पंजाबी साहित्य के ‘हास्य के बादशाह’ प्रो. के.एल. गर्ग का निधन, करीब 60 पुस्तकें लिखकर छोड़ी अमिट छाप
प्रसिद्ध व्यंग्यकार के निधन से साहित्य जगत में शोक; अपनी रचनाओं के जरिए सामाजिक विसंगतियों और कुरीतियों पर करते थे तीखा प्रहार
पंजाबी साहित्य जगत से बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध पंजाबी व्यंग्यकार प्रो. के.एल. गर्ग का निधन हो गया। उनके निधन से पंजाबी साहित्यिक हलकों में शोक की लहर है। उन्हें पंजाबी साहित्य में ‘हास्य के बादशाह’ और व्यंग्य साहित्य के प्रमुख स्तंभ के रूप में याद किया जाता है।
प्रो. के.एल. गर्ग का जन्म 13 अप्रैल 1943 को हुआ था। उन्होंने अपने लंबे साहित्यिक जीवन में अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों, विसंगतियों और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रभावशाली व्यंग्य किया। उनकी रचनाओं में हास्य के साथ-साथ सामाजिक सरोकार और गंभीर चिंतन भी दिखाई देता था।
करीब 60 पुस्तकें पंजाबी साहित्य को दीं
के.एल. गर्ग ने अपने साहित्यिक जीवन में करीब 60 पुस्तकों की रचना की। उनके साहित्य में व्यंग्य, कहानियां, लेख और अनुवाद शामिल हैं। अपनी विशिष्ट शैली के कारण उन्होंने पंजाबी पाठकों के बीच अलग पहचान बनाई। उनकी चर्चित रचनाओं में ‘हुंमस’, ‘अग दे दायरे’, ‘दरअसल’, ‘आखिरी पत्ता’, ‘वाट-69’, ‘तमाशा’, ‘दूसरा पासा’ और ‘पहु फटाला’ प्रमुख हैं।
साहित्य जगत में शोक
प्रो. के.एल. गर्ग के निधन पर विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं, लेखकों और बुद्धिजीवियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। साहित्यकारों का कहना है कि उनके जाने से पंजाबी व्यंग्य साहित्य को बड़ी क्षति हुई है।
साहित्य जगत से जुड़े लोगों ने कहा कि के.एल. गर्ग की रचनाएं लंबे समय तक पाठकों का मनोरंजन करने के साथ सामाजिक विसंगतियों पर सोचने के लिए प्रेरित करती रहेंगी। उनकी साहित्यिक विरासत पंजाबी पाठकों के बीच बनी रहेगी।

