Women Reservation Bill Debate: शशि थरूर का सरकार पर हमला, कहा- परिसीमन ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगी
Women Reservation Bill Debate: महिला आरक्षण को डिलिमिटेशन से जोड़ने पर उठाए सवाल
Women Reservation Bill Debate: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए सरकार द्वारा संसद में लाए गए विधेयकों पर उसे आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाया कि परिसीमन (डिलिमिटेशन) की कवायद 'राजनीतिक नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन)' साबित होगी।
थरूर ने शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को ''देश के इतिहास की सबसे विवादास्पद और जटिल प्रशासनिक कवायदों में से एक'' में बंधक बनाकर रखना है।
थरूर ने कहा, ''आज हम ऐसी स्थिति में हैं जहां महिला आरक्षण को लेकर लगभग सर्वसम्मत राजनीतिक सहमति है। हर बड़ा दल मानता है कि प्रतीकों का समय खत्म हो गया और सामूहिक साझेदारी का कालखंड शुरू होना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह नारी शक्ति के लिए न्याय का उपहार लाए हैं लेकिन उन्होंने इसे कंटीले तारों में लपेट दिया है, महिला आरक्षण को लागू करने को संसद सत्र के विस्तार से, 2011 की जनगणना के आंकड़ों के इस्तेमाल से और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ दिया है।''
थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण की ''फसल कटने को तैयार है'', इसे संसद में सीटों की मौजूदा संख्या के आधार पर तत्काल लागू किया जा सकता है और किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''आपने इतनी हड़बडी में परिसीमन का प्रस्ताव रखा है, इतनी ही जल्दबाजी आपने नोटबंदी में दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि दुर्भाग्य से देश को उस समय कितना नुकसान हुआ था। परिसीमन (डिलिमिटेशन) की कवायद 'राजनीतिक नोटबंदी (डिमोनेटाइजेशन)' बन जाएगी। इसे मत कीजिए।''
उन्होंने कहा कि परिसीमन पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, इसमें छोटे राज्यों और बड़े राज्यों का संतुलन होना चाहिए, तमिलनाडु तथा केरल जैसे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए। थरूर ने यह भी कहा कि एक तरफ संसद में बैठक के दिन कम होते जा रहे हैं, वहीं जब सदन में 850 सांसद होंगे तो आसन को भी कार्यवाही संचालित करने में और सभी सदस्यों को पर्याप्त अवसर देने में कठिनाई होगी। उन्होंने इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की मांग सरकार से की।
