कृषि कानून सरकार से वार्ता एक दिन टली, दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े, किसान बोले सुनने नहीं, सुनाने जाएंगे

कृषि कानून सरकार से वार्ता एक दिन टली, दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े, किसान बोले सुनने नहीं, सुनाने जाएंगे

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर एक दिन के अनशन पर बैठी महिलाओं से बातचीत करते किसान नेता राकेश टिकैत। -मानस रंजन भुई

पुरुषोत्तम शर्मा/ हप्र

सोनीपत, 18 जनवरी

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों और केंद्र सरकार के बीच मंगलवार को होने वाली वार्ता एक दिन टल गयी है। सोमवार देर रात जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार वार्ता अब 20 जनवरी को होगी। इससे पहले दिन में किसानों ने कहा कि इस बार वह कुछ सुनने के बजाय सरकार को दो-टूक बताने जा रहे हैं कि दोहरा चरित्र छोड़कर साफ करे कि कृषि कानून रद्द होंगे या नहीं। किसानों का कहना है कि वह अपने फैसले पर अडिग हैं, कानून वापसी तक आंदोलन जारी रहेगा।

उधर, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का बयान आया है कि किसानों से खुले मन से बातचीत की जाएगी। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि कृषि कानून रद्द करने का सवाल ही नहीं है, किसानों को जो आपत्ति है वह दूर की जा सकती है। इस बयान के बाद किसानों ने कहा कि वह वार्ता के लिए जरूर जाएंगे, ताकि सरकार लोगों को यह संदेश न दे सके कि किसान जिद पर अड़े हुए हैं। किसान नेता डाॅ. दर्शनपाल, योगेंद्र यादव और बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसान तय समय पर वार्ता के लिए जाएंगे। किसानों के सभी प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे। उन्हाेंने कहा, ‘सरकार जितना चाहे आंदोलन को लंबा करा ले, लेकिन किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसानों ने तय कर लिया है कि कानून वापसी से कम उन्हें कुछ मंजूर नहीं है। वह कानून वापस कराकर, एमएसपी पर कानूनी गारंटी लेकर ही लौटेंगे। अब यह सरकार को समझना है कि वह एक महीने या एक साल में यह फैसला लेती है या लंबा समय चाहिए। किसान अपना हक मांग रहे हैं और हक लेकर ही लौटेंगे।’

उधर, देर शाम सूचना मिली कि दिल्ली बार्डर पर किसान संयुक्त मोर्चा के सदस्यों से मिलने के दिल्ली पुलिस के अधिकारी पहुंचे। उन्होंने 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड को लेकर चर्चा की। पुलिस ने परेड को लेकर कानून व्यवस्था का हवाला दिया, तो किसानों की ओर से भरोसा दिया गया कि वह किसी तरह की अशांति या माहौल में गडबड़ी नहीं चाहते। किसानों ने साफ किया कि दिल्ली के आउटर बाइपास पर वह मार्च निकालेंगे।

चढ़ूनी प्रकरण पर बोले सीएम- काली करतूतें आ रहीं सामने

नयी दिल्ली (ट्रिन्यू) : मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी प्रकरण पर कहा कि काली करतूतें सामने आ रही हैं, सभी एक्सपोज हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी इस तरह की कोशिशें होती रही हैं, इन लोगों को कामयाबी नहीं मिलेगी और प्रदेश सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार धैर्य और संयम से काम करके कानून-व्यवस्था बनाए रखेगी। किसान संगठनों और केंद्र सरकार की अगली बैठक को लेकर मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि कोई सार्थक हल निकाला जाएगा।

ट्रैक्टर परेड पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फैसला पुलिस करे

नयी दिल्ली (एजेंसी) : दिल्ली में 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड पर रोक के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और यह फैसला करने का पहला अधिकार पुलिस का है कि राष्ट्रीय राजधानी में किसे प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की पीठ ने सोमवार को कहा, ‘क्या सुप्रीम कोर्ट यह बताएगा कि पुलिस की क्या शक्तियां हैं और वह इनका इस्तेमाल कैसे करेगी? हम आपको यह नहीं बताने जा रहे कि आपको क्या करना चाहिए।’ पीठ ने 20 तक सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि आपके पास इस मामले से निपटने का पूरा अधिकार है।

‘नेताओं के कारण अड़चन’

नयी दिल्ली (एजेंसी) : केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला ने कहा कि जब किसान हमसे सीधी बात करते हैं तो अलग बात होती है, लेकिन जब इसमें नेता शामिल हो जाते हैं, अड़चनें सामने आती हैं। अगर किसानों से सीधी वार्ता होती तो जल्दी समाधान हो सकता था। उन्होंने कहा कि विभिन्न विचारधारा के लोग इस आंदोलन में प्रवेश कर गए हैं, इसलिए वे अपने तरीके से समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष समाधान चाहते हैं, लेकिन दोनों के अलग-अलग विचार हैं। इसलिए विलंब हो रहा है। कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा।’

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