राघव चड्ढा की राजनीतिक निष्ठा संदेह के घेरे में : मान
राज्यसभा में आप के उप-नेता पद से हटाए जाने और अपनी ही पार्टी पर अपनी आवाज दबाने का आरोप लगाने के बाद, राघव चड्ढा पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीखी टिप्पणी की है। मान ने कहा कि राघव...
राज्यसभा में आप के उप-नेता पद से हटाए जाने और अपनी ही पार्टी पर अपनी आवाज दबाने का आरोप लगाने के बाद, राघव चड्ढा पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीखी टिप्पणी की है। मान ने कहा कि राघव पार्टी के रुख के खिलाफ काम कर रहे थे। यही नहीं, सीएम ने कहा कि राघव चड्ढा की राजनीतिक निष्ठा ‘संदेह के घेरे में’ है। मान ने कहा, उन्होंने संसद में उन महत्वपूर्ण मुद्दों को नहीं उठाया जहां पार्टी ने एक निश्चित राजनीतिक रुख अपनाया था। इसके बजाय, वह हवाई अड्डों पर महंगे समोसे और पिज्जा की डिलीवरी के बारे में बात कर रहे थे। वह नागरिकों के वोट काटने और फर्जी वोट बनाने के खिलाफ याचिका पर हस्ताक्षर करने, 160 आप कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज करने के लिए गुजरात सरकार के खिलाफ बोलने, पंजाब में धार्मिक विभाजन पैदा करने की कोशिशों या राज्य से संबंधित अन्य मुद्दों (जैसे जीएसटी और आरडीएफ बकाया फसल एमएसपी पर बोलने के लिए तैयार नहीं थे। यदि कोई पार्टी लाइन का पालन नहीं करता है, तो यह पार्टी व्हिप के खिलाफ है और कार्रवाई होगी।’
आप के अंत की शुरुआत : जाखड़
पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि राघव चड्ढा प्रकरण सत्तारूढ़ आप के अंत की शुरुआत है। ‘ट्रिब्यून’ के साथ विशेष बातचीत में जाखड़ ने कहा कि पंजाब ने 2027 में ‘स्वराज’ (स्व-शासन) का मन बना लिया है और अब वह केजरीवाल और उनके लोगों द्वारा शासित नहीं होगा। यह पूछे जाने पर कि क्या राघव चड्ढा भाजपा में शामिल होने वाले हैं, जाखड़ ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘यह मामला तो ऐसा है कि ‘जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग़ तो सारा जाने है...।’
‘मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना’
इस बीच, राघव चड्ढा ने कहा, ‘मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। मैंने कई ऐसे मुद्दे उठाए जिनसे आम आदमी को फायदा हुआ। इससे पार्टी को क्या नुकसान हुआ? कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहता है?’उधर, भाजपा ने इसे आप का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि उन्हें बोलने से रोकना गलत है।

