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वायुसेना का बड़ा फैसला : सॉफ्टवेयर की खामी सुधरी, कल से फिर आसमान में हुंकार भरेगा 'Tejas'

Tejas Fighter Jet : 7 फरवरी के हादसे के बाद दो महीने से खड़ा था पूरा बेड़ा, गहन जांच के बाद ब्रेकिंग सिस्टम को किया गया अपडेट

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भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल सभी 35 तेजस लड़ाकू विमानों की उड़ान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और उनकी गहन तकनीकी जांच की जा रही है।- सांकेतिक तस्वीर
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Tejas Fighter Jet : भारतीय वायुसेना (IAF) ने स्वदेशी लड़ाकू विमान 'तेजस' के पूरे बेड़े को कल यानी 9 अप्रैल से फिर से उड़ान भरने की मंजूरी दे दी है। बता दें कि 7 फरवरी 2026 को हुए एक हादसे के बाद एहतियात के तौर पर पूरे बेड़े को ग्राउंडेड (उड़ान पर रोक) कर दिया गया था। करीब दो महीने तक चली गहन जांच के बाद अब वायुसेना ने यह फैसला लिया है।

वायुसेना और सार्वजनिक क्षेत्र की विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की एक संयुक्त जांच समिति ने पाया कि 7 फरवरी को हुआ हादसा सॉफ्टवेयर में आई एक तकनीकी गड़बड़ी (ग्लिच) के कारण हुआ था। वर्तमान में वायुसेना के पास लगभग 35 सिंगल-इंजन वाले तेजस विमान हैं।

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ब्रेकिंग सिस्टम में थी दिक्कत

जांच में सामने आया है कि हादसे के समय विमान के ब्रेकिंग सॉफ्टवेयर में समस्या आई थी। दरअसल, एक तेजस जेट पश्चिमी मोर्चे के एक फॉरवर्ड बेस से उड़ान भरते समय रनवे से फिसलकर पास के कीचड़ भरे गड्ढे में गिर गया था। इस हादसे में पायलट घायल हो गए थे, लेकिन वे सुरक्षित बच निकलने में सफल रहे थे।

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सूत्रों के मुताबिक, विमान के ब्रेकिंग सॉफ्टवेयर में सुधार की जरूरत थी, जिसे अब पूरा कर लिया गया है। पिछले हफ्ते ही एचएएल के सीएमडी डी.के. सुनील ने मीडिया को बताया था कि इस तकनीकी समस्या का समाधान ढूंढ लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक विमान के ब्रेकिंग सिस्टम के काम न करने से जुड़ी सॉफ्टवेयर संबंधी समस्या थी।

अपग्रेड के बाद कई परीक्षण

अधिकारियों के अनुसार, सॉफ्टवेयर में सुधार और अपडेट के बाद विमान का विभिन्न परिस्थितियों में कड़ा परीक्षण किया गया। इसके बाद ही बेड़े को फिर से उड़ान भरने की अनुमति दी गई है। आधुनिक लड़ाकू विमान अपनी कॉम्बैट और उड़ान संबंधी गतिविधियों, जैसे रडार सिग्नल प्रोसेसिंग और फायरिंग के लिए ऑन-बोर्ड मिशन कंप्यूटर पर निर्भर रहते हैं। वायुसेना और एचएएल ने संयुक्त रूप से यह अपग्रेड किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए किसी नए सॉफ्टवेयर कोड की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि मौजूदा सिस्टम को ही बेहतर बनाया गया है।

जांच के दौरान अन्य पहलुओं पर भी नजर

बेड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल सॉफ्टवेयर ही नहीं, बल्कि विमान के 'अंडर-कैरेज' (पहियों को थामने वाला ढांचा) की धातु (Metallurgy) और ब्रेक लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक सिस्टम की भी बारीकी से जांच की गई है।

तेजस का सुरक्षा रिकॉर्ड

एचएएल के अनुसार, 2016 में शामिल होने के बाद से तेजस का सुरक्षा रिकॉर्ड दुनिया के समकालीन लड़ाकू विमानों में सबसे बेहतर रहा है। हालांकि, 7 फरवरी की घटना इस विमान से जुड़ा तीसरा हादसा थी।

मार्च 2024: जैसलमेर के पास पहला हादसा हुआ था, जब एक विमान फायरपावर प्रदर्शन से लौटते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

नवंबर 2025: दूसरा बड़ा हादसा दुबई एयरशो के दौरान हुआ, जिसमें विंग कमांडर नमनश स्याल शहीद हो गए थे।

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