Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

Punjab Election: कांग्रेस का तुरुप का पत्ता बने सचिन पायलट, पंजाब में क्यों बढ़ी उनकी अहमियत?

पंजाब में कांग्रेस की चुनावी उड़ान का दारोमदार पायलट पर

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
Sachin Pilot, AICC General Secretary, addresses a press conference at the AICC Office in New Delhi on Sunday. TRIBUNE PHOTO: MANAS RANJAN BHUI
Advertisement

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने दो दशक से अधिक के अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन यह युवा चेहरा अब पार्टी के भरोसेमंद 'तुरुप के पत्ते' के रूप में तेजी से उभर रहा है, जिसका इस्तेमाल अहम राज्यों में चुनावी बाजी पलटने में किया जा सकता है। कांग्रेस में पायलट का बढ़ता कद इस बात से समझा जा सकता है कि पार्टी ने उन्हें पंजाब में अंदरूनी कलह दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी है। विधानसभा चुनाव करीब हैं और कांग्रेस की प्रदेश इकाई में कई गुट अपना दबदबा कायम करने की कोशिश में आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने शनिवार को संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए भूपेश बघेल की जगह पायलट को पंजाब का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया।

बघेल पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल

दिलचस्प बात यह है कि अब तक पायलट छत्तीसगढ़ के प्रभारी थे, जहां बघेल पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं। बघेल को अब जितेंद्र सिंह की जगह असम की जिम्मेदारी दी गई है। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं और पायलट के सामने इस महत्वपूर्ण चुनाव से पहले प्रदेश इकाई में गुटबाजी को दूर करना पहली चुनौती होगी। एक ओर अन्य राजनीतिक दलों ने पंजाब चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अब तक अपनी अंदरूनी खींचतान से जूझती दिखाई दी है।

Advertisement

कार्यक्रमों में गुटबाजी खुलकर सामने आती रही

यह गुटबाजी उस समय और बढ़ गई जब कांग्रेस नेतृत्व ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी की चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने का एक जुलाई को फैसला किया। चन्नी के नेतृत्व वाले नेताओं के एक धड़े ने वडिंग को कांग्रेस की पंजाब इकाई का अध्यक्ष बनाए रखने का विरोध किया और उन्हें पद से हटाने की मांग की। चन्नी समर्थक यह भी चाहते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए। बघेल के हालिया पंजाब दौरों के बावजूद दोनों खेमों के बीच कोई सुलह नहीं हो सकी और पार्टी के कार्यक्रमों में गुटबाजी लगातार खुलकर सामने आती रही।

Advertisement

कांग्रेस पंजाब में वापसी की कोशिश कर रही

पायलट सोमवार को 49 वर्ष के हो जाएंगे। उनके सामने न केवल परस्पर विरोधी खेमों को एक मंच पर लाने की चुनौती है, बल्कि उन्हें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल का मुकाबला करने के लिए चुनावी रणनीति भी तैयार करनी होगी। पायलट को यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने को कई लोग चुनावी रणनीति बनाने की उनकी क्षमता और सबको साथ लेकर चलने की उनकी शैली पर पार्टी नेतृत्व के बढ़ते भरोसे के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस पंजाब में वापसी की कोशिश कर रही है। उसने इसके लिए ऐसे नेता पर उम्मीदें टिकाई हैं, जिनके लिए वापसी करना कोई नई बात नहीं है।

कांग्रेस महासचिव और छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया

वर्ष 2020 में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत का नेतृत्व करने के बाद पायलट एक समय पार्टी में अलग-थलग पड़ गए थे। उन्हें उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था और उन पर भारतीय जनता पार्टी से नजदीकियां बढ़ाने के आरोप भी लगे थे। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा की अहम भूमिका से दोनों पक्षों के बीच सुलह होने के बाद पायलट ने बगावत खत्म कर दी और पार्टी के वफादार नेता के रूप में वापस लौट आए। इसके बावजूद कुछ समय तक उन्हें संदेह की नजर से देखा जाता रहा और उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली। बाद में उन्हें 2023 में कांग्रेस महासचिव और छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया।

प्रचार अभियान और भूमिका की सराहना

हालांकि 2024 के आम चुनाव में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा और वह 11 में से केवल एक सीट जीत सकी, लेकिन पायलट को ऐसे सक्रिय प्रभारी के रूप में देखा गया जो लगातार जमीनी स्तर पर मौजूद रहे और सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश करते रहे। उन्हें केरलम विधानसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक भी बनाया गया था, जहां कांग्रेस ने 10 साल बाद बड़ा जनादेश हासिल किया। विधानसभा चुनाव में पायलट के प्रचार अभियान और उनकी भूमिका की काफी सराहना हुई।

पायलट की पहचान सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता की

पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपे जाने को राजस्थान के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई लोग उन्हें 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का सबसे मजबूत नेता मानते हैं। गोविंद सिंह डोटासरा की जगह उन्हें कांग्रेस की राजस्थान इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें भी लगती रही हैं। फिलहाल उन्हें यह पद नहीं मिला है, लेकिन पंजाब की चुनावी जंग जीतने पर यह उनके लिए अगला बड़ा इनाम हो सकता है। पायलट की पहचान सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता की है।

उनकी नियुक्ति पर आई शुरुआती प्रतिक्रियाओं में भी इसकी झलक दिखाई देती है। वडिंग, चन्नी, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत पंजाब में कांग्रेस के कई नेताओं ने पायलट को राज्य का प्रभारी महासचिव बनाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी ऊर्जा से विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में नया उत्साह आएगा। राहुल गांधी की नई टीम आकार ले रही है और ऐसे में पायलट एक बार फिर उनके पसंदीदा नेताओं में शुमार होते दिखाई दे रहे हैं।

Advertisement
×