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West Asia Conflict : जयशंकर ने जापान के विदेश मंत्री से होर्मुज सुरक्षा पर की चर्चा, भारतीयों की मौत पर जताया शोक

दुनिया भर के देशों को ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई

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पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को अपने जापानी समकक्ष तोशिमित्सु मोतेगी से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की। मोतेगी ने संघर्ष में कई भारतीयों की मौत को लेकर जापान की ओर से शोक जाहिर किया। 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से क्षेत्र में आठ भारतीय नागरिक मारे गए हैं।

जयशंकर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी से बात करके खुशी हुई। होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आवागमन सहित पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर चर्चा की। संघर्ष में जान गंवाने वाले भारतीयों के प्रति उनकी संवेदनाओं के लिए आभार व्यक्त करता हूं। मोतेगी ने कहा कि उन्होंने और जयशंकर ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की, जिसमें होर्मुज से जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना भी शामिल है। जापानी विदेश मंत्री ने अमेरिका और ईरान की ओर से हाल ही में घोषित दो हफ्ते के युद्ध-विराम का स्वागत किया।

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जापान सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक कि मोतेगी ने कहा कि सबसे अहम यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित आवागमन सहित तनाव कम करने के सभी उपायों को लगातार हासिल किया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के जरिए जल्द ही एक अंतिम समझौते पर पहुंचा जाएगा। वह इस मुद्दे पर भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करना चाहेंगे। जापान सरकार के बयान में कहा गया है कि जवाब में मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत जापान के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चत करने के साथ ही तनाव में कमी लाई जा सके।

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दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि जापान और भारत एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ संवाद बनाए रखेंगे। इसके अलावा, दोनों मंत्रियों ने ऊर्जा और संसाधनों की आपूर्ति को मजबूत करने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई, जिसमें भारत और जापान दोनों शामिल हों। ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध करने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया था। इस कदम से भारत सहित दुनिया भर के देशों को ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।

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