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Gurugram Minor Rape Case : गुरुग्राम दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए गठित की महिला IPS अधिकारियों की SIT; पुलिस और CWC को थमाया नोटिस

शीर्ष अदालत ने चार वर्षीय मासूम से दरिंदगी की जांच गुरुग्राम पुलिस से छीनकर अब महिला अधिकारियों की विशेष टीम को सौंपी

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Gurugram Minor Rape Case : गुरुग्राम में चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बेहद सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तीन महिला आईपीएस (IPS) अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जांच में लापरवाही बरतने वाले गुरुग्राम पुलिस के अधिकारियों और बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कड़ी फटकार लगाई है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने गुरुग्राम पुलिस को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की पूरी फाइल गुरुवार तक नवनियुक्त एसआईटी को सौंप दे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल की तारीख तय की है।

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पुलिस की भूमिका पर 'शर्मनाक' टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस के आचरण को "शर्मनाक" करार दिया। पीठ ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि पुलिस ने कथित अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश की। अदालत ने पाया कि मामले में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की धारा 6 (गंभीर मर्मभेदी यौन हमला) के तहत दर्ज होने वाले अपराध को बदलकर धारा 10 (गंभीर यौन हमला) में दर्ज कर दिया गया था।

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CJI कांत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, "पुलिस कितनी संवेदनहीन हो गई है! एक महानगर में ऐसा हो रहा है। आप एक डरे हुए बच्चे के मामले के साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं। क्या प्राथमिकी (FIR) तुरंत दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य नहीं है? क्या वे कानून की बुनियादी बातें भी नहीं समझते?"

CWC और अस्पताल की डॉक्टर को भी नोटिस

अदालत ने केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्यों को भी आड़े हाथों लिया। पीठ ने उनसे पूछा कि मामले को संवेदनहीन तरीके से संभालने के लिए उन्हें उनके पदों से क्यों न हटाया जाए। इसके अलावा, मैक्स अस्पताल की एक महिला डॉक्टर से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि शीर्ष अदालत द्वारा मामले का स्वतः संज्ञान लेने के बाद उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट में बदलाव क्यों किया।

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि पीड़ित बच्ची, उसके माता-पिता और उसके स्कूल की पहचान सुरक्षित रखने के लिए रिकॉर्ड से उनके नाम हटा दिए जाएं।

क्या है पूरा मामला ?

यह मामला गुरुग्राम में एक चार साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म से जुड़ा है। पीड़िता के माता-पिता ने हरियाणा पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए सीबीआई (CBI) या एसआईटी (SIT) जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 23 मार्च को शीर्ष अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार होने के एक दिन बाद ही गुरुग्राम पुलिस ने शनिवार को दो महिला घरेलू सहायिकाओं और उनके एक पुरुष साथी को गिरफ्तार किया था। पीठ ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।

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