Women Reservation Dispute : कांग्रेस ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, महिला आरक्षण पर यू-टर्न का लगाया आरोप
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण पर 30 महीने बाद यू-टर्न लिया, महिलाओं से माफी मांगें : कांग्रेस
Women Reservation Dispute : कांग्रेस ने महिला आरक्षण पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक लेख का हवाला देते हुए शुक्रवार को आरोप लगाया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में महिलाओं का समर्थन हासिल करने तथा शासन एवं विदेश नीति में अपनी विफलताओं को छुपाने के मकसद से 30 महीने बाद महिला आरक्षण के विषय पर ''यू-टर्न'' लिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।
रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया कि प्रधानमंत्री ने खुद को लोकसभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण के एकमात्र चैंपियन के रूप में पेश करने की कोशिश में मीडिया में लेख लिखना शुरू कर दिया है। दरअसल, उन्हें भारत की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को उसी वर्ष संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था तो कांग्रेस ने इसे 2024 से ही लागू करने की मांग की थी, लेकिन यह प्रधानमंत्री को स्वीकार्य नहीं था। प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को परिसीमन और उस जनगणना की कवायद पर निर्भर बना दिया था, जिसे वह कराने में विफल रहे और फिर कई वर्षों तक टालते रहे।
उन्होंने दावा किया कि अब जब निर्वाचन आयोग के केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालय के रूप में कार्य करने के बावजूद विधानसभा चुनावों में (भाजपा की) हार तय नजर आ रही है तब 30 महीनों बाद प्रधानमंत्री ने अपना मन बदल दिया है। वह चाहते हैं कि हम जनगणना को भूल जाएं और जनगणना आधारित परिसीमन को इस आधार पर भूल जाएं कि इसमें बहुत लंबा समय लगेगा। यह इस तथ्य के बावजूद है कि उनके जनगणना पंजीयक ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के परिणाम 2027 तक सामने आ जाएंगे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह एक कहानी है जो झूठ और गोलमोल बातों पर आधारित है। यह सब इस उम्मीद से किया गया है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की महिलाएं भाजपा का समर्थन करेंगी। आख़िरकार, भाजपा के पास इन राज्यों में किसी अन्य मुद्दे पर कोई सार्थक विमर्श नहीं है। यह मोदी सरकार का यू-टर्न है, जो विपक्ष के साथ जुड़ने की उसकी अनिच्छा और योजना की पूर्ण कमी को उजागर करता है। प्रधानमंत्री मोदी पहले से ही यू-टर्न का श्रेय लेने का दावा कर रहे हैं। उनके पाखंड और धोखे की कोई सीमा नहीं है। यह सब शासन में उनकी बड़ी विफलताओं और विदेश नीति में गंभीर झटकों को छुपाने के लिए है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वीरवार को कहा था कि महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत में करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। मोदी ने सभी सांसदों से इस कदम का समर्थन करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में यह भी कहा था कि यह कदम उस सिद्धांत की पुष्टि है जिसने लंबे समय से भारत की सभ्यतागत विचारधारा का मार्गदर्शन किया है कि समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाएं प्रगति करती हैं।

