कौन हैं कैप्टन प्रिया अधिकारी? नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन, 7 दिन में 100 से ज्यादा रेस्क्यू मिशन
हिमालय की संकरी घाटियों में जान जोखिम में डालकर बचा रहीं जिंदगी, तिब्बत सीमा से लगे बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार उड़ान
नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बीच कैप्टन प्रिया अधिकारी राहत और बचाव अभियान की प्रमुख चेहरों में शामिल हो गई हैं। नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने महज सात दिनों में 100 से ज्यादा बचाव मिशन पूरे कर सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद की है।
अधिकारी ने बाढ़ और भूस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रसुवा जिले के तिमुरे में भी राहत अभियान चलाया। यहां मोटी कीचड़, अस्थिर जमीन और बेहद संकरी घाटियों के कारण हेलिकॉप्टर उतारना बेहद जोखिम भरा है। इसके बावजूद अधिकारी और उनकी टीम लगातार प्रभावित लोगों तक पहुंच रही है।
अमेरिकी समाचार चैनल CNN से बातचीत में अधिकारी ने बताया कि लगातार उड़ान भरने के कारण पायलट काफी थक चुके हैं, लेकिन उन्हें ऐसे हालात के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा, “हममें से ज्यादातर लोग लगातार उड़ानों के कारण बेहद थक चुके हैं। हमें इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है।”
कौन हैं प्रिया अधिकारी?
प्रिया अधिकारी अनुभवी हाई-एल्टीट्यूड हेलिकॉप्टर पायलट हैं और हिमालयी क्षेत्र में खोज एवं बचाव अभियानों में विशेषज्ञता रखती हैं। उन्होंने अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में घायल पर्वतारोहियों को बचाने के अभियान में भी हिस्सा लिया है। उनके कुछ मिशन करीब 6,200 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचे हैं।
अधिकारी का विमानन क्षेत्र में आने का सफर भी खासा अलग रहा। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई की और शुरुआत में केबिन क्रू के सदस्य के तौर पर काम किया। एक हेलिकॉप्टर राइड के दौरान उड़ान के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने पायलट बनने का फैसला किया।
इसके बाद वह हेलिकॉप्टर उड़ाने का प्रशिक्षण लेने फिलीपींस गईं। जरूरी उड़ान घंटे पूरे करने के बाद वर्ष 2017 में उन्होंने पूर्णकालिक हेलिकॉप्टर पायलट के रूप में काम शुरू किया। आगे चलकर उन्होंने हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन में विशेषज्ञता हासिल की और नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन बनीं।
एक जगह उतरते हैं पांच-छह हेलिकॉप्टर
नेपाल के बाढ़ प्रभावित हिमालयी इलाकों में बचाव अभियान के दौरान पायलटों को बेहद कम जगह में कई हेलिकॉप्टरों का संचालन करना पड़ रहा है। तिमुरे में करीब 20 हेलिकॉप्टर बचाव अभियान में शामिल हैं।
प्रिया अधिकारी के मुताबिक, कई बार एक ही स्थान पर पांच या छह हेलिकॉप्टरों को उतरकर लोगों को निकालना पड़ता है। ऐसे में पायलटों को रेडियो पर लगातार एक-दूसरे के साथ समन्वय करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण जमीन पर मोटी कीचड़ जम गई है। आसमान से देखने पर जो जमीन ठोस दिखाई देती है, वह हेलिकॉप्टर के उतरते ही धंस सकती है। ऐसी परिस्थितियों में कई बार हेलिकॉप्टर का इंजन बंद करना भी सुरक्षित नहीं होता और यात्रियों को निकालते समय उसे चालू रखना पड़ता है।
Priya Adhikari is Nepal's first female helicopter captain and she's flown over 100 rescue missions in the wake of the devastating flood. Anderson speaks with her about what she's witnessed. pic.twitter.com/3YYXHZA60J
— Anderson Cooper 360° (@AC360) September 1, 2026
‘सब कुछ खत्म हो गया’
तिमुरे में तबाही का मंजर देखकर अधिकारी भी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि फ्लैश फ्लड के बाद इलाके में शव बिखरे हुए दिखाई दिए। बचाव अभियान के शुरुआती दो दिनों में 200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया। नेपाल सेना के अगस्ता हेलिकॉप्टर समेत कई विमान इस अभियान में शामिल रहे।
अधिकारी ने इलाके की स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि “सब कुछ खत्म हो गया। पांच जलविद्युत परियोजनाएं खत्म हो गईं, जिंदगियां खत्म हो गईं।” हालांकि, बचाव अभियान के दौरान लोगों को सुरक्षित देखकर उन्हें आगे बढ़ने की ताकत मिलती है। उन्होंने बताया कि जब हेलिकॉप्टर किसी स्थान पर उतरता है और लोग मदद के लिए हाथ हिलाते नजर आते हैं तो वह उनसे कहती हैं “आप बच गए।”
2015 के भूकंप से भी अलग चुनौती
प्रिया अधिकारी ने कहा कि इस आपदा ने उनके वर्षों के हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू अनुभव की भी परीक्षा ली है। उनके अनुसार मौजूदा हालात कुछ मामलों में वर्ष 2015 में आए विनाशकारी नेपाल भूकंप के दौरान देखी गई परिस्थितियों से भी ज्यादा कठिन रहे हैं।
लगातार कई दिनों तक उड़ान भरने से पायलटों और बचाव दलों में थकान है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकालने की चुनौती के बीच अभियान जारी है। नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन के तौर पर प्रिया अधिकारी की भूमिका इस बचाव अभियान में न केवल साहस, बल्कि कठिन हिमालयी परिस्थितियों में उनकी विशेषज्ञता का भी उदाहरण बन गई है।

