महाराष्ट्र के पेंच बाघ अभयारण्य में इस महीने की शुरुआत में छोड़ा गया एक गिद्ध 17 दिनों में करीब 750 किलोमीटर की दूरी तय कर नासिक जिले में त्र्यंबकेश्वर के पास अंजनेरी पहाड़ियों के करीब पहुंच गया है। लंबी चोंच वाले इस ‘जे132’ नामक गिद्ध को राज्य वन विभाग और ‘बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी’ के संयुक्त संरक्षण कार्यक्रम के तहत 11 दिसंबर को छोड़ा गया था।शोधकर्ताओं के अनुसार, यह गिद्ध नागपुर, वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, वाशिम, बुलढाणा, जालना और छत्रपति संभाजीनगर जिलों से होते हुए 27 दिसंबर को नासिक क्षेत्र में दाखिल हुआ और अंजनेरी से लगभग 38 किलोमीटर दूर एक स्थान पर पहुंच गया।शोधकर्ता मनन सिंह ने बताया, ‘यह पक्षी शाम को विश्राम करता है, सुबह भोजन करता है और फिर अगले स्थान के लिए उड़ जाता है। उसकी गतिविधियों से संकेत मिलता है कि अपनी यात्रा के दौरान इसने कम से कम दो बार भरपेट खुराक ली है।’मनन ने बताया कि यह गिद्ध उन 14 पक्षियों के दूसरे समूह का हिस्सा है, जिन्हें हरियाणा के पिंजौर से लाकर पेंच में आठ महीने तक प्रशिक्षित किया गया था। इनमें सफेद पीठ वाले आठ और लंबी चोंच वाले पांच गिद्ध शामिल थे, जिनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जीपीएस टैग लगाए गए हैं।अधिकारियों ने बताया कि 12 से 15 दिसंबर के बीच छोड़े गए सभी गिद्धों को पेंच में जंगली गिद्धों के साथ खाते हुए देखा गया। मुक्त किए जाने के बाद सफेद पीठ वाले गिद्ध ज्यादातर पेंच क्षेत्र के आसपास ही रहे, जबकि लंबी चोंच वाले गिद्धों ने दूरदराज के क्षेत्रों की यात्रा शुरू कर दी है। समूह का एक अन्य गिद्ध ‘एलबीवी एबी1’ गडचिरोली जिले के धानोरा तक पहुंच गया है, जो गिद्धों का एक ज्ञात प्राकृतिक आवास है।