BJP VS AAP : एक चुटकुलेबाज, दूसरा माल साफ करने में जुटा' : आप सांसदों के पाला बदलने के बाद सैनी का मान पर तीखा हमला
मान के 'मसाले' वाले तंज पर हरियाणा के सीएम का पलटवार, बोले- अदरक-लहसुन का भी होता है अपना वजूद; भ्रष्टाचार के भी लगाए गंभीर आरोप
BJP VS AAP : : पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों के सामूहिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया वाकयुद्ध छिड़ गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें 'चुटकुलेबाज' करार दिया है। सैनी का यह तीखा बयान मान के उस पाक कला वाले रूपक (Metaphor) के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने पाला बदलने वाले सांसदों की तुलना रसोई के मसालों से की थी।
मान का तंज: 'मसाले सब्जी नहीं बन सकते'
बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पंजाबी में एक पोस्ट साझा करते हुए सांसदों के दलबदल पर कटाक्ष किया था। उन्होंने लिखा कि अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी, लाल मिर्च, काली मिर्च और धनिया—ये सात चीजें मिलकर सब्जी का स्वाद तो बढ़ा सकती हैं, लेकिन इनकी अपनी कोई 'सब्जी' नहीं बन सकती। मान का इशारा उन सात सांसदों की ओर था जो अब भाजपा के खेमे में जा चुके हैं। मान का तर्क था कि पार्टी के बिना इन नेताओं का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है।
सैनी का पलटवार: 'अदरक-लहसुन की भी बनती है सब्जी'
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मान के इस बयान पर कड़ा पलटवार किया। सैनी ने चुटकी लेते हुए कहा, "अदरक की भी सब्जी बनती है और लहसुन की भी सब्जी बनती है।" उन्होंने मान को निशाने पर लेते हुए कहा कि राजनीति में हर व्यक्ति का अपना महत्व होता है। सैनी ने आगे बढ़ते हुए 'आप' के शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोला और कहा, "एक चुटकुलेबाज है और दूसरा माल साफ करने में जुटा है।" उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है और राज्य की जनता ही नहीं, बल्कि 'आप' के अपने विधायक भी मुख्यमंत्री से असंतुष्ट हैं।
दलबदल का कानूनी गणित
भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। इन सांसदों का यह कदम दल-बदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षित माना जा रहा है। कानून के अनुसार, यदि किसी विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई (Two-Third) सदस्य एक साथ पाला बदलते हैं, तो उसे विलय माना जाता है और उनकी सदस्यता पर कोई आंच नहीं आती। इसी संवैधानिक व्यवस्था का लाभ उठाते हुए इन सात सांसदों ने भाजपा का दामन थामा है।
2027 के चुनाव और अधूरे वादे
नायब सैनी ने कहा कि पंजाब के विकास के लिए अब जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की ओर देख रही है। उन्होंने 'आप' सरकार को वादाखिलाफी पर घेरते हुए कहा कि न तो किसानों के कर्ज माफ हुए, न युवाओं को रोजगार मिला और न ही राज्य को नशे से मुक्ति मिली। सैनी ने स्पष्ट किया कि पंजाब में 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों में जनता इस 'चुटकुलेबाजी' का जवाब देगी। सैनी के इस आक्रामक रुख ने पंजाब की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।
