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Wildlife Protection: बक्सा में बाघों की वापसी को स्थानीय समुदायों का समर्थन, सुरक्षा चिंता बरकरार

Wildlife Protection: उत्तर बंगाल के बक्सा बाघ अभयारण्य के आसपास के इलाकों में रहने वाले समुदायों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण में प्रस्तावित बाघ पुनर्बहाली योजना को व्यापक समर्थन मिला है। हालांकि, सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंताएं इस...

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सांकेतिक फोटो: iStock
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Wildlife Protection: उत्तर बंगाल के बक्सा बाघ अभयारण्य के आसपास के इलाकों में रहने वाले समुदायों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण में प्रस्तावित बाघ पुनर्बहाली योजना को व्यापक समर्थन मिला है। हालांकि, सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंताएं इस महत्वाकांक्षी संरक्षण परियोजना के लिए चुनौती बन सकती हैं।

एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। एक गैर लाभकारी संगठन द्वारा 70 से अधिक गांवों में कराए गए इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष ऐसे समय सामने आए हैं, जब अधिकारी बिहार के वाल्मीकि बाघ अभयारण्य से एक बाघिन को बक्सा लाने की तैयारी कर रहे हैं। बक्सा में बाघों को फिर से बसाने के लिए करीब 10-12 बाघिनों को संभावित रूप से चुना गया है।

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एक वन अधिकारी ने बताया कि अंततः एक बाघिन का चयन किया जाएगा और उसे बक्सा बाघ अभयारण्य में छोड़ा जाएगा। इसके लिए फिलहाल दो अक्टूबर की तारीख प्रस्तावित है। बक्सा बाघ अभयारण्य और पश्चिम बंगाल वन विभाग के सहयोग से गैर-लाभकारी संस्था स्नैप फाउंडेशन द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में अभयारण्य की 64 संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी) में से 56 को शामिल किया गया। इन समितियों के माध्यम से अनुमानित 280 लोगों से जानकारी जुटाई गई। समय की कमी के कारण आठ जेएफएमसी तक नहीं पहुंचा जा सका।

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वन अधिकारी ने कहा, ''सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि जंगल की सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लोगों के एक वर्ग में अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका है, लेकिन यह चिंता बाघों की पुनर्बहाली के व्यापक विरोध में तब्दील नहीं हुई है।'' जेएफएमसी के कई सदस्यों ने कहा कि जंगल के इलाकों से गुजरते समय वे खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभयारण्य में बाघों को लाने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय, जागरूकता अभियान और मानव-बाघ संघर्ष को कम करने के उपाय किए जाने जरूरी हैं।

एक अधिकारी ने सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि केवल 14.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाने के बावजूद वे बाघों की पुनर्बहाली का विरोध जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, ''सभी उत्तरदाता इस बात पर सहमत थे कि आने वाली पीढ़ियों को बक्सा में बाघों को देखने का अवसर मिलना महत्वपूर्ण है।''

अधिकारी ने कहा कि इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष बाघ पुनर्बहाली की योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण होंगे। खासकर, इससे स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने और संभावित मानव-बाघ संपर्क की स्थिति के लिए निवासियों को तैयार करने में मदद मिलेगी। पश्चिम बंगाल के एक अन्य वन अधिकारी ने बताया कि बिहार वन विभाग ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की एक टीम के साथ वाल्मीकि बाघ अभयारण्य में प्रारंभिक आकलन पूरा कर लिया है और बक्सा परियोजना के लिए करीब 10-12 बाघिनों की प्रारंभिक सूची तैयार की है।

उन्होंने बताया कि अंतिम चयन प्रक्रिया प्रस्तावित दो अक्टूबर को बाघिन को बक्सा में छोड़े जाने से कुछ दिन पहले शुरू होने की उम्मीद है। इस परियोजना को वर्ष 2025-26 से 2028-29 तक केंद्र प्रायोजित योजना के तहत 'प्रोजेक्ट टाइगर' और 'प्रोजेक्ट एलीफेंट' के लिए उपलब्ध कराए गए धन से समर्थन मिल रहा है। अधिकारी ने बताया कि जून में पश्चिम बंगाल को करीब 32 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई थी और इसमें बक्सा का हिस्सा करीब एक करोड़ रुपये है।

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