जसपाल राणा के निधन के 17 दिन बाद मां श्यामा देवी का भी निधन, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हृदय संबंधी जटिलताओं से 12 जून को हुआ था जसपाल राणा का निधन, अब स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहीं उनकी मां ने भी ली अंतिम सांस
भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज और पद्मश्री सम्मानित जसपाल राणा के निधन के महज 17 दिन बाद उनकी मां श्यामा देवी का भी रविवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं और अस्पताल में भर्ती थीं। उनके निधन से राणा परिवार पर दुखों का दूसरा बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है।
जसपाल राणा का 12 जून को 49 वर्ष की आयु में हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण निधन हो गया था। इससे पहले उनके हृदय की समस्या के इलाज के लिए सर्जरी भी की गई थी। उनके निधन के कुछ दिनों बाद उनकी मां श्यामा देवी की तबीयत भी बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। संयोग से रविवार को ही जसपाल राणा का 50वां जन्मदिन भी था।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्यामा देवी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद समाचार है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
श्री नारायण सिंह राणा जी की धर्मपत्नी एवं प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज, पद्मश्री स्व. जसपाल राणा जी की पूज्य माताजी के निधन का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।
इस कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें… pic.twitter.com/KISVtyLqJL
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) June 28, 2026
श्यामा देवी का निधन उनके पति नारायण सिंह राणा के लिए गहरा आघात है, जो अभी अपने बेटे के निधन के सदमे से उबर भी नहीं पाए थे। जसपाल राणा अपने पीछे पत्नी रीना राणा, बेटी देवांशी, बेटे युवराज, बहन सुषमा सिंह और भाई सुभाष राणा को छोड़ गए हैं।
भारतीय निशानेबाजी के महान सितारे थे जसपाल राणा
जसपाल राणा भारत के सर्वश्रेष्ठ पिस्टल निशानेबाजों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने खेल करियर में राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में कई पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद उन्होंने कोचिंग में भी नई ऊंचाइयां हासिल कीं।
पेरिस ओलंपिक में भारतीय निशानेबाज मनु भाकर को दो ऐतिहासिक कांस्य पदक दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही। निधन के समय वह भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे।
जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटते समय उड़ान के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। नई दिल्ली पहुंचने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हृदय की धमनी में रुकावट दूर करने के लिए स्टेंट लगाया गया था। इसके बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

