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US-Iran Conflict : समुद्री हमलों पर भारत सख्त, जयशंकर बोले- पूरी तरह अस्वीकार्य

व्यापारिक नौवहन पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य: जयशंकर

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US-Iran Conflict : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष तथा इसके वैश्विक प्रभावों की पृष्ठभूमि में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को समुद्री नौवहन के ''सुरक्षित एवं निर्बाध'' मार्ग के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमले ''पूरी तरह अस्वीकार्य'' हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यहां संवाददाताओं को बताया कि ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों पर चर्चा के लिए जापान द्वारा बुलाई गई 'एजेईसी प्लस' ऑनलाइन बैठक में विदेश मंत्री ने संबंधित टिप्पणी की।

बुधवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में, जायसवाल ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में भारत की राजनयिक चर्चा जारी है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच मंगलवार को टेलीफोन पर हुई बातचीत का व्यापक संदर्भ साझा किया। जयशंकर ने कल अपने इजराइली समकक्ष गिदोन सार से बात की और पश्चिम एशिया में संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। जायसवाल ने कहा कि जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री से भी बात की, और दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री ने ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों पर चर्चा के लिए जापान द्वारा बुलाई गई 'एजेईसी प्लस' बैठक में भाग लिया। उन्होंने कहा कि जयशंकर ने ''समुद्री नौवहन के सुरक्षित और निर्बाध पारगमन के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया'' और इस बात पर भी जोर दिया कि ''व्यापारिक नौवहन पर हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं''। जयसवाल ने बैठक के दौरान की गई विदेश मंत्री की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा, ''वैश्विक प्रगति के लिए आवश्यक है कि ऊर्जा बाजार सीमित न हों। एक प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता के रूप में, भारत आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन विकसित करने के लिए समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ काम करेगा।''

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जापान के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाची ने 15 अप्रैल को एक ऑनलाइन बैठक की, जिसमें 'एशिया शून्य-उत्सर्जन समुदाय' (एजेईसी) के भागीदारों सहित एशियाई क्षेत्र के नेताओं ने भाग लिया। प्रेसवार्ता के दौरान सवालों के जवाब में, जायसवाल ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के लिए तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीति की आवश्यकता है। कुछ दिन पहले पश्चिम एशिया की स्थिति पर हुई पिछली अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान, उन्होंने यह भी कहा था, ''हम उम्मीद करते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की निर्बाध स्वतंत्रता और वाणिज्य का वैश्विक प्रवाह कायम रहेगा।''

मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बारे में जायसवाल ने कहा, ''दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय सहयोग में हासिल की गई पर्याप्त प्रगति की समीक्षा की। दोनों पक्ष सहयोग के सभी क्षेत्रों में हमारी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'' उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने कहा कि मंत्रालय खाड़ी और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहा है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के उन देशों से भारत के लिए उड़ानें लगातार संचालित हो रही हैं, जहां हवाई क्षेत्र खुला है और 28 फरवरी से अब तक लगभग 9.84 लाख यात्री इस क्षेत्र से भारत की यात्रा कर चुके हैं। महाजन ने कहा कि विदेश मंत्रालय क्षेत्र में भारतीय नाविकों के कल्याण को उच्च प्राथमिकता दे रहा है और भारतीय मिशन की ओर से उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है।

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