US भी करता है विदेशी फंडिंग को रेगुलेट... FCRA संशोधन पर भारत ने दिखाया सख्त रुख, ट्रोलिंग को किया खारिज
FCRA संशोधनों पर अमेरिका को भारत का करारा जवाब
FCRA Bill Dispute : विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को भारत के विदेशी फंडिंग नियमों को लेकर हो रही ट्रोलिंग को खारिज कर दिया और कहा कि कानून से जुड़े मामले देश का अंदरूनी अधिकार क्षेत्र हैं और इन पर संसद ही फैसला लेती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अमेरिका समेत कई देशों में विदेशी पैसे के आने-जाने पर नियम लागू हैं।
जायसवाल ने कहा, "आप जिस मुद्दे की बात कर रहे हैं, हमने उसे देखा है और उस पर कई टिप्पणियां भी की गई हैं। जहां तक कानून से जुड़े मामलों की बात है और खासकर भारत के अपने कानूनों से जुड़े मामलों की, तो यह हमारे लिए एक अंदरूनी मामला है, जिस पर हमारी संसद फैसला लेती है। मैं आपको यह भी बताना चाहूंगा कि दुनिया में अमेरिका समेत कई ऐसे देश हैं जो विदेशी फंड और विदेशी फंडिंग को रेगुलेट करते हैं।"
यह प्रतिक्रिया अमेरिकी सांसद राइली मूर की टिप्पणियों के बाद आई है। मूर ने भारत के 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट' (FCRA) में प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने दावा किया था कि इन प्रावधानों से चर्च और परोपकारी संस्थाओं पर सरकार का नियंत्रण हो सकता है और साथ ही चेतावनी दी थी कि इससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ सकता है।
मूर ने लिखा, "ईसाई धर्म के इतने लंबे इतिहास के बावजूद, भारत की संसद 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट' में बदलाव करने पर विचार कर रही है, ताकि सरकार चर्चों और धार्मिक चैरिटी को अपने कब्जे में ले सके। यह ईसाइयों पर सीधा हमला है। अगर यह बिल इसी तरह आगे बढ़ता है, तो यह भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी चिंता का विषय होगा।"
'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' का मकसद एक 'डेजिग्नेटेड अथॉरिटी' (अधिकृत संस्था) बनाना है। यह संस्था उन मामलों में विदेशी चंदे और उससे खरीदी गई संपत्ति की देखरेख करेगी, जहां किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया हो, सरेंडर कर दिया गया हो या उसकी समय-सीमा खत्म हो गई हो। प्रस्तावित कानून में साफ तौर पर कहा गया है कि अगर ऐसी संपत्ति में कोई पूजा स्थल शामिल है, तो 'डेज़िग्नेटेड अथॉरिटी' को उसके धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना होगा।
इसके अलावा, इसमें कानूनी उल्लंघनों के लिए अधिकतम सजा को पांच साल की जेल से घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव है। FCRA गैर-सरकारी संगठनों, चैरिटेबल संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक ट्रस्टों और उनसे जुड़ी संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंडिंग और उसके इस्तेमाल को कंट्रोल करता है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 और 2022 के बीच 13,520 संस्थाओं को कुल 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा मिला। 15 जुलाई, 2026 तक के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि देश में 14,449 एक्टिव FCRA रजिस्ट्रेशन काम कर रहे थे, जबकि 22,498 रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुके थे और 15,212 की समय-सीमा खत्म हो चुकी थी।

