हरियाणा में कारोबार शुरू करना आसान, ग्राम सभा का कोरम घटा; अल्पसंख्यक आयोग को कानूनी दर्जा
मानसून सत्र के आखिरी दिन विधानसभा में 11 विधेयक पारित
हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को 11 विधेयक पारित हुए। इनमें सबसे बड़ा बदलाव ‘राइट टू बिजनेस’ के जरिए कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया में प्रस्तावित है। नए प्रावधानों के तहत पात्र उद्यमों को सभी मंजूरियां पहले हासिल किए बिना कारोबार शुरू करने की सुविधा मिलेगी। सरकार की ओर से तय समय में प्रारंभिक मंजूरी पर फैसला नहीं हुआ तो उसे स्वीकृत माना जाएगा।
उद्यमियों को सभी वैधानिक मंजूरियां हासिल करने के लिए 36 महीने का समय मिलेगा। इसके साथ ही पंचायतों में योजनाओं के लाभार्थियों के चयन और ग्राम पंचायत विकास योजना से जुड़े ग्राम सभा के लिए जरूरी उपस्थिति कम की गई है। शामलात जमीन पर बने पुराने मकानों के मामलों में मंजूरी का अधिकार भी जिला स्तर पर ले जाया गया है। अल्पसंख्यकों के हितों की निगरानी के लिए राज्य आयोग को वैधानिक दर्जा देने और महिला आयोग में सदस्यों की संख्या बढ़ाने के प्रावधान भी सदन ने मंजूर किए।
36 महीने में मंजूरियां लेने की छूट
हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल के तहत पात्र उद्यमों को एक बार में सैद्धांतिक पूर्व-स्थापना मंजूरी, लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। उद्यमी घोषणा देकर कारोबार शुरू कर सकेंगे और अन्य वैधानिक मंजूरियों की प्रक्रिया समानांतर चलती रहेगी। सरकार द्वारा निर्धारित अवधि में प्रारंभिक मंजूरी पर फैसला नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान किया गया है।
पात्र उद्यमों को सभी जरूरी वैधानिक मंजूरियां लेने के लिए 36 महीने का मोरेटोरियम मिलेगा। इस अवधि में सामान्य निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक रहेगी। हालांकि गंभीर शिकायत, अनधिकृत निर्माण, भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन, जनसुरक्षा, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई हो सकेगी। राज्य और जिला स्तर पर नोडल एजेंसियां सुविधा और शिकायत निवारण का काम करेंगी।
ग्राम सभा में 20 फीसदी उपस्थिति से चलेगा काम
हरियाणा पंचायती राज संशोधन विधेयक में ग्राम सभा की बैठक का कोरम घटाया गया है। सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों के चयन और ग्राम पंचायत विकास योजना के लिए मुख्य बैठक में अब कुल सदस्यों की 20 प्रतिशत उपस्थिति पर्याप्त होगी। पहली स्थगित बैठक में 15 प्रतिशत और दूसरी स्थगित बैठक में निर्धारित संख्या के सदस्यों का कोरम रहेगा। पहले मुख्य बैठक के लिए 40 प्रतिशत, पहली स्थगित बैठक के लिए 30 प्रतिशत और दूसरी के लिए 20 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण बैठकें बार-बार स्थगित होती थीं और योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती थी।
शामलात जमीन पर डीसी देंगे मंजूरी
हरियाणा विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) संशोधन विधेयक के तहत 31 मार्च, 2004 या उससे पहले शामलात देह की जमीन पर मकान बनाने वाले पात्र आवेदकों के मामलों में मंजूरी का अधिकार निदेशक, विकास एवं पंचायत विभाग से संबंधित उपायुक्त को सौंपा गया है। बड़ी संख्या में मामले लंबित होने के कारण यह अधिकार विकेंद्रीकृत किया गया है, जिससे पात्र मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।
अल्पसंख्यक आयोग को मिलेगा वैधानिक दर्जा
हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक के जरिए आयोग को वैधानिक संस्था का दर्जा दिया गया है। आयोग अल्पसंख्यकों के संवैधानिक और कानूनी संरक्षण की निगरानी करेगा, उनके सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास का अध्ययन करेगा तथा अधिकारों से वंचित किए जाने की शिकायतों की जांच कर सरकार को सिफारिशें देगा। आयोग की सिफारिशों को सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और स्थानीय निकायों के समक्ष अधिक संस्थागत महत्व मिलेगा।
महिला आयोग में दो सदस्य बढ़ेंगे
हरियाणा राज्य महिला आयोग संशोधन विधेयक में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात की गई है। बढ़ते शिकायत मामलों और काम के बोझ को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। इसके लिए 9 जुलाई, 2026 को जारी अध्यादेश को विधेयक के जरिए स्थायी कानूनी रूप दिया गया है।
नए निजी विश्वविद्यालयों का रास्ता साफ
हरियाणा निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के तहत रेवाड़ी में कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी और गुरुग्राम में मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने उच्च शिक्षा में बढ़ती छात्र संख्या और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 2030 तक संस्थानों की संख्या बढ़ाने की जरूरत को इसका आधार बताया है।
जीएसटी में पोस्ट-सेल डिस्काउंट पर बदलाव
हरियाणा जीएसटी संशोधन विधेयक में पोस्ट-सेल डिस्काउंट से जुड़े प्रावधान बदले गए हैं। संबंधित चालान के समझौते से छूट को विशेष रूप से जोड़ने की बाध्यता हटाई गई है और इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस करने के लिए क्रेडिट नोट का संदर्भ जोड़ा गया है। उल्टे शुल्क ढांचे से जुड़े रिफंड पर भी प्रोविजनल रिफंड के प्रावधान लागू होंगे।
निकायों की ऑडिट व्यवस्था को कानूनी आधार
हरियाणा लोकल ऑडिट विधेयक स्थानीय निकायों, पंचायती राज संस्थाओं, शहरी निकायों, विश्वविद्यालयों, शिक्षा बोर्ड और अन्य स्थानीय निधि संस्थानों के स्वतंत्र और समयबद्ध ऑडिट के लिए वैधानिक ढांचा देगा। वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों को सीधे सरचार्ज नोटिस जारी करने और ऑडिट आपत्तियों के तय समय में जवाब की व्यवस्था होगी। वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट विधानसभा में रखने की समयसीमा भी निर्धारित की जाएगी।
इन विधायकों पर भी डालें नजर
- 7,136.63 करोड़ का अनुपूरक विनियोग : हरियाणा विनियोग (संख्या-3) विधेयक के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए समेकित निधि से 7,136 करोड़ 63 लाख 25 हजार रुपये के भुगतान एवं विनियोग को मंजूरी दी गई।
- फिजियोथेरेपी परिषद समाप्त : केंद्रीय राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल व्यवसाय आयोग कानून के तहत राज्य संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल परिषद गठित होने के बाद 2020 के हरियाणा राज्य फिजियोथेरेपी परिषद कानून को समाप्त किया गया। पुराने पंजीकरण और कार्यवाहियों की निरंतरता सुरक्षित रहेगी।
- कानून अधिकारियों की संख्या बढ़ी : विशेष योग्यता और अनुभव वाले कानून अधिकारियों की नियुक्ति की सीमा 10 से बढ़ाकर 15 की गई है। भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद मामलों की प्रकृति और संख्या में बदलाव को इसका आधार बनाया गया है।

