सीतारमण बोलीं- संसद में मुद्दा उठाने के बाद मंत्री का जवाब सुनने के लिए सदन में बैठना होगा
बोरदोलोई और के. सुरेश की कुछ टिप्पणियों के बाद वित्त मंत्री ने यह बात कही
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में कांग्रेस सदस्यों को कड़े शब्दों में संदेश दिया कि वे मुद्दा उठा कर सदन से भाग नहीं सकते और मंत्री का जवाब सुनने के लिए उन्हें यहां बैठना होगा। कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और के. सुरेश की कुछ टिप्पणियों के बाद वित्त मंत्री ने यह बात कही। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा में भाग लेते हुए बोरदोलोई ने कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी के लिए शुरूआती प्रावधान 288 करोड़ रुपये था और हाल तक 1,800 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
उन्होंने दावा किया कि असम की ''डबल इंजन सरकार'' ने इस पूरी कवायद को ठंडे बस्ते में डालने का निर्णय लिया, जो सार्वजनिक धन की बर्बादी है। बोरदोलोई ने भाजपा नीत असम सरकार पर ''सार्वजनिक ऋण और अनुत्पादक व्यय के चिंताजनक स्तर'' को लेकर भी सवाल उठाए। इस पर, वित्त मंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि वह असम के बारे में उनके सवालों का जवाब देंगी, तो फिर उन्हें अन्य राज्यों पर भी बोलना होगा। वहीं, पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने कांग्रेस सदस्य बोरदोलोई से कहा कि वह अनुदान की मांग पर ही बोलें।
इस पर, कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि आसन का कहना है कि केवल अनुदान की अनुपूरक मांगों पर ही अपनी बात रखें, इसलिए सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को भी केवल अनुदान मांगों तक सीमित रहना चाहिए। आप हमें अनुमति नहीं देते, लेकिन उन्हें (सत्तापक्ष के सदस्यों को) अनुमति देते हैं। यह ठीक नहीं है। इस पर पाल ने कहा कि मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे अनुदान की अनुपूरक मांगों पर ही अपनी बात रखें। इसके बाद, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि यदि सदस्यों को यह लगता है वे जो विषय उठा रहे हैं वह अनुदान की अनुपूरक मांगों से संबंधित है तो ''मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं। वित्त मंत्री ने कहा कि मैं यह देखकर चकित हूं कि के. सुरेश बचाव कर रहे हैं।
जब मैं केरल के बारे में बात करूंगी तो क्या वह उस वक्त बचाव करेंगे? यहां बैठे अन्य राज्यों के सदस्य अपने राज्य के बारे में बोलेंगे तो क्या मुझे जवाब देना चाहिए? यह केवल इसलिए नहीं हो सकता कि मैं विपक्ष में हूं तो कोई भी मुद्दा उठाऊं और जब मंत्री जवाब दें तो गायब हो जाऊं, बहिर्गमन कर जाऊं, प्रदर्शन करूं व मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करूं...यह एकतरफा नहीं हो सकता। सीतारमण ने विपक्षी सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे बोलना चाहते हैं तो ''मैं यहां जवाब देने के लिए तैयार हूं, लेकिन प्रदर्शन नहीं होना चाहिए...उन्हें जवाब सुनने के लिए यहां बैठना होगा, मुद्दा उठाकर (सदन से) भाग नहीं सकते।

