Ship Seizure Hormuz Strait: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने भारत आ रहे जहाज व पोतों को कैसे घेरा, फायरिंग का वीडियो जारी
Ship Seizure Hormuz Strait: आईआरजीसी कमांडो ने स्पीडबोट से घेरकर Epaminondas और MSC Francesca सहित कई जहाज रोके; ईरान ने ‘समुद्री नियम उल्लंघन’ का लगाया आरोप
Ship Seizure Hormuz Strait: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक नाटकीय वीडियो जारी कर दिखाया है कि कैसे उसके सशस्त्र कमांडो ने भारत की ओर आ रहे जहाज समेत कई कार्गो पोतों को घेरकर अपने कब्जे में लिया।
वीडियो में ईरानी स्पीडबोट्स को तेजी से जहाजों के करीब पहुंचते और फिर हथियारबंद जवानों को उन पर चढ़ते हुए देखा जा सकता है। ईरानी मीडिया के अनुसार, ‘Epaminondas’ नामक जहाज को चेतावनी न मानने पर निशाना बनाया गया, जिससे उसके ब्रिज (कमांड सेंटर) को नुकसान पहुंचा। हालांकि, चालक दल सुरक्षित बताया गया है।
इसके अलावा ‘MSC Francesca’ और ‘Euphoria’ नामक जहाजों को भी रोका गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन जहाजों पर भी फायरिंग की गई ताकि उन्हें रुकने के लिए मजबूर किया जा सके।
IRGC released footage of the interception of two vessels, MSC-FRANCESCA and EPAMINODES, after maritime violations in the Strait of Hormuz.
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— Press TV 🔻 (@PressTV) April 22, 2026
IRGC ने दावा किया कि इन पोतों के पास आवश्यक अनुमति नहीं थी और उन्होंने नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की, जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि MSC Francesca के इज़राइल से संबंध हैं।
ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और व्यवस्था से छेड़छाड़ उसकी ‘रेड लाइन’ है और सभी जहाजों को उसके नियमों का पालन करना होगा।
युद्धविराम के बावजूद बढ़ा तनाव
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी। उन्होंने ईरान से कूटनीतिक समझौते की अपील करते हुए कहा था कि इससे देश को आर्थिक और रणनीतिक स्थिरता मिल सकती है।
हालांकि, ईरान ने अमेरिकी रुख पर संदेह जताया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका पर ‘दोहरे रवैये’ का आरोप लगाते हुए कहा कि बातचीत में सबसे बड़ी बाधा अविश्वास और दबाव की नीति है।
फिलहाल संभावित नई वार्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है।
