Supreme Court SIR Verdict : वोटर लिस्ट से नाम कटने का मतलब नागरिकता छिनना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
SIR स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को सुप्रीम कोर्ट ने ठहराया वैध, चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा- चुनाव आयोग का कदम स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए जरूरी
Supreme Court SIR Verdict : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के लिए चलाए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक लक्ष्य को आगे बढाती है।
देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एसआईआर की यह कवायद पूरी तरह से जायज है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची की सटीकता, पूर्णता और अखंडता को बहाल करना है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव है। कोर्ट ने कहा कि यह कदम जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) और 1960 के नियमों के खिलाफ नहीं है। इसके बजाय यह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को मिली शक्तियों के दायरे में आता है।
नागरिकता पर नहीं पडेगा कोई असर
पीठ ने उन चिंताओं को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि सूची से बाहर किए गए लोगों की नागरिकता छिन जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग द्वारा की गई यह जांच केवल मतदाता सूची में शामिल होने की पात्रता तय करने तक सीमित है। इसका किसी भी व्यक्ति की नागरिकता पर कोई असर नहीं पडेगा।
सरकार को भेजे जाएंगे नाम
कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जो लोग भारत के नागरिक नहीं होने के कारण मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके नाम नागरिकता अधिनियम के तहत अंतिम जांच के लिए भारत सरकार को भेजे जाएं। दस्तावेजों के सत्यापन पर कोर्ट ने माना कि आयोग को यह तय करने का अधिकार है कि कौन सा दस्तावेज पर्याप्त है और कौन सा नहीं। ऐसा इसलिए ताकि प्रक्रिया में कोई सेंध न लगा सके।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज
सुप्रीम कोर्ट का यह अहम फैसला एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, राजद सांसद मनोज झा, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, एनसीपी शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव समेत अन्य की याचिकाओं पर आया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं को सूची से हटाया जा रहा है। उन्होंने इसे पिछले दरवाजे से नागरिकता सत्यापन करने का प्रयास बताया था।
मतदान राष्ट्र निर्माण का पहला कदम
चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए अदालत में बताया था कि सूची से नाम केवल मृत्यु या पलायन के मामलों में ही हटाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग हमेशा मतदाताओं के साथ खडा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण का पहला कदम मतदान है। 18 वर्ष पूरे कर चुके हर भारतीय नागरिक को मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए। उन्हें संविधान व चुनावी कानूनों के अनुसार अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए।
बता दें कि बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा चुनाव सफलतापूर्वक कराए जा चुके हैं। अगले साल चुनाव में जाने वाले कुछ अन्य राज्यों में फिलहाल यह प्रक्रिया जारी है।
