UGC NET : छात्र समूहों ने यूजीसी-नेट की दोबारा परीक्षा का किया विरोध, NTA की जवाबदेही की मांग
फैसले के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करने का ऐलान किया
कई छात्र संगठनों ने आज प्रदर्शन किया और तीन विषयों के लिए यूजीसी-नेट परीक्षा दोबारा कराने के राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के फैसले के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करने का ऐलान किया। उनका आरोप है कि बार-बार हुई गड़बड़ियों से छात्रों की पढ़ाई और करियर की योजनाएं खतरे में पड़ गई हैं। ये प्रदर्शन परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर एनटीए की हो रही आलोचना के बीच हो रहे हैं। एनटीए ने उन उम्मीदवारों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया है, जिन्होंने इस साल जून में अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र की परीक्षा दी थी।
एनटीए को खत्म किया जाए
एक विशेषज्ञ समिति को प्रश्न-पत्रों में तथ्यों, टाइपिंग, अनुवाद और भाषा से जुड़ी कई गलतियां मिली थीं। दोबारा परीक्षाएं नौ और 10 सितंबर को होंगी और उम्मीदवारों को कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं देना होगा। दोबारा परीक्षा कराने के फ़ैसले की कई छात्र संगठनों ने आलोचना की है, जिनमें स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) शामिल हैं। इन संगठनों ने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। मांग की है कि एनटीए को खत्म किया जाए या परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाए।
एनटीए मुख्यालय पर प्रदर्शन किया
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध आइसा ने सोमवार को ओखला औद्योगिक क्षेत्र में एनटीए मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और एनटीए को खत्म करने की मांग की। उनका आरोप था कि तीन परीक्षा रद्द होना परीक्षा एजेंसी की एक और नाकामी है। माकपा से संबद्ध एसएफआई ने एक बयान में कहा कि एनटीए के ताजा फैसले ने एक बार फिर निष्पक्ष और त्रुटि-मुक्त परीक्षा आयोजित करने में उसकी विफलता को उजागर कर दिया है। संगठन ने मांग की कि एनटीए को खत्म कर दिया जाए।
ये विरोध प्रदर्शन, कथित नीट पेपर लीक को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के एक महीने से भी कम समय बाद हो रहे हैं। एसएफआई ने एजेंसी की बार-बार परीक्षा में विफलता और खराब यूजीसी-नेट प्रश्नपत्र से जुड़े हालात की न्यायिक जांच की भी मांग की। केवाईएस ने एनटीए को तुरंत भंग करने की मांग की।
उसने एनटीए के कथित "घोटालों" की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की और परीक्षा से जुड़ी अवसंरचना के निजीकरण का विरोध किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छात्र संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने भी दोबारा परीक्षा कराए जाने पर चिंता जताई और कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गंभीर गलतियों ने परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

