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Supreme Court on freebies: मुफ्त स्कीमों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- रोजगार के अवसर बढ़ाएं, मुफ्तखोरी नहीं

Supreme Court on freebies: कहा- ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार किया जाए, जो देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती हैं

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Supreme Court on freebies: फ्रीबीज (मुफ्त सुविधाओं) की राजनीति पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार किया जाए, जो देश के आर्थिक विकास में बाधा डालती हैं।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जस्टिस जयमाल्या बागची व न्यायमूर्ति जस्टिस विपल एम पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “हम भारत में कैसी संस्कृति विकसित कर रहे हैं? यह समझ में आता है कि जो लोग बिजली बिल देने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए कल्याणकारी उपाय किए जाएं, लेकिन बिना सक्षम और असमर्थ के बीच अंतर किए सबको मुफ्त सुविधा देना क्या तुष्टिकरण की नीति नहीं है?”

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तमिलनाडु की याचिका पर सुनवाई

सुनवाई तमिलनाडु पावर डिस्ट्रिब्यूशन कार्पोरेशन लिमिटेड की याचिका पर हुई, जिसमें सभी उपभोक्ताओं को उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया है। बिजली वितरण कंपनी ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स 2024 ( Electricity Amendment Rules, 2024) के एक प्रावधान को चुनौती दी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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‘रोजगार के अवसर बढ़ाएं, मुफ्तखोरी नहीं’

पीठ ने कहा कि देश के अधिकांश राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में हैं, इसके बावजूद वे विकास कार्यों की अनदेखी कर मुफ्त योजनाएं बांट रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की  “अगर सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, फिर मुफ्त साइकिल, फिर मुफ्त बिजली दी जाएगी, तो कौन काम करेगा? कार्य संस्कृति पर इसका क्या असर होगा?” अदालत ने यह भी पूछा कि बिजली टैरिफ अधिसूचित होने के बाद अचानक ‘खजाना खोलने’ का फैसला क्यों लिया गया।

विकास बनाम कल्याण पर बहस तेज

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कई राज्य सरकारें चुनावी वादों के तहत मुफ्त बिजली, पानी, परिवहन और अन्य सुविधाएं देने की घोषणाएं कर रही हैं। अदालत ने संकेत दिया कि राज्यों को विकास परियोजनाओं और रोजगार सृजन पर अधिक ध्यान देना चाहिए, न कि केवल वेतन भुगतान और मुफ्त योजनाओं पर खर्च बढ़ाना चाहिए।

बता दें, पंजाब में पहले से ही किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी सरकार आने के बाद से आम जनता को भी प्रतिमाह 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है। इससे पहले आम आदमी पार्टी दिल्ली में भी मुफ्त बिजली योजना का लाभ जनता को दे चुकी है।

आम आदमी पार्टी के बाद कांग्रेस, भाजपा सहित कई अन्य राजनीतिक दल भी अपने चुनाव घोषणा पत्रों में मुफ्त बिजली योजना का लाभ देने की बात कह चुके हैं। यही नहीं केंद्र सरकार भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो मुफ्त राशन (गेहूं/चावल) दे रही है।

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