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Partition विभाजन की पीड़ा बनेगी ‘जीवंत इतिहास’, राष्ट्रीय स्मारक व हाईटेक संग्रहालय का ऐलान

नई पीढ़ी को 1947 की त्रासदी से जोड़ने की पहल, मनोहर लाल के मार्गदर्शन में बना स्मृति न्यास, रमेश चंद जुनेजा आजीवन राष्ट्रीय अध्यक्ष

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न्यास के सदस्यों के साथ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल। -ट्रिन्यू
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देश के सबसे दर्दनाक अध्याय भारत विभाजन 1947 की स्मृतियों को सहेजने और नई पीढ़ी तक उसकी सच्चाई पहुंचाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल की गई है। ‘विभाजन विभीषिका स्मृति न्यास’ के गठन के साथ ही एक भव्य राष्ट्रीय स्मारक और अत्याधुनिक संग्रहालय स्थापित करने की घोषणा की गई है, जो इतिहास को केवल प्रदर्शित नहीं करेगा, बल्कि उसे जीवंत अनुभव के रूप में प्रस्तुत करेगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के मार्गदर्शन में गठित इस न्यास का उद्देश्य विभाजन के दौरान हुए मानवीय संकट, विस्थापन, हिंसा और बलिदानों को एक स्थायी पहचान देना है। न्यास के सेटलर एवं संस्थापक अध्यक्ष स्वामी धर्मदेव हैं, जबकि मैनकाइंड फार्मा लिमिटेड के चेयरमैन रमेश चंद जुनेजा को आजीवन राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

इतिहास नहीं, अनुभव बनेगा स्मारक

न्यास के महामंत्री बोधराज सीकरी के अनुसार, प्रस्तावित स्मारक हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसे एक ‘एक्सपीरियंस सेंटर’ के रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जहां आगंतुक केवल जानकारी नहीं, बल्कि उस दौर की परिस्थितियों को महसूस कर सकेंगे। इसमें ‘हॉरर गैलरी’ और ‘विस्थापन गलियारा’ जैसे विशेष सेक्शन होंगे, जिनमें आधुनिक तकनीक के जरिए विभाजन के समय के भयावह दृश्य और मानवीय पीड़ा को दर्शाया जाएगा

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आध्यात्मिक और प्रशासनिक मार्गदर्शन

न्यास को आध्यात्मिक और प्रशासनिक स्तर पर भी मजबूत समर्थन मिला है। परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश के प्रमुख आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनिजी, ऋषि चैतन्य आश्रम गन्नौर की संस्थापिका आनंदमूर्ति गुरु मां और रोहतक के कलानौर स्थित गद्दी टिकाणा सती भाई साईं दास के श्री 108 महंत राम सुखदास महाराज को मुख्य संरक्षक के रूप में जोड़ा गया है। वहीं, असम के पूर्व राज्यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी, सेवानिवृत्त आईएएस सुरीना राजन कुमार, मुकेश आहूजा, पूर्व कुलपति डॉ़ अशोक दिवाकर और डॉ़ मार्कण्डेय आहूजा जैसे अनुभवी व्यक्तित्व भी इस पहल का हिस्सा बने हैं।

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नई पीढ़ी के लिए ‘इतिहास का आईना’

इस परियोजना का उद्देश्य केवल अतीत को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को दिशा देना है। न्यास का मानना है कि यह स्मारक और संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘इतिहास का आईना’ साबित होगा, जहां वे स्वतंत्रता की कीमत और उस दौर के संघर्ष को करीब से महसूस कर सकेंगे। इस पहल के साकार होने के बाद विभाजन की यादें केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि एक सजीव अनुभव के रूप में हर भारतीय के सामने होंगी।

संस्कृति, आस्था और बलिदान की झलक

इस स्मारक में केवल विभाजन की त्रासदी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और बलिदान की परंपरा को भी स्थान दिया जाएगा। यहां भगवान राम, गुरु तेग बहादुर, गुरु गोविंद सिंह, भगत सिंह और मदन लाल ढींगरा जैसे महान व्यक्तित्वों के योगदान को भी प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि यह स्थल इतिहास, संस्कृति और प्रेरणा का समग्र केंद्र बन सके।

देशभर की प्रतिष्ठित हस्तियां जुड़ीं

न्यास की टीम में देशभर के उद्योगपतियों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों को शामिल किया गया है, जो इस परियोजना को व्यापक समर्थन दे रहे हैं। इनमें सुमन कांत मुंजाल, सुनील सचदेवा, राजीव गुलाटी, मनमोहन चावला, खन्ना, पीके दत्ता, राजीव मुकुल, दिनेश नागपाल, पूर्ण डाबर, सुरजीत ओबेरॉय, बलदेव राज भाटिया, सुमित चंदा, प्रवीण भाटिया, सतीश ग्रोवर और अभिषेक बंगा शामिल हैं। इसके अलावा सुभाष अरोड़ा, हरिंदर होरा, संजीव कुमार, ओमप्रकाश कथूरिया, दीप कालरा, चंद्र शेखर तनेजा और विकास कपूर ने भी ट्रस्ट के सदस्य बनने की सहमति दी है।

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