की पूर्ति करे ताकि पानी व्यर्थ भी न जाए।

एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र

सत्य उजागर हो

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश के बाद राजनीतिक रस्साकशी का खेल खत्म हो जाना चाहिए। अब तक न केवल महाराष्ट्र व बिहार पुलिस आमने-सामने थी बल्कि इस प्रकरण का पूरा राजनीतिकरण हो चुका था। अब सीबीआई जो भी अंतिम सत्य है, उसे उजागर करे।

हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, म.प्र.

आपकी राय Other

Aug 21, 2020

रास्ता निकाले

एसवाईएल पंजाब और हरियाणा के लिए एक अतिमहत्वपूर्ण मुद्दा है। पिछले कई सालों से देश के अंदर पानी की किल्लत नज़र आयी है। मॉनसून कमजोर होने से आने वाले दिनों में पानी की किल्लत और ज्यादा होगी। पानी की कमी हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों में है। सच्चाई यह है कि अगर एसवाईएल बनती है तो हरियाणा की पानी की जरूरतें पूरी होंगी, लेकिन पंजाब को पानी की कमी हो जायेगी। इसलिए दोनों राज्य की सरकारें मिलकर अपनी जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए एसवाईएल के अलावा कोई और विकल्प रास्ता निकालना चाहिए।

नारायण हरि, चंडीगढ़


शास्त्रीय संगीत के प्रतीक

शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं में पंडित जसराज जी ने जो आयाम स्थापित किए थे, उनकी भविष्य में बहुत दिनों तक चर्चा होती रहेगी। धार्मिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, शास्त्रीय गायन के विभिन्न मंचों पर पंडित जसराज जी ने जो भाव विभोर करने वाली प्रस्तुतियां दीं थी वे बेजोड़ रहीं। भक्ति रस से परिपूर्ण संगीत की विधा पर संगीत प्रेमियों को नाज रहेगा। स्वर्गीय पंडित जसराज जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, उनकी कला को कोटि-कोटि नमन। 

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद


दिलों में रहेंगे

क्रिकेटर एमएस धोनी ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर क्रिकेट प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया। धोनी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर और बल्लेबाज हैं। उनके हेलीकॉप्टर शॉट को याद किया जायेगा। उन्हें सीमित ओवरों के मैचों में सबसे अच्छे खिलाड़ी के रूप में याद रखा जाएगा। भारतीय क्रिकेट टीम को कूल कैप्टन के रूप में एमएस धोनी की कमी खलेगी। प्रत्येक क्षेत्र में धोनी का जज्बा हमेशा अलग रहा है। धोनी का संन्यास भारतीय क्रिकेट के लिए एक युग का अंत है। धोनी हमेशा दिलों के खिलाड़ी थे और रहेंगे। 

नेहा, चंडीगढ़ 

अपराधियों के हौसले Other

Aug 20, 2020

यूपी सरकार ने दावा किया है कि उनकी सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता की नीति पर काम करती है, लेकिन जमीनी हकीकत पर यह शून्य है। दुर्भाग्य से, सरकार ऐसा करने में विफल रही है। विशेष रूप से लड़कियां एवं महिलाएं डरी हुई हैं। सिर्फ मुआवजे और निलंबन पर ध्यान देने के बजाय अपराध नियंत्रण प्रणाली को और अधिक सतर्क और सक्रिय होने की आवश्यकता है। एक राष्ट्र के रूप में हम कभी भी सफल नहीं होते हैं जब तक देश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।

गौरव कुमार, राजपुरा


अपूरणीय क्षति

भारतीय शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने वाले पंडित जसराज का निधन शास्त्रीय संगीत क्षेत्र की एक अपूरणीय क्षति है। दुनिया के कोने-कोने में शास्त्रीय संगीत प्रेमी तैयार करने वाले पंडित जसराज सुरों के बेताज बादशाह थे। पंडित जसराज का गायन श्रोताओं को बेचैनी, चिंता और तमाम मानसिक अवसाद से निकालकर उसकी तरन्नुम में इस कदर रमा देता था कि लोग सब कुछ भूलकर मग्न हो जाते थे। पंडित जी का निधन उस साधना पर विराम है जो लोगों को आनंद में निमग्न कर देती थी।

अमृतलाल मारू, दसई धार, म.प्र.


यादगार पारी

एमएस धोनी ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। प्रशंसक उनके शक्तिशाली हेलीकॉप्टर शॉट को हमेशा याद करेंगे। उन्होंने इस पीढ़ी में कई लोगों को प्रेरित किया है और वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। उन्हें भविष्य में कोच के रूप में वापस आते देखना बहुत अच्छा होगा।

महक चतुर्वेदी, चंडीगढ़


नया धोनी चाहिए

महेंद्र सिंह धोनी ने क्रिकेट से संन्यास का सही फैसला लिया है। सीनियर खिलाड़ी के अधिक समय तक खेलने से कई प्रतिभावान खिलाड़ी पीछे रह जाते हैं।  वे टीम में शामिल नहीं हो पाते। खिलाड़ी के खेलने की उम्र तय होनी चाहिए। भारतीय टीम को नये धोनी तैयार करने चाहिए।

प्रदीप कुमार दुबे, राजाराम नगर, म.प्र. 

