हर दिन 2 बार गोलों की बरसात के साथ एलओसी पर सीजफायर ने पूरे किए 17 साल!

हर दिन 2 बार गोलों की बरसात के साथ एलओसी पर सीजफायर ने पूरे किए 17 साल!

सुरेश एस डुग्गर

जम्मू, 25 नवम्बर

पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर 26 नवम्बर, 2003 की अर्द्धरात्रि लागू हुए सीजफायर को आज 17 साल पूरे हो गये। सीमाओं पर जारी सीजफायर ने प्रतिदिन दो बार गोलों की बरसात के साथ अपने 17 साल पूरे किये। सीमा पर बनते-बिगड़ते हालात के बीच उन नागरिकों की खुशी गायब है जिन्होंने बंदूकों के मुंह शांत होते ही फिर से सीमांत इलाकों में अपना रैन-बसेरा बसाना आरंभ किया था। पल्लांवाला का रमेश पिछले कुछ दिनों से परेशान है। ऐसी ही परेशानी से अब्दुल्लियां का सतपाल भी जूझ रहा है। बल्लड़ इलाके के दयाराम को अपने खेतोें की चिंता है। सबकी परेशानी के लिए अब उसी सीजफायर को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जिसकी सलामती की दुआएं वे किया करते थे। कारण स्पष्ट है। पाक सेना सीजफायर की आड़ में सीमा पर अपनी स्थिति मजबूत करते हुए अब भारतीय पक्ष पर हावी होने की कोशिश में है। वह आतंकियों को इस ओर किसी भी हालात में धकेलने पर उतारू है। नतीजतन सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं। सीजफायर के 17 सालों के अरसे में होने वाली 12000 से अधिक उल्लंघन की घटनाएं अक्सर सीजफायर के जारी रहने पर सवालिया निशान लगा देती हैं।

198 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा और 814 किमी लंबी एलओसी से सटे इलाकों में बसने वाले 32 लाख के करीब सीमावासी दिन-रात बस एक ही दुआ करते हैं कि सीजफायर न टूटे। ‘हमने मुश्किल से अपना घर आबाद किया है और पाक सेना उसे मटियामेट करने पर उतारू है,’पुंछ के डिग्वार का मुहम्मद असलम कहता था जिसके 2 बेटों को पहले ही सीमा पर होने वाली गोलीबारी लील चुकी है तथा सीजफायर से पहले उसके घर को कई बार पाक गोलाबारी नेस्तनाबूद कर चुकी है।

एलओसी का मच्छेल सेक्टर भारतीय सेना के लिए सिरदर्द है

एलओसी पर इस माह के शुरू में भारत के 4 सैनिकों की शहादत के बाद मच्छेल सेक्टर एक बार फिर चर्चा में हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मच्छेल सेक्टर भारतीय सेना के लिए सिरदर्द की तरह है। एलओसी के पार से कुपवाड़ा जिला में घुसपैठ का आतंकियों के लिए यह एक आसान रास्ता है। समुद्र तल से 6,500 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित इस सेक्टर में घने जंगल आतंकियों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। वे आसानी से इसमें छिप जाते हैं। इसके अलावा यहां का मौसम और इलाके की बनावट भी आतंकियों के पक्ष में जाती है। यहां कुपवाड़ा शहर से महज 50-80 किमी की दूरी पर भारत और पाकिस्तान के बंकर्स एक-दूसरे के काफी करीब हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई ऐसे स्थान हैं जहां आतंकी या पाकिस्तानी सैनिक हाजी नाका से मच्छेल तक आसानी से भारतीय सैनिकों की नजर बचाकर घुस जाते हैं। भारत के आखिरी गांव से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर एलओसी है और दूसरी तरफ केल है, जिसके बारे में अधिकारियों का कहना है कि वह आतंकियों का सबसे बड़ा लान्चपैड है।

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