हवा में ज़हर घोलने वालों को होगी कैद, जुर्माना भी

हवा में ज़हर घोलने वालों को होगी कैद, जुर्माना भी

गुुरुग्राम में बृहस्पतिवार को स्मॉग के बीच चलते वाहन चालक। -प्रेट्र

हरीश लखेड़ा/ट्रिन्यू

नयी दिल्ली, 29 अक्तूबर

दिल्ली-एनसीआर में अब हवा को ज़हरीला बनाने वालों को 5 साल तक कैद और एक करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है। केंद्र सरकार ने दिल्ली- एनसीआर और इससे सटे हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण फैलाने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान कर दिया है। इसके लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का गठन होगा। आयोग दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण पर निगरानी रखने के साथ ही इसे रोकने के उपाय भी देगा। अब यही आयोग वायु प्रदूषण संबंधी आदेश और दिशा-निर्देश जारी कर सकेगा। इस मामले में केंद्र सरकार के अध्यादेश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार रात मंजूरी दे दी।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण की जगह लेगा। इसका मुख्यालय दिल्ली में होगा। आयोग के अस्तित्व में आने के बाद पर्यावरण से जुड़ी सभी टॉस्क फोर्स, कमेटियां, एक्सपर्ट ग्रुप आदि को खत्म कर दिया जाएगा। वायु प्रदूषण के कारकों को देखने के लिए आयोग सब कमेटियों का गठन कर सकेगा। बहरहाल, इस आयोग में अध्यक्ष समेत कुल 18 सदस्य होंगे। इस आयोग में केंद्र सरकार, एनसीआर में शामिल राज्यों के प्रतिनिधि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, इसरो आदि के भी प्रतिनिधि व विशेषज्ञ शामिल रहेंगे। वायु प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ आयोग शिकायत करेगा। शिकायत कोर्ट में की जाएगी। शिकायत के आधार पर कार्रवाई होगी। आयोग के आदेश के खिलाफ कोई भी अपील एनजीटी में की जा सकेगी।

अध्यादेश पर गौर करेगा सुप्रीम कोर्ट : केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये अध्यादेश लायी है और इसे लागू कर दिया गया है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस अध्यादेश के बारे में जानकारी दी। पीठ ने इस पर मेहता से कहा कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की वजह से हो रहे वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाये जाने के मामले में कोई निर्देश देने से पहले वह अध्यादेश देखना चाहेगी।

पीठ ने कहा- हम कोई आदेश पारित करने से पहले अध्यादेश पर गौर करना चाहेंगे। इस मामले में अब 6 नवंबर को आगे विचार किया जायेगा।

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