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जींद-सोनीपत रूट पर बना देश का पहला ग्रीन रेल कोरिडोर

हाइड्रोजन ट्रेन की उलटी गिनती शुरू, सरकार कर रही निगरानी   हरियाणा में रेलवे के इतिहास का एक नया अध्याय लिखने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। जींद से सोनीपत के बीच दौड़ने वाली देश की पहली हाइड्रोजन...

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हाइड्रोजन ट्रेन की उलटी गिनती शुरू, सरकार कर रही निगरानी

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हरियाणा में रेलवे के इतिहास का एक नया अध्याय लिखने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। जींद से सोनीपत के बीच दौड़ने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अंतिम ‘टिक-मार्क’ लगाए जा रहे हैं। सरकार अब उद्घाटन से पहले कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहती है। यही वजह है कि ट्रेन से पहले उसकी जान- हाइड्रोजन प्लांट और उसे मिलने वाली बिजली पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है।

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सूत्रों के मुताबिक, उत्तर रेलवे की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जींद में तैयार किया गया हाइड्रोजन प्लांट 24 घंटे बिना किसी रुकावट के चले। यही प्लांट हाइड्रोजन ट्रेन की रीढ़ है। मंगलवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के अफसरों के साथ हाइब्रिड मोड में बैठक कर इसी बिंदु पर गहन समीक्षा की। बैठक में इस बात पर मंथन हुआ और चिंता भी जताई गई कि अगर बिजली ठप हुई, तो पूरी परियोजना ठप हो सकती है।

बिजली कटौती का विकल्प नहीं

प्लांट को दी जा रही 11 केवी बिजली आपूर्ति की स्थिरता, वोल्टेज क्वालिटी और बैक-अप व्यवस्था को लेकर एक-एक बिंदु पर चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यह मानकर चलें कि प्लांट 24×7 चलेगा और किसी भी वक्त बिजली कटौती का विकल्प नहीं है। मुख्य सचिव ने कहा कि यह केवल एक राज्य परियोजना नहीं, बल्कि देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है, इसलिए बिजली आपूर्ति की नियमित समीक्षा और फील्ड लेवल मॉनिटरिंग अनिवार्य की जाए।

3000 किलो क्षमता, देश का सबसे बड़ा प्लांट

जींद में स्थापित हाइड्रोजन प्लांट देश का अब तक का सबसे बड़ा प्लांट है, जिसकी भंडारण क्षमता करीब 3000 किलोग्राम है। यह प्लांट फिलहाल अंतिम कमीशनिंग चरण में है और नियमित संचालन की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, प्लांट के शुरू होते ही जींद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल और संचालन की राह लगभग साफ हो जाएगी।

शर्तों के साथ रेलवे की हरी झंडी

डीएचबीवीएन के अफसरों ने मुख्य सचिव को बताया कि उत्तर रेलवे ने अब तक दी जा रही बिजली सप्लाई की गुणवत्ता पर संतोष जताया है। हालांकि, रेलवे ने यह भी साफ कर दिया है कि संचालन के दौरान किसी भी तरह की अनियमितता सीधे ट्रेन संचालन को प्रभावित करेगी। इसी वजह से वैकल्पिक बिजली व्यवस्था, फॉल्ट रिस्पॉन्स टाइम और मेंटेनेंस टीम को लेकर विशेष प्रोटोकॉल तैयार किए जा रहे हैं।

ग्रीन ट्रांसपोर्ट का मॉडल बनेगा हरियाणा

सरकारी हलकों में इस परियोजना को पायलट नहीं, प्रेस्टीज प्रोजेक्ट माना जा रहा है। अगर जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन सफल रहती है, तो भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी इसी मॉडल को अपनाया जा सकता है। डीजल से दूरी और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिहाज से यह ट्रेन रेलवे के ग्रीन ट्रांजिशन की दिशा तय करेगी। बैठक में डीएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक विक्रम यादव वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े, जबकि मुख्य अभियंता राजेन्द्र सभ्रवाल मौके पर मौजूद रहे। अब इस परियोजना की समीक्षा नियमित अंतराल पर की जाएगी, ताकि उद्घाटन से पहले किसी भी स्तर पर चूक की गुंजाइश न रहे।

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