विकसित भारत की यात्रा में सेवा तीर्थ मील का पत्थर : मोदी
पीएमओ और केंद्रीय सचिवालय के नये भवन ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और केंद्रीय सचिवालय के नए भवन विकसित भारत की दिशा में देश की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ के उद्घाटन करने के बाद कही। प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है जबकि केंद्रीय सचिवालय की दो इमारतों को ‘कर्तव्य भवन’ 1 और 2 कहा जाएगा।
केंद्रीय मंत्रियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और केंद्र सरकार के अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी ऐतिहासिक इमारतें, जिनमें अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा रक्षा, गृह और वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय स्थित हैं, ब्रिटिश साम्राज्य के आदर्शों को मूर्त रूप देने के लिए बनाई गई थीं, लेकिन सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का निर्माण देश की जनता की आकांक्षाओं को साकार करने के लिए किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की राह पर बढ़ रहे देश के लिये यह अत्यंत आवश्यक है कि वह गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर आगे बढ़े। उन्होंने कहा, ‘शास्त्रों में विजय एकादशी को बहुत महत्व दिया गया है। इस दिन, जिस भी संकल्प के साथ कोई आगे बढ़ता है, वह निश्चित रूप से विजय दिलाता है। आज हम सभी एक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। हमारे लक्ष्य में विजय प्राप्त करने का दिव्य आशीर्वाद हमारे साथ है।’ रेस कोर्स की जगह लोक कल्याण मार्ग रखने की बात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘नाम बदलने की पहल महज शब्दों का परिवर्तन नहीं है; इन सभी प्रयासों के पीछे एक ही वैचारिक सूत्र निहित है- स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान। गुलामी की बेड़ियों से मुक्त एक पहचान।’ इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक स्मारक डाक टिकट और एक सिक्का भी जारी किया, जिस पर नयी इमारत, सेवा तीर्थ, का नाम अंकित है।

