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Uttrakhand Ankita Bhandari case : भाजपा नेता दुष्यंत गौतम दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे, 11 को बनाया प्रतिवादी

आरोपों को भाजपा नेता ने राजनीतिक साजिश बताया

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2022 में हत्या की शिकार बनीं रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी; और (दाएं) भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम।
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Uttrakhand Ankita Bhandari case :  अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने Delhi High Court में याचिका दायर की है। याचिका में कुल 11 व्यक्तियों और संगठनों को प्रतिवादी बनाया गया है। दुष्यंत गौतम ने मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग भी अदालत से की है।

करीब 250 पन्नों की यह याचिका दुष्यंत गौतम की ओर से अधिवक्ता सिमरन बराड़ और नीलमणि गुहा के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में अभिनेत्री उर्मिला सनावर, पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर, Indian National Congress, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी, उसके अध्यक्ष गणेश गोदियाल, Aam Aadmi Party, कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा और मोहित चौहान को प्रतिवादी बनाया गया है।

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‘सुनियोजित राजनीतिक साजिश’ का दावा

दुष्यंत गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह उनकी और Bharatiya Janata Party की छवि खराब करने के लिए रची गई ‘सुनियोजित आपराधिक साजिश’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे और मनगढ़ंत ऑडियो वीडियो क्लिप तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, ताकि उन्हें अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़कर बदनाम किया जा सके।

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गौतम का कहना है कि इन वायरल सामग्रियों में आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया गया और इन्हें जानबूझकर राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से फैलाया गया।

याचिका में लोकेशन का पूरा विवरण

याचिका में दुष्यंत गौतम ने सितंबर 2022 की संबंधित अवधि के दौरान अपनी मौजूदगी का विस्तृत विवरण भी दिया है। दस्तावेज के अनुसार, वह 10, 13, 14 और 15 सितंबर 2022 को नई दिल्ली में थे। 16 सितंबर को उत्तर प्रदेश में मौजूद रहे, जबकि 17 और 18 सितंबर को फिर नई दिल्ली लौट आए। इसके बाद 19 सितंबर 2022 को वह ओडिशा में थे और 20 सितंबर को पुनः नई दिल्ली में मौजूद बताए गए हैं।

उत्तराखंड पुलिस का स्पष्ट रुख

इससे पहले उत्तराखंड पुलिस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया और कुछ मंचों पर भ्रामक सूचनाएं, आधे अधूरे तथ्य और निराधार आरोप फैलाए जा रहे हैं। पुलिस ने साफ तौर पर कहा है कि इस मामले में किसी भी वीआईपी की कोई भूमिका नहीं है और इस तथ्य को अदालत भी स्वीकार कर चुकी है।

दुष्यंत गौतम का दावा है कि यह पूरा मामला उत्तराखंड और अन्य राज्यों में शांति भंग करने, अशांति फैलाने और भाजपा नेताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की मंशा से उछाला जा रहा है।

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