West Bengal News: भाजपा के शासन में आने के बाद कैंपसों में आरएसएस संबद्ध संगठनों की सक्रियता बढ़ी
West Bengal News: पश्चिम बंगाल में भाजपा की शानदार जीत के महज तीन हफ्तों बाद राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में वैचारिक बदलाव की प्रक्रिया में तेजी दिखाई देने लगी है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध संगठन उन परिसरों, कर्मचारी...
West Bengal News: पश्चिम बंगाल में भाजपा की शानदार जीत के महज तीन हफ्तों बाद राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में वैचारिक बदलाव की प्रक्रिया में तेजी दिखाई देने लगी है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध संगठन उन परिसरों, कर्मचारी कक्षों और शैक्षणिक नेटवर्कों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रूप से आगे बढ़ रहे हैं जिन पर लंबे समय से वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व रहा है।
उत्तर बंगाल के कॉलेज कैंटीन से लेकर कोलकाता के विश्वविद्यालय विभागों तक बिना अधिक शोर शराबे के लेकिन स्पष्ट रूप से बदलाव दिख रहा है। बंगाल की छात्र राजनीति में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) दशकों तक हाशिए में रही, लेकिन राज्य में भाजपा की जीत के बाद अचानक उसकी सदस्यता के लिए अनुरोधों में वृद्धि हुई है।
व्हाट्सऐप पर जानकारी हासिल करने वालों की संख्या भी बढ़ी है और परिसर में इकाइयां बनाने के निमंत्रण भी अधिक मिल रहे हैं। शिक्षकों, प्रोफेसरों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बीच भारतीय शिक्षण मंडल और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक महासंघ (एबीआरएसएम) भी चार मई के चुनाव परिणामों के बाद अभूतपूर्व रूप से प्रचार-प्रसार में वृद्धि की रिपोर्ट कर रहे हैं।
चुनाव परिणामों के बाद व्यापक आत्मविश्वास जताते हुए आरएसएस के वरिष्ठ नेता जिष्णु बसु ने कहा, ''हिंदू राष्ट्रवाद और 'वंदे मातरम्' गीत की उत्पत्ति बंगाल की धरती से हुई है। कई दशकों तक यह कोशिश की गई कि हम अपने इतिहास, संस्कृति और जड़ों को भूल जाएं।
अब बंगाल ने अपनी जड़ों की ओर लौटने का फैसला किया है।'' एबीवीपी नेताओं ने दावा किया कि चुनाव परिणामों से पहले छात्र संगठन की उपस्थिति केवल 96 कॉलेजों में थी लेकिन महज दो सप्ताह में यह संख्या 400 से अधिक हो गई है और नौ जून से औपचारिक सदस्यता अभियान शुरू होने से पहले ही अनौपचारिक नेटवर्क उभर कर सामने आ रहे हैं।