श्रमिक नीति Other

Aug 19, 2020

18 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘दूरगामी रणनीति बने श्रमिकों के लिए’ लेख नई श्रम नीति बनाने की जरूरत पर बल देने वाला था। इसके अलावा जिस गृह राज्य से प्रवासी मजदूरों का संबंध है वहां भी उद्योग-धंधे विकसित किए जाएं ताकि ये लोग किसी और राज्य में न जाएं। लेखक ने प्रवासी मजदूरों के लिए विदेशी भाषाएं सीख कर ट्रांसलेशन करके आमदनी कमाने की जो बात कही है, वह व्यावहारिक नहीं हो सकती क्योंकि ये मजदूर बहुत पढ़े-लिखे नहीं हैं। प्रवासी मजदूरों को सरकार-समाज आश्वासन दे कि उन्हें फिर से ऐसी स्िथति में चिंतित होकर लौटने नहीं दिया जाएगा।

शामलाल कौशल, रोहतक


नियमन जरूरी

सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाने वाली भड़काऊ सामग्री देश की जड़ों को कमजोर कर रही है व लोगों को उकसाती है। जिस उकसाने वाली सामग्री से राष्ट्रीय एकता, आपसी सौहार्द व जानमाल का नुकसान होता है, ऐसे आग उगलने वाले प्लेटफार्म पर प्रतिबंध लगाना वक्त की जरूरत है। साथ ही सरकार सख्त कार्रवाई कर स्वयं व्हाट्सएप, फेसबुक जैसे प्लेटफार्म मुहैया करवाए ताकि देश को कमजोर करने वाली ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, म.प्र.


सुरक्षा का भरोसा दें

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नीट और जेईई परीक्षा के स्थगन की मांग तो टाल दी है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा रही है। हज़ारों की संख्या में बच्चे परीक्षा देने आएंगे तो भीड़ होना निश्चित है। सरकार को बच्चों के कोरोना से बचाव के लिए हर प्रबंध ईमानदारी से करना होगा। ऐसे समय में हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा।

कनिका, धर्मशाला

स्कूलों की मनमानी Other

Aug 18, 2020

निजी स्कूलों द्वारा फीस को लेकर अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है। कई निजी स्कूलों ने तो फीस जमा नहीं करने पर बच्चों की आईडी ब्लॉक कर उन्हें ऑनलाइन कक्षा से बाहर तक कर दिया है। यही नहीं, स्कूल वाले शिक्षण शुल्क के साथ-साथ कंप्यूटर व स्मार्ट क्लास की भी फीस अभिभावकों से मांग रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि वे कई बार स्कूलों की मनमानी के लिए शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं हो रही है। कोविड-19 के चलते छात्र और अभिभावक पहले ही परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

जनसंख्या की चुनौती

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश में बढ़ती जनसंख्या पर चिंंता व्यक्त की थी। जब तक लोग जनसंख्या वृद्धि के परिणामों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक देश की समस्याएं कम नहीं हो सकतीं। समय आ चुका है कि सरकार देश में बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाकर गंभीरता से लागू करे।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

आत्मविश्वास की पूंजी Other

Aug 17, 2020

अंकुर खरया

अपने अंदर का विश्वास ही किसी व्यक्ति के लिए सफलता का मार्ग खोलता है। अगर आपके पास सारे संसाधन, क्षमता, योग्यता आदि हो लेकिन उसके ऊपर आपका विश्वास नहीं हो, तो सफलता आपसे उतनी ही दूर है, जितनी दूर समुद्र के किनारे बैठे व्यक्ति से मीठा पानी। जीवन में सफलता का रहस्य है आत्मविश्वास। यदि मनुष्य कितनी भी मेहनत कर ले, परंतु उसे अपने ऊपर भरोसा नहीं है तो वह सफल नहीं हो सकता। जन्म से ही कोई महान अथवा गुणवान पैदा नहीं होता, लेकिन दृढ़तापूर्वक अभ्यास से हर एक अपने में गुण पैदा कर सकता है। बहुत से विचारक ऐसे हुए हैं जिन्हें बचपन में बहुत डर लगता था, परंतु अच्छे विचार वालों से उनमें आत्मविश्वास जगा और वे ऐसे निडर बने कि दुनिया की कोई ताकत उन्हें नहीं डरा सकी। आत्मविश्वास एक ऐसा साधन है, जिसके बिना कामयाबी की सीढ़ी नहीं चढ़ी जा सकती। आत्म विश्वास ही हमें लीक से हटकर फैसले लेने में मदद करता है जो हमारे करियर की राह में मील का पत्थर साबित हो जाते हैं। कठिन परिस्थितियों में जब बहुत से लोग फेल होने के डर से अपने कदम पीछे खींच लेते हैं, उन परिस्थितियों में आत्मविश्वास और साहस से लिए गए फैसले ही हमें जीत दिलाते है। जानिए ये तरीकेे जो आप में आत्मविश्वास जगाने में सहायक सिद्ध होंगे।

संभावनाओं को खोजें और बनें प्रगतिशील। निर्णयात्मक बनें और फटाफट लें फैसले। स्वयं के लिए समय निकालें और खुद पर काम करें। अपने बारे में सोचिये और शक्तियों को पहचानिये। कामयाब लोगो की संगति में रहें। अपने मन पर काबू पाना सीखें। धैर्य रखना सीखें। अपने लक्ष्यों को समय-समय पर चिंतन करते रहें। अपने आपको सकारात्मक और स्वस्थ रखें। दूसरों की नक़ल न करें। अपनी क्षमता को समझकर ही कोई निर्णय लें। अपनी असफलता से डरें नहीं बल्कि उससे प्रेरणा लें। दोस्तो, दुनिया में अनेक ऐसे उदाहरण हैं जब वे चारों ओर से टूट चुके थे, उनके पास बचा था तो सिर्फ आत्मविश्वास और इसी आत्मविश्वास के बलबूते आगे चलकर उन्होंने सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं। इसलिए अपने अनमोल खजाने यानी आत्मविश्वास को कभी डिगने न दें।

