Women DC in Haryana: नई प्रशासनिक तस्वीर में महिलाएं सबसे आगे, 7 जिलों में कमान ‘लेडी बॉसेज’ के हाथ
Women DC in Haryana: झज्जर, चरखी दादरी से जींद तक महिला आईएएस अफसरों का जलवा, नायब सरकार ने जिलों की जिम्मेदारी में बढ़ाया ‘नारी नेतृत्व’
Women DC in Haryana: हरियाणा की नौकरशाही में इस समय बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। प्रदेश के सात जिलों में महिला आईएएस अधिकारी उपायुक्त (डीसी) के रूप में तैनात हैं। यानी लाखों लोगों से जुड़े प्रशासनिक फैसले अब महिला अफसरों के नेतृत्व में लिए जा रहे हैं। हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है।
हाल ही में चरखी दादरी में मनदीप कौर और जींद में वैशाली शर्मा को डीसी नियुक्त किया गया। इन नियुक्तियों के बाद प्रशासनिक गलियारों में महिला नेतृत्व को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार अब जिलों की जिम्मेदारी में महिला अधिकारियों पर अधिक भरोसा जता रही है। इससे पहले वर्षा खांगवाल को झज्जर की जिला उपायुक्त नियुक्त किया जा चुका है।
महिला डीसी की बढ़ती संख्या का असर सामाजिक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। गांवों और कस्बों में अब लोग महिला अधिकारियों को सीधे प्रशासनिक नेतृत्व करते देख रहे हैं। इससे युवतियों में सिविल सेवा के प्रति आकर्षण बढ़ा है और सरकारी नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी को नई मजबूती मिली है।
इन जिलों में महिला डीसी
प्रदेश के जिन जिलों में महिला अधिकारियों को कमान मिली हुई है, उनमें चरखी दादरी में मनदीप कौर, झज्जर में वर्षा खांगवाल, जींद में वैशाली शर्मा, कैथल में अपराजिता, महेंद्रगढ़ में अनुपमा अंजलि, यमुनानगर में प्रीति, सोनीपत में नेहा प्रमुख हैं। इसके अलावा अन्य जिलों में भी महिला अफसर प्रशासनिक नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। लगातार बढ़ती यह संख्या हरियाणा की अफसरशाही में बदलते ट्रेंड का संकेत मानी जा रही है।
सिर्फ ‘सॉफ्ट एडमिनिस्ट्रेशन’ तक सीमित नहीं
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं विधायी और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार का कहना है कि महिला अधिकारी अब केवल सामाजिक योजनाओं या महिला एवं बाल विकास जैसे विभागों तक सीमित नहीं हैं। वे कानून व्यवस्था, विकास कार्यों की मॉनिटरिंग, भ्रष्टाचार नियंत्रण और जन शिकायतों के समाधान जैसे कठिन विषयों पर भी मजबूत फैसले ले रही हैं।
युवा अफसरों पर बढ़ा भरोसा
हरियाणा सरकार पिछले कुछ वर्षों से युवा आईएएस अधिकारियों को भी जिलों की जिम्मेदारी दे रही है। अब केवल लंबे अनुभव वाले अधिकारियों को ही डीसी नहीं बनाया जा रहा, बल्कि कम सेवा अवधि वाले अफसरों को भी मौका मिल रहा है। महिला अधिकारियों की बढ़ती नियुक्तियां इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।
