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Silent Shock : गोल से पहले ही थम गई धड़कन, मैदान में पलभर में बुझ गया घर का चिराग

तीन बहनों का इकलौता भाई का 14 वर्षीय जस्सू

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अबोहर में सरकारी अस्पताल में मृतक के पिता को संभालते परिजन। -निस
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Silent Shock : अबोहर का गांव धरांगवाला का फुटबॉल मैदान रविवार को उम्मीदों से भरा था। चारों ओर खिलाड़ियों की हलचल, दर्शकों की तालियां और बच्चों की खिलखिलाहट थी। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही पलों में वही मैदान खामोशी और आंसुओं का गवाह बन जाएगा। खेलते-खेलते 14 वर्षीय जस्सू उर्फ जसमीत की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया।

14 वर्षीय जस्सू उर्फ जसमीत का फाइल फोटो।
14 वर्षीय जस्सू उर्फ जसमीत का फाइल फोटो।

‘नशों से दूर खेलों की ओर’ अभियान के तहत आयोजित इस फुटबॉल टूर्नामेंट का यह पहला ही मुकाबला था। गांव आलमवाला का रहने वाला जस्सू पूरे जोश में खेल रहा था। अचानक उसने गोल की ओर शॉट लगाया और उसी पल जमीन पर गिर पड़ा। शुरुआत में साथियों को लगा कि वह फिसल गया है, लेकिन जब वह नहीं उठा तो डर ने सबको जकड़ लिया। मैदान में भागादौड़ मच गई। आयोजकों और खिलाड़ियों ने उसे संभाला और तुरंत निजी डॉक्टर के पास ले जाया गया। हालत नाजुक देख उसे सरकारी अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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खबर गांवों तक पहुंची तो माहौल पूरी तरह बदल गया। अस्पताल में जमा भीड़, सिसकियां और टूटता हुआ एक पिता का सब्र। जस्सू तीन बहनों का इकलौता भाई था, घर की उम्मीद और मां-बाप की आंखों का तारा। पिता मेहनत मजदूरी कर परिवार चलाते हैं और बेटे के बेहतर भविष्य के सपने देखते थे। वे सपने उसी मैदान में बिखर गए।

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साथी खिलाड़ियों ने बताया कि जस्सू पढ़ाई में भी अच्छा था और खेल उसका जुनून था। शुरुआती तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है, हालांकि असल वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। थाना सदर पुलिस के एएसआई गुरमीत सिंह मामले की जांच कर रहे हैं।

यह हादसा सिर्फ एक किशोर की मौत नहीं, बल्कि उस सवाल को भी जन्म देता है कि खेल के मैदान में बच्चों की सेहत और सुरक्षा को लेकर हम कितने तैयार हैं। जिस मैदान से भविष्य की उम्मीदें जुड़ी थीं, वहीं एक परिवार का उजाला हमेशा के लिए बुझ गया।

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