साभार : टिप्ससी 123 डॉट ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम

अनुपालन का प्रश्न Other

Aug 15, 2020

सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों को भी उसके पिता की संपत्ति में बराबर हक़ देने का स्वागतयोग्य फैसला दिया है। लेकिन क्या इस फैसले का पालन जमीनी हकीकत पर हो पायेगा? पुरुष प्रधान वाली सोच ने यह स्वीकार ही नहीं किया कि पिता की संपत्ति पर बेटा और बेटी का बराबर का अधिकार है। इस कानून में संशोधन तो हो गया लेकिन क्या पुरुष प्रधान समाज इसे स्वीकार करेगा? क्या बेटियां अपने पिता से अपनी संपत्ति मांग पाएंगी? उम्मीद करनी चाहिए कि इस कानून का ज्ञान सभी वर्ग को हो और बेटियों को संपत्ति में उनका हिस्सा ईमानदारी से मिले।

गौरव कुमार, राजपुरा

समता का कानून

13 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘बेटियों का हक’ बेटियों को अपने पिता की पैतृक अथवा अर्जित की गई संपत्ति में बेटे के बराबर हक मिलने का वर्णन करने वाला था। इस फैसले से और बातों के अलावा बेटा और बेटी में अंतर समाप्त हो जाएगा। यह फैसला महिला सशक्तीकरण की तरफ एक स्वागतयोग्य कदम है। सुप्रीम कोर्ट के उपर्युक्त फैसले के फलस्वरूप लड़की की आर्थिक सुरक्षा बढ़ जाएगी! ऐसा कानून भी होना चाहिए कि विवाहित लड़की अपने ससुराल की संपत्ति की भी हकदार बने।

शामलाल कौशल, रोहतक

बेटियों का हक

13 अगस्त का संपादकीय ‘बेटियों का हक’ खुशी का अहसास करवाने वाला रहा। माता-पिता की पैतृक संपत्ति के बंटवारे के समय बहन-भाइयों में अक्सर लड़ाई-झगड़े देखने को मिल जाते हैं। कोर्ट के इस फैसले से बेटियों को तो राहत मिली है लेकिन जरूरी है कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में नफरत पैदा न हो। रिश्ते की गरिमा को ठेस न लगने पाये। वहीं भाइयों को भी अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा ताकि बहनों को उसका हक मिले।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

साझी लड़ाई Other

Aug 14, 2020

पूरी दुनिया का दृष्टिकोण कोरोना वायरस के चलते चीन के प्रति नकारात्मक होता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का बयान भी चीन पर इसी कड़ी का हिस्सा है। ऐसे में जब कोरोना के कारण भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर होती जा रही है, चीनी सामान के बहिष्कार का यह सही समय नहीं है। चीन के पैर भारत के बाजारों में जम चुके हैं। हमें आत्मनिर्भर बनना है, मगर उससे पहले कोरोना से लड़ाई जीतनी है और चरमराती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। आज दुनिया में प्रतिदिन सबसे ज्यादा केस भारत में हैं। हम कोरोना को तभी हरा सकते हैं जब मीडिया, जनता और सरकार एक साथ इससे लड़ें।

रमाकान्त, रुड़की

न्याय की आस

केंद्र सरकार ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत की गुत्थी को सुलझाने के लिए केस सीबीआई को सौंप कर न्याय की उम्मीदों को एक बार फिर रोशन कर दिया है। इस पूरे मामले में महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस जितनी लापरवाही से पेश आयी है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकार इस केस में कुछ बड़े लोगों को बचाने का भरसक प्रयास कर रही है।

तुषार आनंद, पटना

किसी से कम नहीं

‘मेक इन इंडिया’ के तहत एक नई सफलता का आगाज हुआ है, जिसके तहत भारत में एप्पल ने अपने लेटेस्ट फ्लैगशिप सीरीज़ आई फोन 11 की मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी है। आत्मनिर्भरता की ओर यह एक बढ़ता कदम है। इसकी शुरुआत से रोज़गार बढ़ेगा और एप्पल के आईफोन सस्ते हो जाएंगे।

राहुल, लुधियाना

उम्मीदों की वैक्सीन

रूस ने कोविड-19 की वैक्सीन की खोज एवं उसके सफल परीक्षण का दावा किया है। कोरोना विश्वभर में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पहल कोई भी देश करे, वैक्सीन को किसी राजनीतिक और आपसी कटुता के नजरिये के बजाय पीड़ित मरीज तक पहुंच को यकीनी बनाने में सहयोग करना चाहिए।

यशपाल माहवर, श्रीमुक्तसर साहिब, पंजाब

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

मुद्दे बहुत हैं Other

Aug 13, 2020

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या को लेकर टीवी चैनलों पर खूब बवाल मचा हुआ है। चैनल वाले अपने-अपने ढंग से इस केस का विश्लेषण कर रहे हैं। बीच-बीच में इस केस को लेकर राजनीतिक छींटाकशी भी देखने को मिल रही है। परिवार वालों ने सीबीआई जांच की मांग की है और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। यहां यह सवाल पूछा जा सकता है कि क्या टीवी चैनल वालों के पास इस केस को छोड़कर दर्शकों को दिखाने के लिए और कुछ बेहतर नहीं है? किसी भी मामले पर दो-चार दिन से ज्यादा चर्चा या परिचर्चा नहीं करनी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

