अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया ट्रंप टैरिफ
कहा- राष्ट्रपति ने इमरजेंसी के लिए बने कानून का इस्तेमाल किया। ट्रंप ने फैसले को बताया शर्मनाक
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों के खिलाफ लगाए गए व्यापक शुल्क वृद्धि के आदेशों को शुक्रवार को रद्द कर दिया। अदालत द्वारा 6-3 के बहुमत से सुनाये गये इस फैसले का केंद्र बिंदु आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत लगाए गए टैरिफ हैं, जिनमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए व्यापक पारस्परिक शुल्क भी शामिल हैं। यह ट्रंप के व्यापक एजेंडे का पहला महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सीधे देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष आया है। शीर्ष ने कहा कि संविधान बहुत स्पष्ट रूप से कांग्रेस को कर लगाने की शक्ति देता है, जिसमें शुल्क भी शामिल हैं। इस फैसले के बाद भारत पर लगा 18 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ भी अवैध घोषित हो गया है। उधर, ट्रंप ने फैसले को शर्मनाक बताया है। यह फैसला उस समय आया जब ट्रंप राज्यों के गवर्नरों के साथ बैठक कर रहे थे।
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखे गए फैसले में निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें रिपब्लिकन प्रेसिडेंट का 1977 के इस कानून का इस्तेमाल उनके अधिकार से ज्यादा था। रॉबर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए लिखा कि प्रेसिडेंट को टैरिफ लगाने की अपनी खास ताकत को सही ठहराने के लिए कांग्रेस से मिली साफ मंजूरी दिखानी होगी। उन्होंने आगे लिखा कि वह ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने कराधान की शक्ति का कोई भी हिस्सा कार्यपालिका शाखा को नहीं सौंपा। जस्टिस सैमुअल एलिटो, जस्टिस क्लेरेंस थॉमस और जस्टिस ब्रेट कावानाघ ने ट्रंप के लगाए टैरिफ का समर्थन किया।
ट्रंप प्रशासन ने दलील दी कि 1977 का वह कानून जो राष्ट्रपति को आपात स्थितियों के दौरान आयात को विनियमित करने की अनुमति देता है, उन्हें शुल्क निर्धारित करने की भी अनुमति देता है। प्रशासन ने कहा कि अन्य राष्ट्रपतियों ने भी इस कानून का इस्तेमाल कई बार किया है, अक्सर प्रतिबंध लगाने के लिए, लेकिन ट्रंप आयात करों के लिए इसका इस्तेमाल करने वाले पहले राष्ट्रपति थे। ट्रंप ने अप्रैल 2025 में ज्यादातर देशों पर पारस्परिक शुल्क लगाए, ताकि व्यापार घाटे को दूर किया जा सके, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया था। ये कदम तब उठाए गए जब उन्होंने कनाडा, चीन और मैक्सिको पर शुल्क लगाए, जिसका मकसद कथित तौर पर मादक पदार्थों की तस्करी की आपात स्थिति से निपटना था। इसके बाद कई मुकदमे दायर किए गए। चुनौती देने वालों ने दलील दी कि आपातकालीन शक्तियों के कानून में शुल्क का उल्लेख तक नहीं है और ट्रंप द्वारा इसका उपयोग कई कानूनी समीक्षाओं में विफल रहता है, जिसमें एक ऐसी समीक्षा भी शामिल है जिसने तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के 500 अरब अमेरिकी डॉलर के छात्र ऋण माफी कार्यक्रम को विफल कर दिया था। कांग्रेस बजट कार्यालय के अनुसार, ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क का आर्थिक प्रभाव अगले दशक में लगभग तीन ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। दिसंबर के संघीय आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों कानून के तहत लगाए गए आयात करों से राजकोष ने 133 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि एकत्र की है।
‘बोर्ड आफ पीस’ बैठक : भारत बना पर्यवेक्षक
नयी दिल्ली (एजेंसी): भारत ने वाशिंगटन डीसी में आयोजित ‘बोर्ड आफ पीस’ बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में इसकी पुष्टि की और गाज़ा शांति प्रयासों पर भारत की स्थिति दोहराई। जायसवाल ने कहा, ‘हमने वाशिंगटन डीसी में ‘बोर्ड आफ पीस’ बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया। भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप की ‘गाज़ा पीस प्लान’ पहल और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 का स्वागत किया है।’ बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि नया बोर्ड संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर नज़र रखेगा और उसे मज़बूत बनाएगा। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका इस बोर्ड को 10 अरब डॉलर की सहायता देगा। बोर्ड का पहला ध्यान गाज़ा पट्टी में पुनर्निर्माण कार्यों पर होगा। बैठक में 40 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया, लेकिन फ्रांस, ब्रिटेन, रूस, चीन शामिल नहीं हुए। यूरोपीय संघ ने भी बोर्ड में शामिल होने से इनकार किया।
किसानों की कुर्बानी क्यों दी : राहुल गांधी
नयी दिल्ली (एजेंसी) : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर एक बार फिर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके ‘शर्मनाक समर्पण’ के कारण अब भारत एक ‘डेटा कॉलोनी’ बनकर रह जाएगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘अमेरिकियों को खुश करने के लिए हमारे किसानों की कुर्बानी क्यों दी गई? अमेरिका को हमारा तेल आयात तय करने की मंजूरी देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया?’ उन्होंने सवाल किया कि बिना किसी पारस्परिक वादे के, हर साल 100 अरब डॉलर का अमेरिकी आयात बढ़ाने पर सहमति क्यों दी गई? उन्होंने दावा किया कि यह समझौता भारत को एक ‘डेटा कॉलोनी’ बना देगा क्योंकि सारा डेटा अमेरिका और उसकी कंपनियों के सुपुर्द किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा, ‘मोदी जी ऐसा समझौता क्यों मानेंगे, जिसमें भारत इतना कुछ दे रहा है और बदले में बहुत कम मिलता दिख रहा है?’
भारत पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल
नयी दिल्ली (एजेंसी) : भारत शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल हो गया, जिसका मकसद एआई को बढ़ावा देने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक लचीली सप्लाई चेन विकसित करना है। भारत ने ‘भारत मंडपम’ में ‘एआई इंपैक्ट समिट’ के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में ‘पैक्स सिलिका’ में औपचारिक रूप से शामिल होने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों पक्षों ने ‘पैक्स सिलिका’ को एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने की पहल के रूप में पेश किया। उनका इशारा चीन की ओर माना जा रहा है। अमेरिका के आर्थिक मामलों के उप मंत्री जैकब हेलबर्ग ने ‘पैक्स सिलिका’ में भारत का स्वागत करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अत्यधिक केंद्रित सप्लाई चेन और आर्थिक दबाव एवं ब्लैकमेलिंग के खतरों से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने ‘पैक्स सिलिका’ में भारत का स्वागत करते हुए कहा कि भारत गठबंधन को मजबूती प्रदान करेगा।

