Wheelchair Teacher : 75 फीसदी दिव्यांगता, फिर भी 16 साल से पढ़ाने का जुनून; व्हीलचेयर के सहारे स्कूल पहुंचते हैं विकास
कक्षा XI और XII के विद्यार्थियों को एक्सपोर्ट्स, इंपोर्ट्स और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग देते हैं वोकेशनल शिक्षक, उनके मार्गदर्शन में लगातार 100 फीसदी रहा विद्यार्थियों का परिणाम
Wheelchair Teacher : 75 फीसदी दिव्यांगता के बावजूद विकास कुमार पिछले 16 वर्षों से व्हीलचेयर के सहारे स्कूल पहुंच रहे हैं और विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। दिव्यांगता उनके पेशे के रास्ते में कभी बाधा नहीं बनी। शिक्षक दिवस पर उनका जज्बा कई लोगों के लिए प्रेरणा है।
कुमार वर्ष 2011 से लुधियाना के सराभा स्थित शहीद करतार सिंह सराभा सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल में वोकेशनल शिक्षक के तौर पर पढ़ा रहे हैं। वह कक्षा XI और XII के विद्यार्थियों को एक्सपोर्ट्स, इंपोर्ट्स और मैनेजमेंट की ट्रेनिंग देते हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने लगातार 100 फीसदी परिणाम हासिल किया है।
‘दिव्यांगता को पेशे के आड़े नहीं आने दिया’
कुमार के पिता अनिल कुमार श्रीवास्तव ने द ट्रिब्यून को बताया कि उनका बेटा व्हीलचेयर पर स्कूल जाता है, लेकिन उसने कभी दिव्यांगता को अपने पेशे के आड़े नहीं आने दिया।
उन्होंने कहा कि विकास स्कूल और विद्यार्थियों के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उनके अनुसार, मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद काम के प्रति प्रतिबद्ध रहने वाले व्यक्ति के प्रयासों की सराहना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रेरणा विकास जैसे लोगों को चुनौतियों का मुस्कराते हुए सामना करने का हौसला देती है।
कुमार ने बताया कि कभी-कभी लोगों की असंवेदनशील टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इससे उनका हौसला कभी कम नहीं हुआ। उनकी पत्नी भी दिव्यांग हैं।
‘आगे बढ़ने के लिए खुद को सकारात्मक रखना जरूरी’
कुमार ने कहा, “दिव्यांगता मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए हमें सकारात्मक तरीके से खुद को आगे बढ़ाना पड़ता है। मुझे अपने विद्यार्थियों को पढ़ाते हुए बहुत अच्छा लगता है। मेरे मार्गदर्शन में सैकड़ों विद्यार्थी पढ़ चुके हैं। इससे ज्यादा और क्या चाहिए?” उन्होंने कहा कि उनके ज्यादातर विद्यार्थी उनका बहुत सम्मान करते हैं।
16 साल से जारी है विद्यार्थियों को पढ़ाने का सफर
विकास कुमार के लिए व्हीलचेयर भले ही शारीरिक सहारा है, लेकिन विद्यार्थियों को पढ़ाने और उनका मार्गदर्शन करने का उनका संकल्प 16 वर्षों से अडिग है।