बढ़ती आबादी के संकट

कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन कई बार बढ़ाया जा चुका हैं। हालांकि, अभी भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा हैं। लेकिन बढ़ती जनसंख्या से काफी दिक्कतें सामने आ रही हैं। देश में संसाधन सीमित हैं और आबादी बेहद तेजी से बढ़ रही है। लॉकडाउन के चलते लोग बेरोजगार हो गए हैं। कोरोना संकट से हमें सबक लेना चाहिए व जनसंख्या नियंत्रण पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

सराहनीय कदम

भारत सरकार ने जो 101 सैन्य उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगाया है वह निश्चित ही सराहनीय कदम है। इस प्रतिबंध के बाद स्वदेशी कंपनियों को बड़ा फायदा होगा और देश में रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अगर देश सुरक्षा उपकरणों को अच्छा और सस्ता बनाने में सफल हो जाता है तो निश्चित तौर पर दूसरे देश हमसे रक्षा उपकरणों को खरीदेंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।

गौरव कुमार, राजपुरा

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

मानवीय तबाही Other

Aug 12, 2020

लेबनान में 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट में हुए विस्फोट से मची तबाही दिल दहलाने वाली और मानवीय चूक का नतीजा है। ख़बरों के मुताबिक चेन्नई में भी बंदरगाह के पास, घनी आबादी के बीच, कंटेनर फ्रेट स्टेशन में 740 टन अमोनियम नाइट्रेट रखा हुआ है। भले ही इसे हटाने की कार्रवाई चल रही हो पर घनी आबादी में ऐसे भंडारण करने का क्या मतलब है। कुछ ऐसे नियम बनें कि जब भी खतरनाक और विस्फोटक पदार्थ जब्त किये जायें तो उनका भंडारण पूरे सुरक्षा मानकों के साथ आबादी से दूर हो।

बृजेश माथुर, गाजियाबाद, उ.प्र.

खर्चीली शादी से राहत

10 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में क्षमा शर्मा का लेख ‘कोरोना काल में सादगी की शादियों को राह’ ज्ञानवर्धक रहा। कोरोना कॉल में बेटा-बेटी की शादी के आयोजन में आमजन को सुखद अहसास हुआ है। यह प्रयास अनावश्यक खर्च बचाने में सहयोगी रहा। सरकार को दान-दहेज के आडंबर रहित, चुन्नी ओढ़ा, अग्नि के सात फेरों की शादी को प्रोत्साहन देना चाहिए।

अनिल कोशिक, क्योड़क, कैथल

संस्कृत को गरिमा

हि.प्र. ने देश की विरासत संस्कृत को बढ़ावा देने और इसको संजीवनी देने के इरादे से प्राथमिक कक्षाओं से लेकर लगभग दसवीं कक्षा तक इसे अनिवार्य विषय बनाने की प्रशंसनीय पहल की है। संस्कृत के श्लोक बच्चों के मन में नैतिकता का बीज डालेंगे, जिस कारण बच्चे जिंदगी में कभी पथभ्रष्ट नहीं होंगे। देश में वोट बैंक की राजनीति के कारण हिंंदी राष्ट्रभाषा न बन पाई, ऐसे में संस्कृत को गरिमा देना सार्थक होगा।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

सार्थक प्रयास

घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। करीब 101 हथियारों व सैन्य उपकरणों के आयात पर रोक लगायी गयी। यह विशेष प्रयास ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को बढ़ावा देगा। अगले 5 से 7 साल में घरेलू रक्षा उद्योग को क़रीब 4 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध मिलेंगे। देश के लिए यह एक महत्वपूर्ण फैसला है।

गरिमा, अम्बाला

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Aug 11, 2020

शिक्षा की कसक

कोरोना के चलते देश में बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। विकल्प के तौर पर ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। लेकिन देखने में आ रहा है कि खासकर ग्रामीण और गरीब बच्चों के पास तो मोबाइल तक नहीं है। उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसी खबरें हैं कि बाप ने गाय बेचकर दिलवाया अपने बच्चे को मोबाइल। पिछले साल 11वीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को मोबाइल देने का वादा पंजाब सरकार ने किया था। केंद्र सरकार भी बच्चों की पढ़ाई के लिए ऐसी पहल करे।

नेहा, चंडीगढ़

रिश्तों की कसक

7 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में तिरछी नज़र के अंतर्गत ‘रिश्तों की दूरियां और सुरक्षा कवच’ दिलचस्प रहा। रिटायर्ड अफ़सर का शंकालु स्वभाव है और छोटी छत। वह अपने मन को जैसे कैसे संतुष्ट कर लेता है। कोरोना से बचने के लिए बच्चों और पत्नी से दूरी बनाकर फ़ेसबुक पर मित्रता बना रखी है। रक्षाबंधन को बहन और अपनी लड़की से दूरी बनाए रखता है। नतीजा यह निकला कि अब हर कोई उसे कोरोना वाहक समझने लगा है।

हरि कृष्ण मायर, लुधियाना

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आधुनिक हथियारों से सुरक्षा को मजबूती Other

