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Valley of Flowers : हिमालय की गोद में रंगों का उत्सव, पर्यटकों के लिए खुली फूलों की घाटी

फूलों की घाटी में प्रवेश के लिए घांघरिया से परमिट लेना पड़ता है

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विश्व धरोहर सूची में शामिल फूलों की घाटी सोमवार को पर्यटकों के लिए खोल दी गई। पर्यटक अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक रंग-बिरंगे फूलों से भरी घाटी की सैर कर सकेंगे। उत्तराखंड के चमोली में बदरीनाथ के पास स्थित फूलों की घाटी की विशिष्ट भौगौलिक बनावट, समृद्ध बुग्याली वनस्पतियों और पुष्पीय पादपों के संरक्षण के लिए 87 वर्ग KM के इस विशाल भूभाग को 1982 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था।

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान का प्रबंधन नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान विभाग करता है, जिस पर नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के प्रबंधन की भी जिम्मेदारी है। ये दोनों राष्ट्रीय उद्यान नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का मुख्य हिस्सा हैं और यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल के रूप में दर्ज हैं।

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नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के गेट सोमवार सुबह पर्यटकों के लिए खोल दिए गए। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के वन प्रभागीय अधिकारी अभिमन्यु ने बताया कि पहले दिन 108 से अधिक पर्यटक फूलों की घाटी पहुंचे। वनस्पति वैज्ञानिक और पर्वतारोही फ्रैंक स्मिथ ने 20वीं सदी की शुरुआत में इस घाटी में कदम रखा था।

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अपनी किताब 'फूलों की घाटी' के जरिये पूरी दुनिया तक इस इलाके की पुष्पीय वनस्पतियों की जानकारी पहुंचाई थी। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गोविंद घाट से पुलना तक वाहन से यात्रा करके और फिर पुलना से लगभग 11 किलोमीटर आगे घांघरिया तक पैदल चलकर फूलों की घाटी में प्रवेश किया जाता है। फूलों की घाटी में प्रवेश के लिए घांघरिया से परमिट लेना पड़ता है।

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