करीब 11 साल से जेल में बंद करौंथा-बरवाला आश्रम के संचालक रामपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को देशद्रोह के मामले में जमानत दे दी। इसके साथ ही जेल से बाहर आने का उनका रास्ता लगभग साफ हो गया, क्योंकि चार आपराधिक मामलों में जिला अदालत उन्हें पहले ही बरी कर चुकी है, जबकि हत्या के दो मामलों की सजा पर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है।
रामपाल नवंबर, 2014 से एक अंडरट्रायल कैदी के रूप में जेल में हैं। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि इतने लंबे समय के बावजूद ट्रायल अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। साल 2016 से 2025 के बीच केवल 125 गवाहों के बयान दर्ज हो सके, जबकि 400 से अधिक की गवाही अभी बाकी है। अगस्त 2025 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनवाई दोबारा शुरू करने के आदेश ने मामले को और लंबा खींच दिया।2014 की हिंसक झड़पों से जुड़ा मामला : रामपाल की गिरफ्तारी 2014 में बेहद विवादित परिस्थितियों में हुई थी। पुलिस जब उन्हें गिरफ्तार करने बरवाला (हिसार) आश्रम पहुंची, तो उनके समर्थकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। आरोप है कि उस दौरान महिलाओं और बच्चों को आगे कर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया गया, जबकि सैकड़ों समर्थक हथियारों के साथ तैनात थे।
उम्र और स्वास्थ्य भी बने आधार
रामपाल के वकील अर्जुन श्योराण ने उनकी उम्र (करीब 74 वर्ष) और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत की मांग की। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि इस मामले में सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और आईपीसी की धारा 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) जैसी गंभीर धाराओं पर सवाल उठाए। अदालत को बताया गया कि न तो किसी प्रकार का सशस्त्र विद्रोह हुआ और न ही देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने का कोई ठोस प्रमाण है। फाॅरेंसिक रिपोर्ट में भी आश्रम से किसी विस्फोटक सामग्री के बजाय केवल सामान्य ज्वलनशील पदार्थ मिलने की बात कही गई।

