Swachh Bharat Mission: गांव-गांव में स्वच्छता की क्रांति: हरियाणा बना ‘ओडीएफ प्लस’ का नया रोल मॉडल
Swachh Bharat Mission: 91% से ज्यादा कवरेज के साथ राष्ट्रीय औसत से आगे, 291 करोड़ की नई योजना से मिलेगी और रफ्तार
Swachh Bharat Mission: हरियाणा ने ग्रामीण स्वच्छता के क्षेत्र में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने उसे देश के अग्रणी राज्यों की कतार में ला खड़ा किया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत राज्य ने न केवल अपने लक्ष्य हासिल किए हैं, बल्कि कई मानकों पर राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ दिया है। अब सरकार इस गति को बनाए रखने के लिए 291.40 करोड़ रुपये की नई कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ रही है।
ओडीएफ प्लस में हरियाणा की मजबूत पकड़
ग्रामीण स्वच्छता के सबसे महत्वपूर्ण मानकों में से एक ओडीएफ प्लस मॉडल में हरियाणा ने 91.08 प्रतिशत कवरेज हासिल किया है, जो राष्ट्रीय औसत 85.3 प्रतिशत से काफी अधिक है। राज्य के 6,618 गांवों में से 6,520 गांवों को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है, जबकि 6,028 गांव ‘मॉडल’ श्रेणी में पहुंच चुके हैं। यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन स्तर में आए बदलाव और जागरूकता का भी प्रमाण है। खुले में शौच से मुक्त होने के बाद अब गांव स्वच्छता के अगले स्तर—कचरा प्रबंधन और साफ-सफाई के स्थायी सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं।
समीक्षा बैठक में बनी आगे की रणनीति
राज्य की प्रगति और भविष्य की दिशा तय करने के लिए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए विस्तृत वार्षिक कार्यान्वयन योजना (एआईपी) को मंजूरी दी गई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अब सिर्फ शौचालय निर्माण तक सीमित रहने की बजाय स्वच्छता को एक स्थायी आदत और प्रणाली के रूप में विकसित किया जाए।
शुरुआत से अब तक का सफर
विकास एवं पंचायत विभाग के आयुक्त साकेत कुमार के अनुसार, वर्ष 2014-15 में मिशन की शुरुआत के बाद से अब तक राज्य में 7.35 लाख से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए जा चुके हैं। इससे लाखों ग्रामीण परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन मिला है। सिर्फ वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 7,941 शौचालयों का निर्माण किया गया, जो तय लक्ष्य से अधिक है। इसके साथ ही 2 लाख से ज्यादा परिवारों को सीधे 191.73 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई।
291 करोड़ की नई कार्ययोजना क्या बदलेगी?
सरकार द्वारा स्वीकृत 291.40 करोड़ रुपये की योजना में स्वच्छता के कई आयाम शामिल हैं। इसके तहत नए शौचालयों का निर्माण, सामुदायिक स्वच्छता परिसरों की स्थापना, ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली का विकास और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा गोबर-धन (बायोगैस) परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे न केवल कचरे का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
स्वच्छता से विकास की नई कहानी
हरियाणा का यह मॉडल अब सिर्फ स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सुधार और पर्यावरण संरक्षण का समग्र उदाहरण बनता जा रहा है। गांवों में साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था से बीमारियों में कमी और जीवन स्तर में सुधार देखने को मिल रहा है। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त शेखर विद्यार्थी, मिशन निदेशक अमृता सिंह, राज्य परियोजना निदेशक वर्षा खनगवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

