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चरखी दादरी का वह विमान हादसा, जिसका RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में किया जिक्र; जानिए क्या हुआ था

1996 के विमान हादसे का उदाहरण देकर बोले RSS प्रमुख- हिंदुत्व बहिष्कारी विचारधारा नहीं, मुस्लिम को न चाहने वाला हिंदू नहीं हो सकता

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फोटो स्रोत आरएसएस के एक्स अकाउंट से
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ सम्मेलन में हरियाणा के चरखी दादरी में 1996 में हुए विमान हादसे का जिक्र करते हुए संघ को समावेशी संगठन बताया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व बहिष्कारी विचारधारा नहीं है और कोई हिंदू यह नहीं सोच सकता कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए।

भागवत ने 12 नवंबर, 1996 को चरखी दादरी के ऊपर हुए उस भीषण विमान हादसे का उदाहरण दिया, जिसमें सऊदी अरब एयरलाइंस का बोइंग-747 और कजाकिस्तान एयरलाइंस का इल्यूशिन-76 विमान हवा में टकरा गए थे। हादसे में दोनों विमानों में सवार सभी लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि दुर्घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में RSS के स्वयंसेवक शामिल थे।

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RSS प्रमुख ने कहा कि दोनों विमान अरब देशों से संबंधित थे और इनमें अधिकांश यात्री मुस्लिम थे। संघ के स्वयंसेवकों ने यह नहीं देखा कि जिन लोगों की वे मदद कर रहे हैं, वे किस धर्म के हैं। उन्होंने शवों को निकालने, अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने और मृतकों की पहचान कराने में परिवारों की मदद की।

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भागवत ने कहा कि संघ राजनीति में नहीं है, इसलिए उसके कार्यकर्ता बिना किसी भेदभाव के सेवा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति अब स्वार्थ का खेल बन गई है, जहां ‘मैं और मेरा’ हावी है। इसके विपरीत ‘हम और हमारा’ ही समाधान का रास्ता है।

उन्होंने कहा कि संघ ने समाज से शुरुआत करने का रास्ता चुना है। वर्ष 2018 के बाद से संघ ने भारत के ईसाइयों और मुसलमानों के साथ संवाद शुरू किया है। उनके अनुसार, संवाद पहला कदम है और सेवा दूसरा। उन्होंने दावा किया कि संघ हर जगह और सभी की समान रूप से सेवा करता है।

भागवत ने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है। सत्य एक है और उस तक पहुंचने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि विविधता एकता की सजावट है और इसे उसी तरह सम्मान व संरक्षण दिया जाना चाहिए, जैसे अपनी प्रकृति का।

RSS प्रमुख ने कहा कि विविधता प्रकृति का नियम है और समाज में सभी की एकता को स्वीकार करना जरूरी है।

विविधता में एकता भारत के डीएनए में, इसका सम्मान किया जाना चाहिए: RSS प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और इस पर खुशी जताई जानी चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।'' शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में 6,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ''जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता।'' उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने यह बात 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' फोरम द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा, ''भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।'' उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है।

RSS प्रमुख ने कहा, ''भारत को कौन-सी नियति मिली है? भारत का उद्देश्य इस विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है। हम एक हैं और हमारी यही विविधता हमारी एकता को और अधिक खूबसूरत बनाती है।'' करीब एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ''विविधता पर खुशी मनाई जानी चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही हमें एकता की इस भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह बहुत सच्ची भावना है।'' (एजेंसी के इनपुट के साथ)

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