Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

School Student Road Safety: दिल्ली में स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, 65% अकेले पार करते हैं सड़कें

School Student Road Safety: दिल्ली में स्कूल जाने वाले लगभग दो-तिहाई किशोर स्कूल जाते समय अकेले ही बड़ी सड़कें पार करते हैं और पैदल चलना ही उनके आने-जाने का मुख्य तरीका है। एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है...

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
प्रतीकात्मक चित्र
Advertisement

School Student Road Safety: दिल्ली में स्कूल जाने वाले लगभग दो-तिहाई किशोर स्कूल जाते समय अकेले ही बड़ी सड़कें पार करते हैं और पैदल चलना ही उनके आने-जाने का मुख्य तरीका है। एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है और स्कूल के रास्तों को सुरक्षित बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

यह अध्ययन जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ ने दिल्ली में ज्यादा दुर्घटनाओं वाले सड़क के हिस्सों या 'ब्लैक स्पॉट' के पास स्थित चार सरकारी स्कूलों में किया था। इसमें 10-19 साल की उम्र के 4,789 छात्र शामिल थे और इसमें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने सहयोग किया। '

Advertisement

इंजरी प्रिवेंशन' नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में देखा गया कि इस उम्र के किशोर स्कूल कैसे आते-जाते हैं, उन्हें सड़क सुरक्षा संकेतों और सुरक्षा के तरीकों की कितनी समझ है, और रोजाना आने-जाने के दौरान उन्हें किन खतरों का एहसास होता है। जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ के इंजरी डिवीजन में सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधानकर्ता प्रतिष्ठा सिंह के अनुसार, स्कूल आने-जाने के लिए विशेष रूप से लड़कों में पैदल चलना सबसे आम तरीका पाया गया। कई छात्रों ने रोज़ाना आने-जाने के दौरान सड़क दुर्घटनाओं, तेज रफ्तार गाड़ियों, लूटपाट और उत्पीड़न को लेकर भी चिंता जताई।

Advertisement

सिंह ने कहा, ''सर्वेक्षण में शामिल 80 प्रतिशत लड़के और 49 प्रतिशत लड़कियां अक्सर बिना किसी बड़े की देखरेख के व्यस्त सड़कों और राजमार्ग पर स्कूल से घर पैदल जाती हैं। अकेले बड़ी सड़कें पार करना भी आम बात थी, जबकि साइकिल चलाने वाले कई छात्र भी अधिक यातायात वाली सड़कों पर अकेले ही चलते थे।''

सिंह ने कहा, ''दो-तिहाई छात्र स्कूल जाते समय अकेले ही बड़ी सड़कें पार करते हैं, जबकि पैदल चलना ही आने-जाने का मुख्य तरीका है।'' अध्ययन में पाया गया कि किशोरों को रोजाना आने-जाने के दौरान कई तरह की सुरक्षा चिंताओं का सामना करना पड़ता है। ये परिणाम दर्शाते हैं कि जन-केंद्रित बुनियादी संरचना, नियमों को सख्ती से लागू करने और सड़क सुरक्षा की बेहतर शिक्षा के जरिए स्कूल के रास्तों को सुरक्षित बनाने की जरूरत है।

जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ में चोट रोकथाम विभाग के प्रमुख जगनूर जगनूर ने कहा, ''मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर सफर करने वाले छात्रों में से 39 प्रतिशत लड़कों और 46 प्रतिशत लड़कियों ने बताया कि उन्होंने कभी हेलमेट नहीं पहना। कार से सफर करने वाले छोटे ग्रुप में भी सीटबेल्ट का इस्तेमाल कम और अनियमित था।''

उन्होंने कहा, ''हम सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ किशोरों पर नहीं डाल सकते। अगर बच्चे पैदल या साइकिल से स्कूल जा रहे हैं, तो उनके आस-पास की सड़कों और गलियों को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए कि वे सुरक्षित रहें। पैदल चलने वालों के लिए रास्ते, बेहतर लाइटिंग, ट्रैफिक की रफ्तार कम करने के उपाय और सुरक्षित क्रॉसिंग के साथ-साथ नियमों का सही ढंग से पालन कराने से बड़ा फर्क पड़ सकता है।''

Advertisement
×