Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

Unnao Rape Case : कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उम्रकैद पर रोक वाला आदेश रद्द

न्यायालय ने सेंगर की सजा निलंबित करने का आदेश रद्द किया

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
symbol
Advertisement

Unnao Rape Case : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही हाई कोर्ट से याचिका पर नए सिरे से फैसला करने को कहा।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हाई कोर्ट को यह भी निर्देश दिया कि वह सेंगर की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास के खिलाफ दायर मुख्य याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने का प्रयास करे। इसमें कहा गया कि यदि हाई कोर्ट के लिए मुख्य याचिका पर शीघ्रता से निर्णय लेना संभव नहीं है तो उसे वहां ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले सेंगर की उस याचिका पर आदेश पारित करना चाहिए जिसमें मामले में आजीवन कारावास को निलंबित करने की मांग की गई है।

Advertisement

पीठ ने इस मुद्दे पर भारी जन आक्रोश के बाद सेंगर को जमानत देने वाले हाई कोर्ट के आदेश को पहले ही रद्द कर दिया था। पीठ ने कहा कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और हाई कोर्ट इस पर नए सिरे से सुनवाई कर सकता है। प्रधान न्यायाधीश ने हाई कोर्ट से ऐसे नए मुद्दों पर फैसला लेने को भी कहा कि क्या किसी विधायक को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के दौरान भी लोक सेवक माना जा सकता है।

Advertisement

इससे पहले, न्यायालय ने बलात्कार मामले में पूर्व विधायक की आजीवन कारावास की सजा के निलंबन को चुनौती देने वाली केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर सुनवाई मई के पहले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी थी। पिछले साल 29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था, और कहा था कि उसे हिरासत से रिहा नहीं किया जाएगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर, 2025 के अपने आदेश में कहा था कि सेंगर को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 (सी) (लोक सेवक द्वारा गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया था, लेकिन एक निर्वाचित प्रतिनिधि भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के तहत "लोक सेवक" की परिभाषा के दायरे में नहीं आता है।

उन्नाव बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सेंगर के कारावास को हाई कोर्ट ने उसकी अपील पर सुनवाई लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था और कहा था कि पूर्व विधायक ने पहले ही सात साल और पांच महीने की सजा काट ली है। हाई कोर्ट के इस आदेश की समाज के विभिन्न वर्गों ने आलोचना की और पीड़िता, उसके परिवार और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया।

Advertisement
×