शर्मनाक गणतंत्र दिवस पर पहली बार

दिल्ली में हिंसा, 37 किसान नेताओं पर केस

एफआईआर में टिकैत, दर्शनपाल, चढ़ूनी, यादव का भी नाम | 19 उपद्रवी गिरफ्तार, 50 हिरासत में

दिल्ली में हिंसा, 37 किसान नेताओं पर केस

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर मंगलवार को ट्रैक्टर से बेरिकेड तोड़ते प्रदर्शनकारी किसान। (दाएं) लालकिले पर धार्मिक झंडा लगाता हुड़दंगी। -प्रेट्र

हरीश लखेड़ा/ ट्रिन्यू

नयी दिल्ली, 27 जनवरी

गणतंत्र दिवस पर राजधानी में हुई हिंसा और लाल किला समेत दिल्ली में तांडव मचाने वालों पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस ने राकेश टिकैत, दर्शनपाल, योगेंद्र यादव, सुरजीत सिंह पन्नू, सरवन सिंह, बूटा सिंह बुर्जगिल, गुरनाम सिंह चढ़ूनी, राजेवाल, जोगिन्दर सिंह उगराहां समेत 37 किसान नेताओं के खिलाफ अलग-अलग थानों में मुकदमा दर्ज किया है। ट्रैक्टर परेड को लेकर पुलिस के साथ किए लिखित करार का पालन नहीं करने के आरोप में इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। कुल 25 एफआईआर दर्ज की गयी हैं। दिल्ली पुलिस ने 19 हुड़दंगियों को गिरफ्तार किया है और 50 को हिरासत में लिया है। इन पर हिंसा करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमले का आरोप है। सीसीटीवी फुटेज देखकर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और सबूत जुटाए जा रहे हैं। पुलिस के साइबर सेल ने इस उपद्रव के मामले में एक हजार से अधिक ट्विटर हैंडल की पहचान की है। लालकिले में धार्मिक झंडा फहराने वालों के खिलाफ भी शिकंजा कसा जा रहा है।

लगभग 2 महीने से शांतिपूर्वक चल रहे किसान आंदोलन ने मंगलवार को हिंसक रूप ले लिया था। केंद्र ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए केंद्रीय सुरक्षाबलों की 15 और कंपनियों तैनात कर दी हैं। गृह मंत्रालय में बुधवार को बैठकों का दौर जारी रहा। दिल्ली पुलिस आयुक्त ने गृहमंत्री अमित शाह को रिपोर्ट सौंप दी है।

गौरतलब है कि नये कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर किसान संगठनों की गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली कई जगह तय मार्ग पर जाने के बजाय दिल्ली के भीतर घुस गयी। किसानों के नाम पर शामिल हुड़दंगियों ने दिल्ली की सड़कों पर जमकर उपद्रव मचाया। तलवार, भाले, बरछे व लाठियों से लैस ये लोग कई जगह पुलिस से भिड़ गये। पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिये। गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर से आए किसानों की भीड़ आईटीओ और लाल किले तक पहुंच गयी। लाल किले में घुसी किसानों की भीड़ ने एक धार्मिक ध्वज लगा दिया था और भारी तोड़फोड़ की।

आईटीओ पर आये थे 10 हजार किसान, एक की मौत

एक प्राथमिकी के मुताबिक, ‘मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे सराय काले खां की तरफ से एमजीएम मार्ग पर 500 से 600 ट्रैक्टरों पर सवार होकर 9,000 से 10,000 प्रदर्शनकारी आईटीओ आ गए। उन्होंने लोहे के करीब 70 अवरोधकों को तोड़ दिया। एक ट्रैक्टर ने आंध्र पब्लिक स्कूल के पास बैरिकेड को टक्कर मारी और वह ट्रैक्टर पलट गया। पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने ट्रैक्टर के नीचे दबे ड्राइवर को बचाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की। मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के रामपुर के निवासी नवनीत सिंह के तौर पर हुई।’

खुले हैं बातचीत के दरवाजे : केंद्र

किसान आंदोलन में भटकाव के बावजूद केंद्र सरकार ने कहा कि किसान संगठनों के साथ बातचीत के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि बातचीत के दरवाजे बंद हुए हैं। यहां बुधवार को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए जावड़ेकर ने दिल्ली के उपद्रव और किसानों से बातचीत को लेकर पूछे सवाल पर कहा, ‘आपने कभी सुना बातचीत के दरवाजे बंद हो गए हैं, जब भी कुछ होगा आपको बताएंगे।’

2 संगठन आंदोलन से हुए अलग

नयी िदल्ली (एजेंसी ) : दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के एक दिन बाद 2 किसान संगठन आंदोलन से अलग हो गये। भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि ट्रैक्टर परेड के दौरान जो कुछ भी हुआ उससे वह काफी दुखी हैं और उनकी यूनियन ने अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया है। भाकियू (भानु) से जुड़े किसान नोएडा-दिल्ली मार्ग की चिल्ला सीमा पर प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं ‘ऑल इंडिया किसान संघर्ष को-आर्डिनेशन कमेटी’ के वीएम सिंह ने भी कहा कि वे ऐसे प्रदर्शन में आगे नहीं बढ़ सकते जिसमें कुछ की दिशा अलग है।

हाईकोर्ट में याचिका : दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गयी जिसमें आंदोलन की आड़ में बैठे लोगों को हटाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में दिल्ली पुलिस आयुक्त को उनके पद से हटाये जाने का निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है।

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