Aug 10, 2020

वक्त की जरूरत

हाल ही में वायुसेना में अत्याधुनिक मिसाइलों व घातक बमों से लैस फाइटर राफेल का शामिल होना देश के सुरक्षातंत्र को मजबूत करने का सार्थक प्रयास है। देश तो अपने नापाक पड़ोसियों को सुधारने के लिए तमाम कोशिश करता आया है, लेकिन वे फिर भी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आते हैं। वायुसेना में अत्याधुनिक मिसाइलों व घातक बमों से लैस फाइटर राफेल के आने से पड़ोसी देशों की नींद हराम हो गई होगी। लेकिन भारत के लिए गर्व की बात है। यह भी सच है कि हम अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए हर समस्या का हल निकालना चाहते हैं।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

शक्ति संतुलन

कारगिल युद्ध से पहले भारत की स्थिति कमजोर थी। सेना आधुनिक साजो-सामान की कमी से जूझ रही थी। इस जीत ने देश को सैन्य तथा कूटनीतिक पहलुओं को सुदृढ़ बनाने का अहसास कराया, परिणामस्वरूप यूरोप-अमेरिका हमारे करीब आए। उच्चकोटि के आधुनिक हथियार व तकनीक तथा सुपरसोनिक वायु शक्ति भारत को देने के लिए सहमत हो गए, जिनकी पहाड़ों तथा दुर्गम एवं महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनाती की अत्यन्त आवश्यकता थी। इसी कूटनीति का प्रभाव है कि आज पड़ोसी देश भिड़ने से पहले नतीजे के बारे में सोचने को मजबूर हुआ है।

एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र

मनोबल बढ़ा

हाल में चीन और भारत के बीच हुए संघर्ष में भारतीय सुरक्षा बल चीन पर हावी रहे, यह हमारे सैनिकों का उचित समय के साथ सैन्य शक्ति को हथियारों से लेकर प्रशिक्षण शक्ति को बढ़ाने का ही वक्त है। सुखोई अत्याधुनिक मिसाइलों, घातक बमांे से लैस राफेल, रडार एवं अंतरिक्ष में उपग्रहों के जाल ने परिदृश्य ही बदल दिया। फाइटर राफेल ने तो भारतीय सेनाओं और देश का मनोबल बढ़ाया है। अब पड़ोसी देश हमारी अपार सैन्य शक्ति के आगे बौना नजर आता है।

रमेश चन्द्र पुहाल, पानीपत

सीमा सुरक्षा मजबूत

आधुनिक अस्त्र-शस्त्र व तकनीक ने भारतीय सीमा-सुरक्षा को मजबूत कर दिया है। राफेल उनमें से एक है। इससे वायुसेना को जो मजबूती मिली उससे सेना का मनोबल भी बढ़ा है। उन्हें विश्वास हो गया है कि सरकार उन्हें आधुनिक बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। सेना को हर मोर्चे पर तैयार रहने के लिए जो मजबूती इस सरकार ने दी है उससे सेना का मनोबल कई गुणा बढ़ गया है। आधुनिक समय में सेना किसी भी स्थिति में लड़ने के लिए सक्षम है। हाल ही में चीन सेना से मुठभेड़ इसका ताजा उदाहरण है।

एस.सी. राम राजभर, चंडीगढ़

मुंहतोड़ जवाब

अत्याधुनिक तकनीक से लैस राफेल फाइटर को सेना में शामिल करना समय की मांग थी। जब पड़ोस में पाकिस्तान व चीन जैसे दुश्मन देश हो तो बातचीत से कभी कुछ नहीं हो सकता। इन दोनों देशों ने हमेशा घात किया है। ये दोनों मुल्क बातचीत का ढोंग रचते हैं परन्तु अन्दर ही अन्दर छुरा घोंपने की ताक में रहते हैं। अब ये दोनों कोई भी कुटलबाजी करने से पहले सौ बार सोचेंगे। राफेल को सेना में शामिल करने से निश्चित ही पूरे देश का मनोबल बढ़ा हैं। अब देश आश्वस्त हो गया कि चीन की किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा।

सत्यप्रकाश गुप्ता, बलेवा, गुरुग्राम

जीत सुनिश्चित

आज के ज़माने में कोई भी युद्ध आधुनिक उपकरणों के बिना जीता नहीं जा सकता। राफेल जैसे लड़ाकू विमान सेना में शामिल होने से भारत की छवि एक ताकतवर देश के तौर पर उभर कर आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि राफेल में जो हवा और जमीन में निशाना लगाने की क्षमता है, वैसी क्षमता फिलहाल चीन और पाकिस्तान दोनों की ही वायुसेना के किसी एयरक्रॉफ्ट में नहीं है, जिसके चलते भारत इन दोनों देशों से कहीं आगे है। श्रेष्ठ हथियारों के अभाव में युद्ध जीतने की कल्पना भी नहीं की जा सकती, परन्तु जहां हथियार उत्तम होते हैं, वहां जीत भी तय होती है।

दिव्येश चोवटिया, गुजरात

आत्मनिर्भरता जरूरी

फ्रांस से आयातित राफेल विमान से भारतीय वायुसेना की ताकत में वृद्धि हुई है। युद्धनीति का यह भी सिद्धांत है कि युद्ध में हथियारों का महत्वपूर्ण स्थान है। कोई कमजोर आर्थिकी वाला देश अच्छे हथियार होते हुए भी युद्ध नहीं जीत सकता। कोरोना लॉकडाउन के कारण देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। इस्राइल जैसे देश से भी हम रक्षा उपकरण खरीद रहे हैं। आखिर पिछले 73 सालों से आत्मनिर्भर क्यों नहीं बने? हमें चीन से मुकाबले के लिए हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। इसलिए देश को और मजबूती के लिए आत्मनिर्भरता भी जरूरी है।

निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

आपकी राय Other

Aug 08, 2020

मर्यादा का अनुकरण

पांच अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘मन-मंदिर में बसायें श्रीराम के आदर्शों को’ लेख में सटीक मार्गदर्शन मिला कि हम श्रीराम के उन जीवन मूल्यों और परम्पराओं पर फोकस करें, जिनके कारण श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका त्याग और आदर्श हर काल और युग में अनुकरणीय है। इस महागाथा को युवा पीढ़ी इसलिये भी गुने-बुने कि उसमें श्रीराम के त्याग, धैर्य और संयम जैसे गुण आ सकें। इन्हीं गुणों के अभाव में यह पीढ़ी अवसादग्रस्त हो रही है। रामायण के केन्द्र में श्रीराम का मर्यादित आचरण ही है। श्रीराम के आदर्श हर युग में जीवंत रहेंगे।

मीरा गौतम, जीरकपुर

समृ़द्धि और अशांति

हर आदमी कलाकार नहीं बन पाता। कठोर परिश्रम और भगवान की नियामत उसे ऊंची बुलंदी पर पहुंचाती है। बुलंदी पर कायम रहने के लिए उसे बहुत बड़ी कुर्बानी देनी पड़ती है। वह अपना वास्तविक जीवन छोड़कर अप्राकृतिक जीवन जीता है, जो दूसरों के लिए तो सुनहरा पर्दा लगता है, लेकिन स्वयं को अन्दर से खोखला कर देता है। लेकिन जिन्दगी से अपनापन का रिश्ता दूर होता जाता है। समृद्धि शांति दो बहनें हैं जो साथ-साथ नहीं रहती। एक आती है तो दूसरी साथ छोड़ जाती है। जब कलाकार इन दोनों बहनों में संतुलन नहीं बना पाता तो जीवन की इस कसौटी में अपनी हार दिखायी देती है। कोराेना काल में कलाकार अवसाद की ओर बढ़ते जा रहे हैं।

रमाकांत, रुड़की

संकल्प का वक्त

छह अगस्त का संपादकीय ‘सबके राम’ पढ़ा। यह दिन करोड़ों दिलों में खुशियों का संचार करने वाला रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों की सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक अवधारणा का मान बढ़ाया है। हम सब नैतिकता के आधार पर कर्तव्यनिष्ठा, एकता की समिधा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों का अनुकरण करते हुए इस हवन कुंड में डालने का संकल्प लें।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

सार्थक संदेश Other

Aug 07, 2020

छह अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘सबके राम’ बहुत दिलचस्प लगा! अयोध्या में श्रीराम जन्म स्थान पर भूमि पूजन के बाद श्रीरामचंद्र जी का मंदिर बन जाएगा। अब इस मामले पर किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। मंदिर का बनना सामाजिक तथा राजनीतिक समरसता तथा एकता का द्योतक है। श्रीराम मंदिर का निर्माण हमें उनके आदर्शों पर चलने का रास्ता दिखाता है। नये मंदिर के लिए भूमि पूजन का यही संदेश है।

शामलाल कौशल, रोहतक

कद्र की जाये

दैनिक ट्रिब्यून में 4 अगस्त का सम्पादकीय ‘कोरोना योद्धाओं की बेकद्री’ देश की सभी सरकारों की आंखें खोलने वाला था। यदि कोई परिवार इस महामारी से संक्रमित हो जाता है तो घर के सदस्य मरीज के पास जाने से भी घबराते हैं परन्तु डाक्टर व अन्य स्टाफ अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में उनको समय पर वेतन व भत्ते न मिलना न्यायोचित नहीं है।

एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र

वनवास पूरा

पांच अगस्त का दिन रामलला मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन प्रत्येक भारतीय के लिए त्योहार से कम नहीं था। हर जगह, हर घर में दीपक जलाए गए। भगवान श्रीराम का यह वनवास अब जाकर पूरा हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रीराम मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा। देश के लिए यह एक सुनहरा और गर्व का दिन रहा, जो स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा।

सिमरन, कैथल

आदर्शों पर चलें

पांच अगस्त की तारीख भी एक ऐतिहासिक तारीख बन गई। इस शुभ घड़ी में देश राममय हो गया। हम सभी को भगवान श्रीराम के आदर्शों पर भी चलना होगा, उनके जीवन से प्रेरणा लेनी होगी। यह कहना उचित होगा कि भगवान श्रीराम सबके हैं, इनके नाम और मंदिर पर बिल्कुल भी राजनीति नहीं होनी चाहिए।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Aug 06, 2020

श्रीराम के आदर्श

पांच अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘मन मंदिर में बसायें श्रीराम के आदर्श को’ लेख ने दिल को छुआ। सही बात है कि हमारी आस्था तभी मायने रखती है जब हम मर्यादा पुरुषोत्तम की मर्यादाओं को दैनिक जीवन में अपनाएं। एक परिवार के सदस्य और देश के नागरिक के रूप में। जैसा लेखक ने लिखा भी है कि विश्व के अनेक देशों में उनकी स्वीकार्यता की वजह उनके आदर्श ही हैं। लेख के लिए साधुवाद!

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार

जीवन में हो अनुकरण

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद अब देश में श्रीराम को लेकर होती रही ओछी राजनीति का अंत हो जाएगा। श्रीराम भारत के आदर्श हैं और श्रीराम का चरित्र आज के समय में सभी के लिए एक पवित्र जीवन संदेश है। हम सबको आपसी कटुता एवं धर्म के नाम पर दंगों का परित्याग करने का वचन लेने और श्रीराम के जीवन चरित्र को आदर्श मानकर अच्छे एवं नैतिक जीवन जीने से ही श्रीराम मंदिर की प्रासंगिकता सिद्ध होगी।

यशपाल मावर, श्रीमुक्तसर साहिब, पंजाब

दृढ़ इच्छाशक्ति

मनुष्य के अंदर अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी कार्य असम्भव नहीं। देश के नेता बहानेबाजी करते रहते हैं, कार्य न करने के लिए। दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जो मनुष्य की इच्छाशक्ति से बड़ा हो। हमें किसी किताबी हीरो की बजाय सोनू सूद जैसे व्यक्ति से प्रेरणा लेनी चाहिए।

सुनील सहारण, फतेहाबाद

दमखम नहीं

राहुल गांधी के भाषणों से बेतुकी बातों का वर्णन होता है। उनके आलू से सोना बनाने वाले भाषण तथा ट्विटर पर किये जाने वाले पोस्ट उनकी पार्टी को चलाने की असमर्थता को दर्शाते हैं। राहुल को नया अध्यक्ष चुनना पार्टी के लिए लाभकारी नहीं होगा। गांधी और नेहरू परिवार के सदस्यों के अलावा किसी और को मौका देना चाहिए।

अक्षरा गुरबानी, चंडीगढ़

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

आपकी राय Other

Aug 05, 2020

सुरक्षा का नजरिया

रक्षा मंत्रालय ने  फिल्म प्रमाणन बोर्ड समेत विभिन्न मंत्रालयों से फिल्म निर्माताओं को सेना के विषयों पर किसी भी फिल्म, वृत्तचित्र या वेब शृंखला के प्रसारण से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने की सलाह देने के लिए कहा है। कुछ संबंधित नागरिक और पूर्व सैनिक व एसोसिएशन ने एक प्रोडक्शन हाउस के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। टीवी चैनल अक्सर दुश्मन के लोगों के साथ हमारे सशस्त्र बलों की सैन्य शक्ति की तुलना करते हुए रिपोर्ट प्रसारित करते हैं। सीमा पर सैन्य दृष्टि से संवेदनशील स्थानों से विशेष रिपोर्टों को प्रसारित करने की प्रथा पर प्रतिबंध भी होना चाहिए। 

नेहा, मुजफ्फरनगर 

सच समने आये

सुशांत सिंह राजपूत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आत्महत्या की है। लेकिन लोग इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं है। शुरुआत में बॉलीवुड में नेपोटिज्म को सबसे बड़ा कारण मान रहे थे। जब से सुशांत के पिता ने अभिनेत्री रिया चक्रबर्ती और उनके परिवार के खिलाफ पटना में एफआईआर दर्ज करवाई है तब से इस मामले एक नया मोड़ आ गया है। मुम्बई पुलिस भी संदेह के घेरे में है। देश की जनता सीबीआई जांच की मांग कर रही है ताकि मौत का सच पता चल सके।

 गौरव कुमार, राजपुरा

जानलेवा कारोबार

3 अगस्त के दैनिक ट्रिब्यून संपादकीय ‘जहरीला कारोबार’ विचलित करने वाला रहा। पंजाब में जहरीली शराब पीने से लगभग 113 व्यक्ति मौत के शिकार हो गए हैं। राज्य सरकार द्वारा चलाई गई नशा मुक्ति मुहिम कामयाब नहीं हो रही है। शराब का कारोबार प्रशासन की नाक तले खूब फलफूल रहा है। प्रशासनिक  चेतना हादसा होने के बाद जागती है। मौतों के इस धंधे में संलिप्त दोषियों को कठोर सजा देकर ही हादसे का शिकार हुए परिवारों को सांत्वना मिल सकती है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

विद्रूप खेल Other

Aug 04, 2020

31 जुलाई के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह के ‘कांग्रेसी संकट में अवसर तलाशती भाजपा’ लेख में स्पष्ट कहा है कि 14 अगस्त को राजस्थान के विधानसभा सत्र में गहलोत और पायलट के बीच चल रही राजनीतिक उठापटक का पटाक्षेप होगा। नाटकीयता की तरफ बढ़ रही राजनीति में सूत्रधारों का खेल चरम पर है। अगर अध्यक्ष का पद फिर राहुल को चला गया तो कांग्रेस के भीतर ही बाजी पलट जायेगी। बसपा अपने उन विधायकों को लेकर विलाप कर रही है, जिनके बूते पर राजस्थान में सत्ता का गठन हुआ था जो अब पूरी तरह दूसरी डाल के पंछी बन चुके हैं। इन स्थितियों में सत्तापक्ष अवसर तो तलाशेगा ही। इस रंगमंच पर खेल जारी है। पर, मतदाता को कब समझ में आयेगा कि वही यह स्थिति पैदा कर रहा है और दलों को विद्रूप खेल खेलने का मौका दे रहा है।

मीरा गौतम, जीरकपुर

असली हीरो

सोनू सूद की जितनी प्रशंसा हो उतनी कम है। उन्होंने इंसानियत की एक मिसाल पेश की है। वैश्विक महामारी कोरोना काल के समय में नायक सोनू ने प्रवासी मजदूरों के दर्द को अपना दर्द समझा। असल में वे ही लोगों के सच्चे हीरो हैं।

निधि जैन, लोनी, गाजियाबाद

जग की धुरी नारी Other

Aug 03, 2020

तान्या गोडबोले

बदलते वक्त के साथ गृहिणियों की भूमिका भी बदल गई है। उनकी जिम्मेदारियां कम न होकर और बढ़ गई हैं। गृहिणी शहरी हो या ग्रामीण, दोनों का जीवन बहुत आपाधापी वाला होता है। जिम्मेदारियां तो पहले भी थीं, लेकिन दायरा सीमित था। मगर आज दायरा असीमित है। आज महिला घर से लेकर बाहर तक की जिम्मेदारी के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई से लेकर सब का भविष्य बनाने और भविष्य की बचत योजना तैयार करने में जुटी रहती है। बात अगर ‘शहरी गृहिणियों’ की करें तो उनका जीवन इतना आसान नहीं होता। बाहरी जिम्मेवारियों का निर्वहन करने के साथ उनसे घर की जिम्मेवारियों को भी बेहतर से निभाने की आशा की जाती है। शायद इसी आशा को बनाए रखने के लिए वे अपने ऊपर इतना बोझ ले लेती हैं कि कभी-कभी वे अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों तक की शिकार हो जाती हैं। उनके पास इतना वक्त नहीं होता कि वे स्वयं के लिए कुछ विचार कर सकें। रोज पति, बच्चों और घर के अन्य सदस्यों की देखरेख में इतनी व्यस्त रहती है कि खुद को हमेशा दोयम दर्जे पर ही रखती है। वह दूसरों की शर्तों, इच्छाओं और खुशियों के लिए जीने की इतनी आदी हो जाती है कि अगर किसी काम में जरा सी भी कमी रह जाए तो अपराधबोध से ग्रस्त हो जाती है।

लेकिन उसके बाद भी उसके काम का श्रेय और सम्मान उसके हिस्से नहीं आता। शहरी गृहिणियां परिवार की जिम्मेवारियों को पूरा करते हुए अपने पति की सहभागी भी बन जाती हैं। यही कारण है कि परिवार के खर्चे को बांटने के लिए वे घर से बाहर नौकरी करने को निकलती हैं। नौकरी से मिलने वाले पैसे से अपने परिवार की सहायता करने के साथ-साथ वे अपने आपको आत्मविश्वासी भी बनाती है। शहरी गृहिणियों का यही आत्मविश्वास उन्हें कभी पीछे हटने नहीं देता। घर से बाहर तक स्थापित करना उनके लिए आसान हो जाता है, अगर उनका कोई साथ देने वाला हो। वे आत्मविश्वास से लबरेज उस सूर्य के समान होती हैं जो बादल होने पर छुप तो सकता है लेकिन अपनी रोशनी नहीं खो सकता। यही आत्मविश्वास है कि किसी भी कठिन परिस्थिति होने पर वे घर से बाहर हरेक मोर्चे को एक योद्धा की तरह संभालती हैं। शायद औरत की यही विशेषता होती है कि नारी को जग की धुरी कहा जाता है।

साभार : साभार ब्लूपैड डॉट इन

श्रमिकों से अन्याय Other

Aug 01, 2020

देश में श्रमिकों को जो मजदूरी का भुगतान किया जाता है, वह बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत कम है। यदि श्रम सुधार के नाम पर मजदूर वर्ग की सौदेबाजी की शक्ति को और कम कर दिया जाता है तो यह खतरनाक रूप से उस देश में असमान वितरण को जन्म देगा। निस्संदेह देश को और अधिक निवेश आकर्षित करने की आवश्यकता है और तेजी से औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन के लिए प्रयास करना चाहिए लेकिन गरीब और कमजोर लोगों के शोषण के माध्यम से नहीं। गरीबी और व्यापक आर्थिक असमानताएं, आतंकवाद और अतिवाद के लिए एक प्रजनन भूमि के रूप में कार्य करती हैं।

कुशल, चंडीगढ़

प्रकृति को संवारें

प्रकृति के आगे किसी का कोई जोर नहीं चलता। प्रकृति समय-समय पर आपदाओं के रूप में इनसान को याद दिलाती रहती है कि इनसान अभी भी प्रकृति के आगे बौना है। इनसान ने विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन किया है। अपने पैर पर अगर कोई खुद कुल्हाड़ी मारकर दर्द से बेहाल हो जाए तो उसमें किसकी गलती होगी? हर प्राकृतिक आपदा, जिसमें बाढ़ भी शामिल है, के लिए इनसान खुद जिम्मेवार है। प्रकृति को संभालने की कला सीखनी होगी।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

मुश्किल में अवसर

कोरोना महामारी ने विश्व के सभी विकसित देशों की आर्थिकी को बुरी तरह प्रभावित किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत इस महामारी के कारण विश्व में एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आएगा। संभवतः आ भी जाए, लेकिन क्या अब भारत में व्याप्त शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान आत्महत्या जैसी जटिल समस्याओं का निदान हो पाएगा? भारत को इन समस्याओं का निदान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।

मनकेश्वर भट्ट, मधेपुरा, बिहार