SC on Stray Dogs : सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश: रेबीज से पीड़ित और खतरनाक आवारा कुत्तों को इच्छामृत्यु देने की अनुमति
नगर निकाय और प्रशासन पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के आकलन के बाद उठा सकेंगे यह कदम; कोर्ट ने कहा- इंसानों के गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार सर्वोपरि
SC on Stray Dogs : सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के आतंक और डॉग बाइट के मामलों पर संज्ञान लेते हुए मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने पहली बार मानव जीवन को खतरे से बचाने के लिए रेबीज से पीड़ित, लाइलाज बीमारी से ग्रस्त या बेहद खतरनाक हो चुके आवारा कुत्तों को इच्छामृत्यु देने की अनुमति दे दी है। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने यह आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अधिकारियों को यह निर्देश देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निकाय ले सकेंगे कार्रवाई का फैसला
पीठ ने कहा कि जिन इलाकों में आवारा कुत्तों की आबादी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है और उनके हमलों से लोगों की जान को निरंतर खतरा है, वहां नगर निकाय इच्छामृत्यु का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, अदालत ने सख्त हिदायत दी है कि यह कार्रवाई पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के उचित आकलन और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 तथा पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 के वैधानिक प्रोटोकॉल के तहत ही की जाएगी।
पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों की स्थापना अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पशु जन्म नियंत्रण ढांचे को मजबूत करने का निर्देश दिया है। पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूरी तरह से काम करने वाला केंद्र स्थापित हो, जिसमें बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षित कर्मचारी और सर्जिकल सुविधाएं मौजूद हों। अदालत ने अपने पिछले आदेश को भी सख्ती से लागू करने को कहा है, जिसके तहत टीकाकरण और नसबंदी के बाद आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से उठाकर वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने आवारा कुत्तों को दूसरी जगह ले जाने और उनकी नसबंदी के आदेश को वापस लेने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में बिना किसी डर या कुत्ते के काटने के खतरे के स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार भी शामिल है। पीठ ने कहा कि अदालत उन जमीनी हकीकतों से आंखे नहीं मूंद सकती, जहां बच्चे, अंतरराष्ट्रीय यात्री और बुजुर्ग लोग कुत्ते के काटने का शिकार हो रहे हैं।
