बीरू वाल्मीकि हत्याकांड के बाद हुए करनाल एनकाउंटर की अब ADGP स्तर पर जांच, CM सैनी ने निभाया जांच का वादा
एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर संजय कुमार के नेतृत्व में होगी जांच, पुलिस विभाग ने जारी किए आदेश
करनाल के चर्चित बीरू वाल्मीकि हत्याकांड के बाद हुए पुलिस एनकाउंटर पर उठे सवालों की अब वरिष्ठ स्तर पर जांच होगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर सरकार ने जांच की जिम्मेदारी एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर संजय कुमार को सौंपी है।
पुलिस विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। यह फैसला उस समय आया है, जब एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर 13 अगस्त को एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला था। सीएम ने प्रतिनिधिमंडल को 15 अगस्त के बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया था। अब जांच में मुठभेड़ की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े तमाम तथ्यों की पड़ताल होगी।
हत्या के बाद 27 घंटे में एनकाउंटर
करनाल में बीरू वाल्मीकि की गोली मारकर हत्या के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हत्या के करीब 27 घंटे बाद घोघड़ीपुर नहर क्षेत्र में पुलिस और दो संदिग्ध आरोपियों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार दोनों बाइक पर सवार थे और उन्हें रोकने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल हो गए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान हर्ष और बीरबल के रूप में हुई थी।
पहले हत्या, फिर ताबड़तोड़ पुलिस कार्रवाई
बीरू वाल्मीकि की हत्या करनाल-हांसी रोड क्षेत्र में हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें सिर में गोली मारी थी। वारदात के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया था। परिजन और समर्थक आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे। इसी दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। पुलिस ने मामले की जांच के लिए कई टीमों को सक्रिय किया और आरोपियों की तलाश शुरू की।
भाऊ गैंग के नाम से सामने आया था दावा
हत्याकांड के बाद इस वारदात की जिम्मेदारी भाऊ गैंग की ओर से लिए जाने का दावा भी सामने आया था। पुलिस के सामने हत्या के पीछे की वजह, शूटरों और उनके नेटवर्क तथा वारदात में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाना भी चुनौती थी। पुलिस ने जिन दो लोगों को मुठभेड़ में मार गिराया, उन पर बीरू वाल्मीकि की हत्या में शामिल होने का आरोप था। ऐसे में एनकाउंटर के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया कि पुलिस तक दोनों की लोकेशन कैसे पहुंची और मुठभेड़ से पहले तथा उसके दौरान घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा।
एसपी ने मांगा था 10 घंटे का समय
हत्याकांड के बाद परिजनों और समर्थकों में भारी नाराजगी थी। इसी दौरान करनाल के पुलिस अधीक्षक की ओर से मृतक की पत्नी से आरोपियों को पकड़ने के लिए 10 घंटे का समय मांगे जाने की बात भी सामने आई। इसके कुछ ही समय बाद पुलिस ने मुठभेड़ में दोनों आरोपियों को मार गिराने का दावा किया। कार्रवाई की तेजी के कारण पुलिस की कार्यप्रणाली चर्चा में आ गई और बाद में मुठभेड़ के तौर-तरीके को लेकर सवाल उठने लगे।
अब जांच के दायरे में क्या-क्या आएगा
एडीजीपी संजय कुमार के नेतृत्व में होने वाली जांच में एनकाउंटर से जुड़े घटनाक्रम की कड़ी-दर-कड़ी पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। मसलन, पुलिस को आरोपियों के बारे में सूचना कब और कैसे मिली, उन्हें रोकने की कार्रवाई कहां हुई, दोनों पक्षों के बीच फायरिंग की स्थिति क्या थी, पुलिस टीम में कौन-कौन अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे तथा मौके से क्या बरामद हुआ, इन सभी पहलुओं की जांच की जा सकती है। इसके साथ ही हत्या और एनकाउंटर के बीच की पूरी टाइमलाइन भी जांच का अहम हिस्सा होगी। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि पुलिस की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई और उस पर लगाए जा रहे आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है।
संजय कुमार के नेतृत्व से बढ़ी जांच की अहमियत
सरकार ने जांच की जिम्मेदारी एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर संजय कुमार को दी है। हरियाणा पुलिस की आधिकारिक सूची में संजय कुमार 1997 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर के साथ हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका पहले भी रही है। 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान हरियाणा पुलिस के चुनाव सेल की समग्र जिम्मेदारी भी एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर के रूप में संजय कुमार के पास थी। यही वजह है कि सरकार द्वारा उन्हीं के नेतृत्व में जांच कराने का फैसला इस मामले में खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच किसी स्थानीय स्तर की कार्रवाई तक सीमित न रहकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में होगी।
सीएम के आश्वासन के बाद अमल
एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर 13 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त के बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया था। अब सरकार ने जांच का आदेश जारी कर उस आश्वासन को अमल में बदल दिया है। यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ बीरू वाल्मीकि की हत्या जैसे गंभीर अपराध के खिलाफ पुलिस की त्वरित कार्रवाई का संदेश बनाए रखना और दूसरी तरफ पुलिस मुठभेड़ को लेकर उठे सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले की दिशा एडीजीपी स्तर की जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। जांच यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी कि बीरू वाल्मीकि हत्याकांड के आरोपियों तक पुलिस कैसे पहुंची, घोघड़ीपुर नहर के पास वास्तव में क्या हुआ और मुठभेड़ के दौरान पुलिस की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई। सरकार के इस फैसले से एक बात स्पष्ट है कि पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवालों को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी वरिष्ठ स्तर पर जांच कराई जाएगी। बीरू वाल्मीकि हत्याकांड के बाद हुई पुलिस कार्रवाई अब केवल अपराधियों के खिलाफ त्वरित एक्शन का मामला नहीं रह गई है, बल्कि पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी भी बन गई है।

