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Raghav Chadha AAP : राज्यसभा में पद छिनने पर राघव चड्ढा का छलका दर्द, बोले-'मुझे खामोश किया गया है, हराया नहीं'

आम आदमी पार्टी में रार : आप सांसद का अपनी ही पार्टी पर बड़ा आरोप, बोले— पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखकर मेरा भाषण रुकवाने की कोशिश की

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 Raghav Chadha AAP : आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने उच्च सदन में उपनेता के पद से हटाए जाने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। शुक्रवार को एक भावुक और कड़ा वीडियो संदेश जारी करते हुए चड्ढा ने कहा कि उन्हें 'खामोश तो कर दिया गया है, लेकिन वे अभी हारे नहीं हैं।' गौरतलब है कि पार्टी ने गुरुवार को एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए चड्ढा को पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को राज्यसभा में अपना नया उपनेता नियुक्त किया था।

'क्या जनता के मुद्दे उठाना गुनाह है ?'

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चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा किए गए वीडियो में पार्टी के इस फैसले पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने संकेत दिया कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई संसद में उनकी बेबाक बयानबाजी के कारण हुई हो सकती है। उन्होंने सवाल किया, "जब भी मुझे संसद में मौका मिलता है, मैं आम जनता के मुद्दे उठाता हूं। शायद मैं वे बातें कहता हूं जो कई लोगों को पसंद नहीं आतीं। पर क्या जनता की आवाज उठाना अपराध है? क्या ऐसा करके मैंने कोई गलती कर दी है?"

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पार्टी पर लगाया गंभीर आरोप

राघव चड्ढा ने अपनी ही पार्टी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उन्हें संसद के भीतर बोलने से रोकने के लिए बाकायदा संस्थागत प्रयास किए गए। चड्ढा के अनुसार, "आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी लिखकर राघव चड्ढा को सदन में बोलने से रोकने के लिए कहा है।" उन्होंने इस कदम को अपनी आवाज दबाने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया। चड्ढा ने साफ किया कि वह इस तरह के दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

आम आदमी के लिए संघर्ष जारी रहेगा

अपनी प्रखर वाकपटुता के लिए पहचाने जाने वाले राघव चड्ढा ने अपने संदेश में "आम आदमी" को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि पद रहे न रहे, लेकिन वे जनता की समस्याओं को उठाना बंद नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही उन्हें पद से हटा दिया गया हो, लेकिन उनका हौसला बरकरार है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज

पार्टी के इस कदम ने कई तरह के राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है। 'आप' ने अब तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि चड्ढा को अचानक इस अहम जिम्मेदारी से क्यों हटाया गया। हालांकि, चड्ढा के तेवरों से यह साफ है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और आने वाले दिनों में यह आपसी मतभेद और गहरा सकता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन के नए समीकरण के तौर पर देख रहे हैं।

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