देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, सीबीआई-ईडी को जल्द जांच के आदेश
अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़ी धोखाधड़ी का मामला
अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी), अनिल अंबानी और समूह की कंपनियों से जुड़ी कथित 40,000 करोड़ रुपये की बैंकिंग एवं कॉरपोरेट धोखाधड़ी मामले में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बुधवार को निष्पक्ष, त्वरित जांच के निर्देश दिए।
इस मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता और पूर्व नौकरशाह ईएएस सरमा के अनिल अंबानी के देश छोड़कर जाने की आशंका जताए जाने पर अंबानी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया कि वह उसकी (न्यायालय की) पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने अंबानी और एडीएजी कंपनियों के खिलाफ जारी जांच में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई प्रगति पर चार सप्ताह के भीतर नयी स्थिति रिपोर्ट मांगी है। पीठ ने ईडी को एडीएजी और अन्य के खिलाफ जांच को शीघ्रता से तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचा वरिष्ठ अधिकारियों का एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया।
पीठ ने प्रक्रिया के दौरान सीबीआई के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि एजेंसी ने अन्य कई वित्तीय संस्थानों से शिकायतें मिलने के बावजूद भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत के आधार पर 2025 में केवल एक प्राथमिकी दर्ज की। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि प्रत्येक बैंक ने अलग लेनदेन की शिकायत की है और इसके लिए एक अलग प्राथमिकी दर्ज होना जरूरी है।
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की भी हो जांच पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह अपनी जांच का दायरा बढ़ाकर उसमें बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत को भी शामिल करे। पीठ ने कहा, ‘ईडी और सीबीआई दोनों ने पहले ही समय लिया है और इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि दोनों एजेंसियां शीघ्रता से कार्रवाई करेंगी।’ सरमा की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत से अन्य हाई-प्रोफाइल डिफॉल्टर (ऋण गबन करने वालों) के देश छोड़कर भाग जाने के उदाहरणों का हवाला देते हुए एडीएजी चेयरमैन को देश छोड़कर जाने से रोकने का निर्देश देने का आग्रह किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि अंबानी के खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किए जा चुके हैं